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पांच ग्राम खमीरा रोजाना खाएं, कोरोना के डर से मुक्ति पाएं

यूनानी चिकित्सा पद्धति में प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत करने के लिए खमीरा पर बहुत जोर दिया गया है। इसमें सबसे बेहतर खमीरा अमरबरीद और रेशम को बताया गया है। इसके अलावा भी बहुत तरह के खमीरा है। जब भी प्रतिरोधक शक्ति में कमी महसूस हो, हकीम की सलाह लेकर यूनानी दवा की दुकान से खमीरा खरीद कर प्रतिदिन पांच ग्राम खाया जा सकता है।

फ्लू और मानव का साथ चोली-दामन जैसा

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के यूनानी विभागाध्यक्ष डा. सैयद अहमद के मुताबिक खमीरा शरीर को रोगों से लड़ने की ताकत देता है। यूनानी में वैसे तो अनेक प्रकार के खमीरा का वर्णन है लेकिन अमरबरीद और रेशम को आम आदमी भी आसानी से खरीद सकता है। उनका दावा है कि भरपूर नींद और समय से भोजन करके भी कोरोना संक्रमण का सफलता के साथ मुकाबला किया जा सकता है। डा. सैयद अहमद ने बताया कि फ्लू और मानव का साथ चोली-दामन जैसा है। बदलते मौसम के साथ फ्लू के वायरस मानव शरीर को संक्रमित करते हैं और शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली कुछ बाहरी उपायों के साथ उससे निजात पा लेती है। इसलिए पारम्परिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा शरीर की प्रतिरोधक शक्ति को मजबूत बनाने सिद्धांत पर काम करती हैं।

कोशिकाओं की होती है मरम्मत

डा. अहमद के अनुसार मानव शरीर एक ऐसी मशीन है जिसमें जागते रहने पर लगातार टूट—फूट होती है अर्थात उसकी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता हैं। जैसे ही शरीर नींद के आगोश में जाता है, शरीर कोशिकाओं की मरम्मत शुरू कर देता है। इसके लिए भरपूर गहरी नींद अति आवश्यक है। नींद के दौरान सिर्फ कोशिकाओं की मरम्मत ही नहीं होती बल्कि प्रतिरोधक प्रणाली भी अपनी शक्ति बढ़ाती है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अक्सर आपने देखा होगा कि भरपूर गहरी नींद वही व्यक्ति ले पाता है जिसकी दिनचर्या नियमित है अर्थात वह सभी काम तय समय पर करता है। सीजनल फल—सब्जियों का सेवन करता है। डा. सैयद अहमद का कहना है कि कोरोना काल में इम्युन सिस्टम की मजबूती के लिए ड्राइफ्रूट खाएं। भीगे हुए बादाम और अखरोट की गिरी खाने के साथ ही काली मिर्च लोंग अदरक तुलसी गिलोय की चाय बनाकर पीने से भी कोरोना वायरस के प्रकोप से स्वयं को सुरक्षित किया जा सकता है।

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भारत की छह आईआईटी ने किया कमाल, थम जाएगा कोरोना का नकारात्मक धमाल

भारत पर जब भी कोई मुसीबत आती तो देश के प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) हमेशा अलर्ट मोड में काम शुरू कर देते हैं। कोविड 19 (COVID-19) महामारी की आशंका से जूझते भारत में सम्भावित रोगियों को वेंटिलेटर की बड़ी संख्या में आवश्यकता होगी और देश के आईआईटी इन्हें बनाने की तकनीक ईजाद करने में जुट गए हैं। इसके अलावा वे सस्ती जांच किट और मशीनें भी बना रहे हैं। IIT गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने पॉलीमरेस चेन रिएक्शन (PCR) मशीन बनाई है। इसकी मदद से 12 घंटों में 1,000 सैंपल चेक किए जा सकते हैं। IIT ने अभी तक दो ऐसी मशीनें गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में भेज दी है और बाकी पर काम जारी है। यहीं के छात्रों ने ऑटोमेटेड स्प्रेयर के साथ एक ड्रोन तैयार किया है, जो ऊंची इमारतों, पार्क और सड़क आदि को सैनिटाइज करने के काम आ सकता है।

