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दहाड़ता नहीं कुत्ते की तरह भौंकता है चीता, सांप की तरह फुफकारता भी है

cheetah does not roar but barks: आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि बिल्ली के ख़ानदान में चीता ही ऐसा जानवर है, जो काफ़ी बड़ा होने के बावजूद शेर और बाघ की तरह दहाड़ता नहीं बल्कि कुत्ते की तरह भौंकता है। वो बिल्लियों की तरह गुर्राता है तो सांप की तरह फुफकारता भी है। लेकिन तेंदुए की तरह दिखने वाला यह जानवर दहाड़ नहीं पाता और इसी वजह से वे शेर, बाघ तो दूर तेंदुए का भी मुकाबला नहीं कर पाते। उनके लिए रात में देखना भी मुश्किल होता है। रात में चीतों की हालत इंसानों जैसी ही होती है। इसीलिए चीते, या तो सुबह के वक़्त या भी दोपहर के बाद शिकार करते हैं। चीतों को पेड पर चढ़ने में भी दिक़्क़त होती है।

सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार

वैसे चीता दुनिया का सबसे तेज़ रफ़्तार से दौड़ने वाला जानवर है। ये सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ सकता है। पूरी दुनिया में सिर्फ़ अफ्रीका में चीते बचे हैं। भारत समेत एशिया के हर देश से ये जानवर विलुप्त हो चुका है, लेकिन ईरान में अभी भी चीते बचे हुए हैं। आज भी ईरान में साठ से 100 के बीच चीते पाए जाते हैं। ये मध्य ईरान के पठारी इलाक़ों में रहते हैं। एक वक़्त था जब चीते भारत-पाकिस्तान और रूस के साथ-साथ मध्य-पूर्व के देशों में भी पाए जाते थे। मगर अब एशिया में सिर्फ़ ईरान में गिनती के चीते रह गए हैं। cheetah does not roar but barks:

 

चीते की एशियाई नस्ल

चीते की एशियाई नस्ल के सिर और पैर छोटे होते हैं। उनकी चमड़ी और रोएं मोटे होते हैं। अफ्रीकी चीतों के मुक़ाबले उनकी गर्दन भी मोटी होती है। एशियाई चीते बहुत बड़े दायरे में बसर करते हैं। रिसर्चर के लिए ये बात सबसे चौंकाने वाली रही है। क्योंकि आम तौर पर चीते एक छोटे से इलाक़े तक ही सीमित रहते हैं। cheetah does not roar but barks:

100 बच्चों में से पांच ही ज़िंदा रहते हैं

चीतों के ज़्यादातर बच्चे मर जाते हैं। चीतों के 95 फीसदी बच्चे, वयस्क होने से पहले ही मर जाते हैं। चीते के 100 बच्चों में से पांच ही बड़े होने तक ज़िंदा रहते हैं। कभी कभी इनके बच्चों के बचने की उम्मीद 36 फ़ीसद तक ही होती है। चीतों के बच्चों के मरने के पीछे शिकारी जानवर होते हैं। इनमें शेर, लकड़बग्घे, बबून और शिकारी परिंदे शामिल हैं। साथ ही चीतों के रिहाइश वाले इलाक़ों में इंसानी दखल से भी इनकी तादाद घटती जा रही है। अरब देशों में चीतों के बच्चों को पालने के लिए ख़रीदा जाता है। इनकी क़ीमत दस हज़ार डॉलर तक पहुंच जाती है। cheetah does not roar but barks:

आधे वक़्त हवा में रहता है चीता

चीते 95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार तक दौड़ सकते हैं। चीता जब पूरी ताक़त से दौड़ रहा होता है तो सात मीटर तक लंबी छलांग लगा सकता है यानी 23 फुट लंबी छलांग। चीते ये रफ़्तार तीन सेकेंड में हासिल कर लेते हैं। अच्छी से अच्छी स्पोर्ट्स कार को भी इतनी रफ़्तार हासिल करने में 6 सेकेंड लग जाते हैं। चीते इतनी तेज़ रफ़्तार से ज़्यादा देर नहीं दौड़ पाते हैं। उनके पास शिकार के लिए सिर्फ़ बीस सेकेंड होते हैं। cheetah does not roar but barks:

