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जानिए, कौनसी कॉलेज में डॉ. बी. आर. अंबेडकर स्टडी सेंटर का उद्घाटन किया गया

बाबासाहेब के 52 वें महा परिनिर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में कालिंदी महाविद्यालय में Dr BR Ambedkar Study Center का उद्घाटन अंतर्राष्ट्रीय बोध धर्म गुरू और रॉयल व्हाइट मोनास्ट्री यूरोप, हंगरी और नेपाल के प्रमुख आचार्य गुरु कर्मा तनपई ने किया। इस अवसर पर भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) के सहयोग से “डॉ आंबेडकर औन वुमनस राइट्स इन इंडिया” पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सुश्री राखी बिड़ला, डिप्टी स्पीकर, दिल्ली विधान सभा; प्रो विवेक कुमार, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेस, जेएनयू और प्रोफेसर सी. शीला रेड्डी, डॉ अंबेडकर चेयर इन सोशल जस्टिस, आईआईपीए Dr BR Ambedkar Study Center उद्घाटन समारोह में उपस्थित अन्य गणमान्य अतिथि रहे।

Dr BR Ambedkar Study Center
Dr BR Ambedkar Study Center

 

महिलाओं के उत्थान में डा. अम्बेडकर के योगदान को याद करते हुए, प्रधानाचार्या डॉ. अनुला मौर्य ने कहा कि उन्होंने महिलाओं का शिक्षा प्राप्त करना और सम्मान के साथ जीना सुनिश्चित किया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के प्रति डॉ. अम्बेडकर का योगदान परिवार और हिंदू समाज के स्तर पर था। Dr BR Ambedkar Study Center की संयोजिका डॉ सुनीता मंगला ने कहा कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य महिलाओं को अपने संवैधानिक अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक मंच प्रदान करना है।

आचार्य तनपाई ने बुद्ध की शिक्षाओं को अम्बेडकर की विचारधारा से जोड़ते हुए पवित्र धर्म के अभ्यास पर जोर दिया, जिसके माध्यम से वह अनन्त शांति, स्वतंत्रता, प्रेम और करुणा प्राप्त कर सके। प्रो. कुमार ने पोपुलर डिस्कोर्ससेज में डॉ. अम्बेडकर के “ब्लैकआउट” पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ अंबेडकर ने सती, विधवा पुनर्विवाह पर रोक, और बाल विवाह जैसी तीन महत्वपूर्ण प्रथाओं जिनके कारण भारतीय समाज में महिलाओं का दमन होता है, के खिलाफ लड़ाई लड़ी। डॉ. अम्बेडकर को आधुनिक भारत में सामाजिक न्याय के प्रमुख समर्थक के रूप में देखते हुए, डॉ रेड्डी ने कहा कि उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने खुद भेदभाव और हाशिए का सामना करते हुए “न केवल दलितों की मुक्ति के लिए बल्कि समाज के उच्च वर्गों के लिए भी काम किया”। इस अवसर पर बोलते हुए, सुश्री बिड़ला ने डॉ अंबेडकर द्वारा संविधान में निर्धारित महिलाओं की समानता के लिए संघर्ष जारी रखने के महत्व पर जोर दिया। इस संगोष्ठी में डॉ अम्बेडकर के महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता, महिलाओं के लिए संवैधानिक अधिकारों, कानूनी सुरक्षा उपायों और समान नागरिक संहिता के विचार पर चर्चा हुई।

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अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी और टाटा ट्रस्ट्स की नई शिक्षा नीति जानिए कौनसी है ये नीति

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी और टाटा ट्रस्ट्स ने नई Education Policy के लिए शुरूआती  प्रयास, शिक्षक शिक्षा और साक्षरता निर्देश के लिहाज से संतुलित दृश्टिकोण की सिफारिश की हाराष्ट्र और कर्नाटक के स्कूलों में तीन वर्षों में पर्यवेक्षण के दौरान  गुणवत्तापूर्ण साक्षरता अध्ययन से मिली प्रमुख जानकारियां साझा कीं। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी और टाटा स्ट्स ने आज संयुक्त रूप से 3 वर्षों के अध्ययन  लिटरेसी रिसर्च इन इंडियन लैग्वेजेस (एलआईआरआईएल) से मिली जानकारियों और सिफारिशों की घोषणा की। देश की शिक्षा नीति से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों से युक्त यह शोध सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े दो इलाकों-यादगिर ब्लॉक (यादगिर जिला-कर्नाटक) और वार्ड ब्लॉक (पालघर जिला, महाराष्ट्र) में किया गया। इस दौरान प्रत्येक स्थान पर 360 बच्चों पर नजर रखी गई जिन्होंने 2013 से 2016 के बीच कक्षा 1 से कक्षा 3 की पढ़ाई की।

Education Policy
Education Policy

 

