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IPLके आयोजन पर सरकार लेगी निर्णय : किरेन रिजिजू

मुंबई । कोरोना वायरस के कारण अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुए आईपीएल के 13वें सत्र को आयोजित कराने को लेकर केंद्रीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को कहा कि इस बाबत फैसला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) नहीं बल्कि केंद्र सरकार करेगी।

कोरोना वायरस के कारण देशभर में लागू लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंध के कारण बीसीसीआई ने आईपीएल को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था। रिजिजू ने कहा कि आईपीएल आयोजित कराने पर फैसला लोगों की सुरक्षा को देखते हुए लिया जाएगा।

खेल मंत्री ने कहा, “भारत में आईपीएल को लेकर फैसला सरकार देश में महामारी की स्थिति को देखते हुए लेगी।उन्होंने इंडिया टूडे से कहा, “केवल खेल प्रतियोगिता आयोजित करने के लिये हम अपने देशवासियों का स्वास्थ खतरे में नहीं डाल सकते। हमारा मुख्य उद्देश्य कोविड-19 से लड़ना है।”ऐसा माना जा रहा है कि दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई ऑस्ट्रेलिया में अक्टूबर-नवंबर में होने वाले टी-20 विश्वकप का आयोजन नहीं होने की स्थिति में आईपीएल के आयोजन पर विचार कर सकती है।

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M. Venkaiah Naidu ने दी ईद की बधाई

नयी दिल्ली । उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने ईद-उल-फितर की पूर्व संध्या पर देशवासियों को बधाई दी।नायडू ने रविवार को ईद को परिवारों और समुदायों को साथ लाने का अवसर बताया। साथ ही उपराष्ट्रपति ने सभी लोगों से पर्व के दौरान कोविड-19 से बचाव के सुरक्षा मानकों का पालन करने और सामाजिक दूरी बनाए रखने की अपील की।

उपराष्ट्रपति ने एक संदेश में कहा , “मैं ईद-उल-फितर के शुभ अवसर देशवासियों को शुभकामनाएं और बधाई देता हूं।”उन्होंने कहा कि ईद उल फितर पर रमज़ान के मुबारक माह की समाप्ति का उत्सव मनाया जाता है और इस्लामी कैलेंडर के दसवें माह शव्वाल की शुरुआत होती है।ये पर्व हमारे समाज में दान, दया, करुणा और त्याग का उत्सव है। इस मौके पर परिवार और समुदाय सभी साथ आ जाते हैं।

इस साल जब भारत और सारी दुनिया कोविड-19 महामारी से जूझ रही है, हम अपने लगभग सारे पारंपरिक पर्व घर में सीमित रह कर ही मना रहे हैं।
उन्होंने कहा, ” इस वर्ष हमें अपनी खुशियों और उल्लास को सीमित ही रखना होगा और दो गज दूरी तथा सफाई जैसी सावधानियां बरतनी होंगी। फिर भी उम्मीद करता हूं कि इस पावन पर्व को हम पारंपरिक हर्ष, उल्लास, इबादत – दुआओं और भाईचारे की भावना के साथ मनाएंगे। आशा करता हूं कि ईद उल फित्र हमारे जीवन में रहमत, बरकत, स्वास्थ्य और खुशहाली लाये।”

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सामुदायिक रेडियो पर जनजागरुकता अभियान चलायेगी सरकार

नयी दिल्ली। सरकार कोरोना वायरस (कोविड 19) को रोकने के लिए अब सामुदायिक रेडियो के जरिए जनजागरूकता अभियान चलाएगी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर शुक्रवार को देश के करीब 300 सामुदायिक रेडियो को एक साथ संबोधित करेंगे और दर्शकों को कोरोना महामारी की रोकथाम के उपायों पर चर्चा करेंगे ।

