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मधुमेह रोगियों को पैर और तलवे की झनझनाहट से राहत दिलाता है बेर

Plum relieves diabetics from tingling of feet: बेर के पेड़ शुष्क और अर्द्धशुष्क इलाकों में पाए जाते हैं। बेर का फल हरे रंग का होता है और पकने पर लाल हो जाता है। बेर पकने का समय दिसंबर से मार्च तक होता है। यह मुख्यतः शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है। इसे तमिल में नरी एलान्धई और हिंदी में झरबेरी कहा जाता है। बेर की दोनों प्रजातियां दक्षिण एशियाई देशों भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल-के साथ ही अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी पाई जाती हैं। भारत में यह हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में मिलते हैं। बेर का पेड़ मंदिरों में लगाए जाने वाले महत्वपूर्ण पेड़ों में से एक है। बेर का फल भगवान शिव को अर्पण किया जाता है और महाशिवरात्रि के समय इसे बेल के समान ही महत्त्व दिया जाता है।

 

बेर में अनेक औषधीय तत्व

Plum relieves diabetics from tingling of feet: यह फल विटामिन और खनिजों से लबरेज है। इसमें विटामिन के, कैल्शियम, मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। बेर में कुछ जैविक अम्ल भी पाए जाते हैं, जैसे-सक्सीनिक और टार्टरिक अम्ल। बेर में अनेक प्रकार के औषधीय तत्व पाए जाते हैं, जिसकी पुष्टि वैज्ञानिक अनुसंधान भी करते हैं। एक शोध इसके कैंसर-रोधी गुणों की पुष्टि करता है। बेर के गूदे का सेवन मधुमेह की वजह से होने वाले तंत्रिका क्षरण से बचाव करता है। इस बीमारी में पैर और तलवे की धमनियों में तेज दर्द होता है। बेर के इस गुण की पुष्टि इंडियन जर्नल ऑफ बेसिक मेडिकल साइंसेस में प्रकाशित शोध में की गई है।

 

चेचक और खसरे के उपचार में लाभकारी

Plum relieves diabetics from tingling of feet: बेर के पेड़ की छाल और पत्ते का इस्तेमाल चेचक और खसरे के उपचार में लाभकारी है। एक अध्ययन के अनुसार, बांग्लादेश के पारंपरिक वैद्य बेर के पत्तों और छाल को उबालकर उस पानी को पीड़ित व्यक्तियों पर छिड़कते हैं। तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले के पारंपरिक वैद्य भी बेर के पत्तों और छाल को उबालकर और उस पानी को नहाने के पानी में मिलाकर स्नान करने की सलाह देते हैं। इससे बदन दर्द में आराम मिलता है।

दस्त और हैजा के उपचार में सक्षम

Plum relieves diabetics from tingling of feet: एक शोध के अनुसार, इस फल को सुखाकर और पीसकर भी खाया जाता है। बेर के पेड़ की कोंपलों को छांव में सुखाकर इसका पाउडर बनाया जाता है। इस पाउडर को पानी में घोलकर बने मिश्रण का उपयोग विटामिन सी कमी से होने वाले रोग स्कर्वी के उपचार के लिए किया जाता है। एक अध्ययन बताता है कि बेर के पेड़ की छाल का पाउडर घाव के उपचार में कारगर है। बेर के पेड़ की जड़ से बना घोल दस्त और हैजा के उपचार में सक्षम है।

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शरीर की शुगर को खा जाती है चमत्कारी चिरौंजी, खांसी में भी असरकारक