एलआईआरआईएल प्रोजेक्ट में शुरूआती कक्षाओं में युवा छात्रों को पढ़ाए जाने के तरीकों और दो भारतीय भाषाओं-कन्नड़ और मराठी में पढ़ना और लिखना सीखने के बच्चों के तरीके के बारे में जानकारी जुटाई गई। इसमें इस प्रक्रिया में सीखने वालों के सामने आनी वाली चुनौतियों के बारे में सूचनाएं एकत्रित की गई। तीन वर्षों के दौरान विभिन्न प्रकार के साक्षरता टास्क, कक्षा में पर्यवेक्षण, शिक्षकों के साक्षात्कार, बच्चों के बारे में गहन अध्ययन और चक्रीय विश्लेषण समेत विभिन्न प्रकार के मात्रात्मक एवं गुणात्मक आंकड़ों के माध्यम से इस प्रोजेक्ट ने पाया कि, ज्यादातर भारतीय लिपियों की ही तरह कन्नड़ और मराठी लिपियों को सीखने के लिए कई वर्ष लगते हैं। चिन्हों की संख्या काफी अधिक और जटिल है। हालांकि स्कूल पाठ्यक्रम और पढ़ाई की किताबें इसमें शामिल नहीं हैं।

लिपि को समझने के टास्क में बच्चों का प्रदर्शन काफी खराब रहा। अक्षरों को पढ़ना सीखने का स्वाभाविक परिणाम शब्द और पैराग्राफ पढ़ना नहीं है।

लिपि (Education Policy) को समझना सीखने का स्वाभाविक परिणाम समझ और लिखना नहीं है। जिन बच्चों ने लिपि पढ़ने का काम अच्छे से किया उन्होंने भी पढ़ी गई बातों को समझने के मामले में खराब प्रदर्षन किया और लिखकर अपने विचार साझा करने की उनकी क्षमता भी अच्छी नहीं थी।

शिक्षक विशेष तौर पर भाषा और साक्षरता पढ़ाने के लिहाज से तैयार नहीं हैं। इस प्रोजेक्ट Education Policy में शामिल ज्यादातर शिक्षकों को शुरुआती भाषा और साक्षरता पढ़ाने के लिहाज से लक्ष्यों और दृस्टिकोंणों की स्पष्ट समझ नहीं है या छात्रों की दिक्कतों का समाधान के तरीके उन्हें नहीं मालूम हैं।

श्रीमती अमृता पटवर्धन, प्रमुख-शिक्षा एवं खेल, टाटा ट्रस्ट्स ने कहा, ’’यह वास्तविकता है कि प्राथमिक स्कूलिंग पूरी करने के बावजूद बच्चे साक्षरता में मजबूत आधारभूत कुशलताएं हासिल करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। समझ के साथ पढ़ने और लिखने के पीछे छात्रों की अक्षमता के कारणों को भारतीय कक्षाओं में नहीं समझा जाता है और न ही इनका अध्ययन किया जाता है। एलआईआरआईएल भारतीय भाषाओं में साक्षरता निर्देशों और सीखने संबंधी अपनी तरह का पहला शोध है। पाठ्यक्रम, शिक्षकों की तैयारी और पढ़ाने सिखाने की प्रक्रियाओं पर गौर करने वाला बहुआयामी दृश्टिकोंण प्रमुख अंतरों को पहचानने में मददगार साबित हो सकता है और उपयुक्त शिफारिश कर सकता है जो इनका पालन करने वालों और नीति निर्माताओं को समान रूप से सूचित कर सकता है।’’

प्रोफेसर शैलेजा मेनन, प्रिंसिपल इंवेस्टीगेटर, एलआईआरआईएल प्रोजेक्ट (Education Policy) ने कहा, ’’पढ़ना और लिखना सीखना लक्ष्यों को पूरा करने से कहीं अधिक आगे की बात है। हमें विशेष रूप सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े तबके के बच्चों द्वारा पढ़ना और लिखना सीखने के खास संदर्भ के बारे में अपनी समझ का विस्तार करने की जरूरत है। हमें भारतीय लिपियों के पढ़ने और सीखने के बारे में बेहतर समझ रखने की जरूरत है। हमें शुरुआती भाषा और साक्षरता पाठ्यक्रम के बारे में स्पष्ट दृश्टिकोंण रखने की जरूरत है और यह देखना होगा कि हमारा मौजूदा पाठ्यक्रम हमारे आदर्शों को पूरा करने में सहायक है। एलआईआरआईएल प्रोजेक्ट इस संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में कोशिश कर रहा है जिसमें साधारण रूप से यह कहा जाता है कि भारत में कई बच्चे पढ़ना और लिखना नहीं सीख पाते हैं। इस प्रोजेक्ट से मिली जानकारियां शैक्षणिक प्रयासों और नीतियों का मार्गदर्शन करने में सहायक हो सकती हैं, हालांकि एक बड़े सफर की दिशा में उठाया गया एक छोटा कदम है।’’

 Education Policy, एलआईआरआईएल प्रोजेक्ट की कोशिश उन सवालों का जवाब देने की है कि किस तरह पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति और शिक्षक शिक्षा सुधार विभिन्न भारतीय संदर्भों में शुरुआती स्तर पर पढ़ना और लिखना सीखने में बच्चों की मदद करने वाले कारकों की मजबूत समझ से संबंधित कारकों के विचार पर आधारित होने चाहिए। शुरुआती साक्षरता की जरूरत का उल्लेख करते हुए यह शोध कुछ सिफ़ारिशों करता है.

समय और संगठन-साक्षरता के प्रति संतुलित दृश्टिकोण शुरुआती पढ़ाई और लिखने की क्षमता विकसित करने के लिए न्यूनतम समय के 4 ब्लॉक की जरूरत है-रीड अलाउड ब्लॉक, फोनिक्स एवं शब्द कार्य, निर्देशित पढ़ाई (जहां पर्याप्त स्तर की मुश्किल के साथ पैराग्राफ/किताबें छात्र पढ़ते हैं) और निर्देशित लिखाई (कम्पोजिशनल लिखाई के लिए)।

शिक्षकों को बच्चों को उचित ढंग से पढ़ाने के लिए खुद को पाठक और लेखक के तौर पर Education Policy विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। कई शिक्षकों द्वारा पिछड़े तबके के बच्चों और समुदायों की क्षमता के बारे में बनाई गई मजबूत धारणा का परीक्षण करने के लिए समर्थक फॉर्मेट तैयार किए जाने चाहिए।

संपूर्ण भाषा और साक्षरता कक्षाएंः पाठ्यक्रम को अत्यंत शुरुआती कक्षाओं से विभिन्न भाषाओं और साक्षरता कुशलताओं पर गौर करना चाहिए। सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने की कुशलता को अंतर संबंधी तरीकों से पढ़ाने की जरूरत है और इनका इस्तेमाल संचार, अभिव्यक्ति, विश्लेषण और चर्चा के के लिए किया जाए।

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कैवल्य एजुकेशन फॉउंडेशन और टाटा कम्युनिकेशन ने सरकारी स्कूलों की कि मदद, जानिए कैसे

हरियाणा सरकार के नेतृत्व में शुरू किए गए इस प्रयास से 110 स्कूलों को मिलेगी विधा। कैवल्य एजुकेशन फॉउंडेशन (केईएफ) और टाटा कम्युनिकेशन ने हाल ही में गुणवत्तायुक्त शिक्षा और स्कूलों को अग्रणी भूमिका में लाने के उद्देश्य से प्रधानाध्यापक, शिक्षकों और छात्रों के लिए एक समावेशी और व्यक्तिकृत लर्निंग प्लेटफॉर्म promote digitally learning मुहैया कराते हुए एक डिजिटल इनेबलमेटं प्रयास की शुरुआत की। यह सभी को समावेशी एवं गुणवत्तायुक्त शिक्षा मुहैया कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र के स्थायी विकास लक्ष्यों के ताबिक है।

promote digitally learning
promote digitally learning

 

यह डिजिटल इनेबलमेंट प्रयास एएनईडब्ल्यू (ए न्यू एडुकेशन वर्ल्डव्यू) के अंतर्गत शुरू किया गया promote digitally learning है जो कैवल्य एजुकेशन फॉउंडेशन (केईएफ) और टाटा कम्मुनिकेशन के बीच का एक सामूहिक प्रयास है। केईएफ एक सामाजिक परिवर्तन संगठन है जो भारत में शिक्षा के क्षेत्र में काम करता है।

ऐसे देश में जहां सरकार सक्रिय तौर पर प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के तरीके (promote digitally learning) तलाश रही है, एक आधुनिक एवं अनुकूल शैक्षणिक परिवेश तैयार करने से गड़बडिय़ों को सुधारने में काफी हद तक सफलता मिलती है। इस कार्यक्रम को गुरुग्राम में 110 सरकारी स्कूलों में शुरू किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में दी जाने वाली शिक्षा में एकरूपता लाकर शैक्षणिक और सीखने के परिवेश को बेहतर बनाना है।

उम्मीद है कि इससे आज के समय में सरकारी स्कूलों के सामने पेश आने वाली कुछ प्रमुख चुनौतियों से पार पाने में मदद मिलगे जिनमे से पुराना पाठ्यक्रम, पढ़ने की नवीनतम तकनीकी (promote digitally learning) की कमी, बच्चों के लिए डिजिटल माध्यम का सीमित उपयोग और शिक्षक एवं छात्रों के बीच संवाद का खराब स्तर शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट का डिजिटल इनेबलमेन्ट तत्व बहुत ही सोचा समझा कदम है क्योकि यह सभी ग्रेड, विषयो, भाशाओं और सामग्री में आसानी से अपनाने और अनुकूलन की सुविधा देता है।

इस डिजिटल एनेबलमेन्ट प्रयास की पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में जुडा़ व और छात्रों के लिए परिणाम में सुधार के लिए सामग्री एवं कुशलता मुहैया कराकर समावेशी और समान शिक्षा मुहैया कराना है।

इसने डिजिटल शैक्षणिक तरीकों का प्रयागे कर शिक्षकों को क्षमता बढ़ाने में मदद की है। जिससे स्कूल में शिक्षण-सीखने की प्रक्रिया अधिक संवादपरक और प्रभावी बनाया है।
इसने छात्रों के सीखने ज्ञान को मापने के लिए एक मजबूत निगरानी और मूल्यांक ढांचा तैयार किया है जिससे अन्य साझदेार भी इसे परख सकें और इसमें एनसीईआरटी (एनसीएफ) के दिशा निर्देशों के मुताबिक क्षेत्रीय भाषाओं की सामग्री के लिए प्रावधान है जिसे छात्रों और शिक्षकों द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

सदानंदन सी टी, उपाध्यक्ष, प्रमुख-कॉरपोरेट सर्विसेज़, टाटा कम्मुनिकेशन ने कहा, ’’जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रयोगिकी की मूलभूत शक्ति को देखते हुए हमने शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए इस शक्ति का उपयोग करने की कोशिश की। एक समावेशी और संबंधित परिवेश एक बेहतर कल के लिए सूचित नागरिकों की अगली पीढ़ी तैयार करने में मदद का मलू आधार है। शैक्षणिक प्रयोगिकी के क्षेत्र में यह प्रयास स्थायी विकास और जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए समाधान तलासने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है और इसका हिस्सा बनकर हम बेहद खुश हैं।’’

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NCRTC and ADIF, स्पेन के बीच हुआ समझौता, जानिए क्या ?

RRTS Corridors : दिल्ली-मेरठ स्मार्ट लाइन, दिल्ली-पानीपत स्मार्ट लाइन और दिल्ली- अलवर स्मार्ट लाइन को पहले चरण में कार्यान्वित करने के लिए प्राथमिकता |

RRTS Corridors
RRTS Corridors

 

एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक विनय कुमार और एडीआईएफ ऑफ़ स्पेन के महानिदेशक मिगुएल निटो मेनोर द्वारा इंडो-स्पेनिश टेक्निकल कोऑपरेशन के समझौते पर हस्ताक्षर किया गया | इस अवसर पर हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मिनिस्टर हरदीप सिंह पूरी (स्वत्रन्त्र प्रभार) और सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा  उपस्थित रहें | साथ ही एडीआईएफ के अन्तर्राष्ट्रीय निदेशक फर्नान्डो नोकोलोस पुईगारी, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि और स्पेन दूतावास के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया|

इस समारोह को सम्बोधित करते हुए हरदीप सिंह पूरी ने कहा कि “यह समझौता विशिष्ट मुद्दों जैसे, किसी विशेष समस्या में तकनिकी सलाह की उपलब्धता, ट्रैक, सिग्नलिंग, रोलिंग स्टॉक, सेफ्टी, मल्टी मोडल इंटीग्रेशन, स्टेशन डिजाईन इत्यादि के प्रशिक्षण और तकनिकी क्षेत्रों में सहयोग प्रदान करने के लिए सक्षम होगा |”

परियोजना के महत्व पर जोर देते हुए सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने कहा कि “यह समझौता शहरी परिवहन के क्षेत्र और विशेष रूप से आरआरटीएस परियोजना (RRTS Corridors) के कार्यान्वयन में आपसी सहयोग के लिए संस्थागत मकेनिजम प्रदान करेगा|”

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC), भारत सरकार और उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के राज्य सरकारों का एक जॉइंट वेंचर हैं जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रेल आधारित रिजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS Corridors) के डिजाईन, निर्माण, परिचालन एवं रखरखाव करना अनिवार्य है |

तीन RRTS Corridors :

दिल्ली-मेरठ स्मार्ट लाइन, दिल्ली-पानीपत स्मार्ट लाइन और दिल्ली- अलवर स्मार्ट लाइन को पहले चरण में कार्यान्वित करने के लिए प्राथमिकता दी गई है| दिल्ली- गाज़ियाबाद-मेरठ कोरिडोर कार्यान्वित होने वाला पहला कोरिडोर होगा, जिसके लिए पूर्व गतिविधियों सहित भू-तकनिकी जांच, विस्तृत डिजाईन, उपयोगिता स्थानान्तरण योजना, और ट्रैफिक डाईवर्जन प्लानिंग की प्रक्रिया चल रही है
|

आरआरटीएस भारत की पहली ऐसी परियोजना है जो 180 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के साथ राज्य की कला प्रौद्योगिकी का उपयोग ट्रैक संरचना, रोलिंग स्टॉक और सिग्नल सिस्टम के लिए करेगा | भारत में उच्च गति के लिए इन प्रौद्योगिकियों पर अनुभवी और विशेषज्ञता बहुत ही सिमित हैं, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के द्वारा परियोजना के परिपूर्ण कुशल कार्यान्वयन, प्रणाली संचालन और देश में विकासशील क्षमता के लिए रिकॉर्ड किया जाएगा | एडमिनिस्ट्रेडोर डी इन्फ्रास्ट्रक्चरस फेरोविआरियस (AIDF), स्पेन स्टेट ओन्ड रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर कम्पनी है जिसे मैड्रिड के सर्कानियास जैसे क्षेत्रों में हाई-स्पीड रेलवे और क्षेत्रीय रेल सिस्टम्स के प्लानिंग, डेवलपिंग, ऑपरेटिंग और मेंटेनेन्स का अनुभव है |