IIT गुवाहाटी कोरोना वायरस की वैक्सीन पर काम कर भी रहा है। IIT की तरफ से आधिकारिक बयान में कहा गया है कि फैकल्टी मेंबर बायो टेक्नोलॉजी टूल का इस्तेमाल करते COVID-19 के इलाज के लिए वैक्सीन तैयार कर रहे हैं। यहां फेस शील्ड का प्रोटोटाइप तैयार किया गया है। इसे स्वास्थ्यकर्मी मुंह पर पहनते हैं। 3D प्रिंटर की मदद से तैयार इस फेस शील्ड को इस्तेमाल करना आसान है।

IIT मुंबई ने कोरोंटाइन नाम से एक मोबाइल ऐप बनाई है, जो संक्रमित व्यक्ति को ट्रैक सकती है। यह ऐप समय-समय पर GPS कॉर्डेिनेट्स भेजती रहती है, जिससे ट्रेसिंग आसान हो जाती है। दिल्ली IIT छात्रों ने टेस्टिंग किट तैयार की है, जिससे कोरोना वायरस के टेस्ट के दौरान आने वाली लागत को कम किया जा सकता है। फिलहाल इसका नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) पुणे में क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। इसके अलावा यहां इंफेक्शन-प्रूफ फैब्रिक तैयार किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल अस्पतालों में इंफेक्शन को फैलने से बचाने के लिए हो सकता है।
IIT दिल्ली के केमिस्ट्री विभाग ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुरूप हैंड सैनिटाइजर तैयार किया है। यह कोरोना वायरस को मारने में पूरी तरह कारगर है। फिलहाल इसे कैंपस के अंदर इस्तेमाल किया जा रहा है। दिल्ली की तरह IIT हैदराबाद के छात्रों ने भी हैंड सैनिटाइजर तैयार किया है। इसे भी WHO के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है।

IIT कानपुर में नोक्का रोबोटिक्स नाम की कंपनी है। इस कंपनी ने वेंटिलेटर प्रोटोटाइप तैयार किया जिसकी फिलहाल टेस्टिंग चल रही है। यह बाजार में पहले से मौजूद वेंटिलेटर की तुलना में बेहद सस्ता है। वहीं IIT हैदराबाद ने वेंटिलेटर का विकल्प तैयार किया है। इस बैग वॉल्व मास्क को इमरजेंसी में मरीज को सांस देने के लिए किया जा सकता है। इसी तरह IIT खड़गपुर ने हैंड सैनिटाइजर तैयार किए हैं।

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इंसानी शरीर के चौकीदार की रक्षा करता है शहतूत, शरीर में कोरोना के प्रवेश पर लगाता है रोक

कोरोना वायरस के भय से घरों में बंद लोगों के लिए राहत की खबर। देश के जाने—माने यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डा. सैयद अहमद का दावा है कि इंसानी शरीर के गले में प्रकृति ने जिन टांसिल्स को स्थान दिया है, वे असल में शरीर के सबसे मजबूत चौकीदार हैं और कोरोना जैसे खतरनाक वायरस का हमला होते ही बचाव के लिए संकेत भेजना शुरू कर देते हैं लेकिन अधिकांश लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। इसी गलती के चलते वायरस को फेफडों तक पहुंचने का अवसर मिल जाता है। टांसिल्स हर उस बैक्टीरिया, वायरस को रोकने की कोशिश करते हैं जो शरीर में प्रवेश की कोशिश कर रहा होता है। इस प्रक्रिया के चलते ही गले में खराश पैदा होती है।

डा. सैयद अहमद का कहना है कि प्रकृति ने शरीर को निरोग बनाए रखने के लिए पृथ्वी पर वनस्पति के रूप में तमाम औषधियां पैदा कर रखी हैं और यूनानी, आयुर्वेद जैसी चिकित्सा पद्धतियां उन्हीं वनस्पतियों का औषधि के रूप में इस्तेमाल कर रोग से बचाव के साथ ही उसे जड़ से नष्ट करने में भरोसा रखती हैं।

गले का रक्षक है शहतूत

डा. सैयद अहमद का कहना है कि आमतौर पर भारत में लगभग सभी इलाकों में पाया जाने वाला शहतूत गले का सबसे बड़ा रक्षक है। उसके पत्तों को उबालने के बाद बचे पानी के गरारे गले के टांसिल्स को न सिर्फ राहत देते हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति के साथ मिलकर घातक से घातक वायरस को गले से बाहर निकाल फैंकते हैं। शहतूत फल का उपयोग भी अनेक तरह के वायरस और बैक्टीरिया को मार भगाता है।

यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ के अनुसार अभी तक के अध्ययन में यह साफ हो चुका है कि कोरोना वायरस मूलत: अनेक तरह के फ्लू के वायरस का ही एक घातक रूप है। चूंकि दुनिया इन दिनों कोरोना के खतरे से जूझ रही है, ऐसी स्थिति में जैसे ही किसी को गले में खराश महसूस हो, उसे तत्काल शहतूत के पत्तों के गरारे शुरू कर देने चाहिए। इसके अलावा नमक के गरारे भी गले की रक्षा करते हैं।

तीखी है लेकिन गले को रखती है स्वस्थ

यूनानी विशेषज्ञ का कहना है कि कोरोना वायरस के खतरे से बचने के लिए मौसमी फल—सब्जियों का सेवन बढ़ा दिया जाना चाहिए। ड्राई फ्रूट के साथ ही तुलसी जैसी पारम्परिक औषधि भी शरीर को रोगों से बचाने में सहायक है। काली मिर्च भी ऐसा ही एक सूखा फल है जो स्वाद में तीखी होने के बावजूद गले को स्वस्थ रखती है। प्राकृतिक इलाज में भरोसा रखने वाले गायक आज भी काली मिर्च और मिश्री से गले को बैठने से बचाते हैं।

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कोरौना गांव निवासियों की बढ़ी मुसीबत, नाम सुनते ही भाग खड़े होते हैं लोग

भारत में अजीबोगरीब नाम वाले गांवों की भरमार है और जब कभी उससे मिलते—जुलते नाम वाले कुछ वाकये हो जाते हैं तो उन गांव वालों की परेशानी बढ़ जाती है। इन दिनों ऐसा ही उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के कोरौना गांव के निवासियों के साथ हो रहा है। Increased trouble residents of Korauna

‘कोरौना’ नामक यह गांव उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित है, जिसका नाम गांव वालों के लिए आफत बन चुका है। गांव वासियों के अनुसार जब से कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ा है, उनके गांव में बाहरी व्यक्ति आने से डरते हैं। इतना हीं नहीं, जब कोई गांववाला गांव का नाम बताता है तो वे उससे दूरी बना लेते हैं। लोग यह नहीं समझते हैं कि कोरौना एक गांव है कोई कोरोना से संक्रमित इंसान नहीं। Increased trouble residents of Korauna

हैरान रह जाती है पुलिस

इस गांव के नाम का इतना खौफ है कि लोग टेलीफोन पर भी बात नहीं करते हैं। गांव के लोग जब सड़क पर निकलते हैं तो पुलिस उनसे पूछती है कि कहां जा रहे हो और वह बताते हैं कि हम कोरौना जा रहे हैं तो पुलिस भी हैरान-परेशान हो जाती है।

Increased trouble residents of Korauna इसके अलावा केरल के कोच्चि के एक गांव में स्थित कोरोना टेक्सटाइल नामक दुकान भी भारी चर्चा में है। जब से कोरोना महामारी फैली है तब से यह दुकान लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। लोग अब इस दुकान के सामने दूर से ही सेल्फी ले रहे हैं। Increased trouble residents of Korauna

