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खामोश हो सकती है आसमान को गुंजा देने वाली ये बुलंद आवाज

बिहारी बाबू के नाम से चर्चित फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा इस बार पाला बदलकर कांग्रेस की टिकट पर पटना संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से सीधा मुकाबला करने उतरे हैं जिसमें तय हो जाएगा कि ‘शत्रु’ अपने विरोधियों को ‘खामोश’ करते हैं या जनता उन्हें ‘खामोश’ करेगी। सिन्हा भाजपा की स्थापना से ही उससे जुड़े थे और वह पार्टी के लिए स्टार प्रचारक थे। भाजपा ने उन्हें दो बार राज्यसभा का सदस्य बनाया और उसके बाद 2009 और 2014 में वह पटना साहिब संसदीय क्षेत्र से रिकॉर्ड मतों के अंतर से जीतकर लोकसभा पहुंचे। इससे पहले वह वाजपेयी मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य और जहाजरानी मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके है।

भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी को अपना “ फ्रेंड, फिलॉसफर और गाइड ” मानने वाले शत्रुघ्न सिन्हा उसी समय से बागी हो गए थे जब वर्ष 2013 में नरेंद्र मोदी को भाजपा ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें पटना साहिब से उम्मीदवार तो बना दिया लेकिन पार्टी ने वर्ष 2014 के बाद हुए विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव में उन्हें अपना स्टार प्रचारक नहीं बनाया। सिन्हा को नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में भी जगह नहीं मिली जिसके बाद वह खुलेआम सरकार की आलोचना करने लगे। भाजपा के सांसद होने के बावजूद उन्होंने नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर सरकार की कड़ी आलोचना की। सिन्हा कई बार विपक्ष के दिग्गज नेताओं के साथ मंच साझा करते भी नजर आए।
सार्वजनिक मंचों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को अटल-आडवाणी वाली भाजपा नहीं बल्कि “ वन मैन शो, टू मैन आर्मी ” वाली पार्टी बता कर तथा सरकार की नीतियों की आलोचना की। इसके बावजूद पार्टी ने उनके खिलाफ कोई अनुशासनिक कार्यवाही करने से परहेज किया। इस बार उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए जब उम्मीदवार नहीं बनाया तब वह भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए।

भाजपा ने इस बार पटना साहिब से केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य रविशंकर प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है। प्रसाद पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। पेशे से वकील प्रसाद बिहार में जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से रहे स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद के पुत्र हैं। स्व. प्रसाद वर्ष 1977 में कर्पूरी ठाकुर मंत्रिमंडल में सदस्य भी थे। वहीं पटना साहिब से जीत की हैट्रिक लगाने उतरे सिन्हा कांग्रेस की टिकट पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व वाले महागठबंधन के उम्मीदवार हैं। दिलचस्प बात है कि हाल तक दोनों एक ही दल के सदस्य थे और दोनों एक ही जाति से भी आते हैं। आज दोनों एक दूसरे के खिलाफ हैं लेकिन दोनों ने ही शालीनता और भाषा की मर्यादा बनाए रखी है। दोनों दावा करते हैं कि वे विचारों की लड़ाई लड़ रहे हैं, व्यक्तिगत कुछ भी नहीं है ।

दोनों जिस जाति से आते हैं उसके मतदाताओं की संख्या इस संसदीय क्षेत्र में सबसे अधिक है और वे भाजपा के समर्थक माने जाते हैं। वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में पटना सीट पटना साहिब हो गयी। उस वर्ष छोटे पर्दे के अमिताभ कहे जाने वाले अभिनेता शेखर सुमन कांग्रेस की टिकट पर पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे। वहीं, भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा चुनावी मैदान में थे। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी इस सीट पर विजय कुमार को उम्मीदवार बनाया था। सिन्हा ने इस सीट पर भाजपा का परचम लहराया और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजद के विजय कुमार को 166770 मतों से हराया। सिन्हा को 316549 जबकि विजय कुमार को 149779 मत मिले। कांग्रेस प्रत्याशी शेखर सुमन को महज 61308 मत मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।

इसी तरह 16 वें लोकसभा चुनाव (2014) में कांग्रेस की टिकट पर भोजपुरी सिनेमा के महानायक कुणाल सिंह चुनावी समर में उतरे। वहीं, भाजपा ने एक बार फिर सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया। शत्रुघ्न सिन्हा को रिकॉर्ड 485905 वोट मिले। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी कुणाल सिंह को 265805 मतो के अंतर से मात दी। श्री सिंह को 220100 मत मिले। जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के गोपाल प्रसाद सिन्हा तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें 91024 वोट हासिल हुये।

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