चिरौंजी मतलब चमत्कार। खाने में स्वादिष्ट आकार में छोटा सा चिरौंजी नामक सूखा मेवा आयुर्वेद की कई दवाओं का आधार होने के साथ ही स्वयं भी छोटे—मोटे वैद्य से कम नहीं है। इसके सेवन से मधुमेह के उन रोगियों का दवाओं से पीछा छूट सकता है जिन्हें खा—खाकर वे थक गए हैं। बिल्कुल ये हम नहीं वर्ष 2010 में इंडियन जर्नल ऑफ ट्रेडिशनल नॉलेज में प्रकाशित एक शोध कह रहा है कि चिरौंजी का इस्तेमाल खांसी के उपचार के लिए और शक्तिवर्धक के तौर पर किया जाता है। चिरौंजी के तेल का उपयोग चर्मरोग के इलाज में भी कारगर है। वर्ष 2013 में ट्रॉपिकल जर्नल ऑफ फार्मास्यूटिकल रिसर्च में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया कि चिरौंजी का नियमित सेवन मधुमेह के रोगियों के रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित रखता है। एनल्स ऑफ बायोलॉजिकल रिसर्च नामक जर्नल में वर्ष 2011 में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, चिरौंजी के फल और छाल से बना लेप सर्पदंश के उपचार में कारगर है। फार्माकॉलॉजी ऑनलाइन जर्नल में वर्ष 2010 में प्रकाशित शोध ने भी चिरौंजी की जड़ से बनी दवा से अतिसार के उपचार की पुष्टि की थी। चिरौंजी खांसी, अतिसार और मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद है। चिरौंजी का इस्तेमाल मेवे की तरह होता है और स्थानीय बाजारों में ऊंची कीमत पर इसे बेचा जाता है।

चिरौंजी के पेड़ मुख्यतः ऊष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के शुष्क इलाकों में पाए जाते हैं। लेकिन उन्हें समुद्र तल से 1,200 मीटर की ऊंचाई तक वाले क्षेत्रों में भी उगाया जा सकता हैं। सदाबहार श्रेणी के चिरौंजी के पेड़ जंगलों में 18 मीटर तक ऊंचे हो सकते हैं। भारत में इसके पेड़ बागानों में भी उगाए जाते हैं।

गाय के दूध में पीसकर पीते हैं आदिवासी

चिरौंजी का वानस्पतिक नाम बुकानानिया लांजन है और अंग्रेजी में ‘आमंडेट’ के नाम से जाना जाता है। चिरौंजी भारत में झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के वाराणसी व मिर्जापुर जिलों में पाया जाता है।
चिरौंजी का फल पियार 4-5 महीने में पकता है और इसे अप्रैल-मई के महीने में तोड़ा जाता है। तोड़ने के बाद हरे रंग का फल काला पड़ जाता है। चिरौंजी निकालने के लिए इस फल को रात भर पानी में डालकर रखा जाता है और इसके बाद जूट के बोरे से रगड़-रगड़कर बीज अलग कर लिया जाता है। इसके बाद इसे पानी से अच्छी तरह से धोकर धूप में सुखाया जाता है।
झारखंड और छत्तीसगढ़ के आदिवासी चिरौंजी का इस्तेमाल घाव के उपचार के लिए करते हैं। चिरौंजी इन आदिवासियों के जीवनयापन का एक बड़ा साधन भी है। उत्तर प्रदेश सोनभद्र के आदिवासी समुदाय के लोग चिरौंजी के पेड़ से गोंद और लाख इकट्ठा करके बाजार में बेचकर आय कमाते हैं। आंध्र प्रदेश के कुछ आदिवासी चिरौंजी के गोंद को गाय के दूध में मिलाकर पीते हैं। उनका मानना है कि इससे गठिया का दर्द दूर होता है। पिछले कुछ दशकों से चिरौंजी की मांग शहरी बाजारों में बढ़ने की वजह से इसका बड़ी मात्रा में संग्रह और पेड़ों की गलत तरीके से छंटाई की वजह से जंगलों में चिरौंजी के पेड़ तेजी से कम हुए हैं।

त्रिदोषहर भी मानता है आयुर्वेद

चरक संहिता, भाव प्रकाश, चक्रदत्त और चिरंजीव वनौषधि के अनुसार चिरौंजी का नियमित सेवन शरीर में कफ, वात और पित्त को नियंत्रित रखता है और खून को भी साफ रखता है। आयुर्वेद में चिरौंजी के तेल से दवाई बनाई जाती है। हृदय रोग और खांसी के उपचार में काम आता है। साथ ही मस्तिष्क के लिए टॉनिक का भी काम करता है।
चिरौंजी के पेड़ की छाल का इस्तेमाल चमड़े की सफाई के लिए किया जाता है। चिरौंजी का पेड़ बड़ी मात्रा में गोंद का उत्पादन करता है। इस गोंद का इस्तेमाल सस्ती औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है। खराब गुणवत्ता के कारण इसकी लकड़ी का इस्तेमाल जलावन के तौर पर या चारकोल बनाने में किया जाता है।