फ्रांस की राज्य-स्वामित्व वाली रेलवे कंपनी, एसएनसीऐफ (SNCF) ने आरआरटीएस परियोजना में अपनी रूचि और समर्थन जाहिर किया | एसएनसीएफ प्रतिनिधिमंडल के हालिया दौरे के दौरान ऐसा ही समझौता एनसीआरटीसी और एसएनसीएफ के बीच होने की संभावना का पता चला था |

Source: PIB

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हजारों साल पहले से भारत में मौजूद है गूगल, ऋषि—मुनि भी लेते थे काम

आज जो गूगल अमेरिका से लेकर धुर अफगानिस्तान तक धूम मचा रहा है, वह हजारों सालों से भारत में मौजूद हैै। इसका उपयोग प्राचीन काल में ऋषि—मुनि भी करते थे। तब से गूगल भारतीय घरों का हिस्सा रहा है। आपको नहीं पता तो चलिए हम बताते हैं कि सर्च इंजन गूगल और भारतीय गूगल क्या हैं।  Google Puja read  more….

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प्रत्येक भारतीय पूजा-पाठ के दौरान गूगल का उपयोग उसी तरह होता है जैसे आज की युवा पीढी गूगल सर्च इंजन का करती है। कुछ उत्साही विद्वानों का मत है कि सर्च इंजन का नाम भारत से ही लिया गया है और वह उसी तरह दुनिया में लोकप्रिय हो गया है जिस तरह भारतीय गूगल अग्नि के साथ मिलकर वातावरण को सुगंधी से भर देता है।

वह करता है सर्च, ये देता है खुशबू (Google puja)

आपको नहीं पता तो चलिए हम बताते हैं कि सर्च इंजन गूगल और भारतीय गूगल क्या हैं। भारत का गूगल एक वृक्ष है जिससे प्राप्त पदार्थ को अपभ्रंश के रूप में गुग्गल कहा जाता है। गूगल वृक्ष के शरीर में चीरा लगाकर मिलने वाले पदार्थ को यज्ञ तथा पवित्र कार्यों के दौरान अग्नि में डाला जाता है जिससे यह पूरे वातावरण को मनमोहक सुगंध भर देता है।

मीठी महक का स्रोत

भारत में इस जाति के दो प्रकार के वृक्ष पाए जाते हैं। कुछ स्थानों से प्राप्त गूगल का रंग पीलापन लिए श्वेत तथा अन्य का गहरा लाल होता है। इसमें मीठी महक रहती है। अग्नि में डालने पर स्थान सुंगध से भर जाता है। आयुर्वेद के मतानुसार यह कटु तिक्त तथा उष्ण है और कफ, बात, कास, कृमि, क्लेद, शोथ और अर्श नाशक है।

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गूगल एक छोटा पेड है जिसके पत्ते छोटे और एकान्तर सरल होते हैं। यह सिर्फ वर्षा ऋतु में ही वृद्धि करता है तथा इसी समय इस पर पत्ते दिखाई देते हैं। सर्दी तथा गर्मी के मौसम में इसकी वृद्धि अवरुद्ध हो जाती है तथा पर्णहीन हो जाता है। सामान्यत गूगल का पेड 3-4 मीटर ऊंचा होता है। इसके तने से सफेद रंग का दूध निकलता है। प्राकृतिक रूप से गूगल भारत के कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात तथा मध्य प्रदेश में उगता है। भारत में गूगल विलुप्तावस्था के कगार पर है। भारत में गूगल की मांग अधिक तथा उत्पादन कम होने के कारण अफगानिस्तान व पाकिस्तान से इसका आयात किया जाता है।

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एमसीआई पंजीकृत पीजी पैथोलोजी ही प्रयोगशाला रिपोर्ट्स पर कर सकेंगे हस्ताक्षर

हाल ही में भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नोर्थ गुजरात युनिट ऑफ एसोसिएशन (गुजरात के प्राइवेट Pathology प्रयोगशालाओं के मालिकों (पैरामेडिकल)) बनाम नोर्थ गुजरात पैथोलोजिस्ट एसोसिएशन के मामले में सुनाए गए फैसले के मद्देनज़र भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को हालात का जायज़ा लेना चाहिए और एससी ऑर्डर की समीक्षा करनी चाहिए। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था ‘हम इस दृष्टिकोण के साथ सभी विशेष छुट्टी याचिकाओं एवं अन्य लंबित आवेदनों का निपटान करते हें कि प्रयोगशाला रिपोर्ट पर केवल पंजीकृत चिकित्सक द्वारा ही हस्ताक्षर किए जा सकते हैं जिसके पास पैथोलोजी में पोस्टग्रेजुएट यानि स्नातकोत्तर योग्यता हो।’

Pathology
Pathology

 

