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delhi police getting alert: मिलते रहे अलर्ट फिर भी हाथ बांधे खड़ी रही पुलिस

delhi police getting alert:  खुफिया एजेंसियों ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा शुरू होने से पहले दिल्ली पुलिस को कम से कम छह बार अलर्ट भेजा गया था। भाजपा नेता कपिल मिश्रा के भड़काऊ बयान के दौरान पुलिस को ये अलर्ट भेजे गए थे और इलाके में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाने को कहा गया था। लेकिन पुलिस कार्रवाई में नाकाम रही और हिंसा पूरे इलाके में फैल गई।

हिंसा से पहले बढ़ा तनाव

शनिवार रात को जाफराबाद में लगभग 500 महिलाएं नागरिकता कानून (CAA) के विरोध में सड़क पर धरने पर बैठ गईं थीं। विरोध में भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने CAA समर्थकों से रविवार दोपहर तीन बजे मौजपुर चौक पर इकट्ठा होने को आह्वान किया।
मिश्रा तय समय पर चौक पर पहुंचे और समर्थकों की मौजूदगी में पुलिस को चेतावनी दी कि वो तीन दिन के अंदर सड़के खाली कराएं नहीं तो उन्हें खुद सड़कों पर उतरना पड़ेगा।

मिश्रा के जाने के बाद पत्थरबाजी

भाषण देने के बाद कपिल मिश्रा इलाके से चले गए। उनके जाने के बाद CAA समर्थकों और विरोधियों में पत्थरबाजी शुरू हो गई। पहले पत्थरबाजी किसने की, ये अभी तक साफ नहीं है। रविवार को देर शाम तक पत्थरबाजी की खबरें आती रहीं। अगले दिन सोमवार को हिंसा ने बड़ा रूप ले लिया और ये दंगे में बदल गया जो तीन दिन तक चलता रहा। दिल्ली पुलिस के हिंसा रोकने में नाकाम पर गंभीर सवाल उठे हैं।

इस समय भेजा गया पहला अलर्ट

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, स्पेशल ब्रांच और खुफिया इकाई ने वायरलेस रेडियो के जरिए उत्तर-पूर्व जिले के पुलिस अधिकारियों को कई अलर्ट भेजे।
पहला अलर्ट दोपहर 1:22 बजे के बाद भेजा गया जब मिश्रा ने ट्वीट कर लोगों को मौजपुर चौक पर जमा होने को कहा था। दोनों गुटों में टकराव की आशंका को देखते हुए खुफिया इकाई ने स्थानीय पुलिस को इलाके में सतर्कता बढ़ाने को कहा था।

पत्थरबाजी शुरु होने के बाद आए बाकी अलर्ट

जब इलाके में दोनों गुटों के बीच पत्थरबाजी हुई और भीड़ इकट्ठा होने लगी, तब भी स्पेशल पुलिस और खुफिया इकाई की तरफ से पुलिस को कई अलर्ट भेजे गए थे। हालांकि पुलिस ने इन अलर्ट पर किसी भी तरह की लापरवाही बरतने की बात से इनकार किया है।
एक पुलिस अधिकारी ने टाइम्स आॅफ इंडिया से कहा, अलर्ट मिलने के बाद सभी आवश्यक कदम उठाए गए। इसी कारण एक वरिष्ठ अधिकारी मिश्रा के साथ था और उसने ये सुनिश्चित किया कि वो जल्द से जल्द इलाके से बाहर जाएं। इन प्रयासों के बावजूद CAA विरोधियों ने मिश्रा के समूह पर पत्थरबाजी शुरू कर दी।

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Violence in delhi: यहां से लाए गए थे दिल्ली में हथियार, कई सालों से नुकीले हथियारों की खेप की आपूर्ति

Violence in delhi:  दिल्ली में रविवार से शुरू हुई हिंसा में 38 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से ज्यादा घायल हैं। घायलों का इलाज गुरु तेग बहादुर (GTB) और जग प्रवेश चंद्र अस्पताल में चल रहा है। घायलों को गोली लगने, तेज धार हथियार, लोहे की रॉड, झुलसने और भारी चीजों से मारने के कारण चोटें आई हैं। 14 लोगों की मौत गोली लगने से हुई है।


सांप्रदायिक हिंसा को देखने वाले लोगों के अनुसार भीड़ देसी कट्टे, तलवार, हथौड़े, दरांती, बेसबॉल बैट, डंडे और बड़े-बड़े पत्थर हाथ में लेकर घूम रही थी। हिंसा के दौरान इस्तेमाल किए गए देसी कट्टे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों से दिल्ली लाए गए थे। भीड़ में शामिल नकाब पहने लोगों ने बताया कि वो शामली और मुजफ्फरनगर से आए हैं।

Violence in delhi:  जाफराबाद में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अगर हिंसा के पहले दिन ही उत्तर प्रदेश से लगती दिल्ली की सीमा को सील कर दिया जाता तो हालात इतने खराब नहीं होते। हिंसा के 40 घंटे बाद यह काम किया गया। दिल्ली में बंदूकों की फैक्ट्री नहीं है। यहां जितने भी गैर-कानूनी पिस्तौल इस्तेमाल हुए हैं सब बाहर से तस्करी कर लाए गए हैं।

आसानी से उपलब्ध हैं देसी कट्टे

Violence in delhi:  पिछले साल दिसंबर में दिल्ली पुलिस ने एक मामले का पर्दाफाश किया था, जिसमें पता चला कि मेरठ, शामली और मुजफ्फरनगर जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में देसी कट्टे महज 3,000-5,000 रुपये में मिल जाते हैं।
बंदूकों के अलावा दंगाई पत्थरों का भी इस्तेमाल कर रहे थे। हिंसा में शहीद हुए दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल को भी पत्थर से चोट लगी थी। लेकिन उनकी मौत गोली लगने से हुई थी। DCP अमित शर्मा को भी पत्थर लगने से सिर में गंभीर चोट आई है। फिलहाल वो अस्पताल में भर्ती हैं। भीड़ ने कई घरों पर भी पत्थरबाजी कर नुकसान पहुंचाया।

ट्रक में भरकर लाए गए थे पत्थर

मौजपुर में रहने वाले एक निवासी ने बताया, रविवार रात को यहां ट्रक में भरकर पत्थर लाए गए थे। ये लोग बाहर से आए थे। उनके वीडियो रिकॉर्ड किए हैं। सोच-समझकर हमला किया गया था। न्यू जाफराबाद रोड पर दंगाइयों ने कंक्रीट से बने डिवाइडर को तोड़ दिया और इसके लिए पत्थर और इसमें लगाई गई लोहे की रॉड को हथियारों के रूप मेें इस्तेमाल किया। दंगाइयों ने पेट्रोल बम और तलवारों की भी इस्तेमाल किया था। चांद बाग में भीड़ ने पेट्रोल बमों का भरपूर इस्तेमाल किया। पुलिस का मानना है कि दंगाइयों ने कबाड़ियों के पास से खाली बोतलें उठाई और इनमें पेट्रोल भरा। हिंसा में कम से कम तीन लोगों की झुलसने से मौत हुई है। सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें देखा जा सकता था कि दंगाई मोटरसाइकिल पर बैठकर हथियार लहराते हुए सड़कों पर घूम रहे थे।

नुकीले हथियारों का इस्तेमाल आम

दिल्ली पुलिस में तीन दशक से ज्यादा समय तक काम कर चुके पूर्व DCP एलएन राव ने बताया कि जिस इलाके में हिंसा हुई वहां की ज्यादातर युवा आबादी बेरोजगार है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों के युवा अपराधिक गतिविधियों में शामिल रहते हैं और लोगों को लूटने के लिए चाकू और ब्लेड का इस्तेमाल आम है। लोग अपने घरों में पत्थर, कांच की खाली बोतलें और ईंट जमा कर रखते हैं।

पुलिस ने दर्ज की 18 FIR

पुलिस ने अभी तक 18 FIR दर्ज की है और 106 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनसे पूछताछ में यह भी पता लगाया जाएगा कि वो हथियार कहां से लाए थे।