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आईसीसी विश्वकप के सेमीफाइनल में पुहंचकर ये बोले आस्ट्रेलिया के कप्तान आरोन फिंच

लंदन, । आईसीसी विश्वकप के सेमीफाइनल में आठवीं बार पहुंचने के बाद गत चैंपियन आस्ट्रेलिया के कप्तान आरोन फिंच ने कहा है कि विश्व की नंबर एक टीम तथा मेजबान इंग्लैंड को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचना उनके लिये बहुत सुखद है।

इंग्लैंड के खिलाफ कल 64 रन की महत्वपूर्ण जीत हासिल करने के बाद फिंच ने कहा कि उनकी टीम इस टूर्नामेंट में संतुलित होकर खेल रही है और वह बहुत अच्छी लय में है। फिंच ने कहा, “हमने अब तक अच्छा क्रिकेट खेला है।

टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में क्वालीफाई करना इस विश्वकप का पहला पड़ाव है। मैं टीम के प्रदर्शन से काफी खुश हूं। हम सही दिशा में खेल रहे हैं। इंग्लैंड मजबूत टीम है और वह बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही क्षेत्रों में इतनी आसानी से हमें आगे बढ़ने नहीं दे सकती थी।”

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कई बार किस्मत से मिलते हैं विकेट: मोहम्मद शमी

लंदन।,भारतीय तेम्ज़ गेंदबाज़ मोहमद शमी ने कहा है कि इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों को परेशान करने के बावजूद विकेट नहीं निकाल पाना काफी निराशाजनक रहा लेकिन कई बार विकेट भी किस्मत से मिलते हैं।

Mohammed Shami

इंग्लैंड ने दूसरी पारी में आठ विकेट पर 423 रन बनाने के बाद पारी घोषित कर दी थी और भारत के सामने जीत के लिये 464 का बड़ा लक्ष्य रखते हुये मैच में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। मैच में जहां भारतीय बल्लेबाज़ों ने निराश किया वहीं गेंदबाज़ भी खास कमाल नहीं कर सके हैं और शमी ने पहली पारी में 72 रन पर कोई विकेट नहीं लिया जबकि इंग्लैंड की दूसरी पारी में 110 रन देकर वह दो ही विकेट ले सके।

ओवल मैदान पर खेले जा रहे पांचवें और अंतिम टेस्ट के चौथे दिन के खेल की समाप्ति के बाद शमी ने कहा कि गेंदबाज़ों ने काफी आक्रामकता के साथ गेंदबाजी की थी लेकिन उन्हें विकेट नहीं मिल सके। तेज़ गेंदबाज़ों में शमी के साथ इशांत शर्मा ने गेंदबाजी आक्रमण का जिम्मा संभाला जबकि तेज़ गेंदबाजी ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या को इस मैच में शामिल नहीं किया गया है।ऐसे में शमी को अधिक ओवर मैच में गेंदबाजी करनी पड़ी।

उन्होंने इंग्लैंड की दूसरी पारी में 25 ओवर तक गेंदबाजी की। शमी ने कहा,“ यह कई बार किस्मत पर निर्भर करता है। एक गेंदबाज़ के तौर पर आप हमेशा सही दिशा में गेंदबाजी करना चाहते हो, खासकर नयी गेंद के साथ। लेकिन विकेट मिलना किस्मत पर भी निर्भर करता है, हालांकि विकेट नहीं निकाल पाना बहुत ही परेशान करता है।”उन्होंने कहा,“हमारी गेंदों ने कई बार इंग्लिश बल्लेबाज़ों को परेशान किया लेकिन विकेट नहीं मिले और हमें इस बात काे स्वीकार करना होगा। कई बार जब आपके पास एक गेंदबाज़ कम हेाता है तो इस तरह की परिस्थतियों में यह मुश्किल भरा होता है क्योंकि यह पिच तेज़ गेंदबाज़ों के लिये मददगार है।”

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ICC क्रिकेट वर्ल्‍ड कप- 16 जून को पाकिस्‍तान से भारत का मुकाबला होगा

कोलकाता, गत सेमीफाइनलिस्ट भारत 2019 में इंग्लैंड में 30 मई से 14 जुलाई के बीच खेले जाने वाले एकदिवसीय क्रिकेट विश्व कप में अपने अभियान की शुरुआत पांच जून को दक्षिण अफ्रीका की मजबूत टीम के खिलाफ करेगा जबकि चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से उसकी बहु प्रतीक्षित भिड़ंत 16 जून को होगी।

ICC Cricket World Cup
ICC Cricket World Cup

 

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के मुख्य कार्यकारियों की बैठक के बाद यह जानकारी दी गयी। टूर्नामेंट के शुरूआती कार्यक्रम में आईपीएल ले अगले साल होने वाले 12 वें संस्करण के चलते कुछ बदलाव किया गया है। भारत को विश्व कप में अपना पहला मैच वैसे दो जून को खेलना था लेकिन लोढा समिति की सिफारिशों के मद्देनजर भारत अपना पहला मैच पांच जून को खेलेगा।

दरअसल लोढा समिति की सिफारिशों के अनुसार आईपीएल और किसी अंतरराष्ट्रीय मैच के बीच 15 दिन का अंतर रखना जरूरी है और बीसीसीआई ने इस बात को ध्यान में रखा है। 2019 में आईपीएल 29 मार्च से 19 मई के बीच खेला जाना और 15 दिन के अंतर की बाध्यता के चलते भारतीय टीम अपना पहला मैच पांच जून को ही खेल सकती है। यही वजह है कि भारत अपना अभियान पांच जून को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच से शुरू करेगा।