जावड़ेकर हिंदी और अंग्रेजी में दर्शकों को सम्बोधित करेंगे। यह पहली अनूठी पहल होगी जिसमें इस तरह का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है और सभी सामुदायिक रेडियो पर एक साथ दर्शकों को संबोधित किया जाएगा।

गौरतलब है कि एक कमेटी रेडियो करीब 15 किलोमीटर के दायरे में दर्शकों को कार्यक्रम पेश करता है और इस तरह करीब एक लाख की आबादी इससे लाभान्वित होती है। जावड़ेकर अपने संबोधन में सामुदायिक रेडियो के प्रचार प्रसार पर भी बल देंगे और इस रेडियो को किस तरह लाभदायक बनाया जाए , उसके बारे में भी चर्चा करेंगे।

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कोरोना से परेशान महिलाओं के लिए राहत की खबर, सिलेंडर पर बचेंगे 162 रुपए

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस( कोविड-19) के कारण देशभर में जारी पूर्णबंदी के बीच खाना पकाने की गैस (एलपीजी) का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर है।

शुक्रवार से गैर सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर 162 रुपये की बडी कमी की गई है। देश की अग्रणी तेल विपणन कंपनी के अनुसार नयी दरें आज से प्रभावी हो गई हैं। दिल्ली में गैर सब्सिडी वाला सिलेंडर 162.50 रुपये कम होकर पहले के 744 रुपये से मई माह के लिए 581.50 रुपये प्रति सिलेंडर पर मिलेगा। सरकार रसोई गैस उपभोक्ता को एक वित्त वर्ष में 12 सिलेंडर सब्सिडी दर पर देती है और इससे अधिक की मांग पर बाजार कीमत देनी पडती है। मुंबई में नई दर 579 रुपये प्रति सिलेंडर होगी। कोलकाता में यह 584.50 रुपये और चेन्नई में 569.50 रुपये प्रति सिलेंडर पर मिलेगा।
इधर वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) के कारण पूरे देश में लागू लॉकडाउन का ऑटोमोबाइल उद्योग पर व्यापक असर पड़ा है और इस क्षेत्र की अग्रणी कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड की अप्रैल माह में घरेलू बाजार में बिक्री शून्य रही।

कंपनी ने शुक्रवार को अप्रैल माह के बिक्री आंकड़ों को जारी करते हुए बताया कि लॉकडाउन की वजह से मारुति की सभी इकाइयों में उत्पादन बंद रहा था। मारुति ने कहा है कि अब लॉकडाउन में कुछ ढील मिलने के बाद आंशिक उत्पादन शुरू हुआ है और मुन्द्रा बंदरगाह से 632 यूनिट का निर्यात किया गया है।

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खम्भे से उतारने के लिए पुलिस को पिलानी पड़ी शराब

बरेली से एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है, जहां शराब की मांग करने वाला एक शख्स विज्ञापनों की होर्डिंग लगाए जाने वाले एक खंभे पर चढ़ बैठा और उसकी मांग न पूरी होने पर आत्महत्या करने तक की भी धमकी दी।

इस नाटक की शुरूआत गुरुवार देर शाम को हुई और एक घंटे बाद जब पुलिस ने उसे शराब की बोतल देने का वादा किया, तब जा कर यह खत्म हुआ।
घटना की पुष्टि करते हुए कोतवाली एसएचओ गीतेश कपल ने कहा, हम उसे बिना किसी चोट के नीचे लाने में कामयाब रहे।

हमने सिर्फ वादा किया था, लेकिन शराब की बोतल उसे नहीं दी गई। राज्य में शराब की बिक्री पर रोक लगी हुई है और हम लॉकडाउन के दिशा निदेर्शों का सख्ती से पालन कर रहे हैं। हम उसकी पहचान करने की कोशिश में जुटे हुए हैं, ताकि परिवार को सूचित किया जा सकें।

पुलिस कर्मियों ने उस आदमी को खाना और सॉफ्ट ड्रिंक दिया और उसे छोडऩे से पहले उसकी काउंसिलिंग भी की गई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वह आदमी मानसिक रूप से अस्थिर लग रहा था।

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अब केले पर मंडराया कोरोना वायरस का साया, हजारों टन केला……

कोरोना से खेती को भी बड़ा नुकसान हुआ है। इसकी वजह से उत्तरप्रदेश में हजारों टन केले की पैदावार नहीं हो सकी। उत्तरप्रदेश के कुछ जिलों में टिशू कल्चर केले की खेती की जाती है जिसके बीज महाराष्ट्र और दक्षिण के राज्यों से आते हैं। लेकिन कोरोना के चलते इसके बीज नहीं आ पा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में बाराबंकी, अयोध्या, सीतापुर, गोंडा, बहराइच, संतकबीरनगर, श्रावस्ती, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, बलिया, वाराणसी समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों मे टिशू कल्चर केले की खेती बडे पैमाने पर होती है लेकिन कोरोना को लेकर इस खेती पर भी आफत आ गई है। राज्य मे करीब एक लाख हेक्टेयर में टिशू कल्चर के केले की खेती की जाती है लेकिन अभी तक इसके बीज की व्यवस्था नहीं हो पायी है जबकि इस खेती के लिए खेत पूरी तरह तैयार हैं। चूंकि इसके बीज दक्षिण के राज्यों से आते हैं इसलिए बीजों का आना मुश्किल माना जा रहा है।

टिशू कलचर खेती मे अपनी अलग पहचान बना चुके किसान रामशरण कहते हैं कि एक लाख हेक्टेयर मे केले की खेती के लिए करीब तीन करोड़ बीजों की जरूरत होगी। आवागमन बंद होने के कारण इतना बीज आना मुश्किल ही नहीं असंभव है। रामशरण को टिशू कलचर खेती के लिए पद्मश्री भी मिल चुका है। उद्यान विशेषज्ञों के अनुसार पिछले साल टिशू कल्चर केले की राज्य मे बंपर पैदावार हुई थी और किसानों ने मोटा मुनाफा कमाया था।

पिछले साल के मुनाफे को देखकर कुछ नये किसान भी इस क्षेत्र मे आ गए और अपने खेतों को टिशू कल्चर केले की खेती के लिए तैयार किया लेकिन बीज को लेकर अभी भी अनिश्चितता के हालात के कारण किसान अब उदास हैं। रेल के साथ हवाई सेवा भी पूरी तरह से बंद है, इसके बीज हवाई जहाज से भी आते रहे हैं लेकिन यह सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। निचोड़ यह है कि टिशू कल्चर केले की खेती पर इस बार आफत है। किसान इसके लिए किसी को दोष भी नहीं दे सकते कयोंकि देश कोरोना जैसी महामारी से लड रहा है।

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सौ साल पहले भारत में इस महामारी से मारे गए थे एक करोड़ 70 लाख लोग

लगभग एक सदी पूर्व कोरोना जैसी महामारी से भारत में एक करोड़ 70 लाख लोगों की मौत हो गई थी. पूरी दुनिया में इस महामारी से पांच करोड़ लोग काल के गाल में समा गए थे. इस बीमारी का नाम था स्पेनिश फ्लू. इसे अक्सर ‘मदर ऑफ़ ऑल पैंडेमिक्स’ यानी सबसे बड़ी महामारी कहा जाता है.

वैज्ञानिकों और इतिहासकारों का मानना है कि उस वक्त दुनिया की आबादी 1.8 अरब थी और आबादी का एक-तिहाई हिस्सा संक्रमण की चपेट में आ गया था. तब पहला विश्व युद्ध खत्म ही हुआ था. लेकिन, इस महामारी से मरने वालों की तादाद पहले विश्व युद्ध में मरने वालों की संख्या को भी पार कर गई थी. आज के दौर के मुक़ाबले किसी बीमारी का सामना करने के लिहाज से दवाइयां और विज्ञान उस वक्त बेहद सीमित था.