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रेलवे भोपाल करेगा ट्रेन कोच फैक्ट्री के लिए अपरेंटिस की भर्ती, 200 पदों के लिए मांगे आॅनलाइन आवेदन

रेलवे भोपाल ट्रेन कोच फैक्ट्री निशातपुरा के लिए अपरेंटिस भर्ती के लिए आॅनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। जिन बेरोजगारों के पास इस नौकरी के लिए आवश्यक योग्यता है वे जल्द से जल्द आॅनलाइन आवेदन करके इस नौकरी को पाने का प्रयास कर सकते हैं। इस नौकरी के लिए आॅनलाइन आवेदन का विवरण निम्न प्रकार है:—

पद का नाम: रेलवे डब्ल्यूसीआर भोपाल अपरेंटिस ऑनलाइन फॉर्म 2020: RRC WCR Bhopal Trade Apprentice Recruitment 2020 Online Form

संक्षिप्त जानकारी: रेलवे पश्चिम मध्य क्षेत्र डब्ल्यूसीआर भोपाल को विभिन्न स्ट्रीम 2020 में ट्रेड अपरेंटिस की भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र के लिए आमंत्रित किया जाता है। वे उम्मीदवार जो रिक्ति के बाद इच्छुक हैं और सभी पात्रता मानदंड को पूरा करने से पहले ऑनलाइन आवेदन करने के लिए अधिसूचना पढ़ सकते हैं।
आरआरसी डब्ल्यूसीआर भोपाल ट्रेड अपरेंटिस भर्ती 2020 ऑनलाइन फॉर्म
ट्रेन कोच फैक्टरी, निशातपुरा (आरआरसी भोपाल, मध्य प्रदेश)

महत्वपूर्ण तिथियाँ

आवेदन शुरू: 27/01/2020
ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि: 26/02/2020
अंतिम तिथि वेतन परीक्षा शुल्क: 26/02/2020
परीक्षा की तारीख: जल्द ही अधिसूचित
एडमिट कार्ड उपलब्ध: जल्द ही अधिसूचित
आवेदन शुल्क

सामान्य / ओबीसी: 170 / –
एससी / एसटी / पीएच: 70 / –
सभी श्रेणी महिला: 70 / –
परीक्षा शुल्क का भुगतान Mp ऑनलाइन KIOSK या डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग के माध्यम से करें
पात्रता

संबंधित ट्रेड में आईटीआई सर्टिफिकेट के साथ कक्षा 10 की परीक्षा उत्तीर्ण।
अधिक जानकारी के लिए अधिसूचना पढ़ें
आयु सीमा 21/01/2020 तक

न्यूनतम आयु: 15 वर्ष
अधिकतम आयु: 24 वर्ष
नियमानुसार आयु में छूट अतिरिक्त
रिक्ति का विवरण कुल: 200 पोस्ट

फॉर्म कैसे भरें

पश्चिम मध्य रेलवे WCR भोपाल मध्य प्रदेश विभिन्न पद के उम्मीदवारों के लिए भर्ती 27/01/2020 से 26/02/2020 के बीच आवेदन कर सकता है।
भोपाल डिवीजन डब्ल्यूसीआर रेलवे भर्ती 2020 में भर्ती आवेदन पत्र को लागू करने से पहले उम्मीदवार अधिसूचना पढ़ें।
कृपया सभी दस्तावेज – पात्रता, आईडी प्रमाण, पता विवरण, मूल विवरण की जांच और कॉलेज करें।
भर्ती फॉर्म से संबंधित कृपया तैयार स्कैन दस्तावेज़ – फोटो, साइन, आईडी प्रूफ, आदि।
आवेदन पत्र जमा करने से पहले पूर्वावलोकन और सभी कॉलम को सावधानीपूर्वक देखें।
यदि उम्मीदवार को आवेदन शुल्क का भुगतान करना आवश्यक है तो जमा करना होगा। यदि आपके पास आवश्यक आवेदन शुल्क नहीं है तो आपका फॉर्म पूरा नहीं हुआ है।
फाइनल सब्मिट किए गए फॉर्म का एक प्रिंट आउट ले लें।

Railway West Central Region WCR Bhopal Are Invited to Online Application Form for the Recruitment Post of Trade Apprentice in Various Stream 2020. Those Candidate Are Interested to Following Vacancy and Completed the All Eligibility Criteria Can Read the Notification Before Apply Online.
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RRC WCR Bhopal Trade Apprentice Recruitment 2020 Online Form

Train Coach Factory, Nishatpura (RRC Bhopal, Madhya Pradesh)

Short Details of Notification

Important Dates

Application Begin :27/01/2020
Last Date for Apply Online : 26/02/2020
Last Date Pay Exam Fee : 26/02/2020
Exam Date : Notified Soon
Admit Card Available : Notified Soon

Application Fee

General / OBC : 170/-
SC / ST / PH : 70/-
All Category Female : 70/-
Pay the Examination Fee Through Cast at Mp Online KIOSK or Debit Card, Credit Card, Net Banking

Eligibility

Passed Class 10 Exam with ITI Certificate in Related Trade.
For More Details Read Notification

Age Limit as on 21/01/2020

Minimum Age : 15 Years
Maximum Age : 24 Years
Age Relaxation Extra as per Rules

इच्छुक उम्मीदवार इस लिंक पर क्लिक करके आॅनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

http://mponline.gov.in/portal/Services/RailwayRecruitment/Bhopal/B008/FrmApplication.aspx?langid=en-US&NotificationId=QgAwADAAOABSAGUAZwA=

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इस जेल से चार कैदी फरार पुलिस प्रशासन में मचा हड़कम

नीमच । मध्यप्रदेश के नीमच जिले के ग्राम कनावटी स्थित जिला जेल से चार बंदी फरार हो गए, जिनकी तलाश जेल प्रशासन और पुलिस ने शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक फरार कैदियों का सुराग नहीं लग सका है। वहीं जिला प्रशासन ने इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।

 

पुलिस सूत्रों के अनुसार चारों बंदी गंभीर अपराधों में जिला जेल में निरुद्ध थे। कल रात मौका मिलने ही चारों जेल से फरार हो गए। उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने जिले भर में नाकेबंदी की। साथ ही नजदीकी जिलों में भी सूचना दी है, लेकिन फरार कैदियों का अब तक पता नहीं चल सका है। जिला जेल से फरार बंदियों में नार सिंह, दुबे लाल, पंकज मोंगिया और लेख राम शामिल हैं। वहीं जिला प्रशासन ने इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।

जेल प्रशासन ने बताया कि चारों कैदी गंभीर अपराधों के मामले में पिछले काफी समय से जेल में बंद हैं। इनमें दो कैदी राजस्थान के निवासी है तथा एक मंडला एवं एक मंदसौर का रहने वाला बताया गया है। पुलिस प्रशासन ने इन कैदियों की गिरफ्तारी के लिए पचास-पचास हजार रुपए के इनाम की घोषणा की है।

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परछाई से पीछा छुड़ाना चाहते हैं तो इस शहर में चले जाइए, शरीर से अलग हो जाएगी आपकी परछाई

क्या आप अपनी परछाई को अपने शरीर से अलग होते देखने की चाहत रखते हैं। अगर हां तो आप इस सपने को साकार कर सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको मामूली सी मशक्कत करनी होगी। आपको कर्क रेखा के नजदीक बसे शहर में एक दिन के लिए जाना होगा। चिंतित मत होइए, ये शहर भारत में ही है और बहुत मामूली खर्चे में आप वहां पहुंचकर दोपहर ठीक 12 बजकर 28 मिनट पर अपनी परछाई गायब होने का करिश्मा नंगी आंखों से देख सकते हैं।

आपको मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में जाना होगा। उज्जैन में 21 जून को परछाई को गायब होते देखने के लिए भारी भीड़ जुटती है। 21 जून से ही देश में दिन धीरे-धीरे छोटे और रातें बड़ी होने लगेंगी। मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र प्रकाश गुप्त के अनुसार 21 जून को सूर्य के अपने अधिकतम उत्तरी बिन्दु कर्क रेखा पर होने के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में दिन सबसे बड़ा तथा रात्रि सबसे छोटी होती है। 21 जून के बाद दिन धीरे-धीरे छोटे होने लगेंगे और 23 सितम्बर को दिन-रात बराबर होंगे।

