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प्रवासी मजदूरों पर BJP and Congress कर रही हैं राजनीति :मायावती

नयी दिल्ली । बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने प्रवासी मजदूरों को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुये रविवार को कहा कि मजदूरों को उचित मजदूरी दिलाने के प्रयास नहीं किये गये जिसके उन्हें परेशानी झेलनी पडती है.मायावती ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा के लिए भाजपा की केंद्र सरकार और कांग्रेस दोनों जिम्मेदार हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मजदूरों के मुद्दे पर दोनों ही पार्टियां घिनौनी राजनीति कर रही हैं।

बसपा नेता ने कहा कि भाजपा सरकार और कांग्रेस ने मजदूरों की लगातार अनदेखी की है जिसके कारण उन्हें रोजगार के लिए अलग-अलग शहरों में जाना पड़ा और अब लॉकडाउन के कारण वे भूखे-प्यासे सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर हैं . उन्होंने कहा कि मजदूरों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। अभी तक जहां मजदूर काम कर रहे थे उनसे काम ज्यादा लिया जाता था और वेतन कम दिया जाता था। उन्होंने कहा, ” बसपा ने हमेशा ही मजदूरों के भले के लिए काम किया। हम उन्हें बेरोजगारी भत्ता नहीं रोजगार देते थे.”

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विपक्षी दलों की बैठक कल

नयी दिल्ली। कांगेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पहल पर प्रवासी श्रमिकों की स्थिति तथा आर्थिक हालात से निपटने के लिए सरकार के कदमों पर विचार-विमर्श के वास्ते विपक्षी दलों की शुक्रवार को अहम बैठक बुलाई है।

सूत्रों के अनुसार गांधी इस बैठक की अध्यक्षता करेंगी जिसमें विपक्ष के करीब 24 दलों के नेता शामिल होंगे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित यह बैठक दोपहर बाद तीन बजे से शुरू होगी।

उन्होंने कहा कि बैठक में प्रवासी मज़दूरों की दुर्दशा, कोरोना एवम् लॉकडाउन, सरकार के 20 लाख रुपये के आर्थिक पैकेज किसानों, गरीबों जैसे मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद है।

बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, द्रविड मुनेत्र कषगम, राष्ट्रीय जनता दल, वामदल, नेशनल कांफ्रेंस, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा, जनता दल-एस, बहुजन समाज पार्टी, शिव सेना, लोकतांत्रिक जनता दल, तेलुगू देशम पार्टी,आरएलडीएल आदि दलों के नेताओं के भाग लेने की संभावना है।

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वेंकैया नायडु ने सदन के सदस्याें के व्यवहार पर कही ऐसी बात

नयी दिल्ली । राज्यसभा के सभापति एम . वेंकैया नायडु ने सदन के सदस्याें के व्यवहार पर टिप्पणी करते हुुए बुधवार को कहा कि इससे बेहतर तो स्कूल होता है।

नायडु ने सुबह सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए जरुरी दस्तावेज पटल पर रखवायें और सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपना वक्तव्य देते वक्त यसीमा का ध्यान रखना चाहिए। वक्तव्य के समय अन्य सदस्यों को धीरे बोलना चाहिए और कार्यवाही में व्यवधान पैदा नहीं करना चाहिए। सदन में व्यवस्था बनाने के लिए यह जरुरी है कि सभी सदस्य सदन के नियमों का पालन करें।

सभापति ने कहा, “किसी सदस्य ने कहा है कि यह कोई स्कूल है? …. अरे भाई, स्कूल तो इससे बेहतर होता है। वहां एक्शन तो ले सकते हैं।” गौरतलब है कि सभापति सदन का कामकाज सुचारु रुप से चलाने के लिए व्यवस्था बनायें रखने पर जोर देते हैं अौर सदस्यों से सदन की नियमों और परंपराओं का पालन करने का अनुरोध करते हैं।

इसके बाद सभापति ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा कराने के लिए शून्यकाल और प्रश्नकाल नहीं कराने की घोषणा की और बोलने के लिए सदस्य का नाम पुकारा। बहुजन समाज पार्टी के वीर सिंह के बोलने के लिए 10 मिनट का समय मांगने पर नायडु ने कहा, “ मैं क्या करूं? जनता ने (अापको) समय दिया ही नहीं।” सिंह को अपना वक्तव्य देने के लिए तीन मिनट का समय आवंटित हुआ था।

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अन्तरिम बजट जमीनी हकीकत और वास्तविकता से दूर जुमलेबाजी वाला : मायावती

लखनऊ | बहुजन समाज पार्टी(बसपा)अध्यक्ष मायावती ने केन्द्र की भारतीय जनता पाटी(भाजपा) सरकार द्वारा शुक्रवार को लोकसभा में पेश अन्तरिम बजट को जमीनी हकीकत एवं वास्तविकता दूर जुमलेबाजी वाला बताये हुये कहा कि देश का धन केवल कुछ मुट्ठीभर धन्नासेठों के हाथों में सिमट गया है।मायावती ने शुक्रवार को यहां जारी बयान में कहा कि भाजपा के पिछले पाँच वर्षों के कार्यकाल में देश में आर्थिक समानता की खाई बढ़ गयी है।

देश में धन और विकास केवल कुछ मुट्ठीभर धन्नासेठों के हाथों में सिमट गया है।यह बजट हकीकत से दूर सिर्फ जुमलेबाजी वाला है।उन्होंने कहा कि भाजपा लम्बे-चौड़े बयानों और जुमलेबाजी से देश की तकदीर नहीं बदल सकती है।इस बजट से देश में लम्बे समय से जारी जर्बदस्त मंहगाई, गरीबी, अशिक्षा एवं बेरोजगारी गम्भीर समस्या समाप्त नही हो सकती है।इसके लिये सही नियत एवं समर्पित दृढ़ इच्छाशक्ति की जरुरत होती है।
केन्द्र में आसीन सरकारों में अब तक अभाव रहा है।

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प्रियंका के राजनीति में आने से गरमायेगा, यह राज्य

नयी दिल्ली | केंद्र में सत्ता के लिए अहम उत्तर प्रदेश में हाशिये पर पहुंच चुकी कांग्रेस ने नेहरु गांधी परिवार के एक और सदस्य प्रियंका गांधी वाड्रा के रुप में तुरुप का इक्का चल दिया है जिससे प्रदेश के राजनीतिक माहौल में निश्चित रुप से बड़ा बदलाव आयेगा लेकिन पार्टी को इससे कितना फायदा मिलता है, इसका पता आने वाले आम चुनाव के बाद ही लग सकेगा।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को प्रियंका को पार्टी महासचिव नियुक्त कर उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से का प्रभारी बनाया है। वह फरवरी के पहले सप्ताह में अपना कार्यभार संभालेंगी। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनाव साथ लड़ने का निर्णय लिया है। दोनों दलों ने कांग्रेस को अकेला छोड़ दिया है जबकि कांग्रेस सहित अधिकतर विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिये महागठबंधन की बात कर रहे हैं।

 

राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि प्रियंका गांधी को सक्रिय भूमिका देने की लंबे समय से मांग कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में गांधी के इस फैसले से निश्चित रुप से उत्साह और जोश बढ़ेगा और उनकी सक्रियता बढ़ेगी लेकिन पार्टी से छिटक गये मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने के लिये उन्हें और पार्टी को कड़ी मशक्कत करनी हाेगी।

उन्हें पूरे उत्तर प्रदेश का भार सौंपने की बजाय सिर्फ पूवीं उत्तर प्रदेश का प्रभार सौंपा गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभार सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिया गया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी कमजाेर रहा है और नरेंद्र मोदी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ का चुनाव क्षेत्र इसी हिस्से में हैं। इस तरह प्रियंका गांधी काे उन दोनों की चुनौतियों के साथ साथ सपा बसपा का सामना भी करना होगा। कांग्रेस ने राज्य में पिछला विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लड़ा था लेकिन इस गठबंधन को भारी पराजय का सामना करना पड़ा था।

लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन की बात की जाये तो 1984 के बाद से उसका ग्राफ लगातार नीचे गिरता रहा है। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में हुए आम चुनाव में कांग्रेस ने राज्य की 85 में से 83 सीटें जीती थीं तथा उसे 51 प्रतिशत से अधिक मत मिले थे। उसके बाद से उसकी स्थिति लगातार खराब होती रही है। न केवल उसकी सीटें घटती गयी बल्कि उसे मिलने वाले मतों में भी भारी गिरावट आयी। पांच चुनावों में तो उसकी सीटों की संख्या दो अंकों तक में नहीं पहुंच सकी। पार्टी 1998 के आम चुनाव में राज्य में एक भी सीट नहीं जीत पायी थी।

पिछले लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी और राहुल गांधी अपनी सीटें बचा पाने में सफल हुये थे। पिछले तीन दशक में पार्टी को सबसे अधिक 21 सीटें 2009 के लोकसभा चुनाव में मिली थीं जब कांग्रेस केंद्र में लगातार दूसरी बार गठबंधन सरकार बनाने में सफल रही।

प्रियंका को भले ही पहली बार पार्टी में कोई पद मिला है लेकिन वह अपनी मां तथा कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली और अपने भाई राहुल गांधी के चुनाव क्षेत्र अमेठी में चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। वह राज्य के पार्टी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के लगातार संपर्क में रहती हैं।

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झूठे वादों वाली भाजपा का सूपड़ा साफ करेगी, यह सरकार

लखनऊ | देश की जनता से आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के झूठे वादों और प्रलोभन से सावधान रहने की नसीहत देते हुये बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) से किया गया गठबंधन केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार का सूपड़ा साफ कर देगा।अपने 63वें जन्मदिन के मौके पर पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मायावती ने कहा कि सपा-बसपा गठबंधन से भाजपा के होश उड़े हुये हैं। इस गठबंधन की मजबूती के लिये दोनो दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को कड़ी मेहनत और एकजुटता का प्रदर्शन करना होगा ताकि आगामी चुनाव में पूंजीपतियों का भला चाहने वाली सरकार से निजात मिल सके।

उन्होने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश की जनता से किये गये वादे हवा हवाई साबित हुये हैं जबकि इस बार चुनाव की आहट होते ही मोदी देश भर में जनसभायें कर वादे और प्रलोभन की कवायद में जुट गये हैं।उन्होने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में सिर्फ मुट्ठी भर पूंजीपतियों का ही भला हुअा है जबकि मजदूर,किसान नौजवान और अल्पसंख्यक खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। मोदी ने पिछले चुनाव में वादा किया था कि उनकी सरकार आते ही विदेशों से काला धन लाया जायेगा और हर एक के खाते में 15-15 लाख रूपये डाले जायेंगे जिसने गरीब एवं किसानो की उम्मीदों पर पानी फेरा है।

किसानो की पूर्ण कर्ज माफी की वकालत करते हुये मायावती ने कहा कि इस संबंध में सरकार को स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को ईमानदारी से लागू करना चाहिये। छोटी छोटी कर्जमाफी से किसानो का भला होने वाला नहीं है। सरकार को इस दिशा में स्पष्ट कार्यप्रणाली और नीतियों के साथ चलने की जरूरत थी जिस पर वह नाकाम साबित हुयी है।मायावती ने कहा कि भाजपा ने अपने शासनकाल में सरकारी एजेंसियों का जमकर दुरूपयोग किया है। खनन के झूठे मामले में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का नाम सीबीआई जांच के लिये उछालना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। भाजपा के कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम पर है। यह सरकार संसद से लेकर आम जनता तक अपनी बेगुनाही की सफाई देने में लगी है। यदि सरकार की नीयत पाक साफ होती तो वह सफाई देने की बजाये सरकारी धन और ऊर्जा का उपयोग जनकल्याणकारी कार्यो में लगाने का काम करती।

उन्होने कहा कि केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकार कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार और मंहगाई समेत सभी मोर्चो पर विफल रही है। किसानों का सच्चा हितैषी होने का नाटक करने वाली भाजपा के कार्यकाल में 70 फीसदी किसान सूदखोरों के जाल में फंसे हुये है।आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णो को दस फीसदी आरक्षण देने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हुये बसपा प्रमुख ने कहा कि गरीब सवर्णो के उत्थान के लिये उनकी पार्टी पहले से ही आरक्षण की मांग करती रही है हालांकि उन्हे संदेह है कि संकीर्ण धार्मिक भावना रखने वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में आरक्षण का लाभ अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिम वर्ग के लोगों को ईमानदारी से मिल सकेगा।
उन्होने कहा कि आजादी के समय सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत थी जो मौजूदा समय में घट कर दो से तीन फीसदी रह गयी है। उनकी पार्टी मुस्लिमों के लिये आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग करती है और करती रहेगा।पार्टी कार्यकर्ताओं से सभी गिले शिकवे भुलाकर सपा-बसपा गठबंधन को पूरे तन मन से जिताने की अपील करते हुये मायावती ने कहा कि चुनाव के बाद देश और प्रदेश की जनता यह तय करेगी कि देश में किसकी सरकार बनेगी और प्रधानमंत्री कौन बनेगा।

कांग्रेस पर भी हमलावर बसपा सुप्रीमो ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा राज कांग्रेस पार्टी ने किया है जिसकी गलत कार्यशैली और नीतियों के चलते 1984 में बसपा का राजनीतिक दल के तौर पर उदय हुआ। इसके बाद भी कई पार्टियां बनी लेकिन दुर्भाग्य से उनकी सोच कांग्रेस से अलग नहीं है। इस चुनाव में बसपा और उससे जुड़े दल कांग्रेस एंड कंपनी को सबक सिखायेंगे।उन्होने कहा कि समाज को धर्म और जाति के नाम पर अलग थलग करने वाले भाजपा के लोग अब चुनावी फायदे के लिये भगवान को अपनी-अपनी जाति का बताने में लग गये हैं। इन्होंने जुमे की नमाज पर भी सरकारी मशीनरी का उपयोग करना शुरू कर दिया है।

मायावती ने कहा लोकसभा चुनाव में किसान विरोधी भाजपा के कुशासन से मुक्ति के लिये वह गरीब पीड़ित लोगों से अपील करती है कि पूरे देश में बसपा के गठबंधन का साथ दें। यही उनके लिये जन्म दिन का तोहफा होगा। उन्होने कहा कि उनकी पार्टी गरीब, पिछड़ों की मदद के लिए हमेशा कार्य करती है और करती रहेगी।

इससे पहले जन्मदिन के मौके पर बसपा प्रमुख ने केक काटा जबकि प्रेस कांफ्रेंस के बाद उन्होने बीते वर्ष पार्टी की गतिविधियों पर लिखी गई अपनी किताब ‘ब्लू बुक-मेरे संघर्षमय जीवन एवं बीएसपी मूवमेंट का सफरनामा’ का विमोचन किया। ब्लू बुक का यह 14 वां संस्करण है। यह किताब हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषा में है।

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आगामी मेें लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की होगी जीत, भाजपा के इस वरिष्ठ नेता ने किया दावा

नयी दिल्ली | भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज विश्वास व्यक्त किया कि भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव में विपक्ष के किसी भी गठबंधन के बावजूद उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में बहुत अच्छा प्रदर्शन करेगी।उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के गठबंधन के बारे में सवाल पूछे जाने पर नकवी ने कहा कि उनके इस कदम से पता चलता है कि वे पहले ही मान चुकीं हैं कि भाजपा से अकेले मुकाबला करने में वे सक्षम नहीं हैं इसलिए वे मिलकर लड़ना चाहते हैं।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए केन्द्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के समर्थक ही अब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ जाने के इच्छुक नहीं हैं। अगर समर्थकों की ही ये सोच है तो कोई समझ सकता है कि उत्तर प्रदेश के लोगों की क्या सोच होगी।नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एक बार फिर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनेगी। वह वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ कनॉट प्लेस में बाबा खड़ग सिंह मार्ग पर हुनर हाट के उद्घाटन अवसर पर संवाददाताओं से बात कर रहे थे। श्री जेटली ने कहा कि हुनर हाट जैसी पहल से बहुत सारे लोगों को रोज़गार के अवसर मिले हैं तथा दस्तकारों एवं कलाकारों के हुनर के संरक्षण एवं उनके सशक्तीकरण में योगदान मिला है।

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सपा और बसपा गटबंधन होने से भाजपा के साथ ही कांग्रेस भी भयभीत

कन्नौज | समाजवादी पार्टी(सपा)अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी पत्नी डिम्पल यादव के संसदीय क्षेत्र और इत्र नगरी कन्नौज से लोकसभा चुनाव का शंखनाद करते हुये कहा “सपा और बहुजन समाज पार्टी(बसपा) के एक होने से भारतीय जनता पाटी(भाजपा) के साथ ही कांग्रेस भी भयभीत है।

यादव ने शुक्रवार को यहां ई चौपाल में कहा कि शनिवार को लखनऊ में सपा और बसपा की संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस होगी। हमारे साथ आने पर भाजपा के साथ कांग्रेस के अंदर भी काफी भय है।

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(इस खबर को मोबाइल पे न्यूज संपादकीय टीम ने संपादित नहीं किया है। यह एजेंसी फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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मकरसंक्रांति के दिन सपा-बसपा महागठबंधन की घोषणा लखनऊ में

लखनऊ | शुभ दिन का इंतजार किये बिना बहुप्रतीक्षित, बहुजन समाज पार्टी(बसपा), समाजवादी पार्टी(सपा) तथा अन्य छोटे दलों के बीच महागठबंधन की घोषणा शनिवार को यहां की जाएगी।पार्टी सूत्रों ने इससे पहले बताया था कि माघ महीने पहले दिन 15 जनवरी को मकरसंक्रांति के दिन महागठबंधन की घोषणा की जाएगी। 15 जनवरी को प्रयागराज में कुंभ में पहला शाही स्नान होगा।

उसी दिन बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव अपना जन्मदिन मनाएंगी। दोनों बड़े दलों बसपा तथा सपा के नेताओं ने शनिवार को लखनऊ में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन बुलाया है जिसमें सुश्री मायावती और अखिलेश यादव मौजूद रहेंगे। उम्मीद की जा रही है कि दोनों नेता महागठबंधन की घोषणा करेंगे।

सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चाैधरी और बसपा के महासचिव सतीश चन्द्र मिश्रा ने संयुक्त बयान जारी कर यहां बताया कि संवाददाता सम्मेