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देश में कोरोना संक्रमण के 85,940 मामले, चीन से निकला आगे

नयी दिल्ली । देश में कोरोना वायरस (कोविड-19) का प्रकोप चरम पर है और अब यह संक्रमण के सर्वाधिक आंकड़ों वाले देशों की सूची में 11वें स्थान के साथ ही वैश्विक महामारी के केंद्र चीन से आगे निकल गया।

पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 3970 नए मामले सामने आने से संक्रमितों की संख्या 85,940 हो गयी तथा इसी अवधि में 103 लोगों की मौत होने से मृतकों का आंकड़ा 2752 पर पहुंच गया है।

न्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से शनिवार सुबह जारी आंकड़ों के मुताबिक देश के विभिन्न राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक 85,940 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं तथा 2752 लोगों की मौत हुई है , जबकि 30,153 लोग इसके संक्रमण से पूरी तरह ठीक हुए हैं और उन्हें विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।

चीन में हुबेई प्रांत के वुहान में दिसम्बर 2019 के मध्य में कोरोना वायरस के संक्रमण का पहला मामला प्रकाश में आया था और इसने अब तक विश्व भर के अनेक देशों को अपनी चपेट में ले लिया है। चीन में अब तक 84,038 लोग इससे संक्रमित हुए हैं। तथा 4637 लोगों की मौत हो चुकी है।

तुलनात्मक दृष्टि से हालांकि भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या चीन से अधिक है , लेकिन इसके संक्रमण से यहां हुई मौत का ग्राफ कम है। चीन में अब 4637 लोगों की मौत हुई है जबकि भारत में यह संख्या 2752 है।

देश में कोरोना से सबसे अधिक महाराष्ट्र प्रभावित हुआ है और इसके कारण राज्य की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों में 1576 नये मामले सामने आये हैं , जिसके बाद यहां कुल संक्रमितों की संख्या 29100 हो गयी है तथा कुल 1068 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 6564 लोग इसके संक्रमण से ठीक भी हुए हैं।

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शेयर बाजार गिरावट में

मुंबई । कोरोना वायरस संक्रमण से प्रभावित अर्थव्यवस्था काे गति देेने के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों के लिए की जा रही घोषणायें निवेशकों को बाजार की ओर आकर्षित करने में असफल होती दिख रही है क्योंकि शेयर बाजार में गिरावट का रूख बना हुआ है। शुक्रवार को भी शेयर बाजार गिरावट लेकर बंद हुआ।

बीएसई का सेंसेक्स 25.16 अंक गिरकर 31097.73 अंक पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 5.90 अंक फिसलकर 9136.85 अंक पर रहा। बीएसई में छोटी और मझौली कंपनियों में भी बिकवाली देखी गयी जिसेस मिडकैप 0.31 प्रतिशत उतरकर 11500.32 अंक पर और स्मॉलकैप 0.16 प्रतिशत उतरकर 10688.86 अंक पर रहा।

बीएसई में कुल 2493 कंपनियों में कारोबार हुआ जिसमें से 1229 गिरावट में और 1086 बढ़त में रहा जबकि 178 में कोई बदलाव नहीं हुआ।वैश्विक स्तर पर मिलाजुला रूख देखा गया। ब्रिटेन का एफटीएसई 0.69 प्रतिशत, जर्मनी का डैक्स 0.79 प्रतिशत, जापान का निक्केई 0.62 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.12 प्रतिशत की बढ़त में रहा जबकि हांगकांग का हैंगसेंग 0.14 प्रतिशत और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.07 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ।

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गरारे और जलनेति से थम सकता है कोरोना वायरस का संक्रमण: डा. शीतू सिंह

जयपुर. कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जयपुर के सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज की श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ शीतू सिंह ने दावा किया है कि गुनगुने पानी के गरारे और नेजल वाश (जल नेति) करके कोरोना वायरस के संक्रमण को फेफडों तक पहुंचने से रोका जा सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय जनरल “लंग इंडिया” के ताजा अंक में प्रकाशित डा. सिंह के रिसर्च पेपर में कहा गया है कि नियमित रूप से गुनगुने पानी के गरारे और नेजल वॉश (जल नेति) गले और नाक में पहुंचे कोरोना वायरस को समाप्त कर देते हैं। जल नेति को मेडिकल साइंस में नेसोफेरेंजियल प्रोसेस कहते हैं।

नाक और गले की धुलाई से कम होता है वायरस का लोड

डॉ शीतू सिंह ने बताया कि Rapid Systematic Analysis में सर्दी, खांसी और बुखार के रूप में प्रकट होने वाले अपर रेसपेरेटरी वायरल संक्रमण की रोकथाम में गरारे और जल नेति का मूल्यांकन किया गया है। शोध से पता चला कि नाक और गले के माध्यम से प्रवेश करने वाले वायरस जनित रोगों की रोकथाम में गरारे और जलनेति से मदद मिलती है। जिस तरह धोने से हाथ संक्रमण रहित होते हैं, उसी तरह गरारे और नेजल वॉश से नाक और गले की धुलाई होती है और उससे वायरल लोड कम होता है। गले और नाक के म्यूकोसा की कोशिकाओं में इसका एंटी वायरल प्रभाव होता है।

कम हो जाती है बीमारी की अवधि

शोध के अनुसार नियमित गरारे और नेजल वॉश COVID 19 की रोकथाम में भी उपयोगी हो सकते है। पूर्व के अध्ययन भी इस बात की पुष्टि करने के लिए मौजूद हैं कि जलनेति और गरारे करने से बीमारी की अवधि, उसके लक्षण और वायरस की मात्रा कम हो जाती है। शोध के ग्रुप लीडर श्वांस रोग विशेषज्ञ और राजस्थान हॉस्पीटल के अध्यक्ष डॉ वीरेंद्र सिंह ने बताया कि एडिनबरा में हुए एक अध्ययन में अपर रेसपेरेटरी वायरल संक्रमण में वायरस के प्रकार का भी अध्ययन किया गया था। डॉ वीरेंद्र ने कहा कि जापान में इन्फ्लूएंजा नियंत्रण के लिए जारी राष्ट्रीय दिशानिर्देश में फेस मास्क और हाथ धोना भी शामिल है। इसी तर्ज पर गरारे और नेजल वॉश को भारत में प्रोत्साहित किया जा सकता है। डा. वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कान के छिद्र वाले मरीजों को गरारे और जलनेति चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही करने चाहिए।

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कड़ी धूप में जाते ही दम तोड़ देता है यमराज बना कोरोना वायरस, अमेरिका ने किया दावा

कोरोना वायरस के डर से घरों में छुपी हुई दुनिया के लिए राहत की खबर, यमराज की शक्ल में आया ये वायरस सूरज की धूप नहीं सह पाता और कड़ी धूप में जाते ही दम तोड़ देता है। ये दावा अमेरिका के घरेलू सुरक्षा विभाग अति उन्नत बायो कन्टेनमेंट लैब ने किया है। लैब के अनुसार सूरज की रोशनी कोरोना को खत्म कर सकती है, जबकि गर्म तापमान और चिपचिपा मौसम वायरस को काफी नुकसान पहुंचाता है।

कोविड-19 को मार देती हैं सूरज की किरणें

व्हाइट हाउस ने लैब के शोध के हवाले से कहा है कि सूरज की किरणें कोविड-19 को मार देती हैं। जबकि गर्म तापमान और ह्यूमिडिटी वायरस को नुकसान पहुंचाते हैं, और इससे वायरस का जीवन और इसकी शक्ति आधी हो जाती है।
कोरोनावायरस महामारी के चलते अमेरिका सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। वर्तमान में यहां कोविड-19 संक्रमण के कुल आठ लाख 60 हजार से अधिक मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 50 हजार से अधिक अमेरिकी नागरिकों की जान चली गई है। तापमान और ह्यूमिडिटी के प्रभाव को लेकर किए गए इस शोध को हफ्तों से ट्रैक्शन मिल रहा है। अमेरिकी सरकार ने कोविड-19 पर तापमान के परीक्षण के प्रारंभिक परिणामों पर पहली बार आधिकारिक मुहर लगाई है।
अमेरिकी घरेलू सुरक्षा विभाग में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी निदेशालय के प्रमुख बिल ब्रायन ने कहा, यह आज तक का हमारा सबसे महत्वपूर्ण ऑब्जर्वेशन है। सूर्य की रोशनी के शक्तिशाली प्रभाव से वायरस सतह और हवा दोनों जगह मरता हुआ पाया गया है। हमने तापमान और ह्यूमिडिटी दोनों के साथ इसी तरह के परिणाम देखे हैं। ब्रायन के अनुसार, एक कमरे में 70-75 एफ तापमान पर 20 प्रतिशत ह्यूमिडिटी के साथ वायरस का जीवन लगभग आधा यानी एक घंटे है।
बिल ने कहा कि इसे लेकर बाहर निकलने पर जब यह यूवी किरणों से टकराता है तो इसका जीवन एक मिनट और डेढ़ मिनट में ही आधा रह जाता है।

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अब सीबीआई करेगी खीरे की तस्करी की जांच, तस्कर पूरी दुनिया में करते हैं स्मगलिंग

सीबीआई अब खीरे की तस्करी की जांच करेगी, लेकिन वह खेतों में उगने वाला खीरा नहीं बल्कि समुद्र में उत्पन्न होने वाला खीरा है। आश्चर्य मत करिए, सी ककम्बर कहलाने वाला खीरे की शक्ल का यह जीव लक्षद्वीप के तटों पर भारी मात्रा में मिलता है और पूरी दुनिया विशेषकर जापान में इसे चाव से खाया जाता है। तस्कर इसकी लक्षद्वीप से पूरी दुनिया में स्मगलिंग करते हैं।

समुद्री जीव है सी ककम्बर

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने लक्षद्वीप से समु्द्री जीव सी ककम्बर की विभिन्न प्रजातियों की तस्करी के मामले में जांच शुरू कर दी है। सीबीआई ने पर्यावरण मंत्रालय के अधीन कार्य कर रहे वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो का आग्रह स्वीकार करते हुए कल लक्षद्वीप के कावारत्ती के चार निवासियों के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज करके जांच शुरू कर दी। कावारत्ती वन विभाग ने विलुप्त प्राय: हो चुके विभिन्न प्रजातियों के 173 मृत और 46 जीवित सी ककम्बर को सुहेली चर्याकारा द्वीप के पास से एक नाव से बरामद किया था। इसके बाद इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की गयी थी। प्राथमिकी में जिन चार व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है उनमें सलमानुल फारिस, इरफानुद्दीन, रमीश खान और मोहम्मद अली कोडिपल्ली शामिल हैं। ये सभी कावारत्ती के निवासी हैं। मामले की जांच जारी है।

राष्ट्रीय उद्यान में बाढ़ से वन्य जीवों की रक्षा

इधर केन्द्र सरकार ने असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बाढ़ से वन्य जीवों की रक्षा के लिए ऊंचे स्थलों की संख्या बढ़ाना तय किया है। जानवरों को बाढ़ के पानी से बचाने के लिए राष्ट्रीय उद्यान के अंदर ऊंचे स्थलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। भारी वाहनों की चपेट में आने से होने वाली वन्य जीवों की मृत्यु की घटनाओं को रोकने के लिए ओवरपास और स्पीड गवर्नर लगाने के साथ—साथ वाहन चालकों के लिए संकेतक भी लगाए जाएंगे। कुल 430 वर्ग किलोमीटर में फैले काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से होकर ब्रह्मपुत्र नदी गुजरती है। मानसून के समय हर साल इसमें बाढ़ आती है जिससे यहां रहने वाले जानवरों को दिक्कत होती है।

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भगवान के चरणों की अपेक्षा खेतों में नष्ट हो रहे हैं सुगंध के साथ सौंदर्य के प्रतीक फूल

कोविड 19 ने भगवान के चरणों में अर्पित किए जाने वाले फूलों की ऐसी दुर्गति की है कि वे अब खेतों में ही अंतिम सांस लेने को मजबूर है। सुगंध के साथ सौंदर्य के प्रतीक फूलों के कारोबार को देश में जारी लाकडाउन ने भारी नुकसान पहुंचाया है और बागों में फूलों के साथ साथ किसानों के चेहरे भी मुरझा गये हैं।

गंगा-यमुना के कछारी क्षेत्र में बसा नैनी फूलो की खेती के लिए उपजाऊ माना जाता है। यहां गुलाब, गेंदा, गुलाब, सूरजमुखी, चमेली के फूलों की खेती की जाती है। लॉकडाउन के कारण मंडियों में फूलों की आवक बंद होने से प्रतिदिन लाखों रूपये मूल्य के फूल का कारोबार चौपट हो गया है। फूलों की खेती कर किसान अच्छी कमाई करते हैं लेकिन शादी विवाह के दौर में लॉकडाउन होने से फूलों का कारोबार बंद हो गया जिससे बड़ी समस्या उत्पन्न हो गयी। फूलों की खेती से परोक्ष और अपरोक्ष तौर पर कम से कम 1500 से 2000 लोग जुड़े हुए है।