उन्होंने बताया कि 21-22 जून को उज्जैन में सूर्योदय सुबह पांच बज कर 42 मिनट पर तथा सूर्यास्त शाम सात बज कर 16 मिनट पर होगा। इस प्रकार दिन सबसे बड़ा 13 घंटे 34 मिनिट तथा रात्रि 10 घंटे 26 मिनिट की होगी। 22 जून के बाद सूर्य की दक्षिण की ओर गति प्रारम्भ हो जायेगी। इसे दक्षिणायन प्रारम्भ कहते हैं।

उन्होंने बताया कि वेधशाला में इस खगोलीय घटना को देखने की व्यवस्था की गई है। धूप होने पर दोपहर 12 बजकर 28 मिनिट पर शंकु यंत्र के माध्यम से परछाई को गायब होते प्रत्यक्ष देख सकते हैं। उज्जैन कर्क रेखा के नजदीक स्थित है, इसलिये 21 एवं 22 जून को दोपहर 12 बजकर 28 मिनिट पर सूर्य की किरणों के लम्बवत होने के कारण परछाई शून्य हो जायेगी।

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शनिदेव से पूरी ​दुनिया डरती है लेकिन मध्यप्रदेश का यह ठेकेदार नहीं डरता, जानिए कौन है वो

जिन शनिदेव से पूरी दुनिया डरती है, उसके साथ मध्यप्रदेश के एक ठेकेदार ने ऐसी बेइमानी कर डाली जिसे करने में आम आदमी की रुह कांपती है। ठेकेदार ने शनि के मंदिर में तेल चढ़ाने के लिए बनवाए गए दीपक स्टैंड को काले की अपेक्षा लाल पत्थर से बनवाकर उस पर जले हुए आयल का पेंट करवा दिया।

मंदिर के प्रबंधन ने ठेकेदार की इस करतूत का जवाब दीपक स्टैंड को ढहाकर दिया है। मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के एक प्राचीन शनि मंदिर में नवनिर्मित दीपक स्टैंड को मंदिर प्रबंधन द्वारा भ्रष्ट्राचार का आरोप लगाते हुए जमीदोज कर दिया गया है।

मन्दिर के प्रबंधक गोविंन्द यादव ने बताया कि मंदिर प्रबंधन ने अभी हाल ही में मन्दिर परिसर में साढ़े पांच फुट ऊंचाई के दो दीपक स्टैंड बनाये जाने का मुरैना हाउसिंग बोर्ड को बीस लाख रुपये का ठेका दिया गया था। प्रबंधन ने बोर्ड से स्पष्ट अनुबंध किया था कि स्टैंड काले स्टोन पत्थर के बनाये जाएं, लेकिन हाउसिंग बोर्ड द्वारा राजस्थान से लाल पत्थर के दो दीपक स्टैंड लाकर मन्दिर परिसर में लगाये और उनपर जले हुए ऑयल से पुताई कराई गयी।

यादव ने बताया कि मंदिर प्रबंधन जब उन दीपकों का अवलोकन किया तो उन्हें तत्काल तोड़कर जमीदोज कर दिया गया है और बोर्ड को कारण बताओ नोटिस जारी कर दीपकों में किये गए भ्रष्टाचार से अवगत कराकर अविलंब काले स्टोन से दीपक बनाये जाने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि इस प्राचीन शनि मंदिर पर शनिचरी अमावस्या को दर्शन के लिये देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

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मोटी खाल के राजनेताओं के झांसे में आए ये संत, अब जान देने पर हैं ऊतारू

कहते हैं राजनेताओं की खाल इतनी मोटी हो जाती है कि उन पर जीवन के सामान्य उतार—चढ़ाव का कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन आम आदमी यहां तक कि साधु संत भी इस मामले में बड़े संवेदनशील होते हैं। इसी संवेदनशीलता के चलते मध्यप्रदेश के स्वामी बैराग्यानंद ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह की भोपाल संसदीय क्षेत्र में हार से हताश होकर ब्रह्मलीन समाधि लेने की प्रशासन से इजाजत मांगी है।
लोकसभा चुनाव में भोपाल संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार रहे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की जीत की भविष्यवाणी गलत साबित होने पर बैराग्यानंद गिरी ने 16 जून को हवन-कुंड में ब्रह्मलीन समाधि लेने की घोषणा की है।

