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भरपूर नींद चाहते हैं तो रोजाना खाएं एक केला

If you want sleep Eat banana every day:

केले में विटामिन, मैगनिशियम और फाइबर के साथ ही पौटेशियम और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। रोजाना एक केले के सेवन से शरीर को रोगों से लड़ने में मदद मिलती है, साथ ही इसके सेवन से तनाव और अनिद्रा जैसी समस्याओं से भी बचाव हो सकता है। शरीर की हर छोटी-बड़ी हरकतों के लिए हर कोई हड्डियों पर निर्भर हैं। ऐसे में रोजाना एक केले का सेवन इनको स्वस्थ रखने में सहायता कर सकता है। केले में मैग्नीशियम और कैल्शियम की अच्छी मात्रा सम्मिलित होती हैं जो हड्डियों के विकास के साथ ही उन्हें मजबूती प्रदान करने में सहायक हैं। केले में मौजूद मैग्नीशियम ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों की रोकथाम में मदद करता है। इस बीमारी के कारण हड्डियां कमजोर और नाजुक हो जाती हैं। If you want sleep Eat banana every day:

 

रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए

संक्रमण और बीमारियों से बचने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता का स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाएं रखने के लिए रोजाना एक केले का सेवन फायदेमंद हो सकता है। केला विटामिन-ए और सी जैसे इम्यून बूस्टर गुणों से समृद्ध होता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने का काम करते हैं। इसलिए खुद को बीमारियों से बचाने और तंदुरुस्त रहने के लिए अपनी डाइट में केला जरूर शामिल करें। If you want sleep Eat banana every day:

अवसाद को दूर करने में मदद

मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी रोजाना एक केले का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि केला विटामिन-बी6 से समृद्ध होता है, जो मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने का काम करता है। केले में मौजूद मैग्नीशियम अवसाद जैसी समस्याओं को भी दूर करने में मदद करता है। साथ ही नर्वस सिस्टम पर सकारात्मक प्रभाव डालता हैं। दिल को स्वस्थ बनाए रखने के लिए भी रोजाना एक केले का सेवन बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व सम्मिलित होते हैं जो रक्तचाप को नियंत्रित कर हृदय जोखिम को कम कर सकते हैं। इसमें पाए जाने वाला मैग्नीशियम हृदय को पंपिंग करने में मदद करता है। हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक आदि समस्याओं पर भी काबू पाने में मदद करता है। If you want sleep Eat banana every day:

अनिद्रा से भी छुटकारा

रोजाना एक केले का सेवन करने से अनिद्रा से भी छुटकारा पाया जा सकता है। केला मैग्नीशियम युक्त होने से मांसपेशियों को आराम देकर अच्छी नींद दिलवाता है। तनाव मुक्त रहने के लिए भी केले का सेवन फायदेमंद है। केले में विटामिन-सी पाया जाता है जो तनाव जैसी मानसिक स्थितियों पर सकारात्मक प्रभाव डालने में मदद करता है। If you want sleep Eat banana every day:

 

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Central Board of Secondary Education (CBSE) Top schools: ये हैं देश के टॉप CBSE स्कूलों की सूची, बच्चों को बना देते हैं जीनियस

Central Board of Secondary Education (CBSE) Top schools:आज के समय में माता-पिता बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए लाखों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन इसके बाद भी सही और अच्छे स्कूल का चयन नहीं कर पाते हैं। हम यहां देश के टॉप (Central Board of Secondary Education) Top schools(CBSE): सीबीएसई स्कूलों की सूची लेकर आए हैं। अपने बच्चों को यहां एड​मिशन दिलाइए और उन्हें जीनियस बनाने के रास्ते पर भेज ​दीजिए।

 

DAV स्कूल
Central Board of Secondary Education (CBSE) Top schools: CBSE से संबद्ध टॉप स्कूलों में पहला नाम DAV ग्रुप ऑफ स्कूल्स का है। इनमें भी DAV सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मोगप्पैर अव्वल है। 1989 में DAV ग्रुप ऑफ स्कूल्स के तहत स्थापित इस स्कूल को तमिलनाडु आर्य समाज एजुकेशनल सोसायटी चेन्नई मैनेज करती है। स्कूल में अच्छी क्लास, प्रयोगशालाएं हैं।

झारखण्ड का यह स्कूल भी टॉप
Central Board of Secondary Education (CBSE) Top schools: CBSE से संबद्ध टॉप स्कूलों में रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ, देवघर झारखंड लड़कों का आवासीय विद्यालय है। इसकी स्थापना 1922 में हुई थी। स्कूल छात्र के व्यक्तित्व विकास पर जोर देता है। इसी के चलते इसे भारत के टॉप CBSE स्कूलों में स्थान मिला है। स्कूल में बड़ा परिसर और प्रयोगशालाएं हैं। एक प्रशिक्षण और प्लेसमेंट सेल भी है।

DPS का जवाब नहीं
Central Board of Secondary Education (CBSE) Top schools: दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) के सभी स्कूल का नाम टॉप स्कूलों की सूची में है, लेकिन नई दिलली के आरके पुरम का दिल्ली पब्लिक स्कूल सबसे टॉप है। 1972 में स्थापित इस स्कूल CBSE में प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा और एक साक्षात्कार देना होता है।

इस स्कूल का भी काफी नाम
Central Board of Secondary Education (CBSE) Top schools: चिन्मय अंतर्राष्ट्रीय आवासीय विद्यालय (CIRS), कोयंबटूर 1996 में स्थापित किया गया था। स्कूल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में विश्वास करता है। बच्चे को शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्तर पर ढालने का प्रयास करता है।

(KVS) केवीएस और जेएनवी है बेहतरीन
Central Board of Secondary Education (CBSE) Top schools: सरकारी स्कूलों की बात करें तो केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) और जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) की गिनती स्वयं CBSE नायाब हीरे के तौर पर करता है। JNV में प्रवेश के लिए जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा होती है। इसकी वेबसाइट पर जाकर पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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Download sample paper CBSE board : सीबीएसई बोर्ड परीक्षा तैयारी के लिए यहां से डाउनलोड करें सैंपल पेपर

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं 15 फरवरी से चल रही हैं। परीक्षा में अच्छा स्कोर करने के लिए सैंपल पेपर हल कर सकते हैं। इससे प्रश्नों के प्रकार आदि का पता चलेगा। सैंपल पेपर इन वेबसाइट्स से प्राप्त कर सकते हैं।

 

10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के आयोजन से कुछ महीने पहले सैंपल पेपर जारी किए जाते हैं। BYJU’S परीक्षा की तैयारी के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। वेबसाइट के साथ-साथ इसका एप भी उपलब्ध है। छात्र यहां से बोर्ड परीक्षाओं के लिए सैंपल पेपर डाउनलोड कर सकते हैं। सैंपल पेपर के साथ-साथ मार्किंग स्कीम भी डाउनलोड कर सकते हैं।

mycbseguide.com
बोर्ड परीक्षा की तैयारी और सैंपल पेपर के लिए mycbseguide.com भी लोकप्रिय वेबसाइट है। यह सभी विषयों के लिए फ्री में स्टडी मैटेरियल और सैंपल पेपर ऑफर करती है। 10वीं बोर्ड परीक्षाओं के लिए फ्री में और पेड दोनों तरह से सैंपल पेपर मिलते हैं। वेबसाइट पर पिछले कई सालों के सैंपल पेपर सॉल्यूशन के साथ उपलब्ध हैं।

Vedantu
Vedantu ऑनलाइन ट्यूटरिंग प्लेटफॉर्म है। छात्रों को स्टडी मैटेरियल के साथ-साथ सैंपल पेपर ऑफर करती है। CBSE 10वीं और 12वीं के लिए सैंपल पेपर पर उपलब्ध हैं, जिन्हें फ्री डाउनलोड किया जा सकता है। यहां पिछले साल के प्रश्न पत्र आदि भी उपलब्ध हैं। साथ ही यहां से NCERT सॉल्यूशन भी प्राप्त कर सकते हैं।

डाउनलोड करें सैंपल पेपर
बोर्ड परीक्षा की और भी अच्छी तैयारी करने के लिए tiwariacademy.com से सभी विषयों के सैंपल पेपर डाउनलोड कर सकते हैं। यहां पिछले कई साल के सैंपल पेपर उपलब्ध हैं। इसके साथ ही मार्किंग स्कीम, पिछ्ले साल के प्रश्न पत्र और सॉल्यूशन भी प्राप्त कर सकते हैं। NCERT Textbooks सॉल्यूशन भी हैं।

बोर्ड सैंपल पेपर
cbse बोर्ड भी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर cbseacademic.nic.in पर सैंपल पेपर जारी करता है। छात्र आधिकारिक वेबसाइट से फ्री में सैंपल पेपर डाउनलोड कर सकते हैं।

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CBSE Board Exam 2020: CBSE) 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में चाहते हैं अच्छा स्कोर तो ऐसे करें पढ़ाई

15 फरवरी, 2020 से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा शुरू हो जाएंगी। परीक्षा में एक सप्ताह से भी कम समय रह गया है। ये समय बहुत महत्वपूर्ण है।
परीक्षा में अच्छा स्कोर जरुरी है। इसके लिए समय का सही उपयोग करना होगा।

 

पूरी नींद जरूर ले, शेष समय में रिवीजन करें

परीक्षा में प्रदर्शन के लिए फ्रेश रहना जरुरी है, फ्रेश रहने के लिए पूरी नींद लेनी चाहिए। छात्रों को सात से आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए। डेटशीट को देखकर विषय का रिवीजन करना चाहिए। उस विषय का पहले रिवीजन करें जिसका पेपर पहले हो। रोजाना कम से कम एक विषय का रिवीजन करना चाहिए।

ब्रेक है बहुत जरूरी

ब्रेक ले-लेकर पढ़ाई करनी चाहिए। लम्बे समय तक एक साथ पढ़ाई नहीं करनी चाहिए। पढ़ाई के बीच में 40-45 मिनट का ब्रेक लेना चाहिए, जिससे कि फ्रेश रहें और पढ़ी हुई चीजें याद रहें।

पेपर हल करें

छात्रों को हर विषय के सैंपल पेपर हल करने चाहिए। ये समय सैंपल पेपर हल के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। सैंपल पेपर हल करने से परीक्षा पैटर्न और प्रश्नों के प्रकार का पता चलता है। परीक्षा के दौरान अपनी कमजोरियों और ताकतों का पता रहता है। आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर सैंपल पेपर हल करें और मॉक टेस्ट दें।

नोट्स भी हैं

छात्रों को तैयारी के दौरान अपने द्वारा बनाएं गए नोट्स को जरुर देखना चाहिए। रोजाना सिलेबस और कॉन्सेप्ट में उपयोग होने वाले सूत्रों को पढ़ना चाहिए। सूत्रों के बिना किसी भी कॉन्सेप्ट को हल करना और समझना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए परीक्षा में अच्छा स्कोर करने के लिए सूत्रों ध्यान देना चाहिए और रोजाना रिवीजन करते रहना चाहिए।

एडमिट कार्ड ले जाना न भूलें

परीक्षा में शामिल होने के लिए एडमिट कार्ड बहुत जरुरी दस्तावेज है। इसके बिना छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। छात्रों को एडमिट कार्ड में दी गई सभी जानकारी को जांच लेना चाहिए। एडमिट कार्ड का प्रिंट आउट संभालकर रखें।

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सुबह जल्दी उठने से होता है ये नुकसान, देर तक सोने से मिलती है ऐसी कामयाबी: आक्सफोर्ड के वैज्ञानिक का दावा

अगर आपके दिमाग में ये ख़याल है कि सुबह जल्दी उठने वाले कामयाब होते हैं तो इसे निकाल दीजिए। क्योंकि एक प्रयोग से मालूम हुआ है कि दुनिया दो हिस्सों में बंटी है। आधे लोग ऐसे हैं, जिन्हें सुबह उठना पसंद है। वहीं बाक़ी के आधे लोग देर तक सोना और रात में देर तक जागना पसंद करते हैं। अब ऐसा तो नहीं है कि देर तक सोने वाली दुनिया की आधी आबादी ज़िंदगी में नाकाम है। दुनिया भर के इंसानों में क़रीब एक चौथाई ऐसे हैं, जो सुबह उठना पसंद करते हैं। वहीं क़रीब-क़रीब इतने ही लोग रात में देर तक जागना पसंद करते हैं। रिसर्च से पता चला है कि सुबह उठने वाले लोग ज़्यादा सहयोगी मिज़ाज के होते हैं। वो किसी भी घटना का सही विश्लेषण कर पाते हैं। इनके मुक़ाबले रात में देर तक जागने वाले कल्पनाशीलता के मामले में बाज़ी मार ले जाते हैं। वो अकेले ज़्यादा वक़्त बिताना पसंद करते हैं।

 

कई बार हुए रिसर्च ये साबित कर चुके हैं कि सुबह उठने वाले आत्मप्रेरित होते हैं। वो लगातार काम करते हैं। दूसरों की बात भी वो ज़्यादा मानते हैं। वो बहुत बड़े टारगेट रखते हैं। वो भविष्य की योजनाएं ज़्यादा बेहतर बनाते हैं। सुबह उठने वाले अपनी सेहत का भी ज़्यादा ख़याल रखते हैं। रात में देर तक जगने वालों के मुक़ाबले, सुबह उठने वाले शराब कम पीते हैं. डिप्रेशन के भी कम ही शिकार होते हैं। वहीं, रात में देर तक जागने वाले याददाश्त के मोर्चे पर बीस बैठते हैं। अक़्ल के मामले में भी वो सुबह उठने वालों से बेहतर होते हैं। उनकी काम करने की रफ़्तार भी ज़्यादा होती है। रात में देर तक जागने वाले नए प्रयोग करने में भी खुले दिमाग़ से काम लेते हैं। रात में देर तक जागने वाले सुबह उठने वालों की तरह ही सेहतमंद, अक़्लमंद और ज़्यादा दौलतमंद भी होते हैं।
साफ़ है कि सुबह जल्दी उठने का टारगेट सेट करना कोई फ़ायदे का सौदा नहीं। आपका मन कुछ देर और सोने का है, तो सो जाइए। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक वैज्ञानिक का कहना है कि हर इंसान के शरीर में एक क़ुदरती घड़ी है। उनकी नींद और सोना-जागना उसी हिसाब से चलता है. इसे सिर्काडियन क्लॉक कहते हैं। इसी घड़ी के हिसाब से हमारे शरीर को सोने-जागने का मन होता है। बॉडी क्लॉक के ख़िलाफ़ जाकर सुबह उठने या देर तक जागने को कहा जाएगा, तो उसका बुरा असर ही होगा। शरीर से ज़बरदस्ती कभी भी फ़ायदेमंद नहीं होती। लोगों को उनकी सिर्काडियन क्लॉक यानी शरीर की जैविक घड़ी के हिसाब से ही चलने दिया जाए, तो उनका परफॉर्मेंस बेहतर होता है। किसी देर रात तक जागने वाले को सुबह उठने को मजबूर करेंगे, तो वो अलसाया हुआ रहेगा। काम में उसका मन कम लगेगा। दिमाग़ का भी वो अच्छे से इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। उनका वज़न बढ़ सकता है। सेहत ख़राब हो सकती है।

 

लोगों की सुबह जल्दी उठने या रात में देर तक जागने की आदत अक्सर उन्हें अपने मां-बाप से मिलती है। ये हमारे डीएनए में ही होता है कि हम आगे चलकर सुबह जल्दी उठने की आदत पाएंगे, या रात में देर तक जागेंगे। वैसे उम्र के साथ भी ये आदत बदलती है। बच्चे अक्सर सुबह उठ जाते हैं। बीस साल के बाद देर तक जागने की आदत पड़ने लगती है। पचास के क़रीब पहुंचते-पहुंचते ये आदत फिर सुबह उठने में बदल जाती है। अब तक किसी भी रिसर्च से ये बात पक्के तौर पर साबित नहीं हो पाई है कि सुबह उठना कामयाबी का शर्तिया नुस्खा है। आपके शरीर के हॉरमोन अक्सर आपकी बॉडी क्लॉक के हिसाब से रिलीज़ होते हैं। आदत बदलने से हॉरमेन का तालमेल बिगड़ सकता है। क्योंकि रात में देर तक जागने वाला सुबह उठेगा, तो उसके शरीर को तो यही लगेगा कि वो सो रहा है। उसके हॉरमेन देर से रिलीज़ होंगे। इसका सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।

लेकिन, तमाम देशों में देर तक सोने वालों को आलसी, कामचोर और बाग़ी कहा जाता है। इसीलिए बहुत से लोग मजबूरी में सुबह उठने की कोशिश करते हैं। हां, सुबह उठने के कई फ़ायदे ज़रूर हैं. आपको क़ुदरती रोशनी मिलती है। सूरज की रोशनी में रहने से आपके शरीर को विटामिन डी की भरपूर ख़ुराक मिल जाती है। आप कई काम जल्दी निपटा लेते हैं। लेकिन, अगर आपको देर तक सोने में ज़्यादा मज़ा आता है, तो चादर तानिए और आराम से सो जाइए।

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पोस्टपार्टम डिप्रेशन एक गंभीर स्थिति है, जानना जरुरी

हालिया अध्ययन से संकेत मिला है कि एक प्रोटीन जो मस्तिष्क में एक सिस्टम कोे रैगुलेट करता है और जो तनाव की स्थिति में शारीरिक प्रतिक्रिया में मध्यस्थता करता है, वह गर्भावस्था के दौरान और उसके बाद महिलाओं में Depression के लिए जिम्मेदार हो सकता है। अध्ययन ने न्यूरोएंडोक्राइन सिस्टम की भागीदारी का प्रदर्शन किया जो तनाव के दौरान शारीरिक प्रतिक्रिया का मध्यस्थ बनता हैं। इसे ह्य्पोथैलेमिक-पिट्यूटरी-एड्रेनल (एचपीए) एक्सिस कहा जाता है, जिसे सामान्यतः गर्भावस्था के दौरान और बाद में दबाया जाता है।

Depression
Depression

 

हर पांच नई माताओं में से एक प्रसवोत्तर अवसाद या पोस्टपार्टम Depression से प्रभावित होती है। इस स्थिति में चिंता, थकान, बच्चे से स्नेह में कमी और माताओं में आत्मघाती विचार उत्पन होते हैं। यह शिशुओं के विकास संबंधी समस्याओं के साथ भी जुड़ा हुआ मामला है। अन्य कारकों में, तनाव को नई माताओं में इस स्थिति के एक प्रमुख कारक के रूप में पहचाना गया है।

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इस बारे में बताते हुए, हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन,आईएमएद्ध के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, पद्मश्री डॉ. के के अग्रवाल ने कहा, ‘प्रसवोत्तर Depression के लिए कोई भी प्रेरक कारक नहीं है, लेकिन शारीरिक और भावनात्मक कारक हैं.। यह मां के कुछ करने या न करने की वजह से नहीं होता। प्रसव के बाद, एक महिला के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर तेजी से गिरता है, जिससे मस्तिष्क में रासायनिक परिवर्तन हो जाते हैं। इससे माताओं का मूड ऊपर नीचे हो सकता है। इसके कारण और नींद की कमी से शारीरिक असुविधा और थकावट पैदा हो सकती है, जो प्रसवोत्तर Depression के लक्षणों में वृद्धि कर सकते हैं। प्रसवोत्तर Depression के साथ, उदासी और चिंता की भावनाएं अत्यधिक हो सकती हैं।’ऐसे कुछ जोखिम कारक जो इस स्थिति को बढ़ा सकते हैं, उनमें अवसाद का पिछला अनुभव, अवसाद या अन्य मानसिक बीमारी की फैमिली हिस्ट्री, गर्भावस्था के दौरान कोई तनावपूर्ण घटना, प्रसव के दौरान चिकित्सा जटिलताओं, गर्भावस्था के बारे में मिश्रित भावनाएं, पति से मजबूत भावनात्मक समर्थन की कमी, और अल्कोहल या अन्य नशीली दवाओं के दुरुपयोग की समस्याएं प्रमुख हैं।

