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सात सौ वर्ष पहले लिए गए मुहम्मद बिन तुगलक के इस निर्णय की याद आते ही आज भी कांप उठती है भारत की रूह

सुल्तान मुहम्मद बिन तुग़लक़ का नाम तो आप सबने इतिहास की पुस्तकों में अवश्य पढ़ा होगा। उसके वर्ष 1330 में लिए गए एक निर्णय को याद करके आज भी भारत की रूह कांप उठती है। उसने रातों—रात अचानक अपनी प्रजा को कंगाल कर दिया था क्योंकि उसने अपनी मुद्रा को बेकार घोषित कर दिया था। 21वीं शताब्दी में तीन साल पहले लिए एक ऐसे ही निर्णय की वजह से कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को तुगलक साबित करने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने नोटबन्दी की तीसरी सालगिरह पर कहा है की देश पर नोटबंदी का आतंकी हमला करने वाले गुनाहगारों को अभी कटघरे में खड़ा नहीं किया गया और देश की जनता को इस अन्याय से अभी न्याय नहीं मिला है।
गांधी ने शुक्रवार को ट्वीट किया “तीन साल पहले आज ही के दिन नोटबंदी की गयी थी जिसके कारण भारतीय अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई, कई लोगों की जानें गई, लाखों छोटे-मोटे कारोबारी बर्बाद हो गये लाखों भारतीय बेरोजगार हुए। जिन लोगों ने देश पर यह घातक हमला किया उन गुनाहगारों को अभी कटघरे में खड़ा नहीं किया गया और देश की जनता को इस अन्याय से अभी न्याय नहीं मिला है।।”
इस बीच, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा, “नोटबंदी को तीन साल हो गए। सरकार और इसके नीम हक़ीमों द्वारा किये गये ‘नोटबंदी- सारी बीमारियों का शर्तिया इलाज’ के सारे दावे एक-एक करके धराशायी हो गए।”
उन्होंने नोटबंदी को एक आपदा बताया और कहा “नोटबंदी एक आपदा थी जिसने हमारी अर्थव्यवस्था नष्ट कर दी। इस ‘तुग़लकी’ कदम की जिम्मेदारी अब कौन लेगा।”

कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि तीन साल पहले लिए गए इस फैसले की सजा देश आज भी भगुत रहा है। उन्होंने कहा “सुल्तान मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने वर्ष 1330 में देश की मुद्रा को बेकार कर दिया था। आठ नवंबर, 2016 को आज के समय के तुग़लक़ ने भी यही किया। तीन साल बीत गए पर देश अभी भी इसकी भुगत रहा है क्योंकि-अर्थव्यवस्था चौपट हो गई, रोजगार खत्म हो गया और न आतंकवाद रुका, न जाली नोटो का कारोबार, फिर कौन है इसका जिम्मेदार?”

कांग्रेस ने नोटबन्दी के तीन साल पूरे होने पर शुक्रवार को मोदी सरकार की नीतियों के विरोध में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सामने जमकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राजधानी के संसद मार्ग स्थित रिजर्व बैंक कार्यालय के सामने सुबह में प्रदर्शन किया। ये कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां और बैनर लिए मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों में महिलाएं और नोटबन्दी से प्रभवित आम आदमी भी शामिल थे। प्रदर्शनकारी देश की खराब अर्थव्यस्था के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे आठ नवंबर को अपने जीवन मे भूल नही सकते है क्योंकि उन्हें नोटेबन्दी का दंश झेलना पड़ा था। नोटेबन्दी से लाखों नौकरियां चली गयी और आर्थिक विकास प्रभावित हुआ। असंगठित क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए और कई छोटी कम्पनियां बर्बाद हो गई।

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