इसके लिए उन्होंने जिलाधिकारी को एक आवेदन देकर स्थान निर्धारित करने सहित समाधि लेने की अनुमति मांगी है. निरंजनीय अखाड़े के पूर्व महामंडलेश्वर बैराग्यानंद ने अपने अधिवक्ता माजिद अली के माध्यम से जिलाधिकारी को बुधवार को दिए आवेदन में कहा है, ‘कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के पक्ष में प्रचार करते हुए उनकी विजय की कामना के लिए एक यज्ञ-हवन किया था। इस दौरान संकल्प लिया था कि अगर इस चुनाव में दिग्विजय सिंह को पराजय मिलती है तो हवन कुंड में ब्रह्मलीन समाधि लूंगा।’

पत्र में आगे कहा गया है, ‘साधु-संतों से परामर्श के बाद विधि-विधान से 16 जून अपराह्न् दो बजकर 11 मिनट पर ब्रह्मलीन समाधि लेने का निश्चय किया है, ताकि संकल्प पूरा कर सकूं।’ बैराग्यानंद ने जिलाधिकारी से समाधि के लिए स्थान निर्धारित करते हुए स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया है।
ज्ञात हो कि बाबा बैराग्यानंद ने मई माह में लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिह को चुनाव जिताने के लिए राजधानी के कोहेफिजा इलाके में मिर्ची यज्ञ किया था। इसी के दौरान उन्होंने घोषणा की थी कि यदि दिग्विजय सिह लोकसभा चुनाव में भोपाल सीट से चुनाव नहीं जीते तो वह (बाबा बैराग्यनंद) हवन-कुड में समाधि ले लेंगे।

लोकसभा चुनाव में सिंह को भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से हार का सामना करना पड़ा। उसके बाद से बाबा बैराग्यानंद को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही थीं। अब उन्होंने समाधि लेने की घोषणा की है और जिलाधिकारी से स्थान निर्धारित करने और अनुमति देने का अनुरोध किया है।

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पहले जमकर डांस करवाया फिर गैंगरेप के बाद कर दी उस सुंदरी की हत्या

राजस्थान में बारां जिले के छबड़ा थाना क्षेत्र के शंकर कालानी चांचैडा से मध्यप्रदेश के गुना में नृत्य कार्यक्रम के लिए बुलाई गई कंजरबाला का अपहरण करके गैंगरेप किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई।

छबड़ा के थानाधिकारी ताराचंद ने बताया कि छबड़ा निवासी मृतका की बहन ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि सात जून को वह अपनी बहिन एवं गांव की दो अन्य लड़कियों के साथ उदपुरिया गांव से मध्यप्रदेश के गुना में बस से एक नृत्य कार्यक्रम करने के लिए गयीं थी। दो-तीन दिन पहले गुना जिले के उनारसी के निवासी पंकज कलाल ने नृत्य कार्यक्रम के लिये बुकिंग करवाई थी। उसने बताया कि वे चारों लड़कियां शाम को गुना बस स्टैण्ड पहुंची जहां से पंकज कलाल ने उसे एवं उसकी बहन को मोटरसाईकिल पर बैठा लिया जबकि साथ वाली दोनों लड़कियों को आरोन सिरोंज वाली बस में बिठा दिया।

उसने बताया कि पंकज कलाल उसे और उसकी बहन को मोटरसाईकिल पर बैठा कर लटेरी के जंगल की तरफ ले गया, जहां उसने अपने दो साथियों अजयपाल और सुरेन को बुलवा लिया। बाद में पंकज कलाल ने तीन बार उसकी बहन से दुष्कर्म किया। इस दौरान अजयपाल और सुरेन ने उसे पकड़े रखा। उसके बाद पंकज कलाल ने उसकी बहन को जबरन जहर की गोलियां खिला दीं। बाद में वह हम दाेनों को रुठियाई स्टेशन पर लेकर आ गया। इस बीच उसकी बहन बेहोश हो गई तो पंकज कलाल हमें छोड़कर भाग गया।