 

सिर्फ़ सेक्स के लिए नर चीते से मिलती है

cheetah does not roar but barks:  मादा चीते की ज़िंदगी बड़ी चुनौती भरी रहती है। उसे औसतन नौ बच्चों को अकेले ही पालना पड़ता है। इसका मतलब ये हुआ कि उसे हर दूसरे रोज़ शिकार करना ही होगा। वरना वो बच्चों का पेट कैसे भर पाएगी! शिकार के दौरान उसे अपने बच्चों की निगरानी भी करनी पड़ती है, ताकि उन्हें ख़तरनाक जानवरों से बचाया जा सके। छोटे बच्चों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना भी मादा चीता के लिए चुनौती होती है। मादा चीता सिर्फ़ सेक्स के लिए नर चीते से मिलती है। सेक्स के बाद दोनों फिर से अलग-अलग हो जाते हैं। इस दौरान अगर बच्चे हैं तो उन्हें अपना ख़याल ख़ुद रखना होता है। मादा के मुक़ाबले नर चीते, अपना गैंग बना लेते हैं। एक झुंड में चार-पांच चीते होते हैं।

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अगर पुलिस ने नहीं रचा होता ये षड़यंत्र तो अमेरिका के कान काट लेता भारत

अगर 1994 में ये षड़यंत्र नहीं रचा जाता तो अंतरिक्ष विज्ञान में भारत अमेरिका के कान काट रहा होता. लेकिन भारत की भ्रष्ट पुलिस ने मात्र चंद रुपयों के लिए भारत के इस सपने को धूल—धूसरित कर दिया और एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक को गद्दार साबित करने में पूरी ताकत लगा दी. हां ये मजेदार तथ्य है कि ऐसा भारत में ही हो सकता है कि किसी को गोपनीय तकनीक हनी ट्रेप में फंसकर बेचने के आरोप में गिरफ्तार करके लगातार पीटा जाए और बाद में सुप्रीम कोर्ट पूरी चार्जशीट को फर्जी करार दे. इतना ही नहीं स्वयं भारत सरकार उन्हें पद्म भूषण सम्मान भी दे और भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों के लिए बदनाम केरल सरकार उन्हें गैरकानूनी गिरफ्तारी के लिए करोड़ों का मुआवजा भी चुकाए.
बिल्कुल ऐसा ही इसरो के एक वैज्ञानिक के साथ 26 साल पहले हुआ जब वे क्रायोजनिक इंजन बनाकर भारत को अं​तरिक्ष विज्ञान में अमेरिका से आगे ले जाना चाहते थे.

30 नवंबर 1994 को जब 53 वर्षीय नांबी नारायणन को गिरफ्तार किया गया उस वक़्त इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान) के क्राइजेनिक रॉकेट इंजन कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे थे। कुछ ही घंटों के भीतर अख़बार उन्हें ‘गद्दार’ कह रहे थे. एक ऐसा गद्दार जिसने मालदीव की दो महिलाओं के हनी ट्रैप के फंसकर रूस से भारत को मिलने वाली टेक्नॉलजी पाकिस्तान को बेच दी थी. इसरो में काम करते हुए नारायणन ने तेज़ी से प्रगति की. उन्हें अमरीका की प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में रॉकेट से जुड़ी तकनीक का अध्ययन करने के लिए स्कॉलरशिप भी मिली. वहां से पढ़ाई के एक साल बाद वो भारत लौटे और वापस आकर फिर से इसरो में काम करने लगे.
नारायणन ने इसरो में काम करना शुरू किया तब यह अपने शुरुआती दौर में था. सच कहें तो किसी तरह का रॉकेट सिस्टम विकसित करने की हमारी कोई योजना थी ही नहीं. अपने एयरक्राफ़्ट उड़ाने के लिए हम अमरीका और फ़्रांस के रॉकेट इस्तेमाल करने की योजना बना रहे थे. हालांकि ये प्लान बाद में बदल गया और नारायणन भारत के स्वदेशी रॉकेट बनाने के प्रोजेक्ट में अहम भूमिका निभाने लगे.

