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सुबह जल्दी उठने से होता है ये नुकसान, देर तक सोने से मिलती है ऐसी कामयाबी: आक्सफोर्ड के वैज्ञानिक का दावा - Mobile Pe News
Wednesday , December 11 2019
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सुबह जल्दी उठने से होता है ये नुकसान, देर तक सोने से मिलती है ऐसी कामयाबी: आक्सफोर्ड के वैज्ञानिक का दावा

अगर आपके दिमाग में ये ख़याल है कि सुबह जल्दी उठने वाले कामयाब होते हैं तो इसे निकाल दीजिए। क्योंकि एक प्रयोग से मालूम हुआ है कि दुनिया दो हिस्सों में बंटी है। आधे लोग ऐसे हैं, जिन्हें सुबह उठना पसंद है। वहीं बाक़ी के आधे लोग देर तक सोना और रात में देर तक जागना पसंद करते हैं। अब ऐसा तो नहीं है कि देर तक सोने वाली दुनिया की आधी आबादी ज़िंदगी में नाकाम है। दुनिया भर के इंसानों में क़रीब एक चौथाई ऐसे हैं, जो सुबह उठना पसंद करते हैं। वहीं क़रीब-क़रीब इतने ही लोग रात में देर तक जागना पसंद करते हैं। रिसर्च से पता चला है कि सुबह उठने वाले लोग ज़्यादा सहयोगी मिज़ाज के होते हैं। वो किसी भी घटना का सही विश्लेषण कर पाते हैं। इनके मुक़ाबले रात में देर तक जागने वाले कल्पनाशीलता के मामले में बाज़ी मार ले जाते हैं। वो अकेले ज़्यादा वक़्त बिताना पसंद करते हैं।

 

कई बार हुए रिसर्च ये साबित कर चुके हैं कि सुबह उठने वाले आत्मप्रेरित होते हैं। वो लगातार काम करते हैं। दूसरों की बात भी वो ज़्यादा मानते हैं। वो बहुत बड़े टारगेट रखते हैं। वो भविष्य की योजनाएं ज़्यादा बेहतर बनाते हैं। सुबह उठने वाले अपनी सेहत का भी ज़्यादा ख़याल रखते हैं। रात में देर तक जगने वालों के मुक़ाबले, सुबह उठने वाले शराब कम पीते हैं. डिप्रेशन के भी कम ही शिकार होते हैं। वहीं, रात में देर तक जागने वाले याददाश्त के मोर्चे पर बीस बैठते हैं। अक़्ल के मामले में भी वो सुबह उठने वालों से बेहतर होते हैं। उनकी काम करने की रफ़्तार भी ज़्यादा होती है। रात में देर तक जागने वाले नए प्रयोग करने में भी खुले दिमाग़ से काम लेते हैं। रात में देर तक जागने वाले सुबह उठने वालों की तरह ही सेहतमंद, अक़्लमंद और ज़्यादा दौलतमंद भी होते हैं।
साफ़ है कि सुबह जल्दी उठने का टारगेट सेट करना कोई फ़ायदे का सौदा नहीं। आपका मन कुछ देर और सोने का है, तो सो जाइए। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक वैज्ञानिक का कहना है कि हर इंसान के शरीर में एक क़ुदरती घड़ी है। उनकी नींद और सोना-जागना उसी हिसाब से चलता है. इसे सिर्काडियन क्लॉक कहते हैं। इसी घड़ी के हिसाब से हमारे शरीर को सोने-जागने का मन होता है। बॉडी क्लॉक के ख़िलाफ़ जाकर सुबह उठने या देर तक जागने को कहा जाएगा, तो उसका बुरा असर ही होगा। शरीर से ज़बरदस्ती कभी भी फ़ायदेमंद नहीं होती। लोगों को उनकी सिर्काडियन क्लॉक यानी शरीर की जैविक घड़ी के हिसाब से ही चलने दिया जाए, तो उनका परफॉर्मेंस बेहतर होता है। किसी देर रात तक जागने वाले को सुबह उठने को मजबूर करेंगे, तो वो अलसाया हुआ रहेगा। काम में उसका मन कम लगेगा। दिमाग़ का भी वो अच्छे से इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। उनका वज़न बढ़ सकता है। सेहत ख़राब हो सकती है।

 

लोगों की सुबह जल्दी उठने या रात में देर तक जागने की आदत अक्सर उन्हें अपने मां-बाप से मिलती है। ये हमारे डीएनए में ही होता है कि हम आगे चलकर सुबह जल्दी उठने की आदत पाएंगे, या रात में देर तक जागेंगे। वैसे उम्र के साथ भी ये आदत बदलती है। बच्चे अक्सर सुबह उठ जाते हैं। बीस साल के बाद देर तक जागने की आदत पड़ने लगती है। पचास के क़रीब पहुंचते-पहुंचते ये आदत फिर सुबह उठने में बदल जाती है। अब तक किसी भी रिसर्च से ये बात पक्के तौर पर साबित नहीं हो पाई है कि सुबह उठना कामयाबी का शर्तिया नुस्खा है। आपके शरीर के हॉरमोन अक्सर आपकी बॉडी क्लॉक के हिसाब से रिलीज़ होते हैं। आदत बदलने से हॉरमेन का तालमेल बिगड़ सकता है। क्योंकि रात में देर तक जागने वाला सुबह उठेगा, तो उसके शरीर को तो यही लगेगा कि वो सो रहा है। उसके हॉरमेन देर से रिलीज़ होंगे। इसका सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।

लेकिन, तमाम देशों में देर तक सोने वालों को आलसी, कामचोर और बाग़ी कहा जाता है। इसीलिए बहुत से लोग मजबूरी में सुबह उठने की कोशिश करते हैं। हां, सुबह उठने के कई फ़ायदे ज़रूर हैं. आपको क़ुदरती रोशनी मिलती है। सूरज की रोशनी में रहने से आपके शरीर को विटामिन डी की भरपूर ख़ुराक मिल जाती है। आप कई काम जल्दी निपटा लेते हैं। लेकिन, अगर आपको देर तक सोने में ज़्यादा मज़ा आता है, तो चादर तानिए और आराम से सो जाइए।

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