उसने बताया कि बेहोश बहन को वह रूठियाई स्टेशन से ट्रेन से छबड़ा लेकर आई और उसे छबड़ा के एक अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां इलाज के दौरान उसकी बहन की मौत हो गई। थानाधिकारी ने बताया कि मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया है, उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उक्त घटनाक्रम जिला मध्यप्रदेश का होने के कारण शून्य नम्बर की प्राथमिकी दर्ज करके मूल मुकदमा दर्ज करने के लिये गुना के कोतवाली थाने भिजवाई गई है।
पुलिस इस मामले की तहकीकात कर रही है।

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घोड़े जैसी ताकत पाना चाहते हैं तो एक माह तक मुझे खा लीजिए क्योंकि मैं कड़कनाथ हूं

यौवन शक्ति को घोड़े के बराबर करना चाहते हैं तो मुझे एक माह तक खा लीजिए। अगर आपने सही तरीके से खा लिया तो आप न सिर्फ घोड़े को दौड़ में हरा सकते हैं बल्कि उसके जैसा बलिष्ठ शरीर भी पा सकते हैं।

असल में कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, रक्तचाप और टीबी जैसी बीमारियों की रोकथाम में मददगार ‘कड़कनाथ’ एक समय अस्तित्व का संकट झेल रहा था लेकिन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और अन्य संस्थानों की मदद से अब यह देश के कोने कोने में ‘बांग’ दे रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता से भरपूर कड़कनाथ प्रजाति का मुर्गा मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात के कुछ आदिवासी क्षेत्रों में पाया जाता है। यौवन शक्ति बढ़ाने में कारगर होने के कारण लोगों में इसकी भारी मांग से पिछले वर्षों के दौरान इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया जिससे यह प्रजाति विलुप्त होने के कागार पर पहुंच गयी थी। समय रहते भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के हस्तक्षेप से अब यह न केवल तीन राज्यों बल्कि पूरे देश में किसानों की आय बढ़ाने में बहुत मददगार साबित हो रहा है।
उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) ए.के. सिंह ने बताया कि सिर से नख तक बिल्कुल काले रंग का देशी कड़कनाथ में जलवायु परिवर्तन के इस दौर में भी अत्यधिक गर्मी और सर्दी सहने की क्षमता है और यह विपरीत परिस्थिति में भी जीवित रहता है। इसका न केवल खून काला होता है बल्कि इसका मांस भी काला है जो बेहद नर्म और स्वादिष्ट होता है। इसके मांस में प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है और हृदय रोग के लिए घातक माने जाने वाले काेलेस्ट्रोल की मात्रा इसमें बहुत कम होती है। इसमें नाम मात्र की वसा है।

डॉ. सिंह ने बताया कि प्रोटीन कोशिका का एक महत्वपूर्ण घटक है जो शरीर के ऊतकों के निर्माण और मरम्मत में मददगार है। एंजाइम, हार्मोन और शरीर के अन्य रसायनों के निर्माण में प्रोटीन का उपयोग होता है। प्रोटीन हड्डियों, मांसपेशियों, त्वचा और रक्त के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे शरीर में हानिकारक चर्बी और काेलेस्ट्रोल की मात्रा कम होती है। उन्होंने बताया कि कड़कनाथ के मांस में पाया जाने वाला स्टीयरिक एसिड खराब काेलेस्ट्रोल को कम करने में मददगार है। इसमें पाया जाने वाला ओलिक एसिड रक्तचाप और काेलेस्ट्रोल कम करने के साथ ही टाइप टू मधुमेह और कैंसर प्रतिरोधक है। इसमें गामा लिनोलेनिक एसिड, अरचिडोनिक एसिड और डोकोसैक्सिनोइक एसिड भी पाया जाता है जो शरीर को कई प्रकार के फायदे पहुंचाता है। डॉ. सिंह ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विज्ञान केन्द्र तथा राज्यों के सहयोग से कड़कनाथ हेचरी की स्थापना की गयी है जहां सालाना 139000 चूजे तैयार हो रहे हैं।
इन चूजों को 20 राज्यों के 117 जिलों में पाला जाता है। इन राज्यों में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर आदि शामिल हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दांतेवाड़ा में सालाना एक लाख चूजे तैयार किये जा रहे हैं। इस राज्य के कांकेड़, बलरामपुर और राजनंदगांव में भी हेचरी की स्थापना की गयी है। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, झाबुआ, धार और ग्वालियर में भी इस प्रकार के केन्द्र हैं।

कड़कनाथ का चूजा छह माह में वयस्क हो जाता है और मुर्गी अंडा देने लगती है। यह मुर्गी साल भर में तीन से चार चरणों में अंडे देती है और यह साल भर में 75 से 90 अंडे दे देती है। इसका एक अंडा स्थानीय स्तर पर 10 रुपये से 50 रुपये में मिलता है जबकि इसका मांस 600 से 1200 रुपये प्रति किलोग्राम बिकता है। किसानों को आम अंडों का मूल्य दो से तीन रुपये और सामान्य मुर्गे का मांस का मूल्य 150 रुपये किलोग्राम मुश्किल से मिलता है।
कड़कनाथ का मूल नाम कालामासी है जिसका अर्थ काले मांस वाला मुर्गा है। इसकी तीन किस्मों में जेट ब्लैक, पेनसिल्ड और गोल्डन कड़कनाथ शामिल हैं। कृषि विस्तार उप महानिदेशक ने बताया कि कड़कनाथ के प्रति लोगों में भारी जागरुकता आयी है जिसके कारण देश के विभिन्न हिस्सों से इसके चूजे की भारी मांग आ रही है। कई स्थानों पर कड़कनाथ के पालन से गरीबों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है और वे व्यावसायिक तौर पर वैज्ञानिक ढंग से इसका पालन कर रहे हैं।

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Crime

पहले कराए सात फेरे फिर दुल्हन को लेकर भाग गया पंडित, देखता रह गया दूल्हा

विवाह की पवित्र वेदी पर सात फेरे कराने वाले एक पंडित का ऐसा कारनामा सामने आया है कि जिसने भी सुना, उसने अंगुली दांतों तले दबा ली। हुआ यूं कि पंडित ने पहले तो दुल्हन केे सात फेरे उसके दूल्हे के साथ कराए और दूल्हे के देखते देखते उसकी दुल्हन को लेकर भाग गया। दुलहन के साथ उसका प्रेम कई सालों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। पंडित दो बच्चों का बाप भी है।

मामला मध्‍य प्रदेश में सिरोंज के टोरी बागरोद का है। यहां एक दुल्‍हन विवाह के बाद उसी पंडित के साथ फरार हो गई, जिसने मंडप में उसके फेरे करवाए थे। दरअसल, 21 वर्षीय युवती का विवाह बासौदा के आसठ गांव के एक युवक से 7 मई को हुआ था। आसठ गांव में ही रहने वाले पंडित विनोद महाराज ने दोनों की शादी करवाई थी।

विवाह के बाद लड़की की विदाई हुई। इसके तीन दिन बाद वो मायके वापस लौटी। इसी बीच 23 मई की रात जब दुल्हन के परिजन एक अन्‍य शादी के समारोह में व्‍यस्‍त थे, तब युवती उसी पंडित विनोद के साथ भाग गई। बताया जा रहा है कि जिस शादी में दुल्हन के परिवार वाले शामिल होने गए थे उस शादी में भी फेरे करवाने की जिम्मेदारी पंडित विनोद को ही सौंपी गई थी। किन्तु शादी की रस्मों के पहले ही विनोद लापता हो गया।

जब पंडित विनोद की तलाश की गई, तो पता लगा कि दुल्हन भी घर पर नहीं है। इसके बाद उसके परिजन थाने पहुंचे। पुलिस ने यहां मामला दर्ज किया और जांच आरंभ कर दी। इसके बाद जानकारी मिली कि विनोद और नवविवाहिता युवती के बीच लगभग 2 साल से प्रेम संबंध चल रहा था। पंडित विनोद पहले से ही शादीशुदा था। उसके परिवार में पत्‍नी और दो बच्‍चे भी हैं और घटना वाले दिन से ही पंडित का पूरा परिवार गायब है।