साल 1994 तक उन्होंने एक वैज्ञानिक के तौर पर बड़ी मेहनत से काम किया. तब तक, जब तक नवंबर 1994 में उनकी ज़िंदगी पूरी तरह उलट-पलट नहीं गई. नारायणन की गिरफ़्तारी से एक महीने पहले केरल पुलिस ने मालदीव की एक महिला मरियम राशीदा को अपने वीज़ा में निर्धारित वक़्त से ज़्यादा समय तक भारत में रहने के आरोप में गिरफ़्तार किया था. राशीदा की गिरफ़्तारी के कुछ महीनों बाद पुलिस ने मालदीव की एक बैंक कर्मचारी फ़ौज़िया हसन को गिरफ़्तार किया. इसके बाद एक बड़ा स्कैंडल सामने आया.
स्थानीय अख़बारों ने अपनी ख़बरों में लिखा मालदीव की ये महिलाएं भारतीय रॉकेट से जुड़ी ‘गुप्त जानकारियां’ चुराकर पाकिस्तान को बेच रही हैं और इसमें इसरो के वैज्ञानिकों की मिलीभगत भी है. फिर ये दावे भी किए जाने लगे कि नांबी नारायणन भी मालदीव की औरतों के हनी ट्रैप के शिकार हुए वैज्ञानिकों में से एक हैं. औपचारिक रूप से गिरफ़्तार किए जाने के बाद नारायणन को अदालत में पेश किया गया.
जांचकर्ता उन्हें पीटते थे और पीटने के बाद एक बिस्तर से बांध दिया करते थे. वो उन्हें 30 घंटे तक खड़े रहकर सवालों के जवाब देने पर मजबूर किया करते थे. उन्हें लाइ-डिटेक्टर टेस्ट लेने पर मजबूर किया जाता था, जबकि इसे भारतीय अदालतों में सबूत के तौर पर मान्यता नहीं है.

नारायणन ने पुलिस को बताया था कि रॉकेट की ख़ुफ़िया जानकारी ‘काग़ज के ज़रिए ट्रांसफ़र नहीं की जा सकती’ और उन्हें साफ़ तौर पर फंसाया जा रहा है. उस समय भारत शक्तिशाली रॉकेट इंजन बनाने के लिए क्राइजेनिक टेक्नॉलजी को हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा था और इसलिए जांचकर्ताओं ने नारायणन की बातों पर भरोसा नहीं किया. इस मामले में नारायणन को 50 दिन गिरफ़्तारी में गुजारने पड़े थे. वो एक महीने जेल में भी रहे. जब भी उन्हें अदालत में सुनवाई के लिए ले जाया जाता, भीड़ चिल्ला-चिल्लाकरक उन्हें ‘गद्दार’ और ‘जासूस’ बुलाती.
हालांकि नारायणन की गिरफ़्तारी के एक महीने बाद भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने केरल से यह मामला ले लिया.
नारायणन ने सीबीआई के जासूसों से बताया कि वो जिन भी जानकारियों से काम करते थे उनमें से कोई जानकारी ‘क्लासिफ़ाइड’ नहीं थी. एक जासूस ने नारायणन से इस बारे में माफ़ी भी मांगी थी. उसने कहा था, “मुझे मालूम नहीं कि इतना कुछ कैसे हो गया, हमें इसका बहुत दुख है. आख़िरकार 19 जनवरी 1995 को नांबी नारायणन को ज़मानत मिली . नारायणन के अलावा पांच अन्य लोगों पर भी जासूसी और पाकिस्तान को रॉकेट तकनीक बेचने का आरोप लगा था. इसरो में काम करने वाले डी ससिकुमार, दो अन्य भारतीय पुरुष (रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के एक कार्यकर्ता और एक कॉन्ट्रैक्टर) और मालदीव की दो महिलाओं को भी इस सिलसिले में गिरफ़्तार किया था. सीबीआई के मामला बंद किए जाने के बावजूद, राज्य सरकार ने इसे दोबारा शुरू करने की कोशिश की और सुप्रीम कोर्ट गई. लेकिन साल 1998 में इसे पूरी तरह ख़ारिज कर दिया गया.
इन सबके बाद नारायणन ने उन्हें ग़लत तरीके से फंसाने के लिए केरल सरकार पर मुक़दमा कर दिया. मुआवज़े के तौर पर उन्हें 50 लाख रुपए दिए गए. अभी पिछले महीने केरल सरकार ने कहा कि वो ग़ैरक़ानूनी गिरफ़्तारी और उत्पीड़न के मुआवज़े के तौर पर उन्हें एक करोड़ 30 लाख रुपए और देगी. साल 2019 में नांबी नारायणन को भारत सरकार के प्रतिष्ठित पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया. साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केरल पुलिस की भूमिका की जांच के आदेश दिए. नारायणन और पांच अन्य लोगों के ख़िलाफ़ इस तरह की साज़िश क्यों रची गई, यह आज भी रहस्य बना हुआ है. शायद यह षड्यंत्र किसी प्रतिद्वंद्वी अंतरिक्ष शक्ति ने रचा होगा ताकि भारत की रॉकेट टेक्नॉलजी को विकसित होने से रोका जा सके. बाद में यही तकनीक अंतरिक्ष में भारत की सफलता के लिए वरदान साबित हुई. क्या इसके पीछे वो देश थे जो भारत के कम ख़र्च में सैटेलाइट लॉन्च करने से घबराए हुए थे? या फिर ये सिर्फ़ भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार का नतीजा था?

