Subscribe for notification
Categories: World

इस बार भारत में पड़ेगी हड्डियों को जमा देने वाली ठंड !

नई दिल्ली. मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि इस साल सर्दियां सामान्य से ज़्यादा ठंडी रहेंगी। भविष्यवाणी मौसम के एक पैटर्न ला नीना पर आधारित है जो प्रशांत महासागर पर आकार लेता है और जिसका असर पूरी दुनिया पर होता है।

ला नीना, अल-नीनो-सदर्न ऑसिलेशन साइकिल का एक हिस्सा है, जो प्रशांत महासागर के ऊपर बनने वाले मौसम का सिस्टम है जिसका दुनिया भर के मौसम पर असर होता है। दोनों पैटर्न किस तरह काम करते हैं, ये समझने के लिए प्रशांत महासागर के भूगोल को समझना होगा। प्रशांत महासागर के पूर्व में दोनों अमेरिका हैं और पश्चिम में एशिया और ऑस्ट्रेलिया हैं। समय-समय पर प्रशांत महासागर के ऊपर पानी और हवा के सतही तापमान में बदलाव होता है। ये प्रशांत महासागर के सतही समुद्री तापमान के अलावा बारिश तापमान और हवाओं के पैटर्न पर भी असर डालता है।

ला नीना को ईएनएसओ का ठंडा फेज़ कहा जाता है तो अल नीनो ईएनएसओ का गर्म फेज़ होता है। ला नीना और अल नीनो दोनों प्रशांत महासागर के ऊपर सामान्य सतही तापमान में परिवर्तन को दर्शाते हैं। ला नीना की स्थिति में हवा प्रशांत महासागर के गर्म सतही पानी को पश्चिम की ओर दक्षिण अमेरिका से इंडोनेशिया की ओर ले जाती है। जब गर्म पानी आगे बढ़ता है तो ठंडा पानी ऊपर सतह पर आ जाता है जिसकी वजह से पूर्वी प्रशांत में पानी सामान्य से ठंडा हो जाता है।

भारत में होती है भारी वर्षा

जलवायु के हिसाब से ला नीना वाले साल में सर्दियों में हवाएं कहीं ज़्यादा तेज़ चलती हैं। जिससे भू-मध्य रेखा के पास का पानी, सामान्य से कुछ डिग्री ज़्यादा ठंडा हो जाता है। ला नीना के चलते भारत में मॉनसून में भारी बारिश होती है। पेरू और इक्वाडोर में सूखा पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में भारी बाढ़ आती हैं और हिंद महासागर व पश्चिमी प्रशांत में तापमान बढ़ जाता है। ला नीना के चलते पूरे सीज़न में तापमान गिरने की बजाए रुक रुक कर बेहद ठंडे मौसम की लहरें आएंगी। ला नीना और अल नीनो आमतौर से 9 से 12 महीने तक रहते हैं। इनकी आवृत्ति अनियमित होती है और ये हर दो से सात साल के बीच आते हैं। ला नीना के मुकाबले अल नीनो ज़्यादा आता है।

सर्दियों को बर्फ बना देगा ला नीना

ला नीना भारत की सर्दियों को और ठंडा करेगा। सर्दियों में हवाएं ज़मीनी सतह के पास उत्तरपूर्व से चलती हैं और इसके साथ ऊपरी वातावरण में दक्षिण-पश्चिमी जेट भी होती हैं। अल नीनो इस जेट को दक्षिण की ओर धकेल देता है जिसकी वजह से पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में बारिश और बर्फ लाता है।