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आर्थिक धरातल पर लगातार लुढ़कते हुए रसातल में जा रहा है देश का ये क्षेत्र

कोरोना वायरस ‘कोविड-19 के मद्देनजर जारी लॉकडाउन के कारण देश के सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में अप्रैल में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। विदेशी तथा घरेलू माँग में तेज गिरावट के कारण आईएचएस मार्किट द्वारा बुधवार को जारी सेवा कारोबार गतिविधि सूचकांक घटकर 5.4 रह गया जबकि मार्च में यह 49.3 दर्ज किया गया। सूचकांक का 50 से नीचे रहना गतिविधियों में कमी और इससे ऊपर रहना वृद्धि को दर्शाता है।

अप्रैल की गिरावट एजेंसी के सर्वेक्षण के 14 साल के इतिहास में सबसे तेज गिरावट है। इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये आईएचएस मार्किट के अर्थशास्त्री जो हेज ने कहा ”अप्रैल में देश की सेवा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में माह दर माह आधार पर अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गयी है। चालीस अंकों से अधिक की यह गिरावट दिखाती है कि लॉकडाउन के कड़े प्रतिबंधों के कारण इस क्षेत्र में लगभग ठहराव आ गया है।

सर्वे में हिस्सा लेने वाले 97 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि उनके कारोबार में कमी आयी है। अंतर्राष्ट्रीय बिक्री का सूचकांक घटकर शून्य पर आ गया। कई क्लाइंटों ने पुराने ऑर्डर भी रद्द किये जिसने उत्पादन में गिरावट में और योगदान दिया। इससे पहले 04 मई को विनिर्माण क्षेत्र के आँकड़े जारी हुये थे जिसमें खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) लुढ़ककर 27.4 अंक पर रह गया था।

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सिनेमा के युगपुरुष के नाम से जाना जाता था, इस संगितकार को

मुंबई | भारतीय सिनेमा के युगपुरुष चित्रगुप्त का नाम एक ऐसे संगीतकार के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने लगभग चार दशक तक अपने सदाबहार और रूमानी गीतों से श्रोताओं के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी।बिहार के गोपालगंज जिले में 16 नवंबर 1917 को जन्में चित्रगुप्त श्रीवास्तव की बचपन से ही संगीत के प्रति विशेष रूचि थी। चित्रगुप्त ने अर्थशास्त्र तथा पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वह पटना में लेक्चरर के रूप में काम करने लगे लेकिन उनका मन इस काम में नहीं लगा और वह बतौर संगीतकार फिल्म इंडस्ट्री में अपना करियर बनाने के लिये मुंबई आ गये।

मुंबई आने के बाद चित्रगुप्त को काफी संघर्ष करना पड़ा। इस दौरान उनकी मुलाकात संगीतकार एस.एन.त्रिपाठी से हुई और वह उनके सहायक के तौर पर काम करने लगे। वर्ष 1946 में प्रदर्शित फिल्म ‘तूफान क्वीन’ से चित्रगुप्त ने बतौर संगीतकार अपने करियर की शुरुआत की लेकिन फिल्म की विफलता के कारण वह अपनी पहचान बनाने में असफल रहे।इस बीच चित्रगुप्त ने अपना संघर्ष जारी रखा। अपने वजूद की तलाश में चित्रगुप्त को फिल्म इंडस्ट्री में लगभग 10 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। वर्ष 1952 में प्रदर्शित फिल्म ‘सिंदबाद द सेलर’ चित्रगुप्त के सिने करियर की पहली हिट फिल्म साबित हुईं। इस फिल्म ने सफलता के नये कीर्तिमान स्थापित किये।

इस बीच चित्रगुप्त की मुलाकात महान संगीतकार एस.डी.बर्मन से हुयी जिनके कहने पर उन्हें उस जमाने के मशहूर बैनर ‘एवीएम’ की फिल्म ‘शिव भक्त’ में संगीत देने का मौका मिला। ‘शिव भक्त’ की सफलता के बाद चित्रगुप्त ए.वी.एम बैनर के तले बनने वाली फिल्मों के निर्माताओं के चहेते संगीतकार बन गये।वर्ष 1957 में प्रदर्शित फिल्म ‘भाभी’ की सफलता के बाद चित्रगुप्त सफलता के शिखर पर जा पहुंचे। इस फिल्म में उनके संगीत से सजा यह गीत “चल उड़ जा रे पंछी कि अब ये देश हुआ बेगाना” श्रोताओं के बीच आज भी काफी लोकप्रिय है।बहुमुखी प्रतिभा के धनी चित्रगुप्त ने संगीत निर्देशन के अलावा अपने पार्श्व गायन से भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उन्होंने कई फिल्मों के लिये गीत भी लिखे। चित्रगुप्त ने हिंदी फिल्मों के अलावा भोजपुरी, गुजराती और पंजाबी फिल्मों के लिये भी संगीत दिया और सभी फिल्में सुपरहिट साबित हुईं।

सत्तर के दशक में चित्रगुप्त ने फिल्मों में संगीत देना काफी हद तक कम कर दिया क्योंकि उनका मानना था कि अधिक फिल्मों के लिये संगीत देने से अच्छा है, शानदार संगीत देना। उन्होंने लगभग चार दशक के अपने सिने करियर में 150 फिल्मों को संगीतबद्ध किया। अपने संगीतबद्ध गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले महान संगीतकार चित्रगुप्त 14 जनवरी 1991 को इस दुनिया को अलविदा कह गये।