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प्रवासी मजदूरों पर BJP and Congress कर रही हैं राजनीति :मायावती

नयी दिल्ली । बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने प्रवासी मजदूरों को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुये रविवार को कहा कि मजदूरों को उचित मजदूरी दिलाने के प्रयास नहीं किये गये जिसके उन्हें परेशानी झेलनी पडती है.मायावती ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा के लिए भाजपा की केंद्र सरकार और कांग्रेस दोनों जिम्मेदार हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मजदूरों के मुद्दे पर दोनों ही पार्टियां घिनौनी राजनीति कर रही हैं।

बसपा नेता ने कहा कि भाजपा सरकार और कांग्रेस ने मजदूरों की लगातार अनदेखी की है जिसके कारण उन्हें रोजगार के लिए अलग-अलग शहरों में जाना पड़ा और अब लॉकडाउन के कारण वे भूखे-प्यासे सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर हैं . उन्होंने कहा कि मजदूरों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। अभी तक जहां मजदूर काम कर रहे थे उनसे काम ज्यादा लिया जाता था और वेतन कम दिया जाता था। उन्होंने कहा, ” बसपा ने हमेशा ही मजदूरों के भले के लिए काम किया। हम उन्हें बेरोजगारी भत्ता नहीं रोजगार देते थे.”

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क्या वाकई भाजपा से अंदरखाने मिले हुए हैं अखिलेश, मायावती, जानिए उत्तरप्रदेश की राजनीति का असली सच

उत्तर प्रदेेश में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ मुख्य विपक्षी घोषित करने के लिये कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) -बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन के बीच मौखिक जंग तेज हो गयी है। दोनों एक दूसरे पर भारतीय जनता पार्टी के करीबी और भगवा ब्रिगेड को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा रहे है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बाराबंकी में एक चुनावी जनसभा में भाजपा के साथ सपा-बसपा गठबंधन पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा “ अखिलेश और मायावती का कंट्रोल मोदी के पास है। मेरी कोई हिस्ट्री नही है, इसलिये मैं मोदी से नही डरता हूूं, मोदी मुझसे डरते है। कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को तगड़ा झटका लगने वाला है। कांग्रेस ने कई सीटों पर भाजपा की हार तय करने के लिये वोट काटने वाले प्रत्याशी खड़े किये है। कांग्रेस गठबंधन के वोटों काे नही काट रही है। हमारे उम्मीदवार कड़ी टक्कर दे रहे है। कांग्रेस की इस तरह की टिप्पणियों ने गठबंधन को परेशानी में डाल दिया है, विशेष रूप से सपा कांग्रेस के खिलाफ अब और अधिक आक्रामक हो गयी है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा “कोई भी हमें नियंत्रित नहीं करता है। हम राजनीतिक दल हैं। उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा और राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन है। गठबंधन का मुकाबला सत्तारूढ़ भाजपा से है। हमारा गठबंधन भाजपा की गलत नीतियों को रोकने सक्षम है। सपा अध्यक्ष ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “भाजपा ने कांग्रेस की ही तरह विरोधी दल के नेताओं के खिलाफ ईडी, केंद्रीय जांच ब्यूरो और अन्य एजेंसियों का दुरुपयोग करना सीखा है। भाजपा और कांग्रेस के बीच कोई अंतर नहीं है। कांग्रेस लाभ उठाना चाहती है। भाजपा केंद्रीय एजेंसियों को विपक्षी नेताओं को डराने मेें लगा रही है।

भाजपा के वोट बैंक को सेंध लगाने के लिये कमजोर उम्मीदवार उतारने के कांग्रेस के दावे को खारिज करते हुये यादव ने कहा “मुझे विश्वास नहीं है कि कांग्रेस ने कहीं भी कमजोर उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। कोई भी पार्टी ऐसा नहीं करती है। लोग उनके साथ नहीं हैं, इसलिए वे बहाने बना रहे हैं। यादव ने कहा कि लोकसभा चुनावों में वह संसद में सपा के सांसदों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं। मैं उन लोगों में शामिल होना चाहता हूं जो नया प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं। मैं चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश में अगली सरकार बनाने में योगदान दे।