अभी हाल ही तक लैबोरेटरी की रिपोर्ट की समीक्षा और हस्ताक्षर एमडी Pathology, एमडी माइक्रोबायोलोजी, एमडी बायोकैमिस्ट्री, एम एससी/ पीएचडी माइक्रोबायोलोजी और बायोकैमिस्ट्री द्वारा ही किए जा सकते थे। जून 2017 में भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा इसमें बदलाव लाया गया, जिसमें एम एससी/ पीएच डी- बायोकैमिस्ट्री एवं माइक्रोबायोलोजी को टेस्ट रिपोर्ट पर हस्ताक्षर से वंचित /बहिष्कृत कर दिया गया। एमसीआई के आदेश को माननीय अदालत में चुनौती दी गई। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले पर मुहर लगा दी।

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इसा फैसले का स्वास्थ्यसेवा समुदाय पर गंभीर असर होगा क्योंकि हमारे देश में केवल 5500 एमडी पैथोलोजी हैं। तकरीबन 9500 पेशेवरों के पास एमडी माइक्रोबायोलोजी और एमडी बायोकैमिस्ट्री की योग्यता है। माइक्रोबायोलोजी एवं बायोकैमिस्ट्री में पोस्टग्रेजुएट डिग्री तकरीबन 20000 चिकित्सकों के पास है। इसके अलावा हमारे पास बायोकैमिस्ट्री, माइक्रोबायोलोजी, जेनेटिक्स एवं मॉलीक्युलर बायोलोजी में तकरीबन 1500 पीएचडी हैं। इस तरह हमारे पास कुल मिलाकर 36,500 योग्य पेशेवर हैं जिन्हें विभिन्न मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट्स पर हस्ताक्षर के लिए अधिकृत किया गया है। किंतु माननीय सर्वोच्च न्यायालय के परिप्रेक्ष्य से हमारे पास केवल 5500 व्यक्ति बचेंगे जो रिपोर्ट्स पर हस्ताक्षर के लिए अधिकृत होंगे।

भारत में 3 लाख चिकित्सा जांच प्रयोगशालाएं हैं, ऐसे में 5500 एमडी पैथोलोजी द्वारा इस कार्यभार को मानवीय रूप से संभालना लगभग नामुमकिन होगा। ऐसे में इन पेशेवरों पर विजि़टिंग हस्ताक्षरकर्ता का दबाव बन जाएगा, जिन्हें कई शहरों को कवर करना होगा। पैथोलोजिस्ट एक ही केन्द्रीय कार्यालय से इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर द्वारा सैंकड़ों टेस्ट रिपोर्ट्स पर हस्ताक्षर करने लगेंगे। कुल मिलाकर इससे रिपोर्ट्स की प्रमाणिकता भंग होगी। 5500 एमडी पैथोलोजी केवल दूसरे/ तीसरे स्तर के शहरों के लिए ही पर्याप्त नहीं हैं। इसका बुरा असर छोटे नगरों में हस्ताक्षरकर्ताओं की उपलब्धता पर पड़ेगा; ग्रामीण इलाकों को इसका सबसे बड़ा खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा।

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एएचपीआई के बारे में

एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (भारत) देश में बड़ी संख्या में स्वास्थ्यसेवा प्रदाताओं का प्रतिनिधित्व करता है, संगठन सरकार, विनियामक संगठनों एवं अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम करता है जो अपने सदस्य अस्पतालों को उचित स्वास्थ्यसेवाएं उपलब्ध कराते हैं।

डॉ गिरधर ज्ञानी के बारे में

डॉ ज्ञानी NABH समीक्षा समिती के चेयरमैन, एएचपीआई के महानिदेशक हैं। भारतीय संसद में उठाए गए सवाल के जवाब में, डॉ. गिरधर ज्ञानी जोकि भारतीय गुणवत्तापरिषद के तत्कालीन महासचिव थे, उन्होंने NABH प्रमाणन बनाकर भारत में लागू किया।

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भावी पीढ़ी का चरित्र निर्माण करने वाली हो शिक्षा

मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कहा है कि शिक्षा ऐसी हो जिससे हमारी Future Generation का चरित्र निर्माण हो और वे बेहतर नागरिक बन सकें। उन्होंने कहा कि विद्याभारती द्वारा संचालित विद्यालय इसी प्रकार की शिक्षा के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। यह संस्था 12 हजार 364 पूर्ण विद्यालय तथा 12 हजार से अधिक संस्कार केन्द्रों के माध्यम से 34 लाख से अधिक बच्चों को शिक्षा दे रही है।

Future Generation
Future Generation

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मुख्यमंत्री राजे बांसवाड़ा जिले के कोठारा गांव में विद्या भारती जनजाति समिति राजस्थान के तत्वावधान में विद्या निकेतन माध्यमिक विद्यालय के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रही थीं।

राजे ने कहा कि विद्या भारती संस्थान ने जिले के जनजाति क्षेत्र में भी श्रेष्ठ कार्य किया है और बहुत कम समय में देश भर में पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी शैक्षिक विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों की देश भर में सराहना हो रही है। उन्होंने कहा कि बांसवाड़ा में गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के माध्यम से 40 हजार विद्यार्थियों का नामांकन किया गया है, वहीं डूंगरपुर में मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जा रहा है।