गुलाब की खेती को तवज्जो

एक उद्यान अधिकारी के अनुसार चाका, सबहा, सोनई का पुरवा और धनपुर समेत कई गांवों में फूलों की खेती से किसान लाभ कमाते हैं। चाका गांव के किसान तो गेहूं, धान आदि की फसल छोड़कर गुलाब की खेती को तवज्जों दे रहे हैं। नैनी में यमुनापार के अरैल, गंजिया, देवरख, खरकौनी, मवइया, कटका और पालपुर समेत करीब 40-45 से अधिक गांवो में फूल की खेती होती है। सामान्य दिनों में तडके पुराने यमुना पुल के पास और गऊघाट में फूल मंडी सज जाती थी। फूलों की सप्लाई शहर के अलावा कौशांबी, प्रतापगढ़, जौनपुर, वाराणसी, पडोसी राज्य मध्य प्रदेश के रींवा, कोलकत्ता और छत्तीसगढ़ तक महक भेजी जाती है। महामारी के कारण घोषित लॉकडाउन से इन्हें खरीदने वाला कोई नहीं है। फूलों की तरह खिला रहने वाला किसानों का चेहरा कारोबार ठप होने से मुरझा गया है। छोटे से लेकर बड़े मंदिर, देवालय और तीर्थस्थल तक, सब बंद पड़े हैं।

बर्बाद हो गया यह सीजन 

हर तरह के आयोजनों पर पूरी तरह रोक है। ऐसे में फूल किसानों और कारोबारियों का यह सीजन बर्बाद हो गया है। नवरात्रि के दिनों में फूलों की डिमांड ज्यादा होती है। लेकिन, इस बार सब ठप्प होने से काफी नुकसान हुआ है। फूलों की बिक्री बंद होने से किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। पौधों पर सूखते फूलों को देखकर कोरोना के कारण किस्मत को कोसने को मजबूर हैं। उन्होने बताया कि किसानों को पौधों को बचाने के लिए फूलों को तोड़कर खेत में गिराना पड़ रहा है।

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गरीबों की किचन में परोस रहे थे शराब, मयखाना चलाने वाले दो विदेशी गिरफ्तार

लॉकडाउन में फंसे गरीबो को भोजन मुहैया कराने के नाम पर चलाए जा रहे किचन में मयखाने चलाए जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने ऐसे ही एक मयखाने का भंडाफोड़ करके दो विदेशियों को गिरफ्तार किया है। अफ्रीकी मूल के दोनो विदेशी के कब्जे से अवैध शराब भी बरामद की गयी है।

इस सिलसिले में आरोपियों के खिलाफ मोहन गार्डन थाने में आपराधिक मामला दर्ज कराया गया है। गिरफ्तार दोनो अफ्रीकी युवकों की उम्र 30 और 22 साल है।
डीसीपी के मुताबिक, 22-23 अप्रैल की मध्य रात्रि में करीब ढाई बजे इस संदिग्ध किचन के बारे में सूचना मिली थी। यह किचन मोहन गार्ड के विपिन गार्डन में चल रहा था। किचन की आड़ में चल रहे मयखाने का पर्दाफाश करने के लिए प्रशिक्षु आईपीएस अक्षत कौशल, एसएचओ मोहन गार्डन अरुण कुमार, सहायक उप निरीक्षक संजय धामा, हवलदार लोकेंद्र और एसीपी मोहन गार्डन विजय सिंह की तीन टीमें बनाई गयीं।

योजना बनाकर किचन को घेर लिया

इन्हीं टीमों ने योजना बनाकर किचन को घेर लिया। पुलिस टीमों ने जब छापा मारा तो, मौके से पुलिस को 11 बीयर की बोतलें, 3 क्वार्टर बोतल, बीयर की कई खाली बोतलें मिलीं। मौके पर मौजूद मिले दोनो अफ्रीकी मूल के युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। छानबीन के दौरान दोनो आरोपी विेदेशी युवक भारत में अपने ठहरने का कोई वैध दस्तावेज भी नहीं दिखा पाये।
छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि, जिस मकान में किचन के अंदर चोरी छिपे ये मयखाना चल रहा था वो, किराये पर था। पता चला कि मकान मालिक ने भी बिना कोई वेरीफिकेशन कराये हुए ही विदेशी युवकों को किराये पर मकान दे दिया था। लिहाजा मकान मालिक के खिलाफ भी पुलिस ने अलग से एक और मामला दर्ज किया है।

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कोरोना संकट में उलझे अमेरिका को हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीनी नौसेना की सीधी चुनौती, वियतनाम और मलेशिया को भी धमकाया

समूचे विश्व को कोरोना वायरस में उलझाकर चीन ने हिंद प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व को सीधी चुनौती पेश कर दी है। उसने दक्षिण चीन सागर में अपनी नौसेना की आक्रामक तैनाती बढ़ाकर वियतनाम तथा मलेशिया को धमकाने के साथ ही इस इलाके से होकर गुजरने वाले समुद्री मार्ग पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं।

 

बढ़ गई है चीनी आक्रामकता

दक्षिण चीन सागर के इसी मार्ग से विश्व के एक तिहाई मालवाही पोत गुजरते हैं।
दक्षिण चीन सागर के विवादित क्षेत्र में चीनी आक्रामकता बढऩे के साथ ही अमेरिकी नौसैनिक पोतों के साथ एक ऑस्ट्रेलियाई युद्धपोत के भी आ जाने से मलेशिया, विएतनाम और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ऑस्ट्रेलियाई नौसेना की फ्रिगेट एचएमएएस पर्रामट्टा और तीन अमेरिकी युद्ध पोत इस सप्ताह चीनी सरकार के सर्वेक्षण पोत हाइयांग डिझी 8 के करीब आ गये थे जिस पर विवादित क्षेत्र में तेल के उत्खनन करने का संदेह है।

पर्रामट्टा की तैनाती का फैसला

ऑस्ट्रेलियाई रक्षा अधिकारी पीटर ने कहा कि पर्रामट्टा की तैनाती का फैसला तो एक साल पहले ही ले लिया गया था। उस समय यह पता नहीं था कि यह पोत एक ऐसे नाजुक सैन्य वातावरण में आ जाएगा। उन्होंने कहा कि मार्च के बाद इस क्षेत्र में ऐसा वातावरण बनाया गया कि जापान से लेकर दक्षिण चीन सागर तक चीन आक्रामक मुद्रा में नजर आ रहा है। मलेशिया की सरकारी तेल कंपनी पेट्रोनास के एक पोत भी इस इलाके में मौजूद है। एक उभयचर युद्धपोत ‘दि अमेरिका और एक निर्देशत मिसाइल क्रूज ‘दि बंकर हिल उस इलाके में प्रवेश कर गये हैं जिस पर मलेशिया अपना दावा करता है।

यहां से होता है विश्व का एक तिहाई समुद्री मालवहन 

इसी समय इसी क्षेत्र में चीन सरकार का एक पोत पेट्रोनास के पोत का पीछा कर रहा था जिस पर तेल उत्खनन के उपकरण लदे हुए थे। चीनी और ऑस्ट्रेलियाई युद्धपोत भी आस पास ही पूरी तरह से चौकन्ने हैं। कोविड 19 की वैश्विक महामारी को नियंत्रित करने के चीन के प्रयासों के बावजूद चीनी सेना ने दक्षिण चीन सागर में अपनी सक्रियता को कम नहीं किया है जो सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और जहां से विश्व का एक तिहाई समुद्री मालवहन होता है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार चीन सेना की अरसे से चली आ रही है आक्रामकता और बढ़ गयी है। ऑस्ट्रेलियाई स्ट्रेटिजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक का कहना है कि यह चीन की सोची-समझी रणनीति है जिसके तहत वे प्रयास कर रहे हैं कि दुनिया का ध्यान भंग करके और अमेरिका की क्षमता को कम करके पड़ोसी देशों पर दबाव बढ़ाया जाये।

मछुआरों को कर रहे हैं तंग 

जनवरी के बाद से कोरोना विषाणु की महामारी तेजी से बढ़ी और चीन सरकार और उसके तटरक्षक पोत एवं नौसैना दक्षिण चीन सागर के विवादित क्षेत्र में सक्रिय हैं और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा बलों से भिड़ रहे हैं एवं मछुआरों को तंग कर रहे हैं। इसी माह विएतनाम के सुरक्षा बलों ने आरोप लगाया था कि एक चीनी गश्ती पोत ने एक विएतनामी मछुआरे की नौका को टक्कर मार कर डुबा दिया था। मार्च में चीन ने समुद्री कृत्रिम दीप पर दो नये अनुसंधान स्टेशनों को खोला है। इस क्षेत्र पर फिलीपीन्स एवं अन्य देशों का दावा है। इन अनुसंधान केन्द्रों पर सैन्य बंकर और सैन्य इस्तेमाल वाले रन वे भी बनाये गये हैं। गत सप्ताहांत चीन सरकार ने घोषणा की थी कि उसने दक्षिण चीन सागर में दो नये जिले स्थापित किये हैं जिनमें दर्जनों छोटे छोटे टापू और चट्टानें हैं। उनमें से कई तो पानी में डूबे हुए थे जिन पर अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार किसी का प्रादेशिक दावा भी नहीं बनता है।
अमेरिका के होनोलुलु स्थिति डैनियल के इनोउये एशिया पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज में प्रो. अलेक्जेंडर ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जबकि चीन कोविड 19 की महामारी से मुकाबला कर रहा है, वह दीर्घकालिक सामरिक लक्ष्यों को भी दिमाग में रखे हुए है। चीनी पक्ष दक्षिण चीन सागर में एक नये वातावरण को जन्म देना चाहते हैं जिसमें हर बात में उनका वर्चस्व दिखे। इसके लिए वे अधिक से अधिक आक्रामक हो रहे हैं।

कुछ नहीं होगा दि अमेरिका और ‘बंकर हिल की मौजूदगी से 

वैसे अमेरिका का दक्षिण चीन सागर में कोई प्रादेशिक दावा नहीं है लेकिन अमेरिकी नौसेना का कहना है कि वह इस जलक्षेत्र में दशकों से शांति बनाये रखती आयी है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने चीन को इस क्षेत्र में बढ़ते सैन्यीकरण के खिलाफ कई बार चेताया है। अमेरिका की हिन्द प्रशांत कमान की प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कमांडर निकोल शेवेग्मैन ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी नौसेना की ऑपरेशनल उपस्थिति के माध्यम से हम अपने सहयोगी देशों एवं साझीदारों की नौवहन एवं हवाई परिवहन की स्वतंत्रता तथा उन अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों की रक्षा कर रहे हैं जो हिन्द प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा एवं समृद्धि के लिए आवश्यक है। अमेरिका अपने सहयोगियों एवं साझीदारों की उनके आर्थिक हितों के निर्धारण के प्रयासों की मदद कर रहा है। चीन सरकार ने अमेरिका के पक्ष का विरोध करते हुए कहा है कि अमेरिका इस क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है। ‘दि अमेरिका और ‘बंकर हिल की मौजूदगी से कुछ नहीं होगा।

मंगलवार को अमेरिकी नौसेना को अपने युद्धपोतों की तस्वीरों को टवीटर पर पोस्ट किया। इनमें एक तीसरा पोत ‘दि बैरी भी था जो एक डिस्ट्रॉयर है। अमेरिकी नौसेना ने कहा कि ये पोत हिन्द प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा एवं स्थिरता के समर्थन में तैनात हैं। जिस क्षेत्र में अमेरिकी पोत मौजूद हैं, वह मलेशिया से दो सौ नाविक मील दूर है। मलेशिया, चीन और विएतनाम तीनों देशों का विवादित जलक्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार का दावा है।

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मुनाफाखोर चीन का पर्दाफाश, दक्षिण कोरियाई कम्पनी आधे दामों पर बेच रही है कोरोना टेस्टिंग किट

कोरोना महामारी को लेकर पूरे विश्व के निशाने पर आए चीन की कम्पनियां टेस्टिंग किट पर भारी मुनाफा वसूल रही हैं। इसका खुलासा दक्षिण कोरियाई कम्पनी एस. डी बायोसेंसर की ओर से हरियाणा सरकार को सप्लाई की गई टेस्टिंग किट से हुआ है। दक्षिण कोरियाई कम्पनी ने किट चीनी कम्पनी के मुकाबले 400 रुपए सस्ती दर पर बेची है। चीनी कम्पनी इसी किट की कीमत 780 रुपए वसूल रही है।

चीन का आर्डर रद्द कर दक्षिण कोरियाई कम्पनी को दिया

इसी के साथ हरियाणा सरकार ने चीन से मंगाई जाने वाली एक लाख रेपिड टेस्ट किट का आर्डर रद्द कर इसे दक्षिण कोरियाई कम्पनी को दे दिया। दक्षिण कोरियाई कम्पनी का कारखाना हरियाणा के मानेसर में ही स्थित है। दक्षिण कोरियाई कम्पनी एस.डी. बायोसेंसर यह किट गुणवत्ता में भी बेहतर है। इसलिये चीन की कम्पनियों को दिया गया आर्डर रद्द किया गया है। इससे सरकार को राजस्व की भी बचत होगी। कोरियाई कम्पनी को एक लाख किट का आर्डर दिया गया है जिसमें से राज्य सरकार को 25 हजार रैपिड टेस्टिंग किट मिल गई हैं। इसकी प्रति किट कीमत 380 रुपए है जो चीन से आयातित किट से लगभग 400 रुपए सस्ती है। यह किट यहां बनने से अब इसके लिये दूसरे देशों पर देश और प्रदेश की निर्भरता कम होगी।

कोरियाई कम्पनी एक माह में देगी एक करोड़ रेपिड टेस्टिंग किट

खास बात यह है कि किट बनाने की स्वीकृति 15 दिन में ही मिल गई, जिसमें रूटीन में पांच माह तक का समय लग जाता है। क्योंकि किट निर्माण के लिये पहले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे को आवेदन करना होता है तो इसके बाद भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद को जाता है तथा इसके बाद औषध महानियंत्रक से उत्पादन की स्वीकृति लेनी होती थी। कोरियाई कम्पनी एक माह में एक करोड़ रेपिड टेस्टिंग किट तैयार करेगी। हरियाणा में कोरोना मरीजों के दुगुने होने की रफ्तार लगभग 14 दिन है जबकि देश में यह औसत 7.5 दिन है। हरियाणा में रिकवरी रेट 57 है वहीं केंद्र में केवल 16 फीसदी है।

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हर साल पांच लाख भारतवासियों को मौत के घाट उतार देती है तपेदिक, इतने ही निगल जाता है डायरिया

दुनिया भर में कोरोना वायरस (कोविड-19) की तुलना में तपेदिक (टीबी) और डायरिया जैसी रोकथाम की जा सकने वाली और उपचार योग्य बीमारियों से अधिक मौतें होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) के अनुसार अकेले इस्केमिक हृदय रोग से दुनिया भर में औसतन 26,000 लोगों की मौत होती है।

भारत में दिल और सांस की बीमारियों से लाखों लोगों की मौत

आंकड़ों के अनुसार भारत में दिल और सांस की बीमारियों से होने वाली मौतों के अलावा हर दिन लगभग 2,000 लोग डायरिया से और 1,200 से अधिक लोग तपेदिक से मरते हैं। भारत में बीमारियों के अलावा यातायात दुर्घटनाओं में भी रोजाना 500 लोग मारे जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार स्ट्रोक के कारण हर दिन दुनिया भर में करीब 16,000 लोगों की मौत होती है। आंकड़ों से यह भी पता चला है कि अस्थमा और नवजातों में जन्म संबंधी विकारों के साथ हृदय, श्वसन, डायरिया और गुर्दे की बीमारियों से दुनिया भर में हर साल लाखों लोगों की मौत होती है।

कोरोना से इसलिए ज्यादा डरी हुई है दुनिया

एक अनुभवी चिकित्सक के अनुसार स्वाइन फ्लू एक दशक पहले दहशत का कारण था, लेकिन अब शायद ही इसका कभी उल्लेख होता है। इसके बावजूद भारत में स्वाइन फ्लू से हर साल एक हजार से अधिक लोगों की मौत होती है। इसके बावजूद दुनिया कोरोना से इसलिए ज्यादा डरी हुई है क्योंकि यह प्रचार हो गया है कि कोरोना वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं है। हवा से फैलने वाली तपेदिक जैसी बीमारी भी स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक बड़ी चुनौती है जबकि इसका इलाज है। तपेदिक से भारत में प्रतिवर्ष करीब 4.5 लाख लोगों की मौत होती है। चिकित्सक ने कहा कि इनमें से किसी भी कारण से लोगों या सरकार को कोरोना की नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस वायरस की संक्रामकता का पता इसी से चलता है कि इसने लगभग पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया है। अगर इसके खिलाफ हर मोर्चे पर नहीं लड़ा गया तो यह एक वैश्विक तबाही बन सकता है।