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Beer buffs live for 90 years: वैज्ञानिकों का दावा, 90 साल तक जीते हैं बीयर के शौकीन

Beer buffs live for 90 years: बीयर पीकर इंसान अपने दिल को कई बीमारियों से दूर रख सकता है। हाल ही में हुए एक शोध से यह खुलासा हुआ है कि हर दिन डेढ़ पाव बीयर पीने वाले लंबी आयु जीते हैं और उनका दिल भी स्वस्थ रहता है। शोध नीदरलैंड की मास्ट्रिच यूनिवर्सिटी ने किया है।

Beer buffs live for 90 years: शोध के अनुसार, जो लोग हर दिन तीन शॉट्स व्हिस्की और दो गिलास बीयर पीते हैं वो बीयर नहीं पीने वालों की तुलना में लंबी उम्र जीते हैं और उनकी आयु औसतन 90 साल तक पहुंच सकती है। अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 5 हजार 500 लोगों की पीने की आदत का विश्लेषण किया था। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए 20 सालों तक पीने की आदत का विश्लेषण किया।
सीमित मात्रा में बीयर का सेवन करना ही स्वास्थ्य के लिए है फायदेमंद अध्ययन में बीयर का सेवन करने और लंबी उम्र के बीच संबंध स्थापित किया गया है। एक थ्योरी के अनुसार ड्रिंक करना दिल की सेहत के लिए फायदेमंद है लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि ज्यादा ड्रिंक किया जाए। ज्यादा बीयर पीना फायदेमंद नहीं बल्कि नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए सीमित मात्रा में ही बीयर का सेवन करें।
बीयर पीने से दिल ऐसे स्वस्थ रहता है

बीयर में फॉलिक एसिड के साथ-साथ एंटी-ऑक्सीडेंट्स शामिल होते हैं जो हार्ट अटैक से बचाने में मदद करते हैं। 1999 में ब्रिटिश मेजिकल जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार भी रोजाना सीमित मात्रा में बीयर पीने से दिल की बीमारियां 24.7 प्रतिशत तक कम हो सकती हैं। हफ्ते में एक-दो बार सीमित मात्रा में बीयर पीने से शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ जाती है जिससे हार्ट को फायदा होता है।
नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) हर हफ्ते 14 यूनिट से ज्यादा ड्रिंक नहीं करने की सलाह देती है। अगर आप हफ्ते में अधिक बीयर या एल्कोहल का सेवन करते हैं तो उससे आपकी सेहत को नुकसान हो सकता है। यह भी सच है कि बीयर और शराब पीना सेहत के लिए बेहद हानिकारक है।

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Download sample paper CBSE board : सीबीएसई बोर्ड परीक्षा तैयारी के लिए यहां से डाउनलोड करें सैंपल पेपर

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं 15 फरवरी से चल रही हैं। परीक्षा में अच्छा स्कोर करने के लिए सैंपल पेपर हल कर सकते हैं। इससे प्रश्नों के प्रकार आदि का पता चलेगा। सैंपल पेपर इन वेबसाइट्स से प्राप्त कर सकते हैं।

 

10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के आयोजन से कुछ महीने पहले सैंपल पेपर जारी किए जाते हैं। BYJU’S परीक्षा की तैयारी के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। वेबसाइट के साथ-साथ इसका एप भी उपलब्ध है। छात्र यहां से बोर्ड परीक्षाओं के लिए सैंपल पेपर डाउनलोड कर सकते हैं। सैंपल पेपर के साथ-साथ मार्किंग स्कीम भी डाउनलोड कर सकते हैं।

mycbseguide.com
बोर्ड परीक्षा की तैयारी और सैंपल पेपर के लिए mycbseguide.com भी लोकप्रिय वेबसाइट है। यह सभी विषयों के लिए फ्री में स्टडी मैटेरियल और सैंपल पेपर ऑफर करती है। 10वीं बोर्ड परीक्षाओं के लिए फ्री में और पेड दोनों तरह से सैंपल पेपर मिलते हैं। वेबसाइट पर पिछले कई सालों के सैंपल पेपर सॉल्यूशन के साथ उपलब्ध हैं।

Vedantu
Vedantu ऑनलाइन ट्यूटरिंग प्लेटफॉर्म है। छात्रों को स्टडी मैटेरियल के साथ-साथ सैंपल पेपर ऑफर करती है। CBSE 10वीं और 12वीं के लिए सैंपल पेपर पर उपलब्ध हैं, जिन्हें फ्री डाउनलोड किया जा सकता है। यहां पिछले साल के प्रश्न पत्र आदि भी उपलब्ध हैं। साथ ही यहां से NCERT सॉल्यूशन भी प्राप्त कर सकते हैं।

डाउनलोड करें सैंपल पेपर
बोर्ड परीक्षा की और भी अच्छी तैयारी करने के लिए tiwariacademy.com से सभी विषयों के सैंपल पेपर डाउनलोड कर सकते हैं। यहां पिछले कई साल के सैंपल पेपर उपलब्ध हैं। इसके साथ ही मार्किंग स्कीम, पिछ्ले साल के प्रश्न पत्र और सॉल्यूशन भी प्राप्त कर सकते हैं। NCERT Textbooks सॉल्यूशन भी हैं।

बोर्ड सैंपल पेपर
cbse बोर्ड भी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर cbseacademic.nic.in पर सैंपल पेपर जारी करता है। छात्र आधिकारिक वेबसाइट से फ्री में सैंपल पेपर डाउनलोड कर सकते हैं।

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Karachi halva (pudding)recipe: बर्फी नहीं हलवा है ये, आप भी घर पर बनाइए यह हलवा, ये है इसकी ​रेसिपी

ये हलवा है लेकिन दिखता बर्फी की तरह है। बिल्कुल सही समझे, हम आपको उस हलवे को बनाने की रेसिपी बता रहे हैं जिसे पूरे देश में कराची हलवे के नाम से जाना जाता है। यह हलवा बाकी सभी हलवों से बिल्कुल हटकर है। ये हलवा दिखने में चमकीला और सूखे मेवों से भरपूर होता है।

 

ये है इस जग प्रसिद्ध हलवे की रेसिपी

कराची हलवा बनाने की सामग्री

1. एक कप कार्न फ्लोर।

2. दो कप चीनी।

3. दो चम्मच देसी घी।

4. आधा कप काजू और पिस्ता (छोटे-छोटे टुकड़ों में कटे हुए)।

5. एक चौथाई छोटा चम्मच टाटरी पाउडर।

6. एक चम्मच छोटी इलाइची पाउडर।

7. दो चुटकी खाने में डाला जाने वाला रंग।

कराची हलवा बनाने की विधि

एक बाउल में कार्न फ्लोर और पानी डालकर एक घोल तैयार कर लें। फिर पैन में चीनी के साथ तीन-चार कप पानी डालकर गर्म होने दें।
जब चाश्नी बन जाएं तो उसमें कार्न फ्लोर घोल डालकर धीमी आंच पर पकाएं। ध्यान रखें कि घोल को 10-15 मिनट तक लगातार चलाते रहना है, ताकि हलवा गाढ़ा और पारदर्शी हो जाए। अब हलवे में घी और टाटरी डालकर अच्छी तरह से मिलाएं।

अब एक कटोरी में खाने वाले रंग का घोल बनाकर काजू और इलायची पाउडर के साथ इसे हलवे में मिला दें। जब हलवा कड़ाही छोड़ने लगे तो गैस बंद कर दें। एक ट्रे में घी लगाकर उस पर हलवा फैला दें और उसके ऊपर कटे हुए पिस्ता को गार्निश कर दें।
तो लीजिए कराची हलवा बनकर तैयार है। अब इसे आप अपने मनचाहे आकार में काट कर इसका स्वाद ले सकते हैं।

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गरीबों का खून चूंसकर धन कुबेरों ने नेताओं के पेट में ठूंसे 6 हजार 128 करोड़

पूरा देश जब मंदी से त्राहि—त्राहि कर रहा है तब गरीबों का खून चूंसने वाले धन कुबेर नेताओं का पेट भरने में जुटे हुए हैं। धनकुबेरों ने मात्र कुछ म​हीनों में नेताओं को 6 हजार 128 करोड़ रुपए दिए हैं। यह राशि सभी दलों के नेताओं को मिली है जिसका हिसाब—किताब वे जनता को कभी नहीं देते।

चुनावी और राजनीतिक सुधार के क्षेत्र में काम करने वाली गैर सरकारी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के विश्लेषण के अनुसार मार्च 2018 से अक्टूबर 2019 के बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कम से कम 12,313 चुनावी बॉन्ड बेचे। मार्च 2018 से अक्टूबर 2019 के बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने कम से कम 12,313 चुनावी बॉन्ड बेचे, जिनकी कुल कीमत 6,128 करोड़ रुपये है। देश में चुनावी बॉन्ड बेचने के लिए एसबीआई एकमात्र अधिकृत संस्था है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने एक विश्लेषण के बाद इसका खुलासा किया है। 6,128 करोड़ रुपये में से सबसे अधिक बॉन्ड मुंबई (1880 करोड़ रुपये) में खरीदे गए। इसके बाद कोलकाता (1,440 करोड़), दिल्ली (919 करोड़) और हैदराबाद (838 करोड़) में सबसे अधिक बॉन्ड खरीदे गए। अन्य शहरों में कुल मिलाकर 1051 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे गए।

इस साल के शुरुआत में एक आरटीआई के जवाब में एसबीआई ने बताया था कि 3,622 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केवल दो महीने में बेचे गए थे। अप्रैल 2019 में जहां 2,256.37 करोड़ रुपये वहीं मई 2019 में 1,365.69 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचे गए थे। मोदी सरकार ने मार्च 2018 में राजनीतिक दलों को मिलने वाले नकद चंदे के विकल्प के तौर पर चुनावी बॉन्ड को पेश किया था। ये बॉन्ड 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, 1,00,000 रुपये, 10,00,000 रुपये और 1,00,00,000 रुपये के मूल्य में उपलब्ध हैं। इन बॉन्ड की बिक्री हर तिमाही में दस दिन के लिए की जाती है, जबकि लोकसभा चुनावों के लिए इसे एक महीने के लिए खोला जाता है। इसके अलावा इन बॉन्ड की बिक्री पर सरकार अपनी तरफ से कोई भी समय सीमा तय कर सकती है।

20 महीने पहले शुरु किए गए ये बॉन्ड केवल पिछले 12 महीनों में ही बेचे गए। इन बॉन्ड्स को कोई भी भारतीय खरीद सकता है और किसी भी राजनीतिक दल खाते में जमा करा सकता है। इसके बाद इन बॉन्ड को 15 दिनों के अंदर भुनाना होता है। वित्त वर्ष 2017-18 में कुल 221 करोड़ रुपये बॉन्ड्स बेचे गए जिनमें से 210 के बॉन्ड अकेले भाजपा को मिले जबकि कांग्रेस मात्र पांच करोड़ और अन्य दलों को कुल मिलाकर छह करोड़ के बॉन्ड मिले।
अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह एक महत्वपूर्ण मामला है और इस पर ध्यान दिए जाने की जरुरत है। चुनावों में अनाधिकृत रकम की संभावना लगाता बनी हुई है। यह लोकतंत्र के लिए खराब है। चंदा लेने और देने वालों की गोपनीयता वाली इस योजना के खिलाफ एडीआर ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह फर्जी कंपनियों के सहारे राजनीतिक दलों के खाते में कालाधन पहुंचाने का माध्यम है।