उन्होंने कहा कि कई राज्यों के गठबंधन के पास विकल्प हैं। भाजपा के पास कोई अन्य नेता नहीं है। हमारा गठबंधन भारत को एक नया प्रधानमंत्री देना चाहता है। मेरी पार्टी प्रधानमंत्री पद के लिये अन्तिम चुनाव परिणाम आने के बाद फैसला करेंगी। हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार कर दिया कि उनके पिता मुलायम सिंह यादव प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैं। उन्होंने कहा “हमारा गठबंधन भारत को एक नया प्रधानमंत्री देना चाहता है। पार्टी अन्तिम परिणाम आने के बाद ही कोई फैसला लेगी। यदि नेताजी(मुलायम सिंह यादव) को यह सम्मान मिलेगा तो उन्हें खुशी होगी लेकिन वो प्रधानमंत्री की दौड़ में शामिल नही है।
वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ बर्खास्त जवान के नामांकन की अस्वीकृति पर टिप्पणी करते हुए, यादव ने कहा, “ जब वे राष्ट्रवाद के नाम पर वोट मांग रहे हैं, तो उन्हें एक सैनिक का सामना करना चाहिए था। उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था क्योंकि उसने भोजन के बारे में शिकायत की थी।

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मायावती इसलिए देखती है प्रधानमंत्री बनने का सपना, 40 सांसदों के दम पर ये बन चुका है पीएम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को उत्तरप्रदेश में एक चुनावी सभा में तंज किया कि चालीस सीटों पर लड़ने वाले प्रधानमंत्री बनने का सपना देखते हैं। प्रधानमंत्री की विपक्षी नेताओं की खिल्ली उड़ाने की आदत को दरकिनार करते हुए हम आपको बताते हैं कि बसपा प्रमुख मायावती प्रधानमंत्री बनने का सपना क्यों देखती है! यह जानने के लिए हमें 9ं0 के दशक में जाना होगा जब भारत को 64 सांसदों के रूप में एक प्रधानमंत्री मिला था।

बात 1989 की है। वीपी सिंह ने चालाकी के साथ देवीलाल को इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री की कुर्सी हथिया ली थी। अध्यक्ष जी के नाम से मशहूर जनता दल के नेता चन्द्रशेखर ने उन्हें प्रधानमंत्री स्वीकार नहीं किया। इस बीच देवीलाल और वीपी सिंह में तनातनी हुई तो गद्दार मानसिकता के वीपी सिंह ने उन्हें भी माफ नहीं किया और मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू करके उन्हें निष्प्रभावी बनाने का दांव चला। गुस्से से पागल देवीलाल ने वीपी सिंह को हटाने के लिए जनता दल को तोड़ दिया और कांग्रेस ने चुनावों से बचने के लिए 64 सांसदों वाले संसदीय दल के चन्द्रशेखर को बाहर से समर्थन देकर प्रधानमंत्री बनवा दिया।

ये अलग बात है कि उनकी सरकार कांग्रेस ने अधिक दिन तक चलने नहीं दी और देश को 1991 में मध्यावधि चुनाव में जाना पड़ा। उसके बाद भी 1996 में जब कांग्रेस हार गई और अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार गिर गई तो फिर छोटे से संसदीय दल के नेता एच डी देवेगौडा प्रधानमंत्री बन गए। उनके बाद आई के गुजराल भी प्रधानमंत्री बने।

इन उदाहरणों को ध्यान में रखते हुए ही मायावती यह मानकर प्रधानमंत्री बनने का सपना देखती हैं कि जब चन्द्रशेखर प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो वे अपने तीस—चालीस सांसदों के दम पर प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकती। वैसे मायावती का यह सपना शेखचिल्ली जैसा है क्योंकि अब कांग्रेस उन्हें बाहर से समर्थन नहीं देगी और उन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मुकाबला करना है।

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इन तीन नेताओं के सपने में आई ईवीएम, धड़ाधड़ वोट पड़ते देख मंच पर ही उछलने लगे

चुनावी रैलियों में जुटने वाली भीड़ जीत का आभास देती है, लेकिन हकीकत बिल्कुल विपरीत होती है। उत्तरप्रदेश में कई बार देखा जा चुका है कि मायावती की रैलियों में अपार भीड़ जुटती है, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी शून्य पर और 2017 में शर्मनाक सदस्य संख्या पर आ टिकी। इसी नजरिए से राजनीतिक पंडित रविवार को देवबंद में जुटी भीड़ का आंकलन कर रहे है कि क्या वाकई पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा और रालोद के गठबंधन के हाथों भाजपा हारने जा रही है! भीड़ तो यही कह रही है, लेकिन असलियत का पता 23 को मई को चलेगा। 

 

एक राजनीतिक पंडित तंज के अंदाज में कहते हैं कि रैलियों की भीड़ नेताओं को खुली आंखों से ये सपना दिखाती है कि अब उसकी जीत में कोई बाधा नहीं है, लेकिन पुराने परिणाम उन्हें सतर्क करते हैं। इसी ऊहापोह में वे यह कल्पना करने लगते हैं कि काश ईवीएम रैली स्थल पर आ जाती तो आज ही इस भीड़ से वोट डलवा लिया जाता।
भाजपा को रोकने के लिए बने गठबंधन के नेताओं मायावती, अखिलेश यादव और अजित सिंह भी रविवार को यह कल्पना करने में व्यस्त होंगे कि अब ईवीएम में उनके प्रत्याशियों के लिए इतने वोट पड़ेंगे कि उन्हें भाजपा को हराने से कोई नहीं रोक सकता। वैसे गठबंधन की असली परीक्षा 11 अप्रैल से शुरू होनी है। गठबंधन पूरे उत्तर प्रदेश में ऐसी 11 रैली और करेगा। 

 

भीड़ देखकर मुदित मायावती ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तंज किया कि अपार भीड़ की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिलेगी तो वे गठबंधन से घबरा कर पगला जाएंगे। सहयोगी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश भी पीछे नहीं रहे और कहा कि ये महापरिवर्तन का गठबंधन है। 2014 के चुनाव में बुरी तरह मसल दिए गए राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष अजि​त सिंह भी गरजे और कहा कि संख्या और जोश ने तय कर दिया है कि भाजपा का उत्तर प्रदेश से सफ़ाया हो गया है। 

 

जोश में अजित ने आगे बढ़कर सीधे नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा और उनके फकीर वाले पुराने बयान की याद दिलाते हुए कहा कि दिन में तीन बार सूट बदलते हैं, भगवान ऐसा फ़क़ीर सबको बना दे। जोश में सिर्फ़ नेता ही नहीं समर्थक भी थे। रैली के बाद बीएसपी के एक कार्यकर्ता ने कहा, जो भीड़ आई है, वह अपनी मज़दूरी छोड़कर आई है। ये सभी मजदूर हैं और अपना पैसा खर्च करके आए हैं।

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मायावती, अखिलेश का दावा, भीड़ देखेंगे तो घबराकर गाएंगे सराब, सराब, सराब

उत्तरप्रदेश में चुनावी गठबंधन मेें शामिल सपा, बसपा के नेताओं ने रविवार को सहारनपुर कके देवबंद में भाजपा पर जमकर हमले किए। नेताओं ने कांग्रेस को भी नहीं बख्शा। बसपा अध्यक्ष मायावती ने जहां प्रधानमंत्री के लिए हल्के शब्द का प्रयोग किया तो सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें सत्ता के नशे में चूर बताया। कांग्रेस पर भी दोनों नेताओं ने निशाना साधा और उसकी न्याय योजना की खिल्ली उड़ाई। 

 

मायावती कहा कि महागठबंधन की महारैली में उमड़ी भीड़ की जानकारी जब पीएम मोदी को जानकारी मिलेगी तो वह घबराकर सराब-सराब करने लगेंगे, अखिलेश ने कहा कि सराब बताने वाले लोग खुद सत्ता के नशे में चूर हैं। बीजेपी की रैलियों पर कटाक्ष करते हुए अखिलेश ने कहा कि यहां ऐसे भी नेता आए होंगे जो नफरत के अलावा कुछ नहीं बोले होंगे। वे पहले हमारे बीच में चायवाला बनकर आ गए और हम लोगों ने अच्छे दिन, 15 लाख रुपये और करोड़ों नौकरियों का भरोसा कर लिया। अब चौकीदार बनकर आए हैं ताकि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक चौकीदार की चौकी छीन सकें। 

 

ये मिलावट का नहीं महापरिवर्तन का गठबंधन है। देश को नई सरकार देने का, नया प्रधानमंत्री देने का गठबंधन है। चौधरी चरण सिंह की विरासत को बचाने का गठबंधन है। मोदी के कुंभ मेले के दौरान एक सफाईकर्मी के पैर धोने पर तंज कसते हुए पूर्व सीएम ने कहा, टीवी पर पैर धोए जा रहे थे और जब पीछे मुड़कर देखा तो दलित भाइयों की नौकरी धो डाली। अखिलेश से पहले मायावती ने कहा कि अगर चुनाव या ईवीएम में गड़बड़ी नहीं की गई तो गठबंधन की जीत होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना तैयारी के नोटबंदी और जीएसटी लागू करने से बेरोजगारी को बढ़ावा मिला। बीजेपी के शासन में आरक्षण व्‍यवस्‍था कमजोर हुई है। बीजेपी पूंजीपतियों को धनवान बनाने में जुटी रही। मोदी सरकार सीबीआई और ईडी का इस्‍तेमाल अपने विरोधियों को कमजोर करने के लिए कर रही है। 

