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अब केले पर मंडराया कोरोना वायरस का साया, हजारों टन केला……

कोरोना से खेती को भी बड़ा नुकसान हुआ है। इसकी वजह से उत्तरप्रदेश में हजारों टन केले की पैदावार नहीं हो सकी। उत्तरप्रदेश के कुछ जिलों में टिशू कल्चर केले की खेती की जाती है जिसके बीज महाराष्ट्र और दक्षिण के राज्यों से आते हैं। लेकिन कोरोना के चलते इसके बीज नहीं आ पा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में बाराबंकी, अयोध्या, सीतापुर, गोंडा, बहराइच, संतकबीरनगर, श्रावस्ती, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, बलिया, वाराणसी समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों मे टिशू कल्चर केले की खेती बडे पैमाने पर होती है लेकिन कोरोना को लेकर इस खेती पर भी आफत आ गई है। राज्य मे करीब एक लाख हेक्टेयर में टिशू कल्चर के केले की खेती की जाती है लेकिन अभी तक इसके बीज की व्यवस्था नहीं हो पायी है जबकि इस खेती के लिए खेत पूरी तरह तैयार हैं। चूंकि इसके बीज दक्षिण के राज्यों से आते हैं इसलिए बीजों का आना मुश्किल माना जा रहा है।

टिशू कलचर खेती मे अपनी अलग पहचान बना चुके किसान रामशरण कहते हैं कि एक लाख हेक्टेयर मे केले की खेती के लिए करीब तीन करोड़ बीजों की जरूरत होगी। आवागमन बंद होने के कारण इतना बीज आना मुश्किल ही नहीं असंभव है। रामशरण को टिशू कलचर खेती के लिए पद्मश्री भी मिल चुका है। उद्यान विशेषज्ञों के अनुसार पिछले साल टिशू कल्चर केले की राज्य मे बंपर पैदावार हुई थी और किसानों ने मोटा मुनाफा कमाया था।

पिछले साल के मुनाफे को देखकर कुछ नये किसान भी इस क्षेत्र मे आ गए और अपने खेतों को टिशू कल्चर केले की खेती के लिए तैयार किया लेकिन बीज को लेकर अभी भी अनिश्चितता के हालात के कारण किसान अब उदास हैं। रेल के साथ हवाई सेवा भी पूरी तरह से बंद है, इसके बीज हवाई जहाज से भी आते रहे हैं लेकिन यह सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। निचोड़ यह है कि टिशू कल्चर केले की खेती पर इस बार आफत है। किसान इसके लिए किसी को दोष भी नहीं दे सकते कयोंकि देश कोरोना जैसी महामारी से लड रहा है।