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मुख्यमंत्री ने जनजाति क्षेत्र के लिए गत दिनों की गई घोषणाओं के बारे में बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में जनजाति बीपीएल कास्तकारों के कुओं को गहरा कराया जाएगा। सर्वे के अनुसार 18 हजार कुओं को गहरा कराने की योजना है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में 1 हजार नए मां बाड़ी केन्द्र खोलने के साथ ही प्रतापगढ़ में महाराणा प्रताप बटालियन, बांसवाड़ा में मेवाड़ भील कोर, जिले में तीन स्थानों पर अन्नपूर्णा रसोई वैन के माध्यम से भोजन उपलब्ध कराने तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 37 हजार आवासों के निर्माण जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं।

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ऑटोएक्सपो-द मोटर शो 2018 में टाटा मोटर्स की स्मार्ट सिटीज़ के लिए स्मार्ट मोबिलिटी

फरवरी आने वाली है और टाटा मोटर्स बिलकुल नए अंदाज के साथ ’’14वें ऑटो एक्सपो-द मोटर शो 2018’’ (Tata Motor Show 2018) के लिए तैयार है। भारत में परिवहन के भविष्य को नया आकार देने वाली सबसे शक्तिशाली भारतीय ओईएम के तौर पर कंपनी अपनी क्षमताएं और परिवहन समाधान का प्रदर्शन करेगी। इंडिया एक्सपो मार्ट, ग्रेटर नोएडा के आगंतुक हॉल नंबर 14 के टाटा मोटर्स के पैवेलियन में ’’स्मार्ट मोबिलिटी, स्मार्ट सिटीज़’’ के बारे में जानकारियां तलाशेंगे।

Tata Motor Show 2018
Tata Motor Show 2018

 

भारत सरकार स्मार्ट शहर बनाने की कोशिश कर रही है जहां सब कुछ एक कनेक्टेड पारितंत्र का हिस्सा है और टाटा मोटर्स इस दृश्टिकोण (Tata Motor Show 2018) को बढ़ावा देने के प्रति समर्पित है। वाणिज्यिक एवं यात्री वाहनों की श्रेणी में अपने एंड-टू-एंड एकीकृत मोबिलिटी समाधानों के साथ टाटा मोटर्स भविष्य के स्मार्ट शहरों में एक अहम भूमिका निभाने की अनोखी स्थिति है। सार्वजनिक परिवहन से लेकर व्यक्तिगत गाडि़यों तक, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी से लेकर बीआरटीएस तक, आपातकालीन परिस्थिति में काम करने वाले वाहनों से लेकर कॉमर्शियल यूटिलिटी वाहनों तक, वाहनों के हरित एवं स्थायी समाधानों से लेकर गाड़ी चलाने के रोमांच को बढ़ाने के लिए डिजाइन किए गए वाहनों तक-टाटा मोटर्स के पास एक ऐसा प्रोडक्ट पोर्टफोलियो है जो प्रत्येक ग्राहक की इच्छाओं और जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।

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टाटा मोटर्स पूरे पैवेलियन में विशेष रूप से तैयार की गई थीम में अपने यात्री और वाणिज्यिक वाहनों की श्रेणी में 26 स्मार्ट मोबिलिटी समाधान पेश करेगी। कुछ प्रमुख पीवी और सीवी मॉडल के वैश्विक प्रीमियर के साथ भविष्य की एक झलक पेश करते हुए कंपनी नए डिजाइन लैंग्वेज-इम्पैक्ट डिजाइन 2.0 इन पीवी का खुलासा करेगी। वाणिज्यिक वाहनों में भी टाटा मोटर्स कुछ श्रेणियों को नए सिरे से परिभाशित करने के लिए तैयार है, वह भी ऐसी डिजाइन के साथ जो मजबूती और गुणवत्ता के साथ उद्देश्य के आशय को दर्शाती हो।

कंपनी की हिस्सेदारी और नए अंदाज के बारे में गुएंटर बट्सचेक, सीईओ एवं प्रबंध निदेषक, टाटा मोटर्स, ने कहा, ’’पिछले सात दशकों से भी अधिक समय से देश में परिवहन क्षेत्र में वैश्विक नवोन्मेशों को पेश कर और ग्राहकों की जरूरतों को पूरा कर टाटा मोटर्स अग्रणी रही है। एंड-टू-एंड प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के साथ एकमात्र भारतीय ऑटोमोटिव विनिर्माता होने के नाते और ब्रांड पहचान के अंतर्गत ’’कनेक्टिंग एस्पिरेषंस’’ के साथ हम स्मार्ट सिटीज के प्रति भारत की इच्छाओं से अपने एकीकृत मोबिलिटी समाधान के साथ जुड़ने की जिम्मेदारी समझते हैं। सरकार के दृश्टिकोण को समर्थन करने के हमारे प्र्रयासों के अंतर्गत ऑटो एक्सपो में हमारा पैवेलियन ’’स्मार्ट मोबिलिटी, स्मार्ट सिटीज़’’ थीम के अंतर्गत विकसित किया गया और यह टाटा मोटर्स के भविष्य के मोबिलिटी समाधानों की झलक देगी।’’