आम तौर पर इससे पहले तक आईसीसी के शीर्ष टूर्नामेंटों की शुरुआत भारत और पाकिस्तान के मुकाबले से होती थी लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। भारतीय उप महाद्वीप के ये दो प्रतिद्वंद्वी 16 जून को आमने सामने होंगे। पिछले विश्व कप-2015 में ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड और चैंपियंस ट्रॉफी -2017 में इंग्लैंड के बर्मिंघम में दोनों की भिड़ंत से टूर्नामेंट की शुरुआत हुई थी। 2019 का विश्व कप 1992 के विश्व कप की तरह राउंड रोबिन आधार पर खेला जाएगा जिसमें सभी 10 टीमें एक दूसरे के खिलाफ खेलेंगी। वेस्ट इंडीज और अफगानिस्तान ने क्वालीफायर से विश्व कप में खेलने का अधिकार पाया है।

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(इस खबर को मोबाइल पे न्यूज संपादकीय टीम ने संपादित नहीं किया है। यह एजेंसी फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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अफगान से लेकर इंग्लैंड तक फिदा है उस पर

क्या आप जानते हैं कि ​राजनीति के अखाडे में खूब पसंद किए जाने वाला पकौडा अखिल भारतीय नहीं वैश्विक ब्रांड है। भारत के लगभग हर प्रदेश में चाव से खाए जाने वाले पकौडे को पूरी दुनिया में बनाया और खाया जाता है। अलबत्ता आजकल पकौडा भारतीय राजनीति में भी खूश मशहूर हो गया है। भाजपा हो अथवा कांग्रेस के नेता देश के किसी भी हिस्से में चर्चा करते हैं तो पूरे देश को उसका अर्थ अपने आप समझ आ जाता है। पकौड़े वास्तव में देश के लगभग हर हिस्से में बहुतों को रोजगार दे रहे हैं और उनके परिवार का पेट भर रहे हैं। इन गर्मागर्म बहसों और चर्चाओं के बीच जिन पकौड़ों को अचानक इतनी तबज्जो मिलने लगी है, उनके देश के कोने कोने के साथ साथ देश के बाहर भी बहुत कद्रदान हैं और सड़क से लेकर पांच सितारा होटलों तक इनकी धूम है। 

 

 

दिल्ली के स्ट्रीट फूड में शामिल तरह-तरह की सब्जियों या पनीर के पकौड़े हों, दक्षिण भारत में सड़क किनारे मिलने वाली भजिया हो, बिहार का मुंह में पानी लाने वाला तरुआ या बचका, पश्चिम बंगाल का आलू चॉप, प्याज से बनने वाली पियाजी, केवल बेसन से बनी फुलौरी हो या मछली के पकौड़े, राजस्थान का चटपटा मिर्ची बड़ा हो, महाराष्ट्र में मिलने वाली भाजी या सीफूड के पकौड़े हों अथवा गोवा में बनाये जाने वाले काजू के पकौड़े, सभी बड़े पैमाने पर पसंद किए जाते हैं। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नाम से जाना जाने वाला पकाैड़ा मूल रूप से देसी व्यंजन है।

पूरे भारतीय उप महाद्वीप में इसके कद्रदानों की कमी नहीं है। बेसन के घोल में लिपटी तरह-तरह की सब्जियों और मछली, अंडे तथा सीफूड के पकौड़ों को पाकिस्तान, बंगलादेश और नेपाल में भी खासा पसंद किया जाता है। पकौड़ा अफगानी भोजन का भी अभिन्न हिस्सा है।

दक्षिण एशिया के अलावा यह ब्रिटेन में भी खासा मशहूर है। विशेष रूप से स्‍कॉटलैंड में इसके कद्रदान कुछ ज्‍यादा ही हैं, वहां फास्‍ट फूड स्‍नैक के रूप में यह काफी पसंद किया जाता है। इटली में ऐसा ही एक व्यंजन ‘फ्रितो मिस्तो’ के नाम से जाना जाता है जिसमें सब्जियों, मांस और सीफूड को विशेष प्रकार के घोल में लपेटकर ऑलिव आयल में तला जाता है। अमेरिका और यूरोप में यह ‘फ्रिटर्स’ के नाम से मशहूर है। यहां मक्के के दानों और सब्जियों को छोटे टुकड़ों में काट कर घोल में लपेट कर तला जाता है। चीन में भी इसके चलन का जिक्र मिलता है। इसके अलावा जापान में पारदर्शी चावल के आटे में लिपटा नाजुक सा नजर आने वाला ‘टेंपुरा’ भी पकौड़े का ही एक अवतार है जो मांसाहारी तथा शाकाहारी दोनों ही प्रकार का होता है।

उत्तर भारत में सर्दी और बरसात के रिमझिम मौसम में खास तौर पर लोग पकौड़ों का लुत्फ उठाते हैं। किसी अतिथि के अचानक आगमन पर उसके स्वागत में तुरत-फुरत में यह व्यंजन तैयार किया जा सकता है। दोपहर के भोजन में व्यंजनों की संख्या बढ़ानी हो या शाम की चाय के साथ कुछ स्वादिष्ट खिलाने की इच्छा हो, पकौड़े सबसे पहले याद आते हैं।

शहरों में ही नहीं गांवों में भी जगह-जगह सड़क किनारे ठेलाें पर अक्सर पकौड़े बिकते नजर आ जाते हैं लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि यह केवल सड़क किनारे ही मिलते हैं। नामी-गिरामी रेस्तरां और पांच सितारा होटलों के मेन्यू में भी इसे प्रमुखता से शामिल किया जाता है और लोग इसका खूब लुत्फ उठाते हैं।