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increase immunity corona will not near: डरें नहीं, रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाएं, पास तक नहीं फटकेगा कोरोना

increase immunity corona will not near: कोरोना के भय से थर—थर कांप रही दुनिया को यूनानी विशेषज्ञों की सलाह है कि उसे डरने की अपेक्षा अपनी रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। रोग प्रतिरोधक शक्ति को रात में जल्दी सो जाने और सुबह जल्दी उठ कर ताजा और सादा नाश्ता करके मजबूती दी जा सकती है। इसके अलावा ड्राईफ्रूट का सेवन बढ़ा दें तो कोरोना का इन्फेक्शन पास तक नहीं फटकेगा। अलबत्ता इंसानों को एक—दूसरे से दूरी कायम रखने के साथ ही हाथ धोने पर विशेष ध्यान भी देना होगा ताकि कोरोना वायरस हाथों के जरिए शरीर में प्रवेश नहीं कर पाए।

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में यूनानी विंग के प्रभारी डा. सैयद अहमद का कहना है कि कोरोना वायरस का अभी तक किसी भी पैथी में कोई इलाज नहीं है, लेकिन यह वायरस मजबूत रोग प्रतिरोधक शक्ति वाले शरीरों का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। डा. सैयद का कहना है कि इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि मजबूत रोग प्रतिरोधक शक्ति वाले जबरन भीड़भाड़ में जाकर घुस जाएं। उन्हें भी सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी की पालना करते हुए घरों में रहना चाहिए। increase immunity corona will not near:

फ्रोजन खाद्य से बचना जरूरी

यूनानी पैथी के विशेषज्ञ डा. सैयद अहमद का कहना है कि सुबह उठकर ताजा पका हुआ नाश्ता कर लेने से कुछ ही दिनों में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ना शुरू हो जाएगी। इसके लिए सुबह नाश्ते में दूध, हलवा बादाम इत्यादि खाया जा सकता है। अगर किसी को ये सब खाद्य उपलब्ध नहीं हैं तो वह मूंगफली, चना इत्यादि खाकर भी रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ा सकता है। अलबत्ता फ्रोजन खाद्य से बचना बेहद जरूरी है। जहां तक चिकन मटन खाने का सवाल है तो वह भी ताजा लाकर पकाया जाना चाहिए। फ्रिज में रखा हुआ और प्रोसेस फूड इस वक्त में त्याग देना ही बेहतर होगा। increase immunity corona will not near:

 

सेनेटाइजर से ज्यादा फायदा देगा हाथ धोना

डा. सैयद अहमद का कहना है कि सेनेटाइजर का उपयोग किया जा सकता है लेकिन सबसे अधिक फायदा हाथ धोने से मिलेगा। खाना खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोएं। जब भी कोई काम करें, साबुन से हाथ धो लें। जहां तक मास्क का सवाल है तो सामान्य फ्लू पीड़ितों के साथ ही कोरोना के लक्षण वाले लोगों के लिए अनिवार्य है। अन्य लोग भी लगा सकते हैं लेकिन मास्क से ज्यादा फायदा हाथ धोने से मिलेगा। increase immunity corona will not near:

बेहतरीन सेनेटाइजर है नींबू—पानी

उन्होंने बताया कि नीबू पानी ​बेहतरीन सेनेटाइजर है। चने के बेसन से भी हाथ धोए जा सकते हैं। मुल्तानी मिट्टी भी हाथ धोने के काम ली जा सकती है। लेकिन सबसे ​बढ़िया है कि साबुन से हाथ धोए जाएं। इसके लिए नीम बेस साबुन मिल जाए तो सोने में सुहागा हो सकता है। increase immunity corona will not near:

इन्फेक्शन दिखे तो शहतूत पत्ते के गरारे करें

डा. सैयद अहमद का कहना है कि फ्लू का हमला होते ही गले में खराश के साथ ही निगलने में दिक्कत शुरू हो जाती है। ऐसी स्थिति में शहतूत पत्ते के पानी के गरारे तत्काल शुरू कर दिए जाएं। नमक मिले पानी के गरारे भी फायदेमंद रहेंगे। इसके साथ ही चिकित्सक की मदद भी तत्काल ली जाए। ऐसी स्थिति आते ही शबर्ते उन्नाव को गुनगने पानी से लें। बादाम, अखरोट, चिलगोजा, मूंगफली खाएं। मूंगफली खाने के बाद आधा घंटे तक पानी नहीं पीएं। increase immunity corona will not near: