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राजीव से संबंधित इश्तहार का पैसा गरीबों पर ख़र्च करेगी कांग्रेस

नयी दिल्ली। कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर गुरुवार को उनकी याद में दिये जाने वाले इश्तहार आदि में खर्च होने वाले पैसों को कामगारों की मदद में व्यय करने का निर्णय लिया है।

कांग्रेस ने यहां जारी बयान में कहा “आज पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गाँधी जी के बलिदान दिवस पर हर देशवासी ने उन्हें याद कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।”

पार्टी ने कहा “कोरोना महामारी के कारण कांग्रेस पार्टी ने यह निर्णय लिया की इस बार पुण्यतिथि पर इश्तहार देने की बजाय यह सारी राशि मज़दूर-कामगार भाइयों की मदद में लगाई जाएगी। पूरे देश में कांग्रेसजनों ने भी इस प्रेरणा दिवस पर हर ज़रूरतमंद की सेवा का संकल्प ले अपना हर प्रयास इस दिशा में केंद्रित करने का प्रण दोहराया है।”

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देश में कोरोना संक्रमण के मामले हुए एक लाख से अधिक

नयी दिल्ली। देश में पिछले दो दिन में कोरोना वायरस (कोविड-19 ) के 10 हजार मामले सामने आने से संक्रमितों की संख्या एक लाख से अधिक हो गयी है और इस आंकड़े काे पार करने वाला यह विश्व का 11वां देश बन गया। देश में इस संक्रमण से तीन हजार से अधिक लोगों की अब तक मौत हो चुकी है।

देश में फिलहाल कोरोना संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या 58,802 है।स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मंगलवार सुबह जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में 4,970 नये मामले आये जिससे कुल संक्रमितों की संख्या 101139 पर पहुंच गयी है। इससे एक दिन पहले 5,242 मामले सामने आये थे।

देश में इस संक्रमण से पिछले 24 घंटे में 134 लोगों की मौत होने से मृतकों की संख्या 3163 हो गयी। संक्रमण के बढ़ते मामलों के बावजूद एक सकारात्मक पक्ष यह भी है कि इस बीमारी से ठीक होने वालों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है और पिछले 24 घंटों में 2350 लोग स्वस्थ हुए हैं जिसके साथ स्वस्थ हुए लोगों की कुल संख्या 39174 हो गयी है।

देश में कोरोना से सबसे अधिक महाराष्ट्र प्रभावित हुआ है और कुल संक्रमण के मामलों में एक तिहायी हिस्सा यहीं का है। महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों में 2347 नये मामले सामने आये हैं , जिसके बाद यहां कुल संक्रमितों की संख्या 33,053 हो गयी है तथा कुल 1198 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 7688 लोग इसके संक्रमण से ठीक भी हुए हैं।

कोरोना वायरस से प्रभावित होने के मामले में गुजरात दूसरे नंबर पर है। गुजरात में अब तक 11379 लोग इससे संक्रमित हुए हैं तथा 659 लोगों की मृत्यु हुई है जबकि 4499 लोगों को उपचार के बाद विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी मिल चुकी है।

कोरोना वायरस के संक्रमण के मामलों में पांच अंकों के आंकड़ों की सूची में तमिलनाडु तीसरे नंबर पर है। यहां कुल संक्रमितों की संख्या 11,224 हो गई है तथा इसके संक्रमण से 78 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 4172 लोग इस बीमारी से उबरे हैं।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की भी स्थिति इस जानलेवा विषाणु के कारण चिंताजनक बनी हुई है और यहां भी संक्रमितों की संख्या पांच अंको पर पहुंच गयी है।

दिल्ली में अब तक 10,054 लोग संक्रमित हुए हैं तथा पिछले 24 घंटों में 31 मरीजों की मौत के साथ मृतकों का आंकड़ा 160 पर पहुंच गया है और 4485 लोगों को उपचार के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।

राजस्थान में भी कोरोना तेजी से पैर पसार रहा है। यहां कोरोना संक्रमितों की संख्या 5202 हो गयी है तथा 131 लोगों की मौत हो चुकी है , जबकि 2992 लोग पूरी तरह ठीक हुए हैं।

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में अब तक 4259 लोग इसकी चपेट में आए हैं तथा इसके संक्रमण से मरने वालों की संख्या 104 हो गयी है और 2441 लोग अब तक इससे ठीक हुए हैं।

