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Border Security Force (BSF) Recruitment 2020: सीमा सुरक्षा बल में कांस्टेबल और सब इंस्पेक्टरों की होगी भर्ती

BSF Recruitment 2020: सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने सब इंस्पेक्टर (SI) और कॉन्स्टेबल के पदों के लिए आवेदन मांगे हैं। इंडियन आर्मी भी आपको नौकरी देने को तैयार है। उम्मीदवार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। Border Security Force (BSF) Recruitment 2020:

 

आवेदन की तिथियां

BSF भर्ती 2020 के लिए ऑनलाइन आवेदन 16 मार्च, 2020 तक किए जा सकते हैं। BSF ने 317 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।
आवेदक को कान्स्टेबल पद के लिए 200 रुपये और SI के लिए आवेदन करने हेतु 100 रुपये फीस देनी होगी। साथ ही भर्ती के लिए लिखित परीक्षा देनी होगी। Border Security Force (BSF) Recruitment 2020:

ये कर सकते हैं आवेदन

सभी पदों के लिए शैक्षिक योग्यता अलग-अलग है। किसी भी पद के लिए आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का 10वीं पास होना बहुत जरुरी है। उम्मीदवार की आयु 20-28 वर्ष के बीच होनी चाहिए। पात्रता की अधिक जानकारी नीचे दिए गए लिंक से हासिल करें। Border Security Force (BSF) Recruitment 2020:

ऐसे करें आवेदन

आवेदक को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर होम पेज पर इस भर्ती के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करना होगा। क्लिक करते ही आपके सामने आधिकारिक अधिसूचना खुलेगी। उसमें सभी पदों के लिए अलग-अलग आवेदन फॉर्म दिए गए हैं। उम्मीदवार को जिस पद के लिए आवेदन करना है उस पद के आवेदन फॉर्म को डाउनलोड करके सही तरह से भरकर भेजना होगा। Border Security Force (BSF) Recruitment 2020:

इस लिंक पर ​करें क्लिक तो मिलेगी पूरी जानकारी 

भर्ती आवेदन पत्र प्राप्त करने के लिए उम्मीदवार यहां क्लिक करें।

http://bsf.nic.in/doc/recruitment/r0118.pdf

इंडियन आर्मी करेगी भर्ती

इंडियन आर्मी ने विभिन्न पदों पर भर्ती निकाली है। इंडियन आर्मी रैली भर्ती झारखण्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 20 मार्च, 2020 तक चलेगी। किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र हैं। भर्ती के लिए उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। Border Security Force (BSF) Recruitment 2020:

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Indian Army Recruitment 2020: आ गया सेना में भर्ती का मौका, कई हजार पदों पर होगी भर्ती

Indian Army Recruitment 2020: देश की सेवा करने का जज्बा रखने वाले देश के युवाओं को भारतीय सेना में शामिल होने का मौका उपलब्ध है। इंडियन आर्मी और इंडियन एयर फोर्स ने युवाओं की भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। दोनो सेनाएं विभिन्न पदों पर भर्ती करेंगी और इसके लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार भर्ती के लिए तत्काल आवेदन करें।

 

वायु सेना करेगी इन पदों पर भर्ती

Indian Army Recruitment 2020:
भारतीय वायु सेना जूनियर क्लर्क (EDP) के 01, जूनियर क्लर्क के 02, असिस्टेंट मैनेजर (रिसेप्शनिस्ट) के 01 और असिस्टेंट मैनेजर (पर्सनल असिस्टेंट) के 01 पदों पर भर्ती करेगी। Indian Army Recruitment 2020:
आवेदन 13 फरवरी, 2020 से शुरू हो गए हैं और अंतिम तिथि 17 फरवरी, 2020 है। इस पद के लिए सिर्फ ग्रेजुएट उम्मीदवार ही पात्र होंगे।
उम्मीदवारों को आवेदन पत्र Secretary, IAF Benevolent Association, AFGIS Bhawan, Subroto Park, New Delhi-110010 के पते पर भेजना होगा।

 

भारतीय सेना करेगी सिपाहियों की भर्ती

इंडियन आर्मी भर्ती रैली के माध्यम से पुरुष उम्मीदवारों की भर्ती करेगी। ऑनलाइन आवेदन 05 फरवरी, 2020 से 20 मार्च, 2020 तक किए जा सकेंगे। इसके लिए देश के किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना अनिवार्य है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। Indian Army Recruitment 2020:

 

शार्ट सर्विस कमीशन (ssc) के तहत इतने पदों पर भर्ती

इंडियन आर्मी ने अविवाहित पुरुष और महिला उम्मीदवारों के लिए शॉर्ट सर्विस कमीशन (टेक्निकल) के 191 पदों पर भर्ती निकाली है। ऑनलाइन आवेदन 20 फरवरी, 2020 तक किए जा सकेंगे। इसके लिए मान्यता प्राप्त संस्थान से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन और 20-27 वर्ष की उम्र वाले उम्मीदवार आवेदन के पात्र होंगे। उम्मीदवारों को ऑनलाइऩ आवेदन ही करना होगा। Indian Army Recruitment 2020:

आवेदन के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

http://joinindianarmy.nic.in/index.htm

https://joinindianarmy.nic.in/index.htm

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Rajasthan Junior Engineer (RSMSSB) Recruitment 2020: 1054 जूनियर इंजीनियरों की होगी भर्ती

राजस्थान अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड RSMSSB ने सिविल / इलेक्ट्रिकल / मैकेनिकल में जूनियर इंजीनियर के पद के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र आमंत्रित किए हैं। भर्ती के इच्छुक उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

 

Rajasthan Junior Engineer (RSMSSB) Recruitment 2020

RSMSSB जूनियर इंजीनियर जेई ऑनलाइन फॉर्म 2020:

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर (RSMSSB)

महत्वपूर्ण तिथियाँ

Rajasthan Junior Engineer (RSMSSB) Recruitment 2020

आवेदन शुरू: 4 मार्च 2020:
ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 2 अप्रेल 2020:
परीक्षा की तारीख: जल्द बताई जाएगी।
एडमिट कार्ड उपलब्ध: जल्द मिलेंगे।

आवेदन शुल्क

सामान्य/ओबीसी क्रीमीलेकयर: 450 / –
अन्य राज्यों के आवेदक: 450 / –
ओबीसी नॉन क्रीमीलेयर: 350 / –
एससी / एसटी: 250 / –
परीक्षा शुल्क का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग के माध्यम से ही करें

Rajasthan Junior Engineer (RSMSSB) Recruitment 2020

रिक्ति का विवरण कुल: 1054 पोस्ट

पोस्ट नाम: जूनियर इंजीनियर

आयु सीमा: 18 से 40 वर्ष
योग्यता: भारत में किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड में इंजीनियरिंग में डिग्री / डिप्लोमा।

आवेदन ऐसे करें

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर (RSMSSB) परीक्षा नवीनतम जूनियर इंजीनियर नौकरियां भर्ती 2020: उम्मीदवार पहले अधिसूचना पढ़ें।
सभी दस्तावेज – पात्रता, आईडी प्रमाण, पता विवरण, मूल विवरण की जांच करें।
प्रवेश पत्र से संबंधित तैयार स्कैन दस्तावेज़, फोटो, साइन, आईडी प्रूफ, आदि।
आवेदन पत्र जमा करने से पहले सावधानीपूर्वक देखें। आवेदन पत्र का प्रिंट आउट निकाल लें।

Rajasthan Junior Engineer (RSMSSB) Recruitment 2020

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अब बरसती गोलियों के बीच दौड़ लगाएंगे भारत के सैनिक, मिल गया ये सुरक्षा कवच

आपने फिल्मों में देखा होगा कि हीरो चारों तरफ से बरसती गोलियों के बीच दौड़ लगाता हुआ एक—एक दुश्मन को मार गिराता है। अभी तक यह फिल्मी पर्दे पर होता आया है लेकिन अब युद्ध के असली मैदान में भारत के सैनिक हीरो की तरह बरसती गोलियों के बीच दुश्मनों का सीना चीरते हुए आगे बढ़ सकेंगे। यह सम्भव हुआ है भारत की सेना के एक मेजर के प्रयासों से जिसने एक ऐसा हेलमेट तैयार किया है जो 10 मीटर की दूरी से AK-47 से चलाई गई गोली को रोक सकता है।

 

मेजर अनूप मिश्रा ने प्रोजेक्ट अभेद के तहत यह बैलिस्टिक हेलमेट तैयार किया है। अनूप पहले भी एक बुलेटप्रूफ जैकेट भी तैयार कर चुके हैं जो स्नाइपर राइफल की गोली को रोक सकती है।

हेलमेट का वजन 1.4 किलोग्राम

हेलमेट का वजन महज 1.4 किलोग्राम है और यह 10 मीटर दूर से दागी गई AK-47 की गोलियां झेलने में सक्षम है। पुणे के मिलिट्री इंजीनियरिंग कॉलेज ने एक प्राइवेट कंपनी के साथ मिलकर दुनिया का सबसे सस्ता गनशॉट लोकेटर भी तैयार किया है। यह 400 मीटर के दायरे में गोली चलने के सटीक स्थान का पता लगा सकने में सक्षम है। बुलेटप्रूफ जैकेट बनाने के लिए सम्मानित हो चुके मेजर अनूप भारतीय सेना कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग से जुड़े हैं। जम्मू-कश्मीर में एक ऑपरेशन के दौरान बुलेटप्रूफ जैकेट पहने होने के बावजूद गोली लगने से चोट आई थी। उन्होंने सर्वत्र जैकेट तैयार की, जो स्नाइपर्स राइफल से भी सुरक्षा देने में सक्षम है। इसके लिए भारतीय सेना ने उन्हें आर्मी डिजाइन ब्यूरो एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया था।

इन जगहों पर बनती है जैकेट

दो सरकारी उपक्रमों और तीन निजी कंपनियों में इन जैकेट को तैयार किया जा रहा है। अभी तक हजारों जैकेट सैन्यबल को भेजी जा चुकी हैं। यह 700 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से आने वाली गोली को झेल सकती है। इधर बीते सोमवार को संसद के पटल पर CAG की रिपोर्ट रखी गई थी, जिसमें बताया गया कि सियाचिन और लद्दाख में तैनात भारतीय सैनिकों के पास सर्दियों के लिए विशेष कपड़ों और दूसरे सामानों के भंडार में भारी कमी है। रक्षा मंत्रालय ने CAG से कहा है कि इन कमियों को दूर कर लिया जाएगा। वहीं सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने कहा कि यह रिपोर्ट पुरानी है। आज की तारीख में सेना पूरी तरह तैयार है।

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12वीं पास वालों को सुनहरा मौका, पा सकते हैं ये सरकारी नौकरी

12वीं पास करने के बाद विपरीत परिस्थितियों के चलते आगे पढ़ाई नहीं कर पाने वाले बेरोजगारों के लिए सुनहरा मौका। राजस्थान हाई कोर्ट, अरुणाचल प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (APSSB), पूर्व मध्य रेलवे, आंध्र प्रदेश पंचायत राज विभाग और हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग ने विभिन्न पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइऩ आवेदन करना होगा।

 

 

राजस्थान हाईकोर्ट में स्टेनोग्राफर

राजस्थान हाई कोर्ट ने स्टेनोग्राफर के 434 पदों पर भर्ती निकाली है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 30 जनवरी, 2020 से शुरू हो चुकी है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 28 फरवरी, 2020 है। किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं करने वाले और 18-40 वर्ष के बीच वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। अन्य किसी माध्यम से आवेदन नहीं होगा।

बन जाएं कांस्टेबल

अरुणाचल प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (APSSB) ने हेड कांस्टेबल, फायरमैन, कांस्टेबल, फॉरेस्ट गार्ड, मिनरल गार्ड, एच/सी ड्राइवर और कॉन्स्टेबल ड्राइवर आदि 944 पदों पर भर्ती निकाली है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 28 जनवरी, 2020 से शुरू हो गई थी और आवेदन करने की अंतिम तिथि 28 फरवरी, 2020 है। 10वीं पास और 12वीं पास उम्मीदवार और 18-25 वर्ष के बीच वाले उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र हैं।

रेलवे को चाहिए 12वीं पास क्लर्क, चपरासी, स्टेनो

पूर्व मध्य रेलवे बिहार ने क्लर्क, ग्रुप डी, चपरासी, स्टेनो/टाइपिस्ट, जूनियर इंजीनियर आदि के 447 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन प्रक्रिया 28 जनवरी, 2020 से शुरू हो चुकी है और 20 फरवरी, 2020 तक चलेगी। किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 8वीं, 10वीं, 12वीं और स्नातक करने वाले उम्मीदवार आवेदन के पात्र हैं और उम्मीदवारों की आयु 18-35 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

हिमाचल को चाहिए बस कंडक्टर

हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग (HPSSC) ने कंडक्टर के 568 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके लिए 12वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को ऑनलाइन माध्यम से ही आवेदन करना होगा। अन्य किसी माध्यम से आवेदन स्वीकार नहीं होगा।

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स्नातक (ग्रेजुएट) पा सकते हैं ये नौकरी, शुरू हो चुके हैं आॅनलाइन आवेदन

नौकरी की तलाश कर रहे स्नातकों के लिए अच्छी खबर। राजस्थान अधीनस्थ और मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड (RSMSSB), भारतीय सेना, राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) ने स्नातक वालों के लिए भर्ती निकाली है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवारों को ऑनलाइन माध्यम से ही आवेदन करना होगा। अन्य माध्यम से आवेदन स्वीकार नहीं होगा।

 

इस आवेदन के साथ बन सकते हैं पटवारी

राजस्थान अधीनस्थ और मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड (RSMSSB) ने राजस्व मंडल राजस्थान अजमेर में पटवारी के 4,207 पदों पर भर्ती निकाली है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया 20 जनवरी, 2020 से शुरू हो गई है और 19 फरवरी, 2020 तक चलेगी। मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने वाले और NIELIT से उच्च स्तर का सर्टिफिकेट कोर्स या O लेवल का कोर्स करने वाले आवेदन के पात्र हैं। साथ ही उम्मीदवार की आयु 18-40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

भारतीय सेना में कमीशन

भारतीय सेना ने इंजीनियर ग्रेजुएट उम्मीदवारों के लिए शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) टेक्निकल के 191 पदों पर भर्ती निकाली है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 22 जनवरी, 2020 से शुरू हो चुकी है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 फरवरी, 2020 है। इस भर्ती के लिए किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से संबंधित विषय में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करने वाले और 20-27 वर्ष के बीच वाले उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र हैं।

इंजीनियरिंग स्नातक के लिए मौका

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने सहायक बन संरक्षक और वन रेंज ऑफिरस के 205 पदों पर भर्ती निकाली है। आवेदन प्रक्रिया 04 फरवरी, 2020 से 23 फरवरी, 2020 तक चलेगी। इसके लिए कृषि/वानिकी/इंजीनियरिंग में स्नातक करने वाले और 18-40 वर्ष के बीच वाले उम्मीदवार आवेदन के पात्र हैं। उम्मीदवार को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ही आवेदन करना होगा। अन्य किसी माध्यम से आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मैनेजमेंट ट्रेनी

विशाखापत्तनम स्टील प्लांट (VSP) के राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) ने मैनेजमेंट ट्रेनी के 188 पदों पर और रेडियोलॉजिस्ट के 01 पद पर भर्ती निकाली है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 24 जनवरी, 2020 से शुरू हो गई है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 13 फरवरी, 2020 है। किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से संबंधित ट्रेड में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करने वाले और 27 वर्ष तक के उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र हैं।

NCC स्पेशल एंट्री स्कीम भर्ती

इंडियन आर्मी ने NCC स्पेशल एंट्री स्कीम के तहत पुरुष के 50 पद और महिला के 05 पदों पर भर्ती निकाली है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 08 जनवरी, 2020 से शुरू हो चुकी है। कम से कम 50 प्रतिशत नंबर के साथ स्नातक की डिग्री प्राप्त करने वाले और अंतिम वर्ष में पढ़ाई करने वाले तथा 19-25 वर्ष के बीच वाले छात्र आवेदन करने के पात्र हैं।

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after passing 12th career option:12वीं पास करने के बाद इन कोर्स में ले सकते हैं प्रवेश, मिल जाएगी लाखों की नौकरी

क्या आप 12वीं की परीक्षा दे रहे हैं तो निश्चित रूप से आप कॅरियर को लेकर भी चिंतित होंगे कि आगे कौनसे कोर्स में दाखिला लेना है ताकि कोर्स पूरा होते ही नौकरी मिल जाए। असमंजस छोड़िए क्योंकि हम आपके लिए लाए हैं चुनिंदा उन कोर्स की जानकारी जो आपको 12वीं के बाद भविष्य सुरक्षित करने के लिए जरूरी हैं। आप इनमें से एक विकल्प चुनकर उस कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं।
आज के समय में बहुत अधिक कॉम्पिटिशन है और दूसरों से आगे निकलने के लिए आपके पास कुछ बेहतरीन स्किल्स होनी चाहिए। आपको स्किल एजुकेशन पर ध्यान देना चाहिए।

12वीं करने के बाद छात्र पांच बैचलर ऑफ वोकेशनल (BVoc) कोर्स कर सकते हैं।

इलेक्ट्रिकल स्किल्स
इलेक्ट्रिकल से संबंधित स्किल्स सीखने के लिए उम्मीदवारों को तीन साल का इलेक्ट्रिकल स्किल्स में Bvoc पाठ्यक्रम करना चाहिए। 12वीं पास या 10वीं करके दो साल का ITI डिप्लोमा करने वाले उम्मीदवार ये कर सकते हैं। इसमें छात्रों को साउंड टेक्निकल नॉलेज और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की प्रैक्टिकल स्किल्स सिखाईं जाती हैं। पाठ्यक्रम में इंजीनियरिंग साइंस, विद्युत सिद्धांत, विद्युत स्थापना, इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत, मोटर और ट्रांसफार्मर, सिंगल फेस और तीन फेस सर्किट, विद्युत नियंत्रण सर्किट, प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर प्रोगामिंग शामिल हैं।

पॉलीमैकेनिक स्किल्स
प्रोडक्शन मशीनरी और उपकरणों के लिए पाटर्स इंस्टाल करने का काम करने वालों में मशीनिंग, टर्निंग, मिलिंग, ग्राइंडिंग, हैंड स्किल्स, एसेम्बलिंग, पेनामेटिक्स, न्यूमेटिक्स, प्रोग्रामिंग और ऑपरेशन आदि स्किल्स का होना जरुरी है। पॉलीमैकेनिक स्किल्स में बैचलर ऑफ वोकेशनल करने वाले विभिन्न इंडस्ट्री में टेक्नीशियन, प्रैक्टिशनर और सुपरवाइजर आदि पद पर काम कर सकते हैं। इस पाठ्यक्रम में आपको इससे संबंधित स्किल में ट्रेंड किया जाएगा।

कारपेंटर स्किल्स
कारपेंटर स्किल्स में BVoc करने वाले को कैबिनेट बनाने, इंटीरियर वुडवर्क और फर्नीचर के निर्माण आदि कामों में निपुण किया जाता है। इस पाठ्यक्रम के तहत छात्र नई लकड़ी के उपकरण का उपयोग करके जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों की नई मशीनों पर काम करते हैं और विश्व स्तर के फर्नीचर बनाना सीखते हैं। ये पाठ्यक्रम भी तीन साल का होता है। 12वीं पास या 10वीं करके दो साल का ITI डिप्लोमा या पॉलीटेक्निक वाले उम्मीदवार ये कर सकते हैं।

आटोमोटिव स्किल्स
आटोमोटिव स्किल्स में BVoc करके आप एक बेहतर करियर बना सकते हैं। इसे करके आप मोटर वाहन स्किल्स प्राप्त करते हैं। इसके तहते आपको मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक, सॉफ्टवेयर और सेफ्टी इंजीनियरिंग सिखाई जाती है। जिसका उपयोग करके मोटरसाइकिलों का निर्माण व परिचालन, मोटर वाहन और ट्रक आदि का निर्माण कर सकें। ये भी बाकियों की तरह तीन साल का होता है। फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित से 12वीं करने वाले ये कोर्स कर सकते हैं।

IT और नेटवर्किंग हार्डवेयर स्किल्स
सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और नेटवर्किंग हार्डवेयर स्किल्स में BVoc करने वाले सूचना, प्रसंस्करण और संचार के क्षेत्र में ट्रेंड किया जाता है। डिजिटलीकरण, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), स्मार्ट शहरों और औद्योगिक स्वचालन क्षेत्रों में इन स्किल्स की काफी मांग है। ये कोर्स तीन साल का होता है और 12वीं पास उम्मीदवार ये पाठ्यक्रम कर सकते हैं। इन स्किल्स को प्राप्त करके आप एक अच्छा और बेहतरीन करियर बना सकते हैं।

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अब नेताओं के भाषणों से युद्ध जीतेगी भारतीय सेना, जर्जर होती सेना को इस बार भी नहीं मिला पर्याप्त बजट

भारत के रक्षा बजट में छह प्रतिशत का इजाफा किया गया है, लेकिन इससे ना तो नौसेना 2027 तक 200 जहाजों वाली नौसेना बन सकती है और ना ही वायुसेना को 42 लड़ाकू ​स्क्वाड्रन मिल पाएंगे। थलसेना की ताकत बढ़ाने की सोचना तो शेखचिल्ली के समान सपना देखना होगा।
ये आवंटन सेना के लिए नाकाफी है, जिसे धन के आभाव में ज़रूरत जितने उपकरण खरीदने और आधुनिकीकरण की योजना में कटौती करनी पड़ी है. वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में रक्षा क्षेत्र को 3,23,053 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है.

2020-21 में रक्षा बजट में थोड़ा इजाफा हुआ है. पिछली बार की तुलना में रक्षा बजट (माइनस पेंशन्स) 3.18 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 3.37 लाख करोड़ रुपए किया गया है. इसमें हालांकि प्रतिरक्षा पेंशन शामिल नहीं है. यह लगभग 6 प्रतिशत का इजाफा है. जिसमें कैपिटल मद में 1,13,734 करोड़ रुपए हैं जो कि पिछली बार से 10,340 करोड़ रुपए ज्यादा है.जान लें कि सरकार ने बालाकोट और उसके बाद पाकिस्तान से हवाई झड़प के बाद भारत की फौजी तैयारी की कमी उजागर होने के बावजूद सेनाओं को मजबूत करने की तमाम योजनाओं को उन सिविल नौकरशाहों की लफ्फाजी में तिलांजलि दे दी है जिन्हें मजबूत सेना की राह में रोडा अटकाने में आनन्द मिलता है। इसी के चलते बजट में हथियारों की कमी से जूझ तीनों सेनाओं की तमाम मांगों को दरकिनार कर दिया गया है।
उदाहरण के लिए मामला भारतीय नौसेना का है जिसे नकदी संकट के कारण 2027 तक 200 जहाज की मजबूत सेना बनने की अपनी योजना को फिर से बनाने के लिए मजबूर कर दिया. नई योजना के मुताबिक नौसेना 2027 तक अब 175 जहाज वाली सेना बनने का लक्ष्य है. यह उस समय है जब चीन की पीपुल लिबरेशन पार्टी (पीएलए) अपनी सेना में काफी आधुनिकीकरण कर रही है. दिसंबर 2019 में नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने इस ओर ध्यान दिलाया था कि रक्षा बजट में नौसेना का हिस्सा 2012-13 के 18 प्रतिशत के मुकाबले 2019-20 में 13 प्रतिशत कर दिया गया. सालाना प्रेस कांफ्रेंस में सिंह ने कहा था, ‘चीन उस कदम से आगे बढ़ रहा है जितनी उसकी क्षमता है. हम अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं. हमारा लक्ष्य है कि हम अपने लिए ज्यादा कुछ करें.’ पैसों की कटौती से सिर्फ नौसेना ही नहीं जूझ रही है. वायु सेना काफी लंबे समय से इससे जूझ रही है और स्थिति ये है कि वर्तमान में फाइटर्स की स्क्वाडर्न की संख्या कम होकर 28 पर आ गई है जो कि 42 आवंटित हैं. नए 114 सेनानियों से लेकर उम्र बढ़ने वाले एवरो बेड़े और मिड एयर रिफ्यूएलर्स को बदलने के लिए विमानों का परिवहन, वायु सेना को बजटीय बाधाओं के कारण ऐसे सभी कार्यक्रमों में धीमी गति से जाने के लिए मजबूर हो रहा है.इस साल जनवरी के शुरू में संसद की रक्षा पर स्टैंडिंग कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में सेना के बजट में कटौती और ठीक प्रकार से आवंटन न करने पर आलोचना की थी.समिति ने 2018-19 के बजट में कमी करने पर सरकार को लताड़ा था।

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29 जनवरी को वंदे मातरम बजाने के साथ अस्त्र—शस्त्रों को शस्त्रागारों में रख देगी भारतीय सेना

भारतीय सेना इस साल से ईसाई गीत ‘अबाइड विथ मी’ को इस साल से बजाना बंद कर देगी। रक्षा मंत्रालय ने आदेश दिया है कि अब से सेना के सालाना बीटिंग रिट्रीट कार्यक्रम में 29 जनवरी को ‘अबाइड विथ मी’ के स्थान पर वंदे मातरम बजाया जाएगा।
माना जाता है कि बाइबल से लिया गया ‘अबाइड विथ मी’ गीत, महात्मा गांधी का पसंदीदा गीत था. पारंपरिक रूप से विजय चौक पर गणतंत्र दिवस समारोह के समापन पर सैन्य बैंड के 45 मिनट लंबे कार्यक्रम का समापन इसी गीत से किया जाता है.

ये बदलाव भारतीय संगीत की धुनों को बढ़ावा देने के लिए ये बदलाव किया जा रहा है. हर साल पुरानी धुने हटाई और नई जोड़ी जाती है. ये उसी बदलाव के सिलसिले का हिस्सा है. ‘अब भारतीय धुनों पर अधिकाधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. ये सैन्य संगीत के ‘भारतीयकरण ‘ की दिशा में उठाया गया कदम है, खासकर इस आयोजन में बजाई जाने वाली धुनों का. इन धुनों का चयन सेना के सेरीमोनियल एंड वेलफेयर निदेशालय जो सेना मुख्यालय के अंतर्गत आता है वह रक्षा मंत्रालय के परामर्श के बाद फाइनल करता है.
बीटिंग रिट्रीट का धीरे धीरे भारतीयकरण’ हो रहा है. इसमें कई गैर सैन्य वाद्य यंत्र जोड़ दिए गए हैं जैसे सितार और कई भारतीय धुनें शामिल हैं. ये एक सैन्य समारोह है जिसमें सैन्य बैंड भाग लेते हैं. नरेंद्र मोदी सरकार के पहले गणतंत्र दिवस समारोह में 2015 में, भारतीय क्लासिकल वाद्य यंत्र का पहली बार इस्तेमाल किया गया. उस साल पहली बार इस आयोजन में सितार, संतूर और तबला सुनाई दिया. 2018 में 26 में से 25 धुने भारतीयों द्वारा बनाईं गई थी. इकलौती ‘अंग्रेज़ी’ धुन ‘अबाइड विथ मी’ थी. न केवल बीटिंग रिट्रीट, 2019 के गणतंत्र दिवस समारोह में भी कई बदलाव देखे गये थे. पहली बार स्वतंत्र भारत में ओरिजिनल मारश्यल ट्यून- शंखनाद बजायी गई थी. ये धुन महार रेजिमेंट की यश गाथा कहती है. बीटिंग रिट्रीट समारोह सदियों पुरानी उस सैन्य परंपरा को दर्शाती है, जिसमें जब सेना लड़ना बंद कर देती है, अपने अस्त्र रख देती है और मैदाने-जंग से अपने शिविरों में लौट आती है.

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पुर्जा पुर्जा कट मरे कबहुं न छोडे खेत के ध्येय वाक्य के साथ युद्ध के मैदान में उतरती हैं थलसेना की ये 13 रेजीमेंट

भारतीय थलसेना, विश्व की चौथी सबसे बड़ी और ताकतवर फौज, इसको ये इज्जत उसकी इन दस रेजीमेंट से मिलती है जो युद्ध के मैदान में गुरु गोविंद सिंह के इस कथन पर चलती हैं कि सूरा सो पहचानिए जो लड़े दीन के हेत! पुर्जा पुर्जा कट मरे कबहुं न छोडे खेत। अर्थात वे युद्ध का मैदान कभी नहीं छोड़ती चाहे शरीर के असंख्य टुकड़े हो जाएं। उनकी इसी वीरता के चलते पाकिस्तान तो छोड़िए विश्व की तमाम आधुनिक सेनाएं भी भारतीय थलसेना का लोहा मानती हैं।

भारतीय सेना में टुकड़ी और रेजीमेंट का विविध इतिहास रहा है जिन्होनें दुनिया भर में कई लड़ाई और अभियानों में हिस्सा लिया है और बड़ी संख्या में युद्ध सम्मान हासिल किए। ऐसी ही रेजीमेंटों की जानकारी मोबाइलपेन्यूज आपके लिए लाया है।
सेना की सबसे जाबांज इकाइयों में पहला नाम आता है पैराशूट रेजीमेंट का। पैराशूट रेजीमेंट की स्थापना आजादी से पहले 29 अक्टूबर 1941 को हुई थी। ये रेजीमेंट देश के सभी सैन्य बलों को युद्ध के दौरान हवाई मदद पहुंचाता है। सन 1999 में कारगिल युद्ध के समय 10 में से 9 पैराशूट बटालियन की तैनाती ऑपरेशन विजय के लिए हुई। कारगिल युद्ध में पैराशूट बटालियन ने महात्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रेजिमेंट के जांबाज पैरा कमांडो दुनिया के सबसे खतरनाक सैनिकों में गिने जाते हैं।
इसके अलावा ग्रेनेडियर्स रेजीमेंट को सेना में सबसे शक्तिशाली रेजीमेंट माना जाता है। जब दुश्मन इनके सामने हो तो इनका सिर्फ एक ही ध्येय वाक्य होता है ‘सर्वदा शक्तिशाली’ यानी किसी भी परिस्थिति में मजबूत रहना ही इनका लक्ष्य होता है।

गोरखा रेजीमेंट किसी परिचय की मोहताज नहीं है। उनका जयघोष ‘जय महा काली, आयो गोरखाली’ ही दुश्मन में खौफ पैदा करने के लिए काफी है। ‘कायरता से मरना अच्छा’ के साथ अपने टार्गेट को नष्ट करना, अपने लक्ष्य को हासिल करना ही इनका सबसे बड़ा उद्देश्य होता है।
भारत-पाकिस्तान युद्ध 1965 के बाद भारतीय सेना को मैकेनाइज्ड इंफ्रेंटी रेजीमेंट की जरूरत महसूस की गई। 1979 में मैकेनाइज्ड इंफ्रेंटी रेजीमेंट की स्थापना हुई। यह 26 बटालियनों के साथ देश भर में फैली हुई हैं। मैकेनाइज्ड इन्फैन्ट्री रेजिमेंट ने श्रीलंका में ऑपरेशन पवन, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक और जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन विजय में भाग लिया है। सोमालिया, कांगो, अंगोला और सियरा लियोन में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भी इसने जौहर दिखाए। भारतीय सेना की मैकेनाइज्ड इंफेंट्री रेजीमेंट को लद्दाख और सिक्किम के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी कार्रवाई का गौरव प्राप्त है।
‘जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल’ तथा ‘बोल ज्वाला माता की जय’ का युद्ध घोष करने वाली पंजाब रेजीमेंट भारत की सबसे पुरानी रेजीमेंट में से है। भारत-पाक बंटवारे के समय पंजाब रेजीमेंट का भी बंटवारा हुआ। जिसका पहला हिस्सा पाकिस्तान को मिला, तो दूसरी बटालियन भारत को। पंजाब रेजीमेंट विदेशों में शांति कार्यक्रमों में काफी सक्रिय रही। लोगेंवाला की लड़ाई में पंजाब रेजीमेंट का जौहर सभी देख चुके हैं जिसने पाकिस्तानी सेना को धूल चटा दी थी।
मद्रास रेजीमेंट भी भारतीय सेना के सबसे पुराने रेजीमेंट में से एक है। 1750 में अंग्रेजों ने इस रेजीमेंट की स्थापना की थी। रेजीमेंट में 23 बटालियन हैं। स्वधर्मे निधनं श्रेयः यानी कर्तव्य का पालन करते हुए मरना जिसके लिए गौरव की बात है। ऐसी वीर रेजीमेंट का युद्ध के दौरान केवल एक ही लक्ष्य होता है वीरा मद्रासी, अडी कोल्लु अडी कोल्लु यानी वीर मद्रासी, आघात करो और मारो, आघात करो और मारो!
राजपूत रेजीमेंट की शुरुआत सन 1778 में तब हुई, जब 31वीं रेजीमेंट ( बंगाल नेटिव इनफ़ेंट्री) में तीसरी बटालियन बनी थी। इस बटालियन ने ही हैदर अली से युद्ध में कुड्डालोर पर विजय पाई थी। उनकी इसी बहदुरी के लिए ‘विपरीत दिशाओं मे बने कटारों’ का राज चिन्ह प्रदान किया गया था, जो आज तक राजपूत रेजीमेंट का बैज है। पहली बटालियन ने दिल्ली के युद्ध में इंपेरियाल कोर्ट में मराठों को परस्त कर दिया था। भरतपुर की घेराबंदी में भी बटालियन सक्रिय थी जिसमें लगभग 400 सैनिकों ने अपनी जान गंवाई और 50 फीसदी घायल हुये थे। सर्वत्र विजय की लाइन के साथ राजपूत रेजीमेंट देश की सेवा करती है

जाट रेजीमेंट की स्थापना अंग्रेजों ने 1795 में की। जाट रेजीमेंट भारतीय सेना की एक पैदल सेना रेजीमेंट है। यह सेना की सबसे पुरानी रेजीमेंट है। रेजिमेंट ने वर्ष 1839-1947 के बीच 19 और स्वंत्रता के पश्चात आठ महावीर चक्र, आठ कीर्ति चक्र, 32 शौर्य चक्र, 39 वीर चक्र और 170 सेना पदक जीते हैं। अपने 200 से अधिक वर्षों के जीवन में, रेजीमेंट ने पहले और दूसरे विश्व युद्ध सहित भारत और विदेशों में अनेक युद्धों में भाग लिया है।
जब भी युद्ध हुआ है तो भारत की सिख रेजीमेंट ने उस युद्ध का करारा जवाब दिया हैं और भारतीय सेना का मान बढ़ाने में अपना भरपूर योगदान दिया है। सिख रेजीमेंट भारतीय सेना की सबसे खतरनाक सेना है। जिसे 72 लड़ाई ऑनर्स, 15 रंगमंच ऑनर्स, 2 परमवीर चक्र, 14 महावीर चक्र, 5 कीर्ति चक्र, 67 वीर चक्र और 1596 अन्य वीरता पुरुस्‍कार मिले हैं। रेजीमेंट की पहली बटालियन अंग्रेजों द्वारा 1846 में सिर्फ सिख साम्राज्य के विलय से पहले बनाई गई थी। सिख रेजीमेंट में 19 बटालियन हैं, जो निश्चय कर अपनी जीत करो के नारे के साथ आगे बढ़ते हैं।
अंग्रेजों ने सन 1877 में डोगरा रेजीमेंट की स्थापना की थी। डोगरा रेजीमेंट ने पाकिस्तान के दांत बार-बार खट्टे किए। डोगरा रेजीमेंट को देश के सबसे खतरनाक रेजीमेंट में गिना जाता है।
अंग्रेजों ने सन 1813 कुमाउं रेजीमेंट की स्थापना की थी। कुमाऊं रेजीमेंट अब तक 2 परम वीर चक्र, 4 अशोक चक्र, 10 महावीर चक्र, 6 कीर्ति चक्र समेत तमाम पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। कुमाऊं रेजीमेंट ने तमाम युद्धों में अपना जौहर दिखाया। कुमाऊं रेजीमेंट दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध के मैदान सियाचिन ग्लेशियर में भी तैनात है।
असम रेजीमेंट की स्थापना 15 जून 1941 को हुई थी। असम रेजीमेंट में विशेष तौर पर नॉर्थ-ईस्ट से सिपाहियों की भर्ती होती है। असम रेजीमेंट ने चीन हमले के साथ ही बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में भी हिस्सा लिया था।
बिहार रेजीमेंट की स्थापना 1941 में हुई थी। बिहार रेजीमेंट ने आजादी से पहले बर्मा युद्ध, द्वितीय विश्वयुद्ध में हिस्सा लिया, तो सभी भारत-पाक युद्धों में हिस्सा लिया। बिहार रेजीमेंट ने करगिल युद्ध में भी दुश्मनों के दांत खट्टे किए।
महार रेजीमेंट की स्थापना भी सन 1941 में हुई थी। महार रेजीमेंट को 1 परमवीर चक्र, 4 महावीर चक्र समेत तमाम पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। महार रेजीमेंट में देश के सभी कोने से सिपाहियों की भर्ती की जाती है।
नगा रेजीमेंट देश का सबसे नई रेजीमेंट है। नगा रेजीमेंट की स्थापना 1970 में हुई। नगा रेजीमेंट ने अपनी स्थापना के तुरंत बाद बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में हिस्सा लिया। नगा रेजीमेंट ने कारगिल युद्ध के समय द्रास सेक्टर में कमान संभाली। नगा रेजीमेंट को तमाम युद्ध सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।