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इन मुस्लिम सुंदरियों ने कहा, जो उखाड़ना है, उखाड़ ले अमेरिका, हम तो खरीदेंगी ये वस्तु

तुर्की ने रूस की हवाई सुरक्षा प्रणाली एस 400 को सक्रिय करने के संकेत देने के बाद कहा है कि यदि अमेरिका एफ 35 लड़ाकू विमान को सौपने के अपने रुख के बारे में जल्द बदलाव नहीं करेगा तो वह एस 400 प्रणाली को सक्रिय करने से पीछे नहीं हटेगा।

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दाेगन ने हालांकि इस मामले पर उम्मीद जताई है कि अमेरिका के साथ यह मसला बातचीत के जरिए हल कर लिया जाएगा। एर्दाेगन ने जस्टिस और डेवलपमेंट पार्टी के संसदीय समूह से कहा, “ द्विपक्षीय बातचीत में एस 400 को लेकर जारी विवाद को खत्म करने का प्रयास किया जायेगा। हम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एस 400 सुरक्षा प्रणाली को लेकर जारी विवाद को अधिकारीयों के जरिये खत्म करने की पूरी कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा,“ एस 400 सुरक्षा प्रणाली को छोड़ देना या सक्रिय नहीं करने का कोई सवाल ही नहीं है और इस मामले का निवारण सच्चाई के माध्यम से किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि तुर्की रुसी निर्मित एस 400 सुरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने पर विचार कर रहा है। सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए रूस की संघीय सेवा के प्रमुख दिमित्री शुगाव ने इसे लेकर कहा है कि एस-400 सुरक्षा के प्रणाली के संचालन प्रकिया को लेकर हम वर्ष के अंत तक तुर्की विशेषज्ञों को पूरी तरह से प्रशिक्षित कर दिया जाएगा। यह प्रणाली अगले वर्ष वसंत ऋतु से पहले युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगी।
अमेरिका तुर्की की एस-400 सुरक्षा प्रणाली खरीदने के खिलाफ था। अमेरिका का कहना था कि नाटो सुरक्षा मापदंडो के आधार पर यह हथियार प्रणाली ‘अयोग्य’ है और इससे पांच जनेरेशन वाले एफ-35 लड़ाकू विमान के संचालन पर भी असर पड़ सकता है।

तुर्की द्वारा रुसी एस-400 सुरक्षा प्रणाली खरीदने पर अमेरिका खासा नाराज़ हो गया था जिसके बाद उसने इस वर्ष जुलाई में एफ-35 कार्यक्रम में तुर्की की सहभागिता को स्थगित करते हुए कहा था कि वह मार्च 2020 तक इस परियोजना से तुर्की को पूरी तरह बाहर कर देगा। वहीं रूस ने तुर्की को अपने लड़ाकू विमान एसयू35 और एसयू 37 बेचने की इच्छा जताई है।