पश्चिम बंगाल में 2677 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं तथा 238 लोगों की मौत हो चुकी है और अब तक 959 लोग ठीक हुए है। तेलंगाना में अब तक कोरोना से 1551 लोग संक्रमित हुए हैं। राज्य में जहां कोरोना से 34 लोगों की जान गई है , वहीं 992 लोग अब तक ठीक हुए हैं।

दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश में 2407 और कर्नाटक में 1147 लोग संक्रमित हैं तथा इन राज्यों में इससे मरने वालों की संख्या क्रमश: 50 और 37 हो गयी है। वहीं केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1163 हो गई है और 13 लोगों की मृत्यु हुई है।

  • पंजाब में 35, हरियाणा में 14, बिहार में आठ, केरल और ओडिशा में चार-चार, झारखंड, चंडीगढ़, और हिमाचल प्रदेश में तीन-तीन, असम में दो तथा मेघालय, पुड्डचेरी और उत्तराखंड में एक-एक व्यक्ति की इस महामारी से मौत हुई है।
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ऋतिक ने लॉकडाउन के दौरान स्वस्थ रहने के लिए 23 घंटे रखा उपवास

मुंबई। बॉलीवुड के माचो मैन ऋतिक रोशन ने लॉकडाउन के दौरान स्वस्थ रहने के लिए 23 घंटे का उपवास रखा हैं।

ऋतिक रोशन लॉकडाउन के दौरान भी अच्छा स्वास्थ्य और फिटनेस बनाए हुए हैं।उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक नई पोस्ट शेयर की कि कैसे उन्होंने 23 घंटे का उपवास किया। इस बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने लिखा, ’23 घंटे का उपवास। इसमें एक नई सेल्फी और एक ऐप का स्क्रीनशॉट है जो उनकी फिटनेस पर नज़र रखता है। सेल्फी में ऋतिक कैमरे के लिए पलक झपकाते दिखाई दे रहे हैं।

ऋतिक के प्रशंसक उनके शानदार लुक से एक बार फिर प्रभावित हुए। एक फैन ने लिखा, ‘खूबसूरत फोटो सर’, वहीं एक अन्य ने लिखा, ‘सुंदर लग रहे हों।ऋतिक इन दिनों अपने दो बेटों हरेन, ह्रदान और अपनी पूर्व पत्नी सुजैन खान के साथ लॉकडाउन में सेल्फ-आइसोलेशन में है।

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विश्व में कोराना संक्रमितों की संख्या 45.42 लाख, तीन लाख से अधिक मौत

बीजिंग/जिनेवा/नयी दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) का प्रकोप दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है और विश्व भर में इसके संक्रमितों की संख्या 45.43 लाख से अधिक हो गयी है जबकि 3.07 लाख से ज्यादा लोग काल का ग्रास बन चुके हैं।

अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र (सीएसएसई) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक कुल संक्रमितों की संख्या 45,42,752 हो गयी जबकि कुल 3,07,696 लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है।

भारत में भी कोरोना वायरस का संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है और यह संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित देशों की सूची में 11वें स्थान के साथ ही वैश्विक महामारी के केंद्र चीन से आगे हो गया है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से शनिवार सुबह जारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना से संक्रमितों और मृतकों की संख्या में क्रमश: 3970 और 103 की बढ़ोतरी हुई है।देश में इसके संक्रमण से अब तक 85,940 लोग प्रभावित हुए हैं तथा 2752 लोगों की मौत हुई है जबकि 30,153 लोग पूरी तरह ठीक भी हो चुके हैं।

सीएसएसई के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में कोरोना वायरस से दुनिया में सर्वाधिक लोग संक्रमित हुए हैं तथा यहां संक्रमण के मामलों की संख्या 14 लाख से अधिक हो चुकी है।

विश्व की महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका में 14,42,924 संक्रमित है और 87,493 की मौत हो चुकी है।रूस में भी कोविड-19 का प्रकोप लगातार तेजी से बढ़ रहा है और यह कोविड-19 के संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देशों की सूची में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है।

देश में संक्रमितों की संख्या ढाई लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है। यहां अब तक 2,62,843 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं और 2418 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।यूरोप में गंभीर रूप से प्रभावित देश इटली में इस महामारी के कारण अब तक 31610 लोगों की मौत हुई है और 2,23,885 लोग इससे संक्रमित हुए हैं।

स्पेन में काेरोना से 230183 लोग संक्रमित है जबकि 27459 लोगों की मौत हो चुकी है।इस वैश्विक महामारी के केंद्र चीन में अब तक 82,941 लोग संक्रमित हुए हैं और 4633 लोगों की मृत्यु हुई है।

इस वायरस को लेकर तैयार की गयी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में हुई मौत के 80 प्रतिशत मामले 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के थे।रोपीय देश फ्रांस और जर्मनी में भी स्थिति काफी खराब है।

फ्रांस में अब तक 1,78,994 लोग संक्रमित हुए हैं और 27529 लाेगों की मौत हो चुकी है। जर्मनी में कोरोना वायरस से 173722 लोग संक्रमित हुए हैं और 7881 लोगों की मौत हुई है।इसके अलावा ब्रिटेन में भी हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं।

यहां अब तक इस महामारी से 236711 लोग प्रभावित हुए हैं और अब तक 33998 लोगों की इसके कारण मौत हो चुकी है। तुर्की में कोरोना से अब तक 146457 लोग संक्रमित हुए हैं तथा इससे 4055 लोगों की मौत हो चुकी है।

कोरोना वायरस से गंभीर रूप से प्रभावित खाड़ी देश ईरान में 116635 लोग संक्रमित हुए हैं जबकि 6902 लोगों की इसके कारण मौत हुई है।ब्राजील में 14817, बेल्जियम में 8959, नीदरलैंड में 5643, कनाडा में 5562, मेक्सिको में 4767, स्वीडन में 3646, स्विट्जरलैंड में 1874, आयरलैंड में 1518 और पुर्तगाल में 1190 लोगों की मौत हो गयी है।

इसके अलावा पड़ोसी देश पाकिस्तान में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के तीन हजार से अधिक तथा 64 लोगों की मौत का नया मामला सामने आया हैं। यहां कुल संक्रमितों की संख्या 38799 हो गयी है जबकि 834 लोगाें की मौत हो चुकी है।

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कोरोना ने बदली कैटरीना की जिंदगी

मुंबई ।बॉलीवुड की बार्बी गर्ल कैटरीना कैफ की जिंदगी के प्रति सोच कोरोना महामारी ने बदल दी है।कोरोना महामारी ने लगभग हर चीज को बदलकर रख दिया है।इससे जिंदगी के प्रति इंसानों का नजरिया बदला है। कैटरीन का भी कुछ ऐसा ही मानना है।

कैटरीना ने कहा, “यह महामारी और इसके चलते लगाए गए लॉकडाउन ने हम में से कई लोगों कोआत्मनिरीक्षण करने का मौका दिया है कि हमारी जिंदगी कितनी बेहतर है या किस तरह से हम इसे आम तौर पर ले लेते हैं।

इसके साथ ही मामलों की बढ़ती संख्या के कारण मेरा मानना है कि हमें अपने खानपान और जीवनशैली के माध्यम से अपनी बेहतर इम्युनिटी की दिशा में काम करना चाहिए। इसने कुछ मायनों में जिंदगी के प्रति मेरी सोच भी बदल दी है।”

कैटरीना ने कहा , “मैं यह सोचकर कभी-कभार परेशान हो जाती हूं कि जिंदगी पटरी पर कब आएगी, लेकिन दुनिया इस वक्त जिस परेशानी का सामना कर रही है मैं उसे भी समझती हूं। तनाव ऐसी स्थिति में एक गंभीर मुद्दा है।

मेरा सभी से सुझाव यह है कि शांत रहें, ध्यान लगाएं या योगाभ्यास करें और इसके बेहतर पहलुओं के बारे में सोचने का प्रयास करें। इस दौर के बाद आने वाले समय के बारे में सोचें, इस पर भी विचार करें कि आगामी समय में पर्यावरण के प्रति हमारी पहले की गई गलतियों को कैसे न दोहराया जाएं।

फिलहाल मैं जब भी खुद को निराश महसूस करती हूं, तो मैं या तो ध्यान लगाती हूं या योगा करती हूं या खुद को दोबारा खुश करने के लिए कोई फिल्म या शो देखती हूं।”

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कोरोना के मामले में भारत बनने वाला है चीन, जानिए कितने हो गए मामले

नयी दिल्ली । देश में कोरोना वायरस (कोविड-19) का प्रकोप चरम पर है और अब यह संक्रमण के सर्वाधिक आंकड़ों वाले देशों की सूची में 12वें स्थान के साथ ही वैश्विक महामारी के केंद्र चीन के करीब पहुंच गया है। पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 3967 नए मामले सामने आने से संक्रमितों की संख्या 81,970 हो गयी तथा इसी अवधि में 100 लोगों की मौत होने से मृतकों का आंकड़ा 2649 पर पहुंच गया है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से शुक्रवार सुबह जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश के विभिन्न राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक 81,970 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं तथा 2649 लोगों की मौत हुई है , जबकि 27920 लोग इसके संक्रमण से पूरी तरह ठीक हुए हैं और उन्हें विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।

चीन में हुबेई प्रांत के वुहान में दिसम्बर 2019 के मध्य में कोरोना वायरस के संक्रमण का पहला मामला प्रकाश में आया था और इसने अब तक विश्व भर के अनेक देशों को अपनी चपेट में ले लिया है। चीन में ही अब तक 82933 लोग इससे संक्रमित हुए हैं तथा 4633 लोगों की मौत हो चुकी है।

देश में कोरोना से सबसे अधिक महाराष्ट्र प्रभावित हुआ है और इसके कारण राज्य की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। महाराष्ट्र में 27524 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं तथा 1019 लोगों की मौत हो चुकी है और 6059 लोग इसके संक्रमण से ठीक भी हुए हैं।

कोरोना वायरस से प्रभावित होने के मामले में देश का दक्षिणी राज्य तमिलनाडु दूसरे नंबर पर है। तमिलनाडु में अब तक 9674 लोग इससे संक्रमित हुए हैं तथा 66 लोगों की मृत्यु हुई है जबकि 2240 लोगों को उपचार के बाद विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी मिल चुकी है। गुजरात में भी कोविड-19 संक्रमितों की संख्या 9591 हो गई है तथा इसके संक्रमण से 586 लोगों की मौत हो चुकी है।    इसके अलावा 2753 लोग इस बीमारी से उबरे हैं।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की भी स्थिति इस जानलेवा विषाणु के कारण चिंताजनक बनी हुई है। यहां संक्रमितों की संख्या आठ हजार से अधिक हाे गई है । दिल्ली में अब तक 8470 लोग संक्रमित हुए हैं तथा नौ मरीजों की मौत के साथ मृतकों का आंकड़ा 115 पर पहुंच गया है और 3045 लोगों को उपचार के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।

राजस्थान में भी कोरोना तेजी से पैर पसार रहा है। यहां कोरोना संक्रमितों की संख्या 4534 तक हो गयी है तथा 125 लोगों की मौत हो चुकी है , जबकि 2580 लोग पूरी तरह ठीक हुए हैं। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में अब तक 3902 लोग इसकी चपेट में आए हैं तथा इसके संक्रमण से मरने वालों की संख्या 88 हो गयी है, 2072 लोग अब तक इससे ठीक हुए हैं।

पश्चिम बंगाल में 2377 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं तथा 215 लोगों की मौत हो चुकी है और अब तक 768 लोग ठीक हुए है। तेलंगाना में अब तक कोरोना से 1414 लोग संक्रमित हुए हैं। राज्य में जहां कोरोना से 34 लोगों की जान गई है , वहीं 950 लोग अब तक ठीक हुए हैं।दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश में 2205 और कर्नाटक में 987 लोग संक्रमित हैं तथा इन राज्यों में इससे मरने वालों की संख्या क्रमश: 48 और 35 हो गयी है।

वहीं केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 983 हो गई है और 11 लोगों की मृत्यु हुई है। पंजाब में 32, हरियाणा में 11,, बिहार में सात, केरल में चार, झारखंड, चंडीगढ़ और ओडिशा में तीन-तीन, हिमाचल प्रदेश और असम में दो-दो तथा मेघालय, पुड्डचेरी और उत्तराखंड में एक-एक व्यक्ति की इस महामारी से मौत हुई है

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17 साल पहले मौत का तांडव करने वाले सार्स का सगा भाई है कोरोना

संसार के शक्तिशाली देशों को घुटने पर ला चुका कोरोना वायरस 17 साल पुराने सार्स का सगा भाई है। इस बार उसके ज्यादा मारक होने का यही कारण है। दूसरे शब्दों में कहें तो कोरोना फैमिली का यह वायरस पिछले दो बार के मुकाबले ज्यादा ताकतवर होकर आया है और उसने म्युटेशन के जरिए स्वयं को ज्यादा घातक बना लिया है। 2003 में आए सार्स कोविड-1 और 2013-14 में आए मर्स वायरस से मौजूदा वायरस की समानता क्रमश: 70 और 50 प्रतिशत तक है। पहले के दोनो वायरस घातक तो थे लेकिन वे व्यापक तबाही नहीं फैला पाए थे। क्योंकि कोविड-1 पूरी तरह ग्लोबल होने से पहले ही दम तोड़ गया था और 2013-14 का मर्स सऊदी अरब तक सीमित रह गया था।
कोरोना वायरस का मौजूदा स्वरूप बेहद घातक है। उसने 45 वर्ष से अधिक उम्र के इंसानों को उसी तरह मौत के घाट उतारा है जिस तरह लगभग एक सदी पहले प्लेग ने उनका भक्षण किया था। अनुमान है कि पिछले चार माह में कोरोना संक्रमण के चलते पूरी दुनिया में भगवान को प्यारे हुए लगभग ढाई लाख इंसानों में से 80 प्रतिशत 45 से 80 साल के हैं।

बूढ़ों के लिए मौत का दूसरा नाम है कोरोना

इन दिनों कोविड-19 के रोगियों की जान बचाने में जुटे दिल्ली के एक निजी अस्पताल में कार्डियक थोरासिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अजीत जैन के मुताबिक पूरी दुनिया में अभी तक कोरोना संक्रमितों की मृत्यु का जो आंकड़ा सामने आ रहा है, उसमें 25 साल से कम उम्र के संकमितों की संख्या एक प्रतिशत है। 25 से 44 साल तक के मृतकों का आंकड़ा अभी तक छह प्रतिशत पर टिका हुआ है लेकिन 45 से 60 साल तक संक्रमितों की मृत्यु दर 15 प्रतिशत तक जा पहुंची है। सबसे ज्यादा मौत 65 वर्ष से अधिक उम्र के रोगियों की हो रही है। इस उम्र के संक्रमितों में से आधे ठीक होने की अपेक्षा काल के गाल में समा जाते हैं।
डा. अजीत के मुताबिक तीनो वायरस एक ही जींस के हैं इसलिए विशिष्ट दवाएं उपलब्ध नहीं हो पाने के बावजूद परम्परागत दवाएं इलाज में काम ली जा रही हैं। इन दवाओं के बल पर ही कोरोना से मुक्त होने वालों की संख्या बढ़ रही है लेकिन इससे यह महामारी नियंत्रण में नहीं आ रही है।
उन्होंने बताया कि सीवियर एक्यूट रेस्पेरेटिरी सिंड्रोम अर्थात सार्स वायरस सात तरह का है। इनमें 2003 में आया सार्स कोविड-1, 2013-14 में आए मर्स वायरस और 2019 में आए कोविड-19 से दुनिया का परिचय हो चुका है। इसके अलावा कोरोना फैमिली के चार अन्य वायरस के नाम क्रमश: ह्यूमन कोरोना वायरस ओएच 43, ह्यूमन कोरोना वायरस एनएल 63, ह्यूमन कोरोना वायरस 229ई, ह्यूमन कोरोना वायरस एचयूके1 हैं। डा. अजीत जैन के अनुसार 2016 में डब्ल्यूएचओ ने भविष्यवाणी की थी कि कोरोना फैमिली के ये वायरस दुनिया में कभी भी महामारी फैला सकते हैं। भविष्यवाणी के बाद रिसर्च प्रोग्राम और दवा बनाने के प्रयास शुरू हो गए थे। इसीलिए उम्मीद है कि कोरोना का इलाज जल्द ही खोज लिया जाएगा।

