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भाजपा सरकार पिछड़ा वर्ग ओबीसी के लोगों के लिये कर रही इतना बड़ा काम

लातेहार। केंद्रीय गृह मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने आज दावा किया कि केंद्र की भाजपा सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोगों को और आरक्षण देने की स्कीम पर काम कर रही है।

शाह ने यहां मनिका के उच्च विद्यालय मैदान में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 70 सालों में कांग्रेस ने कभी भी ओबीसी का सम्मान नहीं किया। यह तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार है, जिसने ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 एवं 35 (ए) को समाप्त कर देश में आतंकवादियों का प्रवेश द्वार को हमेशा के लिए बंद कर दिया है। उन्होंने राम जन्मभूमि का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सभी चाहते थे कि भगवान राम का मंदिर अयोध्या में बने। इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के हाल ही में आये फैसले ने मंदिर निर्माण का रास्ता खोल दिया है।

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ऐसी पार्टी के पक्ष में मतदान करना चाहिए जिसमें जंग न लगा हो-अमित शाह

लोहरदगा । केंद्रीय गृहमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने झारखंड के लोगों से एक बार फिर भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का आह्वान करते हुए आज कहा कि यदि पार्टी दुबारा सत्ता में आई तो विकास के लंबित कार्यों को पूर्ण करेगी।

शाह ने यहां बी. एस. कॉलेज मैदान में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि लोहरगा अपने धातु भंडार के लिए जाना जाता है इसलिए यहां के लोगों को वैसी पार्टी के पक्ष में मतदान करना चाहिए जिसमें जंग न लगा हो। पिछले पांच साल में भाजपा सरकार ने झारखंड के विकास के लिए काम किया है यदि इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा दुबारा सत्ता में आई तो विकास के लंबित पड़े सभी कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे।

भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस और हमला करते हुए कहा कि जब तक कांग्रेस सत्ता में रही तबतक झारखंड राज्य का गठन नहीं हो सका लेकिन जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी तब यह संभव हुआ। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने वैसे लोगों से हाथ मिला लिया जो केवल सत्ता में आने के लिए युवओं पर गोली चलाने के आदेश देते हैं।

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केबीसी के अगले एपिसोड में पूछा जा सकता है ये सवाल, किस पार्टी को मिला है भारतीय जासूसी पार्टी का खिताब

केबीसी में ​अमिताभ बच्चन आजकल राजनीति से जुड़े सवाल अधिक पूछ हैं और अक्सर ऐसे सवालों का जवाब देने में प्रतिभागी नाकाम रहते हैं। ऐसे ही सवालों की लिस्ट में एक नया सवाल जुड़ने वाला है जिसे केबीसी के अगले एपिसोड में कभी भी पूछा जा सकता है क्योंकि ये सवाल ऐसा ही है जिसका जवाब बहुत कम लोग याद रखेंगे। सवाल ये हो सकता है कि भारत में हाल ही किस पार्टी को भारतीय जासूसी पार्टी का खिताब मिला है।

क्योंकि एक दिन पहले ही कांग्रेस ने केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि उसे इस साल अप्रैल-मई में बीते लाेकसभा चुनावों के समय इजरायली साॅफ्टवेयर पिगैसस के माध्यम से नेताओं, पत्रकारोंं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की जासूसी कराये जाने की पूरी जानकारी थी और वह इस मामले में रहस्यमयी एवं षड़यंत्रकारी चुप्पी साधे हुए है।
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने संवाददाता सम्मेलन में अपने आरोपों के समर्थन में कुछ दस्तावेज पेश करते हुए कहा, “अबकी बार जासूस सरकार।” उन्होंने कहा कि फेसबुक एवं व्हाट्सएप के मालिक ने 17 मई को अपनी रिपोर्ट में केन्द्र सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को इस बारे में जानकारी दे दी थी। उन्होंने कहा कि जासूसी के लिए इजरायल निर्मित जिस पिगैसस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया, उसे निर्माता कंपनी केवल एवं केवल सरकार एवं उसकी सुरक्षा एजेंसियों को ही बेचती है।

सुरजेवाला ने रिपोर्ट के आधार पर यह दावा भी किया कि पिगैसस की जासूसी निगाह से नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) और विदेश संचार निगम लिमिटेड भी प्रभावित रहे हैं। इसका मतलब यह है कि कोई भी जासूसी के दायरे से अछूता नहीं था। उन्होंने कहा कि सरकार यह सब जानने के बावजूद एक रहस्यमयी एवं षड़यंत्रकारी चुप्पी साधे रही। अमेरिका में मामला 30 अक्टूबर को सामने आने के बाद संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीटर पर अगले दिन कहा कि उन्होंने कंपनी से जानकारी मांगी है ।

उन्होंने कहा कि आज तक सरकार ने इस बारे में कुछ भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया है और पत्रकारों एवं संपादकों पर दबाव डाल कर सूत्रों के हवाले के झूठी बातें छपवा रही है। उन्होंने सरकार से पूछा कि वह बताये कि क्या चुनाव के लिए उसने राजनेताओं एवं पत्रकारों की जासूसी करवायी। क्या यह टेलीग्राफ अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम का उल्लंघन नहीं है। केन्द्र सरकार ने किसके कहने पर पिगैसस की खरीद एवं उसके गैरकानूनी इस्तेमाल की इजाजत दी। क्या यह काम प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार या गृहमंत्री ने किया था। केन्द्र सरकार ने इस पर रहस्यमयी चुप्पी क्यों साधे रखी। क्या सरकार इसके जिम्मेदार मंत्रियों या अधिकारियों पर कोई कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से इस मामले में भाजपा की संलिप्तता उजागर हुई है उसके बाद पार्टी के नाम का अर्थ अब भारतीय जासूस पार्टी हो गया है।

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इसलिए बौखला गया भारत का ये बड़ा जाट नेता, दे रहा है कमल को मसल देने की धमकी

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के संयोजक एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व मंत्री यूनुस खान पर खींवसर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की मदद करने का आरोप लगाया है। बेनीवाल ने ट्वीट कर इस बारे में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एवं कार्यवाहक अध्यक्ष जे पी नड्डा एवं भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया से शिकायत कर इन दोनों नेताओं के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव और अब खींवसर उपचुनाव में भी श्रीमती वसुंधरा राजे और श्री खान रालोपा का भाजपा के साथ गठबंधन के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी की चुनाव में खुले आम मदद की, इन पर कार्यवाही की जानी चाहिये।

पिछले लोकसभा चुनाव के समय रालोपा एवं भाजपा के बीच गठबंधन हुआ था और श्री बेनीवाल नागौर से सांसद चुने गये थे। इसके बाद हाल में खींवसर विधानसभा सीट पर हुए चुनाव में भी गठबंधन जारी रहा। गत 24 अक्टूबर को उपचुनाव परिणाम में हनुमान बेनीवाल के छोटे भाई एवं रालोपा प्रत्याशी नारायण बेनीवाल संभावना से बहुत कम अंतर करीब साढ़े हजार से चुनाव जीता। जबकि लोकसभा चुनाव में क्षेत्र में रालोपा एवं कांग्रेस के प्रत्याशियों में करीब 55 हजार का अंतर रहा था।

वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई खींवसर में शुरू से ही हनुमान बेनीवाल का राजनीतिक दबदबा रहा है और वह पहले चुनाव में ही भाजपा के टिकट पर खींवसर से विधायक चुने गये। इसके बाद 2013 में निर्दलीय एवं गत वर्ष पिछले विधानसभा चुनाव में खुद की पार्टी रालोपा उम्मीदवार के रुप में विधायक निर्वाचित होकर लगातार तीसरी बार विधानसभा पहुंचे।

इसके बाद वह सांसद निर्वाचित हुए और सीट खाली होने पर हुए उपचुनाव में अपने छोटे भाई को चुनाव मैदान में उतारा और वह भी विधायक चुने गये। हालांकि उनके भाई नारायण बेनीवाल के चुनाव जीत जाने से उनका दबदबा कायम रहा लेकिन संभावना से कम मत मिले। इसके बाद हनुमान बेनीवाल ने श्रीमती राजे एवं खान पर कांग्रेस प्रत्याशी की चुनाव में मदद करने का आरोप लगाया।

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राहुल गांधी ने त्यागपत्र देकर एक से एक दिग्गज नेताओं से त्यागपत्र दिलाने का सिलसिला शुरू किया है- राजनाथ

नयी दिल्ली । कर्नाटक एवं मध्यप्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायकों को तोड़ने एवं इस्तीफा दिलाने के आरोपों से इन्कार करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आज संसद में कटाक्ष किया कि कांग्रेस में त्यागपत्र देने का सिलसिला राहुल गांधी ने शुरू किया है जिसका भाजपा से कोई लेना देना नहीं है।

लोकसभा में शून्यकाल आरंभ होते ही सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने यह मामला उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र साजिश का शिकार हो गया है।ध्यप्रदेश एवं कर्नाटक की सरकार में दलबदल कराया जा रहा है। केन्द्र सरकार गुप्त तरीके से साजिश कर रही है। भाजपा को पसंद नहीं है कि विपक्षी दलों की सरकार किसी राज्य में चले। ये बहुत चिंता की बात है।

चौधरी ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों को राज्यपाल के कार्यालय से सुनियोजित ढंग से कारों के जरिये हवाईअड्डे ले जाया गया और फिर वहां से भाजपा के एक सांसद के चार्टर्ड विमान से मुंबई ले जाकर एक पांच सितारा होटल में रखा गया है। यह सब कुछ पूर्वनियोजित ढंग से कराया गया है। केन्द्र सरकार कहती है कि ये लोकतंत्र में विश्वास करती है लेकिन ये तो लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा रही है। उन्होंने कहा, “आपके 303 सांसद जीत गये लेकिन आपका पेट नहीं भरा। आपका पेट कश्मीरी गेट हो गया है।”चौधरी के बाद संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सदन के उपनेता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस विषय पर बोलेंगे। इस पर विपक्ष के सदस्यों ने मांग की कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में माैजूद हैं, तो उन्हीं को जवाब देना चाहिए। पर जोशी ने कहा कि सिंह सदन के उपनेता हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि कर्नाटक में जो कुछ भी हो रहा है। उससे उनकी पार्टी का कुछ भी लेना देना नहीं है। उनकी पार्टी का ऐसा कोई इतिहास नहीं है कि किसी दूसरी पार्टी के विधायकों/ सांसदों पर दबाव डाल कर इस्तीफा दिलवाया हो। भाजपा संसदीय गरिमा को बनाये रखने को लेकर हमेशा से प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस में त्यागपत्र दिलाने का सिलसिला हमने नहीं शुरू किया। राहुल गांधी ने त्यागपत्र देकर एक से एक दिग्गज नेताओं से त्यागपत्र दिलाने का सिलसिला शुरू किया है। भाजपा का इससे कोई लेना देना नहीं है।

सिंह के जवाब से कांग्रेस के सदस्य उत्तेजित हो गये। उन्होंने अपनी अपनी सीटों पर खड़े हाे कर ‘लोकतंत्र बचाओ’ के प्लेकार्ड उठाकर सरकार के विरुद्ध नारे भी लगाये। इसी शोरशराबे के बीच अध्यक्ष आेम बिरला ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के टी आर बालू का नाम पुकारा। बालू ने राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) के पाठ्यक्रम की एकरूपता को लेकर सवाल उठाये और कहा कि तमिलनाडु में कुछ लड़कियों ने आत्महत्या भी की है। शोर शराबे में उनकी बात साफ नहीं सुनायी दी। उन्होंने सरकार ने जवाब चाहा लेकिन अध्यक्ष ने इसकी अनुमति नहीं तो द्रमुक के सारे सदस्य सदन के बहिर्गमन कर गये। अध्यक्ष ने इसके साथ ही भोजनावकाश के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

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ओडिशा विधानसभा के उपाध्यक्ष के लिए चुने गये ये विधायक

भुवनेश्वर । बीजू जनता दल (बीजद) विधायक रजनीकांत सिंह गुरुवार को सर्वसम्मति से ओडिशा विधानसभा के उपाध्यक्ष चुन लिए गए।

 

मुख्यमंत्री और सदन के नेता नवीन पटनायक ने सिंह का विधानसभा उपाध्यक्ष के लिए नाम प्रस्तावित किया और संसदीय मामलों के मंत्री बिक्रम केसरी अरुख ने प्रस्ताव का समर्थन किया।विधानसभा उपाध्यक्ष पद के लिए भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) और किसी अन्य दल ने इस पद के लिए उम्मीदवार खड़ा नहीं किया था और सिंह निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए।

कांग्रेस विधान दल के नेता नरसिंह मिश्रा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी(माकपा) ने सिंह को उपाध्यक्ष चुने जाने पर बधाई और सदन चलाने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।दोनों ने उम्मीद जताई है कि सिंह सदन की गरिमा को बनाये रखने के लिए अपने दायित्वों काे निष्पक्ष निभायेंगे।

विधानसभा अध्यक्ष सूर्या नारायण पात्रो ने सिंह के निर्विरोध उपाध्यक्ष चुने जाने पर सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया और अपील की कि सभी विधायक सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण चलाने में पूरा योगदान करें।नवीन पटनायक सरकार में मंत्री रहे सिंह चार बार से अंगुल विधानसभा सीट से विधायक हैं।उनके पिता आदित्य नारायण सिंह भी पूर्व मंत्री थे।

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इस हिन्दू नेता ने नरेन्द्र मोदी को धमकाया, रामलला को नहीं मिला मंदिर तो फिर….

शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्ण बहुमत की सरकार अब अयोध्या में कानून बनाकर राम मंदिर का निर्माण करवाये, जिसका शिवसेना पूरा समर्थन करेगी। ठाकरे ने रविवार को अपने परिवार एवं शिवसेना के 18 सांसदों के साथ विवादित श्रीरामजन्मभूमि पर विराजमान रामलला के दर्शन किये जिसके बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से रामजन्मभूमि पर राम मंदिर का मामला उच्चतम न्यायालय में लम्बित है लेकिन अब देश में एक मजबूत सरकार आयी है जो मंदिर का निर्माण करायेगी।

उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में हिम्मत है कि संसद में कानून बनाकर राम मंदिर का रास्ता साफ करें। शिवसेना कदम से कदम मिलाकर सरकार के साथ है। शिवसेना ने हमेशा हिन्दुत्व की आवाज उठायी है और भाजपा भी हिन्दुत्व की बात करती है। जिसका परिणाम है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज किया है।

ठाकरे ने कहा कि पिछले साल नवम्बर में हम अयोध्या में आये थे और रामलला से यह वादा किया था कि चुनाव के बाद हम आयेंगे और उस समय हमने कहा था कि पहले मंदिर फिर सरकार जो आज भी कायम है कि कानून बनाओ और राम मंदिर बनाओ। कल से लोकसभा का सत्र शुरू हो रहा है इसलिये शिवसेना के सांसद रामलला के दर्शन व आशीर्वाद लेकर लोकसभा सत्र में सच्चे रामभक्त के रूप में भाग लेंगे।
शिवसेना प्रमुख ने कहा कि हमें विश्वास है कि यहां जल्द से जल्द भव्य राम मंदिर बनेगा जिसमें शिवसेना बढ़-चढ़कर हिस्सा लेगी। अयोध्या ऐसा दिव्य स्थान है जहां कण-कण में राम बसे हैं। यहां बार-बार आने की इच्छा होती है। हमारा यह प्रयास रहेगा कि यहां बराबर आता रहूंगा और श्रीरामजी का आशीर्वाद मिलता रहेगा।

एक सवाल के जवाब में ठाकरे ने कहा कि शिवसेना एवं भाजपा का गठबंधन देश के दूसरे राज्यों में मिलकर चुनाव लड़ें इस पर दोनों दलों को विचार करना होगा। शिवसेना प्रमुख ठाकरे तय कार्यक्रम के तहत सुबह करीब नौ बजे अयोध्या एयरपोर्ट पहुंच गये थे और सुबह दस बजे उन्होंने अपने बेटे आदित्य ठाकरे और शिवसेना के सभी 18 सांसदों के साथ रामलला के दर्शन किए। इस अवसर पर शिवसेना के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य संजय राउत, महाराष्ट्र शिवसेना के युवा नेता आदित्य ठाकरे एवं शिवसेना के सभी सांसद मौजूद थे।
गौरतलब है कि प्रदेश की योगी सरकार में उद्धव ठाकरे एवं सभी सांसदों को राज्य अतिथि का दर्जा दिया है। सांसदों का कहना है कि वे रामलला की धरती पर आकर खुद को धन्य मानते हैं। सुबह उठते ही रामजन्मभूमि का दर्शन करने की व्याकुलता थी जो पूरी हो गई। सांसद संजय यादव ने बताया कि पहले भी राम मंदिर आ चुके हैं। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बने यह शिवसेना ही नहीं सम्पूर्ण भारत का हिन्दू समाज चाहता है।

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अमेठी से राहुल गांधी की हार का ये है असली कारण, वोटरों ने इस वजह से स्मृति को सिर आंखों पर बिठाया

पिछले दो दशकों से गांधी परिवार के अभेद्य दुर्ग के तौर पर विख्यात उत्तर प्रदेश के अमेठी से आखिरकार गुरूवार को कांग्रेस की विदाई हो गयी। वर्ष 1967 में अस्तित्व में आयी अमेठी लोकसभा सीट पर गांधी परिवार के किसी सदस्य की यह पहली हार है। लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को 55 हजार 120 मतो से शिकस्त दी। इसके साथ ही ईरानी ने वर्ष 2014 में गांधी के खिलाफ मिली पराजय का बदला ले लिया। देश भर की निगाहें गुरूवार को सारा दिन इस सीट की मतगणना पर टिकी रहीं।

अमेठी में जीत मिलने के बाद ईरानी ने ट्वीट कर कहा “ कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता ..” । बाद में उन्होने एक और ट्वीट कर अमेठी के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होने लिखा “ एक नयी सुबह अमेठी के लिए , एक नया संकल्प। धन्यवाद अमेठी शत शत नमन । आपने विकास पर विश्वास जताया, कमल का फूल खिलाया। अमेठी का आभार ।  कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेठी में मिली हार को स्वीकार करते हुये ईरानी को जीत की मुबारकबाद दी और साथ ही उन्हे अमेठी के लोगों का ध्यान रखने की गुजारिश की।

अमेठी में कांग्रेस के विध्याधर वाजपेयी ने वर्ष 1967 में अमेठी में पार्टी की जीत की नींव रखी थी। त्रिपाठी यहां लगातार दो बार सांसद चुने गये जबकि 1977 में जनादेश जनता पार्टी के रविंद्र प्रताप सिंह के पक्ष में गया। गांधी परिवार के हाथ में अमेठी की कमान वर्ष 1980 में आयी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी यहां के सांसद चुने गए। इस बीच एक विमान दुर्घटना में संजय गांधी की मृत्यु हो गयी जिसके बाद यहां से निर्वाचित राजीव गांधी 1981 से लेकर 1991 तक अमेठी सीट के सांसद बने रहे।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी के फिदाईन हमले में निधन के बाद इस सीट की जिम्मेदारी कांग्रेस के सतीश शर्मा के कंधों पर आयी। शर्मा ने अमेठी सीट की बागडोर 1991 से लेकर 1998 तक संभाली हालांकि भाजपा के संजय सिन्हा ने वर्ष 1998 में कांग्रेस के दुर्ग में पहली दफा सेंधमारी कर अपना कब्जा जमाया। सिन्हा का यह कार्यकाल बहुत लंबा नहीं जा सका और 1999 में राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी ने संजय सिन्हा को चुनाव में हराया और 1999-2004 तक वह अमेठी की सांसद बनी रही।

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भाजपा को इस सीट पर मुसलमानों की वजह से देखना पड़ सकता है हार का मुंह

राजस्थान में कांग्रेस का गढ़ रही नागौर संसदीय सीट पर इस बार राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के संयोजक हनुमान बेनीवाल के कंधों पर सवार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनाव प्रतिष्ठा दांव पर है जहां बेनीवाल का कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा से सीधा मुकाबला होता नजर आ रहा है।

राज्य में पिछले लोकसभा चुनाव में सभी पच्चीस सीटें जीतने वाली भाजपा ने इस बार रालोपा के साथ गठबंधन कर यह सीट बेनीवाल के लिए छोड़ दी और उनके कंधों पर सवार होकर चुनावी वैतरणी पार करना चाह रही है लेकिन उसके समर्थित उम्मीदवार को नागौर जिले में करीब पचास साल तक राजनीतिक दबदबा रखने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री नाथूराम मिर्धा की पोती पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा कड़ी टक्कर दे रही है।

इस सीट पर 1977 के चुनाव से लगातार जाट उम्मीदवार ही जीतता आ रहा है और गत विधानसभा चुनाव में जिले की दस विधानसभा सीटों पर दो सुरक्षित सीटों को छोड़कर शेष सभी आठ सीटों पर जाट प्रत्याशियों के जीतने से जाट लैंड के रुप में उभरे जिले में इस बार भी मुख्य मुकाबला दो जाट प्रत्याशी हुनमान बेनीवाल और ज्योति मिर्धा के बीच हैं। लोकसभा चुनाव में एक ही समुदाय के दो उम्मीदवार आमने सामने होने से एक बड़े वोट बैंक के बंटने की संभावना होती है लेकिन पिछले चार दशक से अधिक समय में हुए तेरह चुनावों में से अधिकतर मुकाबला दो जाट उम्मीदवार के बीच ही होता आ रहा है। इस बार भी जाटों के मतों का धुव्रीकरण होगा लेकिन जीत किस दल को नसीब होगी यह अन्य समुदायों के मतों पर निर्भर होगा।

नागौर में मुसलमान और जाटों के मत ज्यादा है, इसके बाद राजपूत एवं अनुसूचित जाति तथा मूल ओबीसी के मतदाता भी निर्णायक भूमिका में रहते हैं। भाजपा ने केन्द्रीय मंत्री सी आर चौधरी को फिर से चुनाव मैदान में नहीं उतारकर रालोपा के लिए सीट छोड़ी है जिसका कांग्रेस की ज्योति मिर्धा इसका फायदा उठा सकती है, क्योंकि नागौर में सर्वाधिक छह बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले उनके दादा नाथूराम मिर्धा के कारण आज भी सभी वर्गों में ज्योति के प्रति सद्भावना नजर आ रही है लेकिन युवाओं का झुकाव हनुमान बेनीवाल और प्रधानमंत्री मंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर ज्यादा दिख रहा है।

जिले में मीठे पानी, बिजली, कृषि कनेक्शन, बैलों के परिवहन पर रोक को हटाने, किशनगढ़-परबतसर रेलमार्ग एवं डीडवाना और नांवा में नमक उद्योग के विकास तथा जिले में सड़कों की हालत सुधारने के मुद्दे है लेकिन इस बार मोदी के बढ़ते प्रभाव के चलते ये मुद्दें जोर नहीं पकड़ पा रहे हैं और सभी जगह मुद्दों की बात आने पर मोदी का नाम आ जाता है। नागौर में अभी चुनावी माहौल किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में नजर नहीं आ रहा है।

इन दोनों उम्मीदवारों के अलावा आरपीडब्ल्यूपी के हनुमानराम तथा दस निर्दलीयों सहित कुल तेरह उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इस संसदीय क्षेत्र में आने वाली आठ विधानसभा सीटों में डीडवाना, लांडनूं, परबतसर, नावां और जायल में कांग्रेस विधायक है जबकि नागौर एवं मकराना में भाजपा तथा खींवसर विधानसभा क्षेत्र से रालोपा का विधायक है। रालोपा के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने गत विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी पार्टी की घोषणा की और विधानसभा चुनाव में स्वयं सहित उसके तीन प्रत्याशियों ने चुनाव जीता। बेनीवाल ने पिछले लोकसभा चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में लड़कर एक लाख 59 हजार 980 मत हासिल किये थे।

इससे पिछले चुनाव में ज्योति मिर्धा भाजपा के सी आर चौधरी से 75 हजार 218 मतों से चुनाव हार गई। नागौर में अब तक हुए लोकसभा चुनावों में वर्ष नाथूराम मिर्धा ने सर्वाधिक छह बार 1977, 1980, 1984, 1989, 1991 एवं 1996 में चुनाव जीता। उन्होंने 1989 में जनता दल तथा शेष चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार के रुप में चुनाव जीता। उनके निधन के बाद 1997 में हुए उपचुनाव में उनके पुत्र भानु प्रकाश मिर्धा ने भाजपा प्रत्याशी के रुप में चुनाव जीता। इसके बाद 1998 एवं 1999 में कांग्रेस के रामरघुनाथ चौधरी, 2004 में भाजपा के भंवर सिंह डांगावास एवं 2009 में कांग्रेस की ज्योति मिर्धा ने चुनाव जीता। वर्ष 1984 में पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामनिवासी मिर्धा ने लोकसभा चुनाव जीता था। नागौर से पहला लोकसभा चुनाव निर्दलीय जी डी सोमानी ने जीता। दूसरा चुनाव कांग्रेस के मथुरा दास माथुर तथा तीसरा लोकसभा चुनाव कांग्रेस के एन के सोमनी ने जीता।

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चमकने की अपेक्षा इंडिया ने कसकर मार दी टंगड़ी, कठोर जमीन पर गिरे औंधे मुंह

केंद्र में पहली बार पांच वर्ष तक सरकार चलाने में सफल रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 2004 के चुनाव में जबर्दस्त झटका लगा जब जनता ने उसके ‘शाइनिंग इंडिया और फील गुड’ के प्रचार को धूल धूसरित कर दिया और कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में आने में सफल रही ।
लोकसभा के 543 सीटों के लिए हुये चुनाव में कांग्रेस 145 सीट ही जीत सकी थी लेकिन वह सहयोगी दलों के साथ मिलकर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार बनाने में कामयाबी मिली। गठबंधन ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना नेता चुन लिया था लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री पद संभालने से इन्कार कर दिया और मनमोहन सिंह के नेतृत्व में

नयी सरकार का गठन हुआ। इस चुनाव में राष्ट्रीय पार्टियों के 364 तथा राज्य स्तरीय पार्टियों के 159 उम्मीदवार विजयी हुये थे। राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव बिहार में दो सीटों निर्वाचित हुये थे जबकि जनता दल (यू) के उम्मीदवार शरद यादव पराजित हो गये थे। कांग्रेस की सोनिया गांधी, भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी, बहुजन समाज पार्टी की मायावती, समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी तथा लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के राम विलास पासवान जीत गये थे जबकि कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे चुनाव हार गये थे। चुनाव में कुल 5435 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था जिनमें 2385 निर्दलीय प्रत्याशी थे । कांग्रेस ने 417 उम्मीदवार खड़े किये थे जिनमें 145 निर्वाचित हुये थे । उसे 26.53 प्रतिशत वोट मिले। वहीं भाजपा ने 364 उम्म्मीदवार खड़े किये थे जिनमें से 138 चुने गये। भाजपा को 22.16 प्रतिशत वोट आया था । भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के 34 में से दस तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के 69 में से 43 उम्मीदवार जीते थे । बहुजन समाज पार्टी ने सबसे अधिक 435 उम्मीदवार खड़े किये थे जिनमें से 19 ही निर्वाचित हुये जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 32 में से नौ प्रत्याशी चुने गये थे।

कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में नौ, बिहार में तीन, असम में नौ, आन्ध्र प्रदेश में 29, गोवा में एक, गुजरात में 12, हरियाणा में नौ, हिमाचल प्रदेश में तीन, जम्मू कश्मीर में दो, कर्नाटक में आठ, मध्य प्रदेश में चार, महाराष्ट्र में 13, राजस्थान में चार, पश्चिम बंगाल में छह, झारखंड में छह, दिल्ली में छह, मणिपुर और मेघालय में एक-एक, ओडिशा और पंजाब में दो-दो , तमिलनाडु में दस, छत्तीसगढ, उत्तराखंड, अंडमान निकोबार, चंडीगढ और दामनदीव में एक-एक सीट मिली थी।
भाजपा को उत्तर प्रदेश में दस , बिहार में पांच , असम और अरुणाचल प्रदेश में दो- दो , गोवा में एक , गुजरात में 14, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में एक-एक, कर्नाटक में 18, मध्य प्रदेश में 25, महाराष्ट्र में 13, ओडिशा में सात, पंजाब में तीन, राजस्थान में 21, छत्तीसगढ़ में दस, झारखंड में एक उत्तराखंड में तीन तथा दिल्ली में एक सीट मिली थी। भाकपा को केरल में तीन, पश्चिम बंगाल में तीन, तमिलनाडु में दो, आन्ध्र प्रदेश और झारखंड में एक-एक सीट मिली थी। माकपा को पश्चिम बंगाल में 26, केरल में 12, तमिलनाडु और त्रिपुरा में दो तथा आन्ध्र प्रदेश में एक सीट मिली थी।

समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश में 35 और उत्तराखंड में एक, बसपा को उत्तर प्रदेश में 19, राकांपा को महाराष्ट्र में नौ, तृणमूल कांग्रेस को पश्चिम बंगाल और मेघालय में एक-एक , बीजद को ओडिशा में 11, द्रमुक को तमिलनाडु में 16, जनता दल (एस) को कर्नाटक में दो तथा केरल में एक, जनता दल (यू) को बिहार में छह, उत्तर प्रदेश में एक तथा लक्ष्यद्वीप में एक, राष्ट्रीय जनता दल को बिहार में 22 और झारखंड में दो, अकाली दल को पंजाब में आठ, शिवसेना को महाराष्ट्र में 12, तेलगू देशम पार्टी और तेलंगना राष्ट्र समिति को आन्ध्र प्रदेश में पांच-पांच सीटें मिली थी। झारखंड मुक्ति मोर्चा को झारखंड में चार तथा अोडिशा में एक सीट मिली थी।
तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उत्तर प्रदेश के लखनऊ सीट पर सपा की मधु गुप्ता से भारी मतों से जीत गये थे। वाजपेयी को 324714 और मधु गुप्ता को 106339 वोट मिले थे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी रायबरेली में सपा के अशोक कुमार सिंह से भारी अंतर से जीती थी। श्रीमती गांधी को 378107 तथा सिंह को 128342 वोट मिले थे। अमेठी में कांग्रेस उम्मीदवार राहुल गांधी चुनाव जीते थे।
पीलीभीत में भाजपा के टिकट पर मेनका गांधी और गोरखपुर में इसी पार्टी के आदित्यनाथ निर्वाचित हुये थे। बसपा नेता मायावती ने अकबरपुर में सपा के सेखलाल मांझी को हराया था। मायावती को तीन लाख 25 हजार से अधिक तथा मांझी को दो लाख 66 हजार से अधिक मत आये थे । बलिया में समाजवादी जनता पार्टी के टिकट पर चन्द्रशेखर विजयी हुये थे । मैनपुरी में सपा के मुलायम सिंह यादव ने बसपा के अशोक शाक्य को पराजित किया था।