 

मायावती ने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे कांग्रेस की बजाय गठबंधन को वोट दें। गठबंधन ही बीजेपी को टक्‍कर दे सकता है। कांग्रेस ने सहारनपुर में इमरान मसूद को टिकट देकर मुस्लिम वोटों को बांटने की कोशिश की है। बीएसपी नेता ने कहा कि बीजेपी को यूपी में हार का मुंह दिखाना है तो मुस्लिम समाज को गठबंधन के उम्‍मीदवारों को वोट देना होगा। मायावती ने कहा कि अपनी गलत नीतीयों की वजह से कांग्रेस सत्‍ता से बाहर हुई है। कांग्रेस की न्‍याय योजना से भी गरीबों को कुछ भी फायदा नहीं होगा। गरीबी हटाओ की नाटकबाजी राहुल गांधी की दादी ने भी की थी। उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस को गरीबों की याद चुनाव के ही समय क्‍यों आती है।

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मायावती का किरदार निभायेगी यह मशहूर अभिनेत्री

मुंबई| बॉलीवुड में अपने संजीदा अभिनय के लिये मशहूर विद्या बालन सिल्वर स्क्रीन पर बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती का किरदार निभाती नजर आ सकती है।विद्या बालन को बायोपिक का क्वीन कहा जाता है।उन्होंने अब तक जितनी फिल्मों में काम किया है उससे अधिक तो उनकी बायोपिक फिल्मों को लेकर चर्चा होती रही है, जिसमें इंदिरा गांधी तक का नाम शामिल है।

चर्चा है कि विद्या, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती के जीवन पर बनने वाली फिल्म में लीड रोल में नज़र आ सकती हैं।कहा जा रहा है कि फिल्म निर्देशक सुभाष कपूर मायावती की जीवनी पर एक फिल्म बनाने का विचार कर रहे हैं।जिसमें वह बतौर अभिनेत्री विद्या बालन को बतौर अभिनेत्री लेने की सोच रहे हैं।

निर्देशक सुभाष कपूर इसके पहले टी सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की जीवनी पर बन रही फिल्म मुग़ल का निर्देशन करने वाले थे लेकिन मी टू अभियान में उनका नाम आने के बाद वह फिल्म उनसे छीन ली गई।

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अन्तरिम बजट जमीनी हकीकत और वास्तविकता से दूर जुमलेबाजी वाला : मायावती

लखनऊ | बहुजन समाज पार्टी(बसपा)अध्यक्ष मायावती ने केन्द्र की भारतीय जनता पाटी(भाजपा) सरकार द्वारा शुक्रवार को लोकसभा में पेश अन्तरिम बजट को जमीनी हकीकत एवं वास्तविकता दूर जुमलेबाजी वाला बताये हुये कहा कि देश का धन केवल कुछ मुट्ठीभर धन्नासेठों के हाथों में सिमट गया है।मायावती ने शुक्रवार को यहां जारी बयान में कहा कि भाजपा के पिछले पाँच वर्षों के कार्यकाल में देश में आर्थिक समानता की खाई बढ़ गयी है।

देश में धन और विकास केवल कुछ मुट्ठीभर धन्नासेठों के हाथों में सिमट गया है।यह बजट हकीकत से दूर सिर्फ जुमलेबाजी वाला है।उन्होंने कहा कि भाजपा लम्बे-चौड़े बयानों और जुमलेबाजी से देश की तकदीर नहीं बदल सकती है।इस बजट से देश में लम्बे समय से जारी जर्बदस्त मंहगाई, गरीबी, अशिक्षा एवं बेरोजगारी गम्भीर समस्या समाप्त नही हो सकती है।इसके लिये सही नियत एवं समर्पित दृढ़ इच्छाशक्ति की जरुरत होती है।
केन्द्र में आसीन सरकारों में अब तक अभाव रहा है।

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भाजपा शासन में कानून के रखवाले ही हो रहे हैं अराजकता का शिकार: मायावती

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी(बसपा) अध्यक्ष मायावती ने कानून व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुये कहा कि भाजपा शासन में कानून के रखवाले ही अब अराजकता का शिकार हो रहे हैं।

BSP

मायावती ने मंगलवार को यहां जारी बयान में कहा कि देश की राजधानी दिल्ली के नजदीक पश्चिमी उत्तर प्रदेशके बुलन्दशहर ज़िले में हुई हिंसा के लिये भाजपा सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि हर प्रकार की अराजकता को संरक्षण देने का ही परिणाम है कि विकास के लिये तरस रहे देश के सबसे बड़े राज्य में भाजपा का जंगलराज कायम है। क़ानून के रखवाले भी बलि चढ़ रहे हैं। यह बड़ी चिन्ता की बात है।