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अब भी उतनी ही मस्त, मस्त दिखती है ये गर्ल, युवा देखकर थाम लेते हैं दिल

बॉलीवुड में ..शहर की लड़की…मस्त मस्त गर्ल जैसे उपनामों से मशहूर रवीना टंडन को एक ऐसी अभिनेत्री के रूप में शुमार किया जाता है जिन्होंने अपने बिंदास अभिनय से दर्शको को अपना दीवाना बनाया है । रवीना टंडन का जन्म 26 अक्टूबर 1974 को मुंबई में हुआ। पिता रवि टंडन और मां वीणा टंडन के नाम को मिलाकर उनका नाम रवीना टंडन रखा गया। रवीना टंडन को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनके पिता जाने माने फिल्म निर्माता थे। रवीना ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के जमनाबाई स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने मुंबई के मशहूर मिठठीभाई कॉलेज में दाखिला लिया। इस दौरान उनकी मुलाकात निर्देशक शांतनु शोरी से हुयी। उन्होंने रवीना टंडन को फिल्मों में काम करने की सलाह दी। इसके बाद कॉलेज में पढ़ाई छोड़कर रवीना टंडन फिल्मों में अभिनेत्री बनने का ख्वाब देखने लगीं।
रवीऩा टंडन ने अपने सिने कैरयिर की शुरूआत वर्ष 1991 में प्रदर्शित फिल्म ..पत्थर के फूल ..से की। जे.पी.सिप्पी निर्मित इस फिल्म में नायक की भूमिका सलमान खान ने निभाई थी। हालांकि यह फिल्म टिकट खिड़की पर सफल नही हो सकी लेकिन रवीना टंडन के अभिनय को दर्शको ने काफी सराहा। इसके साथ ही वह नवोदित अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित की गयीं। वर्ष 1994 रवीना टंडन के सिने कैरियर के लिये अहम साल साबित हुआ। इसी वर्ष उनकी मोहरा .लाडला .दिलवाले और अंदाज अपना अपना जैसी सुपरहिट फिल्में प्रदर्शित हुयी। फिल्म लाडला में अपने दमदार अभिनय के लिये रवीना टंडन अपने कैरियर में पहली बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए नामांकित की गयीं।

वर्ष 1994 में ही प्रदर्शित फिल्म ..मोहरा ..रवीना टंडन के कैरियर की सर्वाधिक सुपरहिट फिल्म साबित हुयी । मारधाड़ और एक्शन से भरपूर इस फिल्म में रवीना टंडन पर फिल्माया गया गीत ..तू चीज बड़ी है मस्त मस्त ..उन दिनों श्रोताओं के बीच क्रेज बन गया था। इसके बाद रवीना टंडन फिल्म इंडस्ट्री में मस्त..मस्त गर्ल के रूप में विख्यात हो गयीं। वर्ष 1995 में प्रदर्शित फिल्म ..रक्षक ..रवीना टंडन की एक और महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुयी। अशोक होंडा के निर्देशन में सुनील शेट्टी और करिश्मा कपूर की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में यूं तो रवीना टंडन ने अतिथि कलाकार के तौर पर काम किया था लेकिन फिल्म में उन पर फिल्माया गीत ..शहर की लड़की..श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ और वह दर्शको के बीच शहर की लड़की के नाम से मशहूर हो गयीं।

वर्ष 2001 में प्रदर्शित फिल्म ..दमन..रवीना टंडन के कैरियर की उल्लेखनीय फिल्मों में शुमार की जाती है । कल्पना आजमी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने दुर्गा नामक एक ऐसी महिला का किरदार निभाया था जिसे उसका पति बेहद प्रताडि़त करता है। फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिये रवीना टंडन सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित की गयीं। वर्ष 2001 में ही रवीना टंडन के कैरियर की एक और अहम फिल्म ..अक्स ..प्रदर्शित हुयी। इस फिल्म में उनका किरदार ग्रे शेडस लिये हुये था। बावजूद इसके वह दर्शको का दिल जीतने में सफल रहीं। फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिये वह फिल्म फेयर के विशेष पुरस्कार से सम्मानित की गयी।
वर्ष 2003 में प्रदर्शित फिल्म ..सत्ता .. भी रवीना टंडन के कैरियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक है। राजनीति से प्रेरित मधुर भंडारकर निर्मित इस फिल्म में रवीना टंडन ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शको के साथ ही समीक्षको का भी दिल जीतने में सफल रहीं। वर्ष 2003 में रवीना टंडन ने फिल्म ..स्टंपड ..के जरिये फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया। फिल्म ने टिकट खिड़की पर औसत व्यापार किया। इस दौरान वह फिल्म वितरक अनिल थडानी से प्यार करने लगीं। वर्ष 2004 में रवीना टंडन ने अनिल थडानी से शादी कर ली। इसके बाद रवीना टंडन ने फिल्म ..पहचान..का निर्माण किया लेकिन यह फिल्म टिकट खिड़की पर नकार दी गयी।

वर्ष 2003 में रवीना टंडन ..बाल फिल्म सोसाईटी ..की अध्यक्ष बन गयीं। हालांकि इस दौरान उन पर आरोप लगने लगे कि वह अपने काम पर ध्यान नही दे रही हैं। वर्ष 2005 में रवीना टंडन ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। वर्ष 2006 में प्रदर्शित फिल्म सैंडविच की असफलता के बाद रवीना टंडन ने फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया। रवीना टंडन के सिने कैरियर में उनकी जोड़ी अभिनेता अक्षय कुमार और गोविंदा के साथ काफी पसंद की गयी। रवीना टंडन ने अपने दो दशक लंबे सिने कैरियर में लगभग 75 से अधिक फिल्मों में काम किया है।

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भले ही सबसे ​बड़े राम भक्त कहलाएं ​लेकिन विषीषणों को आज भी पसंद नहीं करता है भारत, ये है प्रमाण

भगवान राम के परम भक्तों में शुमार लंकापति रावण के भाई वि​भीषण को भारत आज भी पसंद नहीं करता। महाराष्ट, हरियाणा विधानसभा चुनाव के साथ ही देश भर की 51 विधानसभा सीटों और दो लोकसभा सीटों के चुनाव परिणाम इसका प्रमाण है। मतदाता ने हर उस विभीषण को चुनाव हरा दिया जिसने अपनी लंका {अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी में गए नेता} को धोखा दिया था। अर्थात अपने दल को छोड़कर दूसरे दल से चुनाव लड़ने वाले नेताओं का इस चुनाव में बुरा हश्र हुआ है। अब इनमें भले ही छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज सतारा से एनसीपी के पूर्व सांसद उदयनराजे भोसले हों अथवा कांग्रेस के टिकट पर एमएलए चुने गए अल्पेश ठाकुर का भाजपा टिकट पर लड़ जाने की घटना हो। जनता ने बुरी तरह से हरा दिया।

कांग्रेस छोड़ कर भाजपा का दामन थामने वाले अल्पेश ठाकोर की गुजरात की राधनपुर विधानसभा उपचुनाव में हार हुई है। कांग्रेस के प्रतिद्वंद्वी रघु देसाई के हाथों लगभग तीन हजार मतों से हुई हार के बाद ठाकोर ने अपनी पराजय को जातिवादी तत्वों का एक षडयंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि वह चुप नहीं बैठेंगे और आने वाले समय में इसका करारा जवाब देंगे। इसी सीट पर पिछली बार कांग्रेस की टिकट पर जीते ठाकोर ने पार्टी पर कुछ माह पहले धोखेबाजी का आरोप लगाते हुए नाटकीय अंदाज में केंद्रीय सचिव तथा बिहार सह-प्रभारी समेत सभी पदों को छोड़ने की घोषणा कर दी थी। जुलाई माह में राज्यसभा उपचुनाव में भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने के बाद उन्होंने विधायक पद और कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया था। भाजपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया था। ठाकोर के साथ ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले बायड सीट के विधायक धवल सिंह झाला को भी कांग्रेस के जशु पटेल के हाथों लगभग सात सौ मतों के करीबी अंतर से हार का सामना करना पड़ा है।

इस तरह इन दोनो सीटों पर दोनो दलबदलू पूर्व विधायकों की हार के बावजूद कांग्रेस ने इन पर कब्जा बरकरार रखा है। गुजरात की छह विधानसभा सीटों में से अन्य चार में से एक खेरालु में भाजपा के अजलम ठाकोर ने कांग्रेस के बाबूजी ठाकोर को 29 हजार से अधिक मतों से तथा लुनावड़ा में भाजपा के जिग्नेश सेवक ने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के गुलाबसिंह चौहाण को 12 हजार से अधिक मतों से हराया है। दोनो सीटें पिछली बार भी भाजपा ने जीती थीं।

राज्य सरकार के मंत्री रहे तथा पिछले लोकसभा चुनाव में बनासकांठा सीट के सांसद बन गये परबत पटेल की सीट थराद में भी कांग्रेस के गुलाब राजपूत ने भाजपा के जीवराज पटेल को चार हजार से अधिक मतों से पराजित कर दिया है। अमराईवाड़ी सीट पर रस्साकशी भरी जंग के बीच भाजपा के जगदीश पटेल अंतिम चरणों की गिनती में कांग्रेस के धमेर्न्द्र पटेल से बारीक बढ़त बना ली है. यह सीट पिछली बार भाजपा के कब्जे में थी।

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अमेरिका ने फिर मरोड़ा भारत का हाथ, नाराज भारत ने कहा, हद में रहे अमेरिका

पिछले छह माह से भारत—पाकिस्तान के फटे में कश्मीर के बहाने टांग फंसाने की ताक में बैठे अमेरिका ने एक बार फिर भारत की बांह मरोड़ने की कोशिश की है। उसने न सिर्फ कश्मीर में धारा 370 हटाने के बाद के हालात पर उंगली उठाते हुए फिर दोहराया है कि राष्ट्रपति ट्रम्प कश्मीर मामले भारत—पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता को तैयार है। हालांकि भारत ने तत्काल इस पर नाराजगी जाहिर कर दी लेकिन अमेरिका पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा।

विदेश विभाग के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि कश्मीर पर अमरीकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने खेदजनक टिप्पणियां की हैं। समिति के लोगों को भारत के फ़ैसले की आलोचना करने की बजाय सीमा पार से कश्मीर में होने वाली प्रायोजित घुसपैठ की निंदा करनी चाहिए थी।
यह दुखद है कि कुछ सदस्यों ने कश्मीर के लोगों की बेहतरी और कश्मीर में शांति बनाए रखने के मकसद से उठाए गए कदम पर सवाल खड़े किए हैं। अमरीकी प्रशासन के अधिकारियों ने कहा था कि उनका एक पैनल 5 अगस्त के बाद कश्मीर जाना चाहता था लेकिन भारत ने इनकार कर दिया। जम्मू-कश्मीर मामले में पाकिस्तान लगातार अमेरिका से मध्यस्थता करने की बात कह रहा है जबकि भारत इसे अपना आंतरिक मामला मानता है।

Narendra Modi

अमेरिका ने भारत से कहा था कि वह कश्मीर में राजनीतिक और आर्थिक स्थिति सामान्य करने का ‘खाका’ पेश करने और जल्द से जल्द राजनीतिक बंदियों को रिहा करे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के ‘फॉगी बॉटम मुख्यालय’ में अमेरिकी प्रतिनिधि ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका घाटी की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। करीब 80 लाख स्थानीय लोगों का जीवन जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने और राजनीतिज्ञों को बिना कारण हिरासत में लेने और संचार प्रतिबंधों के कारण प्रभावित है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में सुरक्षा प्रतिबंधों के चलते पत्रकारों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रवक्ता ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे गिरोह निश्चित तौर पर परेशानी का कारण हैं। उन्होंने कहा, इस सिलसिले में हम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के सितंबर में आए उस बेबाक बयान का स्वागत करते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि कश्मीर में हिंसा करने के लिए पाकिस्तान से गुजरने वाला हर शख्स पाकिस्तानियों और कश्मीरियों, दोनों का दुश्मन होगा’ इस बीच, विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक बार फिर कहा कि अगर दोनों देश चाहें तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मामले पर मध्यस्थता करने को तैयार हैं। वह (ट्रम्प) निश्चित तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार हैं, अगर दोनों देश इस पर सहमत हों तो।

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फिर बरस पड़ा सुप्रीम कोर्ट, पूछा क्या वहां जंगलराज है, सरकार कानून का राज चाहती है

​देश की अंतिम अदालत सुप्रीम कोर्ट आए दिन नेताओं को फटकार लगाता है लेकिन नेता हैं कि सुधरने का नाम ही नहीं लेते। अब उसके निशाने पर आया है उत्तरप्रदेश। कोर्ट की एक पीठ ने एक मंदिर से जुड़े प्रबंधन पर सुनवाई के दौरान उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल से कहा कि हम उत्तर प्रदेश सरकार से तंग आ चुके हैं। क्या उत्तर प्रदेश में जंगलराज है! जो वहां के वकीलों को पता ही नहीं है कि किस नियम के तहत काम किया जा रहा है। आखिर ऐसा क्यों होता है कि अधिकतर मामलों में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकीलों के पास संबंधित प्राधिकरण का कोई उचित निर्देश नहीं होता।

पीठ ने बुलंदशहर के सैकड़ों वर्ष पुराने एक मंदिर से जुड़े प्रबंधन के मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल से पूछा कि क्या राज्य में कोई ट्रस्ट या सहायतार्थ ट्रस्ट एक्ट है! क्या वहां मंदिर और सहायतार्थ चंदे को लेकर कोई कानून है! उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कहा कि इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इस पर नाराज होकर पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि राज्य सरकार चाहती ही नहीं है कि वहां कानून का राज हो।
पीठ ने कहा कि लगता है वहां जंगलराज है; हम यूपी सरकार से परेशान हो गए हैं। हर दिन ऐसा देखने को मिलता है कि सरकार की ओर से पेश वकीलों के पास उचित निर्देश नहीं होते हैं। फिर चाहें वह दीवानी मामला हो या आपराधिक। पीठ ने पूछा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है! नाराज पीठ ने 2009 के इस मामले में अब उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को तलब किया है!

पीठ ने कहा, ‘हम सीधे मुख्य सचिव से जानना चाहते हैं कि क्या यूपी में मंदिर और सहायतार्थ चंदे को लेकर कोई कानून है! पीठ ने मुख्य सचिव को मंगलवार (22 अक्टूबर) को पेश होने को कहा है! यह मामला बुलंदशहर के करीब 300 वर्ष पुराने श्री सर्वमंगला देवी बेला भवानी मंदिर के प्रबंधन से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें बुलंदशहर के एक मंदिर के चढ़ावे को वहां काम करने वाले पंडों को दे दिया गया था।

इन आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर के प्रबंधन के लिए एक बोर्ड बनाया था, लेकिन इससे कुछ खास फर्क नहीं पड़ा और इस तरह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में मंदिर की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला गलत है और मंदिर के बोर्ड के गठन के लिए किसी तरह के कानून का पालन नहीं किया गया।