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भरोसेमंद दोस्त रूस के बुलावे पर मास्को में लेफ्ट—राइट करेगी भारतीय सेना, क्लाशिनिकोव राइफल बनाने का कारखाना भी खोलेगा

भारत का भरोसेमंद दोस्त रूस, पूरी दुनिया में कितनी भी उथल—पुथल हो जाए लेकिन रूस भारत का हाथ नहीं छोड़ता। उसी रूस ने भारत से कहा है कि द्वितीय विश्वयुद्ध की 75वीं वर्षगांठ पर वह मास्को में होने वाली भव्य सैनिक परेड़ में भारतीय सेना का एक दल भेजे। यह दल उन यूनिटों को मिलाकर बनेगा जिनके अधिकारी और जवानों ने द्वितीय विश्वयुद्ध में हिस्सा लिया था। इसके अलावा रूस ने भरोसा दिया है कि वह विश्वप्रसिद्ध कलाशिनीकोव ए के 203 राइफल बनाने का कारखाना भारत में खोलेगा।

भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को यह आश्वासन रूस के रक्षा मंत्री जनरल जनरल सेर्गेई शोइग्यू ने मास्को में दिया। उन्होंने कहा कि रूस भारत की रक्षा क्षमता बढाने और उसे उन्नत तथा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी हासिल करने में हर संभव मदद देगा।
रूसी रक्षा मंत्री ने सिंह के साथ मास्को में सेना और सैन्य तकनीकी सहयोग पर 19 वें भारत-रूस अंतर सरकारी आयोग की बैठक में यह आश्वासन दिया। दोनों रक्षा मंत्रियों ने बैठक की संयुक्त रूप से अध्यक्षता की। श्री सिंह तीन दिन की यात्रा पर रूस गये हुए हैं।
जनरल शोइग्यू ने सिंह का स्वागत करते हुए भारत को विशेष सामरिक रक्षा सहयोगी करार दिया। लखनऊ में अगले वर्ष फरवरी में आयोजित होने वाली रक्षा प्रदर्शनी में रूस की विशेष भागीदारी के आमंत्रण को स्वीकार करते हुए जनरल सेर्गेई ने कहा कि रूस की ओर से प्रदर्शनी में व्यापक हिस्सेदारी की जायेगी। दोनों रक्षा मंत्रियों ने मंगलवार को मास्को में ही हुए भारत रूस रक्षा उद्योग सम्मेलन के परिणामों को सार्थक बताया। रूस ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध कलाशिनीकोव ए के 203 राइफलों के भारत में विनिर्माण के लिए संयुक्त उपक्रम भारत-रूस राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड को चालू करने की तैयारी पूरी कर ली गयी हैं।

रूस ने आतंकवाद से निपटने में भारत को अपने समर्थन को दोहराते हुए कहा कि वह क्षेत्र में भारत की सुरक्षा प्राथमिकता को महत्व देता है। रूसी रक्षा मंत्री ने कहा कि रूस भारत की रक्षा क्षमता बढाने के लिए उसे अत्याधुनिक तथा उन्नत प्रौद्योगिकी हासिल करने में मदद करेगा। दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों की टीमों को सैन्य साजो सामान के परस्पर आदान प्रदान से संबंधित समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम करने को कहा।

रूसी रक्षा मंत्री ने सिंह को द्वितीय विश्व युद्ध की 75 वीं वर्षगांठ के मौके पर रूस की सेना परेड में भारतीय सेना के दस्ते की भागीदारी का अनुरोध किया। रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन इस परेड में आने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पहले ही निमंत्रण दे चुके हैं। श्री सिंह ने आश्वस्त किया कि भारतीय सेना का दस्ता इस परेड में शामिल होगा।

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अमेरिका और रूस के पास भी नहीं है, भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने खोजी ऐसी तकनीक, कोई नहीं कर पाएगा इन पनडुब्बियों का मुकाबला

युद्ध की स्थिति में पनडुब्बियों को सुरक्षा कवच की तलाश कर रही भारतीय नौसेना बल्लियों उछल रही है क्योंकि रक्षा शोध एवं विकास संगठन ने एक ऐसी तकनीक विकसित कर ली है जिससे नौसेना अपनी डीजल पनडुब्बियों को परमाणु पनडुब्बी जैसी ताकत से लैस कर सकेगी और वे बिना आवाज किए पाकिस्तान के कराची समेत तमाम फौजी बंदरगाहों को नष्ट कर सकेंगी। चूंकि उनकी पानी की गहराई में उतरने की क्षमता बढ़ जाएगी इसलिए पाकिस्तान यहां तक कि चीन भी उन्हें कभी खोज नहीं पाएगा।

पिछले दिनों भारतीय डीजल पनडुब्बियों को परमाणु पनडुब्बियों जैसी क्षमता देने वाली प्रणाली का भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों ने सफल परीक्षण किया। इस तकनीक का नाम है, एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्सन तकनीक। इससे डीजल पनडुब्बी को काफी अधिक दिनों तक गहरे समुद्र में छिप कर रहने की क्षमता हासिल हो जाएगी।

रक्षा शोध एवं विकास संगठन (DRDO) के मुताबिक किसी डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन में एआईपी तकनीक वाली प्रणाली लगा देने से इसकी ताकत में कई गुना इजाफा होगा। भारतीय पनडुब्बियों के लिये फ्युल सेल आधारित एआईपी तकनीक के सफल जमीनी परीक्षण से डीआरडीओ ने अब तक कई लक्ष्य हासिल कर लिये हैं। इस तकनीक के सफल परीक्षण को नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने रक्षा शोध एवं विकास सचिव औऱ डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. सतीश रेड्डी की मौजूदगी में देखा। परीक्षण महाराष्ट्र के अम्बरनाथ में स्थित नेवल मटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी में किया गया। नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने इस बड़ी उपलब्धि के लिये डीआऱडीओ के वैज्ञानिकों की सराहना की। यह कार्यक्रम देश खासकर भारतीय नौसेना के लिये काफी अहमियत रखता है। डीआरडीओ चेयरमैन ने कहा कि नौसेना के मानकों के अनुरुप इस प्रणाली को जल्द से जल्द भारतीय पनडुब्बियों में तैनात करने की हर सम्भव कोशिश की जाएगी।

नौसेना के अनुसार फ्रांस के सहयोग से जो स्कारपीन डीजल पनडुब्बियां बनाई जा रही हैं, उनमें इस स्वदेशी एआईपी तकनीक वाली प्रणाली को तैनात किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मौजूदा डीजल पनडुब्बियों को 24 घंटे में एक बार सतह पर ऑक्सीजन के लिये आना होता है। इससे दुश्मन को पता चल जाता है कि कोई पनडुब्बी किसी खास इलाके में है। लेकिन एआईपी प्रणाली वाली पनडुब्बी समुद्र के भीतर एक सप्ताह से दस दिनों तक पानी के भीतर छिपी रह सकती है इससे डीजल पनडुब्बियों के पानी में रहने की क्षमता बढ़ जाएगी। परमाणु बिजली से चालित पनडुब्बियां दो महीने से अधिक वक्त तक समुद्र की गहराई में रह सकती हैं।

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रूस के कुरील द्वीप समूह में भूकंप

रूस के दक्षिणी कुरील द्वीप समूह में मंगलवार को भूकंप के झटके महसूस किये गये। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 4.5 मापी गयी।

रूस के भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग की शाखा के अनुसार कुरील द्वीपों पर स्थानीय समयानुसार आज तड़के करीब चार बजकर 18 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किये गये। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 4.5 मापी गयी। भूकंप का केन्द्र युजहनाे कुरिलिस्क से 57 किलोमीटर दूर जमीन की सतह से 27 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।

भूकंप से अभी तक किसी भी प्रकार के जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

गौरतलब है कि पांच नवंबर 1952 को कुरिलस्क में 9.0 तीव्रता वाले भीषण भूकंप के कारण आई सुनामी में 2300 से अधिक लोगों की मौत हो गयी थी।

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वायुसेना को इसलिए खोना पड़ा गजराज, कर लेती ये काम तो मेचुका में सुनाई दे जाती उसकी चिंघाड़

भारी सैनिक साजोसामान ढोने के लिए भारतीय वायुसेना के लिए रूस से खरीदे गए ए एन 32 विमानों के लापता होने की घटनाओं ने न सिर्फ वायुसेना को चिंतित कर दिया है, बल्कि विमान के निर्माता रूस के माथे पर भी सलवटें दिख रही हैं। भारत में तीन साल में दूसरे ए एन 32 {गजराज} के उड़ान के दौरान लापता होने का वाकया हकीकत में गम्भीर है क्योंकि ये थलसेना की त्वरित तैनाती का एकमात्र साधन है।

इधर ​वैमानिकी विशेषज्ञों ने गजराज के लापता होने को वायुसेना की लापरवाही मानते हुए यह दावा किया है कि उसे पुराने जमाने के नेवीगेशन सिस्टम के जरिए उड़ाया जा रहा है जबकि निर्माता कम्पनी इसके लिए नया नेवीगेशन सिस्टम विकसित कर चुकी है। माना जा रहा है कि बजट की कमी के चलते वायुसेना ने नए नेवीगेशन सिस्टम को गजराज में फिट नहीं किया है जिसका नतीजा तीन साल में दूसरे विमान के लापता होने के रूप में सामने है।

वायुसेना का एएन-32 परिवहन विमान असम के जोरहाट वायुसैनिक अड्डे से उड़ान भरने के बाद लापता हो गया था। विमान को चीन सीमा पर अरुणाचल प्रदेश के इलाके में मेचुका घाटी में मेचुका अडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड पर उतरना था। इस विमान के विमानचालक दल के आठ और पांच अन्य यात्री सवार थे। उड़ान भरने के 35 मिनट बाद विमान का जोरहाट हवाई अड्डे से सम्पर्क टूट गया था।
गौरतलब है कि 2016 में भी वायुसेना का ऐसा ही परिवहन विमान बंगाल की खाड़ी के ऊपर लापता हो गया था जिसका आज तक पता नहीं चल पाया है। विमान ने चेन्नई के एक वायुसैनिक अड्डे से उडान भरी थी और अंडमान निकोबार के वायुसैनिक अड्डे की ओर जा रहा था। निराश होकर वायुसेना ने सितम्बर, 2016 में इसकी खोज का काम बंद कर दिया था।

इधर लापता एएन-32 के खोज अभियान में नौसेना का टोही विमान भी शामिल हो गया है। चूंकि इस विमान का कोई पता नहीं चला है इसलिये माना जा रहा है कि लापता विमान कहीं दुर्धटनाग्रस्त हो कर घने जंगलों में गिर गया है। लापता विमान के मलवे को खोजने के लिये नौसेना ने टोही विमान पी 8 आई को तमिलनाडु के अरक्कोणम से दोपहर बाद एक बजे अरुणाचल प्रदेश के इलाके में भेजा। इसके अलावा वायुसेना के कई हेलीकाप्टर अरुणाचल प्रदेश और असम के इलाके में उड़ाया जा रहा है।

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ऐसा क्या हुआ की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हुए नाराज

वाशिंगटन । क्रीमिया द्वीप के पास यूक्रेन के तीन नौसैना की जहाजाें पर रूस की आेर से कब्जा किये जाने के अगले दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि माॅस्को और कीव के बीच जो कुछ भी हो रहा है वह उसे पसंद नहीं करते हैं।

 Donald Trump

ट्रंप ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, “जो कुछ भी हो रहा है वह हमें पसंद नहीं है और उम्मीद है कि यह ठीक हो जाएगा।” उन्होंने कहा कि यूरोपीय नेता स्थिति पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा,“वे (यूरोपीय नेता) रोमांचित नहीं हैं। हम सभी एक साथ काम कर रहे हैं।”