बुलंदशहर में हिंसक घटना का शिकार हुये पुलिस अधिकारी तथा एक निर्दोष युवक की मौत पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुये मायावती ने कहा कि अब अराजगता के राज को खत्म करने को समय आ गया है। देश में कानून का राज स्थापित करने के लिये पूरी ईमानदारी से प्रयास करना चाहिये ताकि संविधान तथा लोकतंत्र काे भीड़तंत्र की बलि चढ़ने से रोका जा सके।

राजधानी लखनऊ में भाजपा के एक और युवा नेता प्रत्युष मणि त्रिपाठी की हत्या का जिक्र करते हुये मायावती ने कहा कि भाजपा की बढ़ती हुई भींड़ तंत्र की उग्र एवं हिंसक स्थिति का शिकार अब स्वयं इनके लोग ही हाेने लगे है। पहले दलितों, पिछड़ाें, मुस्लिम तथा अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों काे अपनी हिंसा व उग्रता का शिकार बनाने वाले ये अराजक लोग अब अपनी आदतों से मजबूर लगते हैं। ऐसी स्थिति में भी भाजपा की सरकारें सख्त कदम उठाने का अपना कर्तव्य निभाने में पूरी तरह से विफल साबित हाे रही हैं।

उन्होंने कहा कि बुलन्दशहर की घटना में मृतकाें के परिवाराें काे केवल समुचित अनुग्रह राशि देना ही उत्तर प्रदेश भाजपा सरकार के लिये काफी नहीं होना चाहिये बल्कि इस हिंसा के लिये सभी दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाना भी सुनिश्चित किया जाना चाहिये ताकि देश को एेसा महसूस हाे कि प्रदेश में कोई सरकार भी है।

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भाजपा अपनी विफलता छिपाने के लिये उठा रही है राममंदिर का मुद्दा : मायावती

नयी दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को आरोप लगाया कि केंद्र और राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें अपने वादे पूरे करने में विफल रही हैं और इसे छिपाने के लिए राम मंदिर का मुद्दा उठाया जा रहा है।

 Mayawati

मायावती ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भाजपा की सरकार केंद्र में पांच साल पूरे करने वाली है लेकिन उसने पचास प्रतिशत वादे भी पूरे नहीं किये हैं इसलिए आम जनता का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा और उसके सहयोगी संगठन राम मंदिर का मुद्दा उठा रहे हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा और मोदी वर्ष 2014 में किए वादों को पूरा करने में विफल रहे हैं। मोदी जानते यह हैं और उन्हें लग रहा है कि वह सत्ता में वापस नहीं आएंगे।

एक सवाल के जवाब में मायावती ने कहा कि शिवसेना और विश्व हिंदू परिषद द्वारा अयोध्या में किया जा रहा आयोजन एक साजिश का हिस्सा है। असफलताओं से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए राम मंदिर मुद्दा उठाया जा रहा है। अगर उनकी मंशा अच्छी होती तो वे पांच साल तक इंतजार नहीं करते।

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पटेल की प्रतिमा का नाम अंग्रेजी में होने पर मायावती ने उठाये सवाल

नयी दिल्ली बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने सरदार वल्लभभाई पटेल की गुजरात में अरब सागर के तट पर स्थापित प्रतिमा का नाम ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ अंग्रेजी में रखने पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह केंद्र सरकार की मंशा को दर्शाता है

 

मायावती ने बुधवार को यहां सरदार पटेल की जयंती पर उनको श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा उनके सहयोगियों को बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर सहित दलितों और अन्य पिछड़े वर्गों में जन्में महान सन्तों, गुरुओं तथा महापुरुषों के आदर -सम्मान में बसपा सरकार द्वारा निर्मित भव्य स्थलों, स्मारकों और पार्कों आदि को फिजूलखर्ची बताकर इसकी आलोचना करने के लिये क्षमा मांगनी चाहिए।

मायावती ने कहा, “सरदार पटेल अपनी बोल-चाल, रहन-सहन और खान-पान में पूर्ण रुप से भारतीयता और भारतीय संस्कृति की एक मिसाल थे, लेकिन उनकी भव्य प्रतिमा का नामकरण हिन्दी एवं भारतीय संस्कृति के नज़दीक होने के बजाय ‘स्टैच्यू आफ यूनिटी’ जैसा अंग्रेजी नाम रखना कितनी राजनीति है और भाजपा की उनमें कितनी श्रद्धा है, यह देश की जनता अच्छी तरह से समझ रही है।