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डॉ. अग्रवाल ने आगे बताया, ‘इस स्थिति का पता लगाने और इलाज में एक बड़ी चुनौती है इस स्थिति के बारे में जागरूकता की कमी और अज्ञानता। कई महिलाएं बच्चे के जन्म के बाद आने वाले लक्षणों को समझने में असमर्थ होती हैं। फिर ऐसे लोग भी हैं जो चिकित्सा सहायता लेने के लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि मानसिक परेशानी आज भी भारतीय समाज में बहुत अच्छी तरह से नहीं देखी जाती है। गर्भवती महिलाओं, नई मां और परिवार के बीच इस स्थिति के बारे में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है।’

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प्रसवोत्तर और प्रसूति संबंधी चिंता से निपटने के लिए माताओं के लिए कुछ सुझाव इस प्रकार हैं-
पर्याप्त आराम करें। थकान चिंता से भी बदतर हो सकती है और आपको निरंतर उदास महसूस करा सकती है। जब बच्चा सो रहा हो तो थोड़ा सा सोने की कोशिश करें।
थोड़ी थोड़ी देर बाद कुछ खाएं। ऊर्जा का कम स्तर मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
घर के कामों में मदद न कर पाने पर खुद को दोषी महसूस न करें।
ऐसी गतिविधियों में शामिल हों, जो आपको किसी भी नकारात्मक विचारों से विचलित होने में सहायता कर सकती हैं, जैसे कि कोई पुस्तक पढ़ना और संगीत
सुनना।
अन्त में, अपनी मां की अन्य माताओं के साथ तुलना मत करें। प्रत्येक गर्भावस्था अलग है और यह समझने से आपको बेहतर महसूस करने में मदद मिलेगी।

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हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया-

हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया की शुरूआत 1986 में हुई थी। यह एक अग्रणी गैर सरकारी संस्था है जिसका उद्देश्य लोगों को उनके जीवन के हर कदम और प्रत्येक पहलू से संबंधित स्वास्थ्य के संबंध में जागरूक करना है और देश की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान हेतु उपाय करने में सहयोग देना है। एनजीओ लोगों को जागरूक करने और उन्हें स्वास्थ्य पहलुओं से अवगत कराने के लिए उपभोक्ता आधारित मनोरंजक साधनों का इस्तेमाल करता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण परफेक्ट हेल्थ मेला है, जो कि एक वार्षिक आयोजन है। मेले की शुरूआत 1993 में की गई थी, जिसमें हर साल 2-3 लाख लोग हिस्सा लेते हैं। मेले में विभिन्न श्रेणियों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जैसे कि स्वास्थ्य शिक्षा सेमिनार, चेकअप, मनोरंजक कार्यक्रम, लाइफस्टाइल एग्जीबिशन, लेक्चर, कार्यशाला और प्रतियोगिता आदि। इसके अतिरिक्त, एनजीओ लोगों को हैंड्स ओनली सीपीआर-10 तकनीक को सीपीआर 10 मंत्र के माध्यम से सिखाने के लिए सेमिनार आदि भी लगाता है, इसके तहत सडन कार्डिएक अरेस्ट के बाद मरीज को पुनर्जीवित करने की तकनीक सिखाई जाती है। उनका नाम एक साथ सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को सीपीआर 10 तकनीक सिखाने के लिए लिमका बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में भी दर्ज है। भारतीय संविधान की धारा 21 को दिमाग में रखते हुए, जो हर व्यक्ति को जीवन का अधिकार देती है, हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने हाल ही में एक प्रोजेक्ट समीर मलिक हार्ट केयर फाउंडेशन फंड की भी शुरुआत की है। इसके तहत उन दिल के मरीजों को आर्थिक और तकनीकी सहायता मुहैया कराई जाती है जो आर्थिक रूप से पिछ़ड़े हैं।

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