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टाटा मोटर्स डिजाइन के साथ शोटाइम इवेंट्स और मेरोफॉर्म द्वारा डिजाइन और तैयार किया गया टाटा मोटर्स का स्मार्ट मोबिलिटी पैवेलियन रेजीडेन्टिनल जोन, स्पोर्ट्स जोन, स्मार्ट एनर्जी जोन, इंटर एवं इंटरासिटी जोन जैसे आकर्शक एवं संवादपरक जोन में विभाजित है। ये जोन उत्पादों के प्रदर्शन के आसपास अपने डिजिटल इंगेजमेंट्स के साथ ग्राहकों को पूरे पैवेलियन में जुड़ाव महसूस करने का अनुभव मुहैया कराएंगे।

वर्ष 2018 टाटा समूह के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस वर्श समूह देश निर्माण के 150वें वर्ष का उत्सव मनाएगा। इस सफर के दौरान, टाटा मोटर्स ने पिछले 7 दशकों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ’’ऑटो एक्सपो-द मोटर शो 2018’’ (Tata Motor Show 2018) इसे और भी खास बनाएगा क्योंकि स्मार्ट मोबिलिटी समाधान विकसित करने के साथ ही अपने ग्राहकों की इच्छाओं की पूर्ति करने की दिशा में टाटा मोटर्स के सफर में एक खास मौका है।

टाटा मोटर्स के बारे में

42 अरब डॉलर मूल्य की कंपनी टाटा मोटर्स लिमिटेड कारों, यूटिलिटी व्हीकल्स, बसों, ट्रकों और रक्षा वाहनों की अग्रणी ग्लोबल ऑटोमोबाइल निर्माता है। 100 अरब डॉलर मूल्य के टाटा समूह की यह कंपनी भारत में सबसे बड़ी वाहन निर्माता है जिसके यूके, दक्षिण कोरिया, थाइलैंड, दक्षिण अफ्रीका तथा इंडोनेशिया में 76 सब्सीडियरी और एसोसिएट कंपनियों वाला नेटवर्क है और इसमें यूके में जैगुवार लैंडरोवर तथा दक्षिण कोरिया में डेवू भी शामिल है। टाटा मोटर्स ने फिएट के साथ औद्योगिक संयुक्त उपक्रम भी लगाया है। इंजीनियरिंग एवं ऑटोमोटिव सोल्यूशंस मुहैया कराने वाली टाटा मोटर्स का ज़ोर भविष्य के लिए तैयारी पर है तथा कई टैक-आधारित उत्पादों की योजना है। करीब 90 लाख वाहनों के साथ यह भारत में कॉमर्शियल वाहनों के क्षेत्र में मार्केट लीडर और पैसेंजर वाहनों की श्रेणी में अग्रणी निर्माता है। कंपनी इनोवेशन के जरिए ऐसी ऑटो टैक्नोलॉजी विकसित करने पर ध्यान जमाती है जो सस्टेनेबल होने के साथ-साथ उपयुक्त भी हों। कंपनी के डिजाइन एवं आरएंडडी सेंटर भारत, यूके, इटली और कोरिया में स्थित हैं और यह जैन नैक्स्ट ग्राहकों को लुभाने के लिए नए उत्पादों को पेश करने के लिए प्रयासरत है। विदेशों में, टाटा की कारों, बसों, ट्रकों को यूरोप, अफ्रीका, पश्चिम एशिया, दक्षिण एशिया, दक्षिण पूर्वी एशिया, सीआईएस तथा रूस समेत कई देशों में बेचा जाता है।

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स्किल डवलपमेंट ट्रेनिंग सेंटर्स की पर्याप्त मॉनिटरिंग की जाए-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने skill development training center कार्यक्रम में तेजी लाने और ज्यादा से ज्यादा सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग कर इसमें पारदर्शिता लाने के निर्देश दिए हैं।

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श्रीमती राजे शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर कौशल विकास की समीक्षा बैठक ले रही थीं। उन्होंने कहा कि स्किल डवलपमेंट कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण देने वाले सेंटर्स को ऑनलाइन किया जाए ताकि उनकी पर्याप्त मॉनिटरिंग की जा सके और यह पता लग सके कि किस सेंटर पर कितने बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं।

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skill development training center
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मुख्यमंत्री ने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रम में राजस्थान सिरमौर है और पूरे देश में प्रदेश की एक अलग पहचान कायम हुई है। उन्होंने कहा कि यह मोमेन्टम बरकरार रहना चाहिए।

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उन्होंने कौशल विकास कार्यक्रम के तहत skill development training center लेने वाले एवं रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं का जिलेवार डेटा तैयार करने के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, दीनदयाल उपाध्याय कौशल्या ग्रामीण योजना एवं नियमित कौशल  प्रशिक्षण कार्यक्रम की ब्रांडिंग एवं कम्युनिकेशन गाइड लाइन्स 2017-18 का विमोचन भी किया।

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बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रम एवं रोजगार जे.सी. महान्ती, सचिव श्रम एवं कौशल टी. रविकान्त, एमडी  आरएसएलडीसी कृष्णकुणाल उपस्थित थे।

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image source: Chief Public Relations Cell