प्रोटीन बढ़ाते है मौत का खतरा

डा. जैन के अनुसार दुनिया को सबसे ज्यादा घबराहट कोरोना संक्रमितों की मौत की बढ़ती दर से है। 2003 में चाइना के यूनान से शुरू हुए सार्स कोविड-1 के दौर में मौत की दर 9 प्रतिशत थी। दस साल बाद 2013-14 में आई मर्स महामारी में मौत की दर 35 प्रतिशत थी, लेकिन उसका फैलाव नहीं होने से दुनिया को ज्यादा चिंता नहीं हुई थी। इस बार यह पूरी दुनिया में फैल गया है और इसकी औसत मृत्यु दर भी 15 प्रतिशत है। कोविड-19 वायरस में चार तरह के प्रोटीन स्पाइक प्रोटीन, एनवल्व, मेमरिन और न्यूक्लोसाइट हैं और ये हाइरिस्क ग्रुप (डायबिटीज, हाइपर टेंशन,हृदय रोग) के मरीजों के मरने का खतरा बढ़ा देते है।

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हार गया कोरोना, तेज होते संक्रमण के बीच मरीजों के ठीक होने की रफ्तार बढ़ी

कोरोना के कहर के बीच राहत की खबर आई है। देश में अभी जिस तेजी से कोरोना संक्रमण फैल रहा है, उतनी तेजी से संक्रमण के शिकार मरीज ठीक होकर घर भी जा रहे हैं। पिछले 24 घंटों में कोरोना से संक्रमित 682 लोगों के स्वस्थ होने के साथ ऐसे लोगों की संख्या 10633 पर पहुंच गयी है तथा इनकी रिकवरी दर बढ़कर 26 प्रतिशत से अधिक हो गयी है।

रेड और ओरेंज जोन पुन: परिभाषित

इसी को देखते हुए रेड और ओरेंज जोन को पुन: परिभाषित किया गया है। इन क्षेत्रों में विषाणु संक्रमण को रोकने के लिए उपयुक्त कंटेनमेंट स्ट्रैटिजी अपनाई जानी जरूरी है। कंटेनमेंट जोन के बाहर के क्षेत्र को घेरकर उपयुक्त रणनीति बनाई जानी है लेकिन अगर इसके बाहर के क्षेत्र यानी बफर जोन में कोई भी केस नहीं आ रहा है और इसके बाहर के क्षेत्र में कुछ गतिविधियों में छूट दी जा सकती है। किसी भी राज्य अथवा जिले चाहे वे रेड जोन हो या ओरेंज जोन हो, उन सभी में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों को बढऩे से रोकने के लिए कड़े कदम उठाये जाने जरूरी है क्योंकि इस वायरस का प्रसार रोकने के लिए यह बहुत जरूरी हो जाता है। हालांकि इसी बीच देश में कईं मरीजों पर प्लाज्मा थैरेपी को आजमाया गया और उसके नतीजे भी सकारात्मक रहे है लेकिन महाराष्ट्र में एक कोरोना मरीज की मौत होने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसके बारे में स्पष्ट कर दिया है कि प्लाज्मा थेरेपी को विश्व में कहीं भी मान्य उपचार के तौर पर पुष्टि नहीं हुई है और यह सिर्फ ट्रायल के तौर पर ही की जा रही है तथा दिशा-निर्देशों का पालन किए बिना यह घातक साबित हो सकती है।

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की मंजूरी जरूरी

विश्व के अनेक देशों में कोरोना महामारी से निपटने पर शोध और अनेक कार्य हो रहे हैं लेकिन अभी तक किसी भी कारगर वैक्सीन अथवा दवा का पता नहीं चल सका है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में कई स्थानों पर प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल कोरोना मरीजों के इलाज के लिए हो रहा है लेकिन इसका उपयोग भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के दिशा- निर्देशों के तहत ही होना चाहिए और इसके लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से मंजूरी लेनी जरूरी है। इसी के बाद ही यह प्रकिया शुरू की जानी है।

देश में कुल 75 हजार वेंटीलेटर की मांग

देश में इस समय कुल 75 हजार वेंटीलेटर की मांग है और उपलब्ध वेंटीलेटर की संख्या 19398 है जिसे देखते हुए केन्द्र सरकार ने घरेलू निर्माता कंपनियों को 59884 वेंटीलेटर के ऑर्डर दिए हैं। देश में आक्सीजन तथा आक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य है। देश की कुल आक्सीजन निर्माण क्षमता 6400 एमटी है जिसमें से एक हजार एमटी का इस्तेमाल ही मेडिकल आक्सीजन बनाने में होता है। देश में इस समय पांच बड़े और 600 छोटे आक्सीजन निर्माता कंपनियां हैं और खुद ही आक्सीजन निर्माण करने वाले अस्पतालों की संख्या 409 है और क्रायोजेनिक टैंकरों की संख्या 1050 है। देश में 30 मार्च को पीपीई की निर्माण क्षमता मात्र 3312 थी जो 30 अप्रैल तक 186472 हो गई है।

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सौ साल पहले भारत में इस महामारी से मारे गए थे एक करोड़ 70 लाख लोग

लगभग एक सदी पूर्व कोरोना जैसी महामारी से भारत में एक करोड़ 70 लाख लोगों की मौत हो गई थी. पूरी दुनिया में इस महामारी से पांच करोड़ लोग काल के गाल में समा गए थे. इस बीमारी का नाम था स्पेनिश फ्लू. इसे अक्सर ‘मदर ऑफ़ ऑल पैंडेमिक्स’ यानी सबसे बड़ी महामारी कहा जाता है.

वैज्ञानिकों और इतिहासकारों का मानना है कि उस वक्त दुनिया की आबादी 1.8 अरब थी और आबादी का एक-तिहाई हिस्सा संक्रमण की चपेट में आ गया था. तब पहला विश्व युद्ध खत्म ही हुआ था. लेकिन, इस महामारी से मरने वालों की तादाद पहले विश्व युद्ध में मरने वालों की संख्या को भी पार कर गई थी. आज के दौर के मुक़ाबले किसी बीमारी का सामना करने के लिहाज से दवाइयां और विज्ञान उस वक्त बेहद सीमित था.

दुनिया की पहली एंटीबायोटिक की खोज 1928 में

डॉक्टरों को यह तो पता चल गया था कि स्पेनिश फ़्लू के पीछे माइक्रो-ऑर्गेनिज़्म है. उन्हें यह भी पता था कि यह बीमारी एक शख़्स से दूसरे शख़्स में फैल सकती है. लेकिन, वे तब ये मान रहे थे कि इस महामारी की वजह वायरस न होकर एक बैक्टीरिया है. उस दौरान इलाज भी सीमित था. दुनिया की पहली एंटीबायोटिक की खोज 1928 में जाकर हो पाई थी. पहली फ़्लू वैक्सीन 1940 में लोगों के लिए उपलब्ध हो सकी. उस वक्त सबके लिए इलाज की व्यवस्था मुमकिन नहीं थी. यहां तक कि अमीर देशों में भी पब्लिक सैनिटेशन एक लग्ज़री थी.

कोई युवा व्यक्ति जीवित नहीं बचा

औद्योगिक देशों में ज्यादातर डॉक्टर या तो खुद के लिए काम करते थे या उन्हें चैरिटी या धार्मिक संस्थानों से पैसा मिलता था. ज्यादातर लोगों के पास इलाज कराने की सहूलियत नहीं थी. स्पेनिश फ़्लू ने इस तरह से हमला किया जैसा इससे पहले की किसी भी महामारी में नहीं देखा गया था. इससे पहले 1889-90 में फैली महामारी से 10 लाख से ज्यादा लोग पूरी दुनिया में मारे गए थे, लेकिन इसका दायरा स्पेनिश फ़्लू जैसा नहीं था. दूसरी तरफ, भारत में स्पेनिश फ़्लू से मरने वालों की तादाद आबादी की 5.2 फीसदी यानी करीब 1.7 करोड़ लोग थे. कई देशों में घर चलाने की जिम्मेदारी उठाने वाला, खेती करने वाले, कारोबार करने वाले कोई युवा व्यक्ति जीवित नहीं बचा था. शादी और बच्चे पैदा कर मरे हुए लोगों की भरपाई करने तक के लिए युवा नहीं बचे थे. ऐसे लाखों युवा खत्म हो गए थे.’
योग्य लोगों के अभाव में अकेली बची औरतों की समस्या पैदा हो गई. लाखों महिलाओं के पास कोई पार्टनर नहीं था.
1918 तक भारत को ब्रिटेन की कॉलोनी बने तकरीबन एक सदी बीत चुकी थी. भारत में स्पेनिश फ़्लू उसी साल मई में आया. भारत में इसकी चोट ब्रिटिश नागरिकों से ज्यादा भारतीय आबादी पर पड़ी. आंकड़े बताते हैं कि हिंदुओं में नीची जातियों की मृत्यु दर हर 1,000 लोगों पर 61.6 के स्तर पर पहुंच गई थी. जबकि यूरोपीय लोगों के लिए यह प्रति हजार 9 से भी कम थी.

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भारत की छह आईआईटी ने किया कमाल, थम जाएगा कोरोना का नकारात्मक धमाल

भारत पर जब भी कोई मुसीबत आती तो देश के प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) हमेशा अलर्ट मोड में काम शुरू कर देते हैं। कोविड 19 (COVID-19) महामारी की आशंका से जूझते भारत में सम्भावित रोगियों को वेंटिलेटर की बड़ी संख्या में आवश्यकता होगी और देश के आईआईटी इन्हें बनाने की तकनीक ईजाद करने में जुट गए हैं। इसके अलावा वे सस्ती जांच किट और मशीनें भी बना रहे हैं। IIT गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने पॉलीमरेस चेन रिएक्शन (PCR) मशीन बनाई है। इसकी मदद से 12 घंटों में 1,000 सैंपल चेक किए जा सकते हैं। IIT ने अभी तक दो ऐसी मशीनें गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में भेज दी है और बाकी पर काम जारी है। यहीं के छात्रों ने ऑटोमेटेड स्प्रेयर के साथ एक ड्रोन तैयार किया है, जो ऊंची इमारतों, पार्क और सड़क आदि को सैनिटाइज करने के काम आ सकता है।

IIT गुवाहाटी कोरोना वायरस की वैक्सीन पर काम कर भी रहा है। IIT की तरफ से आधिकारिक बयान में कहा गया है कि फैकल्टी मेंबर बायो टेक्नोलॉजी टूल का इस्तेमाल करते COVID-19 के इलाज के लिए वैक्सीन तैयार कर रहे हैं। यहां फेस शील्ड का प्रोटोटाइप तैयार किया गया है। इसे स्वास्थ्यकर्मी मुंह पर पहनते हैं। 3D प्रिंटर की मदद से तैयार इस फेस शील्ड को इस्तेमाल करना आसान है।

IIT मुंबई ने कोरोंटाइन नाम से एक मोबाइल ऐप बनाई है, जो संक्रमित व्यक्ति को ट्रैक सकती है। यह ऐप समय-समय पर GPS कॉर्डेिनेट्स भेजती रहती है, जिससे ट्रेसिंग आसान हो जाती है। दिल्ली IIT छात्रों ने टेस्टिंग किट तैयार की है, जिससे कोरोना वायरस के टेस्ट के दौरान आने वाली लागत को कम किया जा सकता है। फिलहाल इसका नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) पुणे में क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। इसके अलावा यहां इंफेक्शन-प्रूफ फैब्रिक तैयार किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल अस्पतालों में इंफेक्शन को फैलने से बचाने के लिए हो सकता है।
IIT दिल्ली के केमिस्ट्री विभाग ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुरूप हैंड सैनिटाइजर तैयार किया है। यह कोरोना वायरस को मारने में पूरी तरह कारगर है। फिलहाल इसे कैंपस के अंदर इस्तेमाल किया जा रहा है। दिल्ली की तरह IIT हैदराबाद के छात्रों ने भी हैंड सैनिटाइजर तैयार किया है। इसे भी WHO के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है।

IIT कानपुर में नोक्का रोबोटिक्स नाम की कंपनी है। इस कंपनी ने वेंटिलेटर प्रोटोटाइप तैयार किया जिसकी फिलहाल टेस्टिंग चल रही है। यह बाजार में पहले से मौजूद वेंटिलेटर की तुलना में बेहद सस्ता है। वहीं IIT हैदराबाद ने वेंटिलेटर का विकल्प तैयार किया है। इस बैग वॉल्व मास्क को इमरजेंसी में मरीज को सांस देने के लिए किया जा सकता है। इसी तरह IIT खड़गपुर ने हैंड सैनिटाइजर तैयार किए हैं।