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Violence in delhi: यहां से लाए गए थे दिल्ली में हथियार, कई सालों से नुकीले हथियारों की खेप की आपूर्ति

Violence in delhi:  दिल्ली में रविवार से शुरू हुई हिंसा में 38 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से ज्यादा घायल हैं। घायलों का इलाज गुरु तेग बहादुर (GTB) और जग प्रवेश चंद्र अस्पताल में चल रहा है। घायलों को गोली लगने, तेज धार हथियार, लोहे की रॉड, झुलसने और भारी चीजों से मारने के कारण चोटें आई हैं। 14 लोगों की मौत गोली लगने से हुई है।


सांप्रदायिक हिंसा को देखने वाले लोगों के अनुसार भीड़ देसी कट्टे, तलवार, हथौड़े, दरांती, बेसबॉल बैट, डंडे और बड़े-बड़े पत्थर हाथ में लेकर घूम रही थी। हिंसा के दौरान इस्तेमाल किए गए देसी कट्टे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों से दिल्ली लाए गए थे। भीड़ में शामिल नकाब पहने लोगों ने बताया कि वो शामली और मुजफ्फरनगर से आए हैं।

Violence in delhi:  जाफराबाद में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अगर हिंसा के पहले दिन ही उत्तर प्रदेश से लगती दिल्ली की सीमा को सील कर दिया जाता तो हालात इतने खराब नहीं होते। हिंसा के 40 घंटे बाद यह काम किया गया। दिल्ली में बंदूकों की फैक्ट्री नहीं है। यहां जितने भी गैर-कानूनी पिस्तौल इस्तेमाल हुए हैं सब बाहर से तस्करी कर लाए गए हैं।

आसानी से उपलब्ध हैं देसी कट्टे

Violence in delhi:  पिछले साल दिसंबर में दिल्ली पुलिस ने एक मामले का पर्दाफाश किया था, जिसमें पता चला कि मेरठ, शामली और मुजफ्फरनगर जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में देसी कट्टे महज 3,000-5,000 रुपये में मिल जाते हैं।
बंदूकों के अलावा दंगाई पत्थरों का भी इस्तेमाल कर रहे थे। हिंसा में शहीद हुए दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल को भी पत्थर से चोट लगी थी। लेकिन उनकी मौत गोली लगने से हुई थी। DCP अमित शर्मा को भी पत्थर लगने से सिर में गंभीर चोट आई है। फिलहाल वो अस्पताल में भर्ती हैं। भीड़ ने कई घरों पर भी पत्थरबाजी कर नुकसान पहुंचाया।

ट्रक में भरकर लाए गए थे पत्थर

मौजपुर में रहने वाले एक निवासी ने बताया, रविवार रात को यहां ट्रक में भरकर पत्थर लाए गए थे। ये लोग बाहर से आए थे। उनके वीडियो रिकॉर्ड किए हैं। सोच-समझकर हमला किया गया था। न्यू जाफराबाद रोड पर दंगाइयों ने कंक्रीट से बने डिवाइडर को तोड़ दिया और इसके लिए पत्थर और इसमें लगाई गई लोहे की रॉड को हथियारों के रूप मेें इस्तेमाल किया। दंगाइयों ने पेट्रोल बम और तलवारों की भी इस्तेमाल किया था। चांद बाग में भीड़ ने पेट्रोल बमों का भरपूर इस्तेमाल किया। पुलिस का मानना है कि दंगाइयों ने कबाड़ियों के पास से खाली बोतलें उठाई और इनमें पेट्रोल भरा। हिंसा में कम से कम तीन लोगों की झुलसने से मौत हुई है। सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें देखा जा सकता था कि दंगाई मोटरसाइकिल पर बैठकर हथियार लहराते हुए सड़कों पर घूम रहे थे।

नुकीले हथियारों का इस्तेमाल आम

दिल्ली पुलिस में तीन दशक से ज्यादा समय तक काम कर चुके पूर्व DCP एलएन राव ने बताया कि जिस इलाके में हिंसा हुई वहां की ज्यादातर युवा आबादी बेरोजगार है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों के युवा अपराधिक गतिविधियों में शामिल रहते हैं और लोगों को लूटने के लिए चाकू और ब्लेड का इस्तेमाल आम है। लोग अपने घरों में पत्थर, कांच की खाली बोतलें और ईंट जमा कर रखते हैं।

पुलिस ने दर्ज की 18 FIR

पुलिस ने अभी तक 18 FIR दर्ज की है और 106 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनसे पूछताछ में यह भी पता लगाया जाएगा कि वो हथियार कहां से लाए थे।

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India will become super power: ये हथियार मिलते ही एशिया में खत्म हो जाएगी चीन की दादागिरी, भारत बनेगा सुपर पॉवर

India will become super power: हिंद महासागर में चीन के बढ़ते दखल से निजात पाने के लिए भारत को जल्द ही वे हेलीकॉप्टर मिलने वाले हैं जो जमीन के साथ ही समुद्र में छोटी सी नाव से भी उड़ान भर सकते हैं। ये हेलीकॉप्टर पानी के नीचे छुपी पनडुब्बियों के लिए यमराज माने जाते हैं। इनके मिलते ही हिंद महासागर में घूम रही चीनी पनडुब्बियां दुम दबाकर भाग निकलेंगी। इन हेलीकॉप्टरों को प्राप्त करने के लिए भारत और अमेरिका के बीच तीन अरब डॉलर का रक्षा समझौता हुआ है। द्विपक्षीय बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

 

रोमियो और अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदेगा भारत

India will become super power:  जिस रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं, उसके तहत भारत 2.6 अरब डॉलर में 24 MH60 रोमियो हेलीकॉप्टर खरीदेगा। इसके अलावा 80 करोड़ डॉलर में छह AH 64E अपाचे हेलिकॉप्टर भी खरीदे जाएंगे। भारत आए ट्रंप ने कहा कि तीन अरब डॉलर से ज्यादा के इस रक्षा समझौते से दोनों देशों के रक्षा संबंध और मजबूत होंगे।

आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाए पाकिस्तान

India will become super power: बैठक में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साझेदारी को लेकर दोनों देशों में सहमति बनी। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान अपनी धरती पर पनप रहे आतंकवाद को खत्म करने के लिए उपाय करे। प्रधानमंत्री मोदी और मैं अपने नागरिकों को कट्टर इस्लामी आतंकवाद से बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अमेरिका पाकिस्तान की धरती से चल रहे आतंकवाद को रोकने के लिए कदम उठा रहा है।

India will become super power: ट्रंप ने अपने शानदार स्वागत के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया। मेलानिया और मैं भारत की महिमा और भारतीय लोगों की असाधारण उदारता और आदर से विस्मित हैं। हम आपके (मोदी) गृह राज्य के नागरिकों द्वारा किए गए शानदार स्वागत को हमेशा याद रखेंगे। हम यहां से सुखद अनुभव साथ लेकर जाएंगे। अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में ट्रंप का स्वागत करने के लिए एक लाख से अधिक लोग आए थे।

India will become super power: इधर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक है। भारत और अमेरिका के बीच बीच ड्रग तस्करी, आतंकवाद और संगठित अपराध जैसे गंभीर अपराधों के बारे में एक नया तंत्र बनाने पर सहमति बनी है।

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अब बरसती गोलियों के बीच दौड़ लगाएंगे भारत के सैनिक, मिल गया ये सुरक्षा कवच

आपने फिल्मों में देखा होगा कि हीरो चारों तरफ से बरसती गोलियों के बीच दौड़ लगाता हुआ एक—एक दुश्मन को मार गिराता है। अभी तक यह फिल्मी पर्दे पर होता आया है लेकिन अब युद्ध के असली मैदान में भारत के सैनिक हीरो की तरह बरसती गोलियों के बीच दुश्मनों का सीना चीरते हुए आगे बढ़ सकेंगे। यह सम्भव हुआ है भारत की सेना के एक मेजर के प्रयासों से जिसने एक ऐसा हेलमेट तैयार किया है जो 10 मीटर की दूरी से AK-47 से चलाई गई गोली को रोक सकता है।

 

मेजर अनूप मिश्रा ने प्रोजेक्ट अभेद के तहत यह बैलिस्टिक हेलमेट तैयार किया है। अनूप पहले भी एक बुलेटप्रूफ जैकेट भी तैयार कर चुके हैं जो स्नाइपर राइफल की गोली को रोक सकती है।

हेलमेट का वजन 1.4 किलोग्राम

हेलमेट का वजन महज 1.4 किलोग्राम है और यह 10 मीटर दूर से दागी गई AK-47 की गोलियां झेलने में सक्षम है। पुणे के मिलिट्री इंजीनियरिंग कॉलेज ने एक प्राइवेट कंपनी के साथ मिलकर दुनिया का सबसे सस्ता गनशॉट लोकेटर भी तैयार किया है। यह 400 मीटर के दायरे में गोली चलने के सटीक स्थान का पता लगा सकने में सक्षम है। बुलेटप्रूफ जैकेट बनाने के लिए सम्मानित हो चुके मेजर अनूप भारतीय सेना कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग से जुड़े हैं। जम्मू-कश्मीर में एक ऑपरेशन के दौरान बुलेटप्रूफ जैकेट पहने होने के बावजूद गोली लगने से चोट आई थी। उन्होंने सर्वत्र जैकेट तैयार की, जो स्नाइपर्स राइफल से भी सुरक्षा देने में सक्षम है। इसके लिए भारतीय सेना ने उन्हें आर्मी डिजाइन ब्यूरो एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया था।

इन जगहों पर बनती है जैकेट

दो सरकारी उपक्रमों और तीन निजी कंपनियों में इन जैकेट को तैयार किया जा रहा है। अभी तक हजारों जैकेट सैन्यबल को भेजी जा चुकी हैं। यह 700 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से आने वाली गोली को झेल सकती है। इधर बीते सोमवार को संसद के पटल पर CAG की रिपोर्ट रखी गई थी, जिसमें बताया गया कि सियाचिन और लद्दाख में तैनात भारतीय सैनिकों के पास सर्दियों के लिए विशेष कपड़ों और दूसरे सामानों के भंडार में भारी कमी है। रक्षा मंत्रालय ने CAG से कहा है कि इन कमियों को दूर कर लिया जाएगा। वहीं सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने कहा कि यह रिपोर्ट पुरानी है। आज की तारीख में सेना पूरी तरह तैयार है।

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रंग गोरा नहीं हुआ तो खरीदने वाले को देना होगा लाखों का मुआवजा, जेल में चक्की भी पीसनी पड़ेगी

विज्ञापनों में जिन क्रीम से रंग गोरा बनाने का दावा किया जाता है, उनसे रंग गोरा नहीं हुआ तो उन्हें बनाने और उनका विज्ञापन देकर झांसा देने वाली कम्पनियों के मालिकों, मैनेजरों और विज्ञापन में दावा करने वाले अभिनेताओं, खिलाड़ियों, सेलिब्रिटिज को पांच साल तक जेल में चक्की पीसनी पड़ेगी।

भ्रामक विज्ञापनों से लोगों को हो रही मानसिक और आर्थिक क्षति को देखते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने औ​षधि और चमत्कारिक उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन अधिनियम, 1954) में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। ऐसे विज्ञापन प्रसारित कराने वालों के खिलाफ अब 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने के साथ-साथ उन्हें पांच साल की जेल की सजा दी जाएगी।
इसमें कहा गया है कि कंपनियां भ्रामक विज्ञापनों के जरिए लोगों का मानसिक और आर्थिक शोषण करते हुए मोटा मुनाफा कमा रही है और उन पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में चमत्कारिक उपचार सहित 78 अन्य बीमारियों से संबंधित विज्ञापनों के प्रकाशन पर रोक लगाई जानी चाहिए।

इन बीमारियों के विज्ञापन नहीं करने देंगे

संशोधन प्रस्ताव में त्वचा को गोरा करने, यौन शक्ति बढ़ाने, बांझपन दूर करने, निसंतान का इलाज, हकलाना दूर करना, लंबाई बढ़ाना, समय से पहले बूढ़ा होना, बालों का झड़ना, बालों को सफेद होने से रोकना, एड्स से बचाव, मोटापे से छुटकारा, बिना वर्कआउट के वजन कम करना सहित 78 प्रकार के विज्ञापनों के प्रकाशन पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी।

 

ये सजा दी जाएगी

संशोधन प्रस्ताव में दी सजा की अवधि और जुर्माना बढ़ाने की दलील मंत्रालय ने भ्रामक विज्ञापन देने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान करने की बात कही है। विज्ञापन देने वालों पर पहली बार चेतावनी के रूप में 10 लाख रुपये का जुर्माना और दो साल की जेल दी जाएगी। यदि इसके बाद भी वह विज्ञापन जारी करते हैं तो 50 लाख रुपये जुर्माना और पांच साल की सजा दी जाएगी। मंत्रालय का मानना है कि कड़ी सजा से ही ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगाई जा सकती है। मंत्रालय की ओर से अधिनियम में संशोधन के लिए लोगों, संबंधित कंपनियों से सुझाव और आपत्तियां भी मांगी जाएगी। संशोधन का नोटिस जारी होने के 45 दिन की अवधि में सुझाव भेजे जा सकेंगे।

इन विज्ञापनों पर रहेगी रोक

संशोधन प्रस्ताव में भ्रामक उत्पादों का प्रकाश, ध्वनि, गैस, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, इंटरनेटर या वेबसाइट के जरिए दिखाई या सुनाई देने वाले किसी भी तरीके से विज्ञापन नहीं करने की बात कही गई है। इन उत्पादों के समर्थन में कोई भी नोटिस, परिपत्र, पम्फलेट, ब्रोशर, बैनर, होर्डिंग्स, पोस्टर सहित कोई भी दस्तावेज ना तो छापा जाएगा और ना ही उसे वितरित किया या दीवारों पर चिपकाया जाएगा।

प्रसिद्ध हस्तियां भी नहीं कर सकेंगी प्रचार

भ्रामक विज्ञापनों के प्रचार और प्रसार पर रोक लगाने के साथ कोई भी प्रसिद्ध हस्ती भी ऐसे उत्पादों का समर्थन और प्रचार नहीं कर सकेगी। ऐसा करने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। मंत्रालय का मानना है कि आजमन प्रसिद्ध हस्तियों को रोल मॉडल मानते हैं और उनके द्वारा कही गई बातों का अनुकरण करते हैं। इसका सीधा असर जनता पर होता है।

टेलीविजन चैनलों को पहले दी जा चुकी है चेतावनी

भ्रामक विज्ञापनों पर रोक के लिए सरकार की ओर से पहले भी कदम उठाए गए थे। लोगों के मानसिक और आर्थिक शोषण को देखते हुए सरकार ने साल 2017 की शुरुआत में सभी टेलीविजन चैनलों को अपने शौ के दौरान किसी भी प्रकार के भ्रामक विज्ञापन नहीं दिखाने के लिए निर्देश दिए थे। उस दौरान कहा गया था कि चैनल केवल लाइसेंसधारी दवा और उत्पादों का ही विज्ञापन कर सकते हैं।

 

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देश भर को पसंद ये कार कम्पनी दिसम्बर के पहले सप्ताह लंच में खाएगी सस्ती कार, डिनर में निगलेगी नौकरियां!

मारुति सुजुकी इंडिया ने अक्टूबर में अपने उत्पादन में 20.7 फीसदी की कटौती की है। कंपनी ने इस महीने 1,19,337 वाहनों का उत्पादन किया, जबकि पिछले साल इसी महीने 1,50,497 वाहनों का उत्पादन किया था। मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने अक्टूबर में अपने उत्पादन में 20.7 प्रतिशत की कटौती की है। यह लगातार नौवां महीना है जब देश की सबसे बड़ी कार कंपनी ने अपना उत्पादन घटाया है।

मारुति सुजुकी के मुताबिक, कंपनी ने अक्टूबर में 1,19,337 वाहनों का उत्पादन किया, जबकि पिछले साल इसी महीने 1,50,497 वाहनों का उत्पादन किया था। कंपनी के यात्री वाहनों का उत्पादन पिछले महीने 20.85 प्रतिशत घटकर 1,17,383 इकाई रहा जबकि अक्टूबर 2018 में यह 1,48,318 इकाई था। ऑल्टो, न्यू वैगनार, सेलेरियो, इग्निस, स्विफ्ट और डिजायर जैसे मिनी और कॉम्पैक्ट खंड में वाहनों का उत्पादन इस साल अक्टूबर में 21.57 फीसदी घटकर 85,064 इकाई रहा, जो पिछले साल इसी महीने में 1,08,462 इकाई था।

विटारा ब्रेजा, अर्टिगा और एस-क्रॉस जैसे उपयोगी वाहनों का उत्पादन पिछले महीने मामूली रूप से बढ़कर 22,736 इकाई रहा, जबकि बीते साल इसी महीने में यह 22,526 इकाई था। वहीं, मझोले आकार की सेडान सियाज का उत्पादन पिछले महीने 1,922 इकाई रहा, जो पिछले अक्टूबर 2018 में 3,513 इकाई था। इस दौरान हल्के वाणिज्यिक वाहन का उत्पादन 1,954 इकाई रहा, जो एक साल पहले इसी महीने में 2,179 इकाई था। कुल मिलाकर सितंबर महीने में मारुति सुजुकी का उत्पादन 17.48 प्रतिशत घटकर 1,32,199 इकाई रहा।

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गरीबों का खून चूंसकर धन कुबेरों ने नेताओं के पेट में ठूंसे 6 हजार 128 करोड़

पूरा देश जब मंदी से त्राहि—त्राहि कर रहा है तब गरीबों का खून चूंसने वाले धन कुबेर नेताओं का पेट भरने में जुटे हुए हैं। धनकुबेरों ने मात्र कुछ म​हीनों में नेताओं को 6 हजार 128 करोड़ रुपए दिए हैं। यह राशि सभी दलों के नेताओं को मिली है जिसका हिसाब—किताब वे जनता को कभी नहीं देते।

चुनावी और राजनीतिक सुधार के क्षेत्र में काम करने वाली गैर सरकारी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के विश्लेषण के अनुसार मार्च 2018 से अक्टूबर 2019 के बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कम से कम 12,313 चुनावी बॉन्ड बेचे। मार्च 2018 से अक्टूबर 2019 के बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने कम से कम 12,313 चुनावी बॉन्ड बेचे, जिनकी कुल कीमत 6,128 करोड़ रुपये है। देश में चुनावी बॉन्ड बेचने के लिए एसबीआई एकमात्र अधिकृत संस्था है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने एक विश्लेषण के बाद इसका खुलासा किया है। 6,128 करोड़ रुपये में से सबसे अधिक बॉन्ड मुंबई (1880 करोड़ रुपये) में खरीदे गए। इसके बाद कोलकाता (1,440 करोड़), दिल्ली (919 करोड़) और हैदराबाद (838 करोड़) में सबसे अधिक बॉन्ड खरीदे गए। अन्य शहरों में कुल मिलाकर 1051 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे गए।

इस साल के शुरुआत में एक आरटीआई के जवाब में एसबीआई ने बताया था कि 3,622 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केवल दो महीने में बेचे गए थे। अप्रैल 2019 में जहां 2,256.37 करोड़ रुपये वहीं मई 2019 में 1,365.69 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचे गए थे। मोदी सरकार ने मार्च 2018 में राजनीतिक दलों को मिलने वाले नकद चंदे के विकल्प के तौर पर चुनावी बॉन्ड को पेश किया था। ये बॉन्ड 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, 1,00,000 रुपये, 10,00,000 रुपये और 1,00,00,000 रुपये के मूल्य में उपलब्ध हैं। इन बॉन्ड की बिक्री हर तिमाही में दस दिन के लिए की जाती है, जबकि लोकसभा चुनावों के लिए इसे एक महीने के लिए खोला जाता है। इसके अलावा इन बॉन्ड की बिक्री पर सरकार अपनी तरफ से कोई भी समय सीमा तय कर सकती है।

20 महीने पहले शुरु किए गए ये बॉन्ड केवल पिछले 12 महीनों में ही बेचे गए। इन बॉन्ड्स को कोई भी भारतीय खरीद सकता है और किसी भी राजनीतिक दल खाते में जमा करा सकता है। इसके बाद इन बॉन्ड को 15 दिनों के अंदर भुनाना होता है। वित्त वर्ष 2017-18 में कुल 221 करोड़ रुपये बॉन्ड्स बेचे गए जिनमें से 210 के बॉन्ड अकेले भाजपा को मिले जबकि कांग्रेस मात्र पांच करोड़ और अन्य दलों को कुल मिलाकर छह करोड़ के बॉन्ड मिले।
अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह एक महत्वपूर्ण मामला है और इस पर ध्यान दिए जाने की जरुरत है। चुनावों में अनाधिकृत रकम की संभावना लगाता बनी हुई है। यह लोकतंत्र के लिए खराब है। चंदा लेने और देने वालों की गोपनीयता वाली इस योजना के खिलाफ एडीआर ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह फर्जी कंपनियों के सहारे राजनीतिक दलों के खाते में कालाधन पहुंचाने का माध्यम है।

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अब भी उतनी ही मस्त, मस्त दिखती है ये गर्ल, युवा देखकर थाम लेते हैं दिल

बॉलीवुड में ..शहर की लड़की…मस्त मस्त गर्ल जैसे उपनामों से मशहूर रवीना टंडन को एक ऐसी अभिनेत्री के रूप में शुमार किया जाता है जिन्होंने अपने बिंदास अभिनय से दर्शको को अपना दीवाना बनाया है । रवीना टंडन का जन्म 26 अक्टूबर 1974 को मुंबई में हुआ। पिता रवि टंडन और मां वीणा टंडन के नाम को मिलाकर उनका नाम रवीना टंडन रखा गया। रवीना टंडन को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनके पिता जाने माने फिल्म निर्माता थे। रवीना ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के जमनाबाई स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने मुंबई के मशहूर मिठठीभाई कॉलेज में दाखिला लिया। इस दौरान उनकी मुलाकात निर्देशक शांतनु शोरी से हुयी। उन्होंने रवीना टंडन को फिल्मों में काम करने की सलाह दी। इसके बाद कॉलेज में पढ़ाई छोड़कर रवीना टंडन फिल्मों में अभिनेत्री बनने का ख्वाब देखने लगीं।
रवीऩा टंडन ने अपने सिने कैरयिर की शुरूआत वर्ष 1991 में प्रदर्शित फिल्म ..पत्थर के फूल ..से की। जे.पी.सिप्पी निर्मित इस फिल्म में नायक की भूमिका सलमान खान ने निभाई थी। हालांकि यह फिल्म टिकट खिड़की पर सफल नही हो सकी लेकिन रवीना टंडन के अभिनय को दर्शको ने काफी सराहा। इसके साथ ही वह नवोदित अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित की गयीं। वर्ष 1994 रवीना टंडन के सिने कैरियर के लिये अहम साल साबित हुआ। इसी वर्ष उनकी मोहरा .लाडला .दिलवाले और अंदाज अपना अपना जैसी सुपरहिट फिल्में प्रदर्शित हुयी। फिल्म लाडला में अपने दमदार अभिनय के लिये रवीना टंडन अपने कैरियर में पहली बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए नामांकित की गयीं।

वर्ष 1994 में ही प्रदर्शित फिल्म ..मोहरा ..रवीना टंडन के कैरियर की सर्वाधिक सुपरहिट फिल्म साबित हुयी । मारधाड़ और एक्शन से भरपूर इस फिल्म में रवीना टंडन पर फिल्माया गया गीत ..तू चीज बड़ी है मस्त मस्त ..उन दिनों श्रोताओं के बीच क्रेज बन गया था। इसके बाद रवीना टंडन फिल्म इंडस्ट्री में मस्त..मस्त गर्ल के रूप में विख्यात हो गयीं। वर्ष 1995 में प्रदर्शित फिल्म ..रक्षक ..रवीना टंडन की एक और महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुयी। अशोक होंडा के निर्देशन में सुनील शेट्टी और करिश्मा कपूर की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में यूं तो रवीना टंडन ने अतिथि कलाकार के तौर पर काम किया था लेकिन फिल्म में उन पर फिल्माया गीत ..शहर की लड़की..श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ और वह दर्शको के बीच शहर की लड़की के नाम से मशहूर हो गयीं।

वर्ष 2001 में प्रदर्शित फिल्म ..दमन..रवीना टंडन के कैरियर की उल्लेखनीय फिल्मों में शुमार की जाती है । कल्पना आजमी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने दुर्गा नामक एक ऐसी महिला का किरदार निभाया था जिसे उसका पति बेहद प्रताडि़त करता है। फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिये रवीना टंडन सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित की गयीं। वर्ष 2001 में ही रवीना टंडन के कैरियर की एक और अहम फिल्म ..अक्स ..प्रदर्शित हुयी। इस फिल्म में उनका किरदार ग्रे शेडस लिये हुये था। बावजूद इसके वह दर्शको का दिल जीतने में सफल रहीं। फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिये वह फिल्म फेयर के विशेष पुरस्कार से सम्मानित की गयी।
वर्ष 2003 में प्रदर्शित फिल्म ..सत्ता .. भी रवीना टंडन के कैरियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक है। राजनीति से प्रेरित मधुर भंडारकर निर्मित इस फिल्म में रवीना टंडन ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शको के साथ ही समीक्षको का भी दिल जीतने में सफल रहीं। वर्ष 2003 में रवीना टंडन ने फिल्म ..स्टंपड ..के जरिये फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया। फिल्म ने टिकट खिड़की पर औसत व्यापार किया। इस दौरान वह फिल्म वितरक अनिल थडानी से प्यार करने लगीं। वर्ष 2004 में रवीना टंडन ने अनिल थडानी से शादी कर ली। इसके बाद रवीना टंडन ने फिल्म ..पहचान..का निर्माण किया लेकिन यह फिल्म टिकट खिड़की पर नकार दी गयी।

वर्ष 2003 में रवीना टंडन ..बाल फिल्म सोसाईटी ..की अध्यक्ष बन गयीं। हालांकि इस दौरान उन पर आरोप लगने लगे कि वह अपने काम पर ध्यान नही दे रही हैं। वर्ष 2005 में रवीना टंडन ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। वर्ष 2006 में प्रदर्शित फिल्म सैंडविच की असफलता के बाद रवीना टंडन ने फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया। रवीना टंडन के सिने कैरियर में उनकी जोड़ी अभिनेता अक्षय कुमार और गोविंदा के साथ काफी पसंद की गयी। रवीना टंडन ने अपने दो दशक लंबे सिने कैरियर में लगभग 75 से अधिक फिल्मों में काम किया है।

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भले ही सबसे ​बड़े राम भक्त कहलाएं ​लेकिन विषीषणों को आज भी पसंद नहीं करता है भारत, ये है प्रमाण

भगवान राम के परम भक्तों में शुमार लंकापति रावण के भाई वि​भीषण को भारत आज भी पसंद नहीं करता। महाराष्ट, हरियाणा विधानसभा चुनाव के साथ ही देश भर की 51 विधानसभा सीटों और दो लोकसभा सीटों के चुनाव परिणाम इसका प्रमाण है। मतदाता ने हर उस विभीषण को चुनाव हरा दिया जिसने अपनी लंका {अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी में गए नेता} को धोखा दिया था। अर्थात अपने दल को छोड़कर दूसरे दल से चुनाव लड़ने वाले नेताओं का इस चुनाव में बुरा हश्र हुआ है। अब इनमें भले ही छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज सतारा से एनसीपी के पूर्व सांसद उदयनराजे भोसले हों अथवा कांग्रेस के टिकट पर एमएलए चुने गए अल्पेश ठाकुर का भाजपा टिकट पर लड़ जाने की घटना हो। जनता ने बुरी तरह से हरा दिया।

कांग्रेस छोड़ कर भाजपा का दामन थामने वाले अल्पेश ठाकोर की गुजरात की राधनपुर विधानसभा उपचुनाव में हार हुई है। कांग्रेस के प्रतिद्वंद्वी रघु देसाई के हाथों लगभग तीन हजार मतों से हुई हार के बाद ठाकोर ने अपनी पराजय को जातिवादी तत्वों का एक षडयंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि वह चुप नहीं बैठेंगे और आने वाले समय में इसका करारा जवाब देंगे। इसी सीट पर पिछली बार कांग्रेस की टिकट पर जीते ठाकोर ने पार्टी पर कुछ माह पहले धोखेबाजी का आरोप लगाते हुए नाटकीय अंदाज में केंद्रीय सचिव तथा बिहार सह-प्रभारी समेत सभी पदों को छोड़ने की घोषणा कर दी थी। जुलाई माह में राज्यसभा उपचुनाव में भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने के बाद उन्होंने विधायक पद और कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया था। भाजपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया था। ठाकोर के साथ ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले बायड सीट के विधायक धवल सिंह झाला को भी कांग्रेस के जशु पटेल के हाथों लगभग सात सौ मतों के करीबी अंतर से हार का सामना करना पड़ा है।

इस तरह इन दोनो सीटों पर दोनो दलबदलू पूर्व विधायकों की हार के बावजूद कांग्रेस ने इन पर कब्जा बरकरार रखा है। गुजरात की छह विधानसभा सीटों में से अन्य चार में से एक खेरालु में भाजपा के अजलम ठाकोर ने कांग्रेस के बाबूजी ठाकोर को 29 हजार से अधिक मतों से तथा लुनावड़ा में भाजपा के जिग्नेश सेवक ने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के गुलाबसिंह चौहाण को 12 हजार से अधिक मतों से हराया है। दोनो सीटें पिछली बार भी भाजपा ने जीती थीं।

राज्य सरकार के मंत्री रहे तथा पिछले लोकसभा चुनाव में बनासकांठा सीट के सांसद बन गये परबत पटेल की सीट थराद में भी कांग्रेस के गुलाब राजपूत ने भाजपा के जीवराज पटेल को चार हजार से अधिक मतों से पराजित कर दिया है। अमराईवाड़ी सीट पर रस्साकशी भरी जंग के बीच भाजपा के जगदीश पटेल अंतिम चरणों की गिनती में कांग्रेस के धमेर्न्द्र पटेल से बारीक बढ़त बना ली है. यह सीट पिछली बार भाजपा के कब्जे में थी।

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अमेरिका ने फिर मरोड़ा भारत का हाथ, नाराज भारत ने कहा, हद में रहे अमेरिका

पिछले छह माह से भारत—पाकिस्तान के फटे में कश्मीर के बहाने टांग फंसाने की ताक में बैठे अमेरिका ने एक बार फिर भारत की बांह मरोड़ने की कोशिश की है। उसने न सिर्फ कश्मीर में धारा 370 हटाने के बाद के हालात पर उंगली उठाते हुए फिर दोहराया है कि राष्ट्रपति ट्रम्प कश्मीर मामले भारत—पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता को तैयार है। हालांकि भारत ने तत्काल इस पर नाराजगी जाहिर कर दी लेकिन अमेरिका पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा।

विदेश विभाग के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि कश्मीर पर अमरीकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने खेदजनक टिप्पणियां की हैं। समिति के लोगों को भारत के फ़ैसले की आलोचना करने की बजाय सीमा पार से कश्मीर में होने वाली प्रायोजित घुसपैठ की निंदा करनी चाहिए थी।
यह दुखद है कि कुछ सदस्यों ने कश्मीर के लोगों की बेहतरी और कश्मीर में शांति बनाए रखने के मकसद से उठाए गए कदम पर सवाल खड़े किए हैं। अमरीकी प्रशासन के अधिकारियों ने कहा था कि उनका एक पैनल 5 अगस्त के बाद कश्मीर जाना चाहता था लेकिन भारत ने इनकार कर दिया। जम्मू-कश्मीर मामले में पाकिस्तान लगातार अमेरिका से मध्यस्थता करने की बात कह रहा है जबकि भारत इसे अपना आंतरिक मामला मानता है।

Narendra Modi

अमेरिका ने भारत से कहा था कि वह कश्मीर में राजनीतिक और आर्थिक स्थिति सामान्य करने का ‘खाका’ पेश करने और जल्द से जल्द राजनीतिक बंदियों को रिहा करे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के ‘फॉगी बॉटम मुख्यालय’ में अमेरिकी प्रतिनिधि ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका घाटी की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। करीब 80 लाख स्थानीय लोगों का जीवन जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने और राजनीतिज्ञों को बिना कारण हिरासत में लेने और संचार प्रतिबंधों के कारण प्रभावित है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में सुरक्षा प्रतिबंधों के चलते पत्रकारों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रवक्ता ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे गिरोह निश्चित तौर पर परेशानी का कारण हैं। उन्होंने कहा, इस सिलसिले में हम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के सितंबर में आए उस बेबाक बयान का स्वागत करते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि कश्मीर में हिंसा करने के लिए पाकिस्तान से गुजरने वाला हर शख्स पाकिस्तानियों और कश्मीरियों, दोनों का दुश्मन होगा’ इस बीच, विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक बार फिर कहा कि अगर दोनों देश चाहें तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मामले पर मध्यस्थता करने को तैयार हैं। वह (ट्रम्प) निश्चित तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार हैं, अगर दोनों देश इस पर सहमत हों तो।

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फिर बरस पड़ा सुप्रीम कोर्ट, पूछा क्या वहां जंगलराज है, सरकार कानून का राज चाहती है

​देश की अंतिम अदालत सुप्रीम कोर्ट आए दिन नेताओं को फटकार लगाता है लेकिन नेता हैं कि सुधरने का नाम ही नहीं लेते। अब उसके निशाने पर आया है उत्तरप्रदेश। कोर्ट की एक पीठ ने एक मंदिर से जुड़े प्रबंधन पर सुनवाई के दौरान उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल से कहा कि हम उत्तर प्रदेश सरकार से तंग आ चुके हैं। क्या उत्तर प्रदेश में जंगलराज है! जो वहां के वकीलों को पता ही नहीं है कि किस नियम के तहत काम किया जा रहा है। आखिर ऐसा क्यों होता है कि अधिकतर मामलों में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकीलों के पास संबंधित प्राधिकरण का कोई उचित निर्देश नहीं होता।

पीठ ने बुलंदशहर के सैकड़ों वर्ष पुराने एक मंदिर से जुड़े प्रबंधन के मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल से पूछा कि क्या राज्य में कोई ट्रस्ट या सहायतार्थ ट्रस्ट एक्ट है! क्या वहां मंदिर और सहायतार्थ चंदे को लेकर कोई कानून है! उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कहा कि इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इस पर नाराज होकर पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि राज्य सरकार चाहती ही नहीं है कि वहां कानून का राज हो।
पीठ ने कहा कि लगता है वहां जंगलराज है; हम यूपी सरकार से परेशान हो गए हैं। हर दिन ऐसा देखने को मिलता है कि सरकार की ओर से पेश वकीलों के पास उचित निर्देश नहीं होते हैं। फिर चाहें वह दीवानी मामला हो या आपराधिक। पीठ ने पूछा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है! नाराज पीठ ने 2009 के इस मामले में अब उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को तलब किया है!

पीठ ने कहा, ‘हम सीधे मुख्य सचिव से जानना चाहते हैं कि क्या यूपी में मंदिर और सहायतार्थ चंदे को लेकर कोई कानून है! पीठ ने मुख्य सचिव को मंगलवार (22 अक्टूबर) को पेश होने को कहा है! यह मामला बुलंदशहर के करीब 300 वर्ष पुराने श्री सर्वमंगला देवी बेला भवानी मंदिर के प्रबंधन से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें बुलंदशहर के एक मंदिर के चढ़ावे को वहां काम करने वाले पंडों को दे दिया गया था।

इन आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर के प्रबंधन के लिए एक बोर्ड बनाया था, लेकिन इससे कुछ खास फर्क नहीं पड़ा और इस तरह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में मंदिर की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला गलत है और मंदिर के बोर्ड के गठन के लिए किसी तरह के कानून का पालन नहीं किया गया।