रूस ने सोमवार को पश्चिमी देशों की ओर से कब्जे में लिये गये यूक्रेनी नौसेना के जहाजों और उनके कर्मचारियों को छोड़ने के लिए की गयी अपील को नजर अंदाज कर दिया था। रूस ने यूक्रेन पर अपने पश्चिमी सहयोगियों के साथ मिलकर साजिश रचने का भी आरोप लगाया है।

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रूस ने यूक्रेन के तीन जहाजों पर किया कब्जा

माॅस्को। (स्पूतनिक) रूस ने यूक्रेन की नौसेना के तीन जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया है। रूस का आरोप है कि यूक्रेन के जहाजों ने अवैध रूप से उसकी जल सीमा में प्रवेश किया था, जिसके बाद उसने यह कार्रवाई की।

 

 Russia

रूस की फेडरल सुरक्षा सेवा (एफएसबी) ने रविवार को इस बात की जानकारी दी।एफएसबी के मुताबिक यूक्रेन की नौसेना के बर्दयास्क, निकोपोल और यानी कापू नामक जहाजों ने रविवार को काला सागर में गैरकानूनी रूप से रूस की जल सीमा में प्रवेश किया जिसके बाद इन तीनों जहाजों को हिरासत में ले लिया गया।

इस घटना से दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ गया है।इस घटना के बाद यूक्रेन में मार्शल लॉ लगाए जाने की तैयारी की जा रही है।यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा परिषद (एनएसडीसी) के सचिव ओलेक्जेंडर तुर्चनोव ने कहा कि इस मामले को लेकर जल्द ही एक आपात बैठक बुलाई जायेगी।

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अमेरिका को रूस के साथ शिखर बैठक से खास उम्मीद नहीं- जोन बोलटोन

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जोन बोलटोन ने कहा अमेरिका और रूस के साथ होने वाली शिखर बैठक से उन्हें कोई खास उम्मीद नहीं हैराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हेलसिंकी में उनकी मुलाकात होगी। जनवरी 2017 में ट्रम्प के पद संभालने के बाद से उनकी यह पहली बैठक होगी।

America

 

अमरीकी टीवी नेटवर्क सीबीएस से बातचीत में ट्रंप ने कहा है रूसी राष्ट्रपति से मुलाक़ात से कुछ बुरा नहीं होगा और हो सकता है कि शायद कुछ अच्छे परिणाम निकले, पर इस मुलाक़ात से मुझे बड़ी उम्मीदें नहीं हैं।रूस के अमेरिकी राजदूत जॉन हंट्समैन ने “फॉक्स न्यूज संडे’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि दोनों पक्ष की बैठक से ज्यादा उम्मीद न ही करें।

यह भी देखिये-वर्दी का रौब दिखाकर करते थे ऐसा काम पुलिस वाले भी हैरान

हंट्समैन ने कहा “यह तथ्य है कि इस तरह की वार्तालाप के लिए हमारे देश के प्रमुख यहां एक साथ मिल रहे हैं जो कि एक बड़ी बात है।” शिखर सम्मेलन बैठक में दोनों नेताओं की अन्य चीजों, परमाणु प्रसार और सीरिया में संघर्ष पर चर्चा करने की उम्मीद है।

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ट्रम्प ने कहा कि वह वर्ष 2016 के अमरीकी चुनाव के दौरान कथित रूप से हैकिंग में शामिल 12 रूसी लोगों की बात उठायेंगे। लेकिन पुतिन ने बार-बार इस बात से इंकार करते रहे हैं। हालांकि ट्रम्प ने उनके प्रत्यर्पण के बारे में अभी कुछ नहीं सोचा है।सीबीएस साक्षात्कार में ट्रम्प ने ओबामा प्रशासन और डेमोक्रेटिक पार्टी पर हैकिंग के लिए जिम्मेदार ठहराया, रूस को नहीं।बोल्टन ने रविवार को कहा कि उन्हें यह विश्वास नहीं हो रहा है कि पुतिन को रूसी खुफिया अधिकारियों की कथित भूमिका के प्रयासों के बारे में पता नहीं है। जबकि रूसी खुफिया अधिकारियों की इसमें कथित भूमिका रही है।

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