दुनिया की पहली एंटीबायोटिक की खोज 1928 में

डॉक्टरों को यह तो पता चल गया था कि स्पेनिश फ़्लू के पीछे माइक्रो-ऑर्गेनिज़्म है. उन्हें यह भी पता था कि यह बीमारी एक शख़्स से दूसरे शख़्स में फैल सकती है. लेकिन, वे तब ये मान रहे थे कि इस महामारी की वजह वायरस न होकर एक बैक्टीरिया है. उस दौरान इलाज भी सीमित था. दुनिया की पहली एंटीबायोटिक की खोज 1928 में जाकर हो पाई थी. पहली फ़्लू वैक्सीन 1940 में लोगों के लिए उपलब्ध हो सकी. उस वक्त सबके लिए इलाज की व्यवस्था मुमकिन नहीं थी. यहां तक कि अमीर देशों में भी पब्लिक सैनिटेशन एक लग्ज़री थी.

कोई युवा व्यक्ति जीवित नहीं बचा

औद्योगिक देशों में ज्यादातर डॉक्टर या तो खुद के लिए काम करते थे या उन्हें चैरिटी या धार्मिक संस्थानों से पैसा मिलता था. ज्यादातर लोगों के पास इलाज कराने की सहूलियत नहीं थी. स्पेनिश फ़्लू ने इस तरह से हमला किया जैसा इससे पहले की किसी भी महामारी में नहीं देखा गया था. इससे पहले 1889-90 में फैली महामारी से 10 लाख से ज्यादा लोग पूरी दुनिया में मारे गए थे, लेकिन इसका दायरा स्पेनिश फ़्लू जैसा नहीं था. दूसरी तरफ, भारत में स्पेनिश फ़्लू से मरने वालों की तादाद आबादी की 5.2 फीसदी यानी करीब 1.7 करोड़ लोग थे. कई देशों में घर चलाने की जिम्मेदारी उठाने वाला, खेती करने वाले, कारोबार करने वाले कोई युवा व्यक्ति जीवित नहीं बचा था. शादी और बच्चे पैदा कर मरे हुए लोगों की भरपाई करने तक के लिए युवा नहीं बचे थे. ऐसे लाखों युवा खत्म हो गए थे.’
योग्य लोगों के अभाव में अकेली बची औरतों की समस्या पैदा हो गई. लाखों महिलाओं के पास कोई पार्टनर नहीं था.
1918 तक भारत को ब्रिटेन की कॉलोनी बने तकरीबन एक सदी बीत चुकी थी. भारत में स्पेनिश फ़्लू उसी साल मई में आया. भारत में इसकी चोट ब्रिटिश नागरिकों से ज्यादा भारतीय आबादी पर पड़ी. आंकड़े बताते हैं कि हिंदुओं में नीची जातियों की मृत्यु दर हर 1,000 लोगों पर 61.6 के स्तर पर पहुंच गई थी. जबकि यूरोपीय लोगों के लिए यह प्रति हजार 9 से भी कम थी.

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कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाएंगे एंटी वायरल कपड़े से बने वस्त्र

फैशन बाजार ने कोरोना संक्रमण के चलते देश भर में लागू लॉकडाउन का फायदा उठाने का रास्ता खोज लिया है। वह फैशन के दीवाने लोगों के लिए एंटी वायरल कपड़ा लेकर आया है। बाजार का दावा है कि इस कपड़े से बने वस्त्र पहनने वालों से कोरोना वायरस कई मीटर दूर रहेगा।

सूक्ष्मजीवों को पनपने से रोकते हैं एंटीवायरल और एंटी-बैक्टीरियल कपड़े 

ये कपड़ा ग्राडो नामक कम्पनी ने बनाया है। डोनियर समूह की कंपनियों द्वारा विकसित और ग्राडो की निर्माण इकाइयों द्वारा बेहतरीन तरीके से तैयार किए गए परिधानों में सूट से लेकर जैकेट और पतलून तक किसी भी तरह के परिधान पहनने और उपयोग करने के लिए सुरक्षित प्रमाणित किए गए हैं। विशेष रूप से डिजाइन किए गए एंटीवायरल और एंटी-बैक्टीरियल कपड़े सूक्ष्मजीवों को पनपने से रोकते हैं। जिससे वे सुरक्षित और स्वच्छ बनते हैं। कपड़े अपने गुणों को 50 बार धुलने तक भी बरकरार रखते हैं और हर रोज पहनने के लिए उपयुक्त हैं।
ग्राडो के एक अधिकारी ने कहा कि दुनिया की मौजूदा स्थिति को देखते हुए बाजार में इस लॉकडाउन के लिए ज्यादा हाइजीन प्रोडक्ट की पेशकश करने की स्थिति में होना चाहते थे और फिलहाल एंटी वायरल कपड़ों से बेहतर और क्या हो सकता है, जिसे हर कोई पहन सकता है। हम इस मुश्किल समय में राष्ट्र के लिए अपना योगदान देने के बारे में गर्व महसूस कर रहे हैं।

सुरक्षा की गारंटी नहीं

यहां यह उल्लेखनीय है कि कोरोना संकट के बीच जहां हम सब परेशान हैं, वहीं क्या हमने एक बार भी सोचा है कि जब हम घरों से बाहर निकलने के लिए आजाद होंगे तो क्या अपने फैंसी कपड़ों में सुकून के साथ बाहर निकलने का साहस कर पाएंगे? एंटीवायरल कपड़ों को पहनने से इसमें मदद मिल सकती है, जो भले ही सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है, लेकिन कम से कम मानसिक शांति देता है। नियो टेक्नोलॉजी की मदद से जो बेहतरीन क्वालिटी का उपयोगी प्रोडक्ट बनाता है, जो बैक्टीरिया और वायरस से सुरक्षा कवच प्रदान करता है, जिंदगी शायद सहज व आसान हो जाए। ग्राडो नियो टेक्नोलॉजी उपयोग करते हुए वायरस और रोगाणुओं से सुरक्षा के लिए कपड़े बनाने वाली पहली कपड़ा कंपनी है।

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कड़ी धूप में जाते ही दम तोड़ देता है यमराज बना कोरोना वायरस, अमेरिका ने किया दावा

कोरोना वायरस के डर से घरों में छुपी हुई दुनिया के लिए राहत की खबर, यमराज की शक्ल में आया ये वायरस सूरज की धूप नहीं सह पाता और कड़ी धूप में जाते ही दम तोड़ देता है। ये दावा अमेरिका के घरेलू सुरक्षा विभाग अति उन्नत बायो कन्टेनमेंट लैब ने किया है। लैब के अनुसार सूरज की रोशनी कोरोना को खत्म कर सकती है, जबकि गर्म तापमान और चिपचिपा मौसम वायरस को काफी नुकसान पहुंचाता है।

कोविड-19 को मार देती हैं सूरज की किरणें

व्हाइट हाउस ने लैब के शोध के हवाले से कहा है कि सूरज की किरणें कोविड-19 को मार देती हैं। जबकि गर्म तापमान और ह्यूमिडिटी वायरस को नुकसान पहुंचाते हैं, और इससे वायरस का जीवन और इसकी शक्ति आधी हो जाती है।
कोरोनावायरस महामारी के चलते अमेरिका सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। वर्तमान में यहां कोविड-19 संक्रमण के कुल आठ लाख 60 हजार से अधिक मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 50 हजार से अधिक अमेरिकी नागरिकों की जान चली गई है। तापमान और ह्यूमिडिटी के प्रभाव को लेकर किए गए इस शोध को हफ्तों से ट्रैक्शन मिल रहा है। अमेरिकी सरकार ने कोविड-19 पर तापमान के परीक्षण के प्रारंभिक परिणामों पर पहली बार आधिकारिक मुहर लगाई है।
अमेरिकी घरेलू सुरक्षा विभाग में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी निदेशालय के प्रमुख बिल ब्रायन ने कहा, यह आज तक का हमारा सबसे महत्वपूर्ण ऑब्जर्वेशन है। सूर्य की रोशनी के शक्तिशाली प्रभाव से वायरस सतह और हवा दोनों जगह मरता हुआ पाया गया है। हमने तापमान और ह्यूमिडिटी दोनों के साथ इसी तरह के परिणाम देखे हैं। ब्रायन के अनुसार, एक कमरे में 70-75 एफ तापमान पर 20 प्रतिशत ह्यूमिडिटी के साथ वायरस का जीवन लगभग आधा यानी एक घंटे है।
बिल ने कहा कि इसे लेकर बाहर निकलने पर जब यह यूवी किरणों से टकराता है तो इसका जीवन एक मिनट और डेढ़ मिनट में ही आधा रह जाता है।

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अब सीबीआई करेगी खीरे की तस्करी की जांच, तस्कर पूरी दुनिया में करते हैं स्मगलिंग

सीबीआई अब खीरे की तस्करी की जांच करेगी, लेकिन वह खेतों में उगने वाला खीरा नहीं बल्कि समुद्र में उत्पन्न होने वाला खीरा है। आश्चर्य मत करिए, सी ककम्बर कहलाने वाला खीरे की शक्ल का यह जीव लक्षद्वीप के तटों पर भारी मात्रा में मिलता है और पूरी दुनिया विशेषकर जापान में इसे चाव से खाया जाता है। तस्कर इसकी लक्षद्वीप से पूरी दुनिया में स्मगलिंग करते हैं।

समुद्री जीव है सी ककम्बर

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने लक्षद्वीप से समु्द्री जीव सी ककम्बर की विभिन्न प्रजातियों की तस्करी के मामले में जांच शुरू कर दी है। सीबीआई ने पर्यावरण मंत्रालय के अधीन कार्य कर रहे वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो का आग्रह स्वीकार करते हुए कल लक्षद्वीप के कावारत्ती के चार निवासियों के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज करके जांच शुरू कर दी। कावारत्ती वन विभाग ने विलुप्त प्राय: हो चुके विभिन्न प्रजातियों के 173 मृत और 46 जीवित सी ककम्बर को सुहेली चर्याकारा द्वीप के पास से एक नाव से बरामद किया था। इसके बाद इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की गयी थी। प्राथमिकी में जिन चार व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है उनमें सलमानुल फारिस, इरफानुद्दीन, रमीश खान और मोहम्मद अली कोडिपल्ली शामिल हैं। ये सभी कावारत्ती के निवासी हैं। मामले की जांच जारी है।

राष्ट्रीय उद्यान में बाढ़ से वन्य जीवों की रक्षा

इधर केन्द्र सरकार ने असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बाढ़ से वन्य जीवों की रक्षा के लिए ऊंचे स्थलों की संख्या बढ़ाना तय किया है। जानवरों को बाढ़ के पानी से बचाने के लिए राष्ट्रीय उद्यान के अंदर ऊंचे स्थलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। भारी वाहनों की चपेट में आने से होने वाली वन्य जीवों की मृत्यु की घटनाओं को रोकने के लिए ओवरपास और स्पीड गवर्नर लगाने के साथ—साथ वाहन चालकों के लिए संकेतक भी लगाए जाएंगे। कुल 430 वर्ग किलोमीटर में फैले काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से होकर ब्रह्मपुत्र नदी गुजरती है। मानसून के समय हर साल इसमें बाढ़ आती है जिससे यहां रहने वाले जानवरों को दिक्कत होती है।