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लाखों की अफीम खा जाते हैं राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के अफीमची तोते

भारत के अफीमची तोते सरकार के बड़ी मुसीबत बन गए हैं। उन्हें अफीम खाने की ऐसी लत लग गई है कि वे डोडे में लगाए गए चीरे से रिसने वाले अफीम के दूध को चूंस जाते हैं। कई तोते तो इतने बड़े अफीमची हो चुके हैं कि वे पूरे डोडे को ही तोड़कर ले जाते हैं और आराम से पेड़ों की डालियों पर बैठकर खाते हैं।

तोतों को ऐसे पड़ी अफीम की लत 

मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में अफीम की खेती करने वाले किसानों की शिकायत है कि अफीम के आदी तोते, बारी बारी से उनकी फसल को नुक़सान पहुंचाते हैं। उन्हें भगाने के बहुत प्रयास किए जाते हैं। तोते पोस्त की फसल के अलावा अंदर अफीम तक पहुंचने के लिए पोस्त के बीज की फली को भी उधेड़ डालते हैं। पोस्त की एक फली से 30-35 ग्राम अफीम निकलती है। जिसे कटाई के सीज़न में तोतों के बड़े बड़े समूह तबाह कर देते हैं। उनमें के कुछ तो फली को ही लेकर उड़ जाते हैं। इन तोतों को अफीम की लत पड़ गई है। ये दिन में 30-40 बार खेतों पर वापस आते हैं। फलियों को पकाने के लिए लगाए गए चीरे से जब मॉरफीन रिसने लगता है तो तोते उस मॉरफीन को चूस लेते हैं।

घट रहा है अफीम का वजन

इधर हर साल अप्रैल में नार्कोटिक्स विभाग किसानों से अफीम ख़रीदता है, लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण एक महीने से अधिक समय से अफीम किसानों के घरों में पड़ी है। किसानों को चिंता है कि अफीम को लम्बे समय तक घरों या गोदामों में रखने से उसकी क्वालिटी ख़राब हो सकती है। जिससे उसका नेट वज़न घट सकता है।

…..तो रद्द हो जाएगा लाइसेंस

लाइसेंसिंग पॉलिसी के अनुसार अफीम उत्पाद का नेट वज़न अगर लाइसेंस देते समय सरकार द्वारा तय किए गए प्रति हेक्टेयर मानक से कम हो तो किसान का अफीम की खेती का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। पॉलिसी में कहा गया है कि केवल वही किसान लाइसेंस के पात्र होंगे जो प्रति हेक्टेयर कम से कम 53 किलोग्राम अफीम उत्पाद मध्यप्रदेश और राजस्थान में और कम से कम 45 किलोग्राम उत्तर प्रदेश में बेंचेंगे। पोस्त उगाने वाले किसानों को लाइसेंस देने के लिए सरकार ने उपज की यही न्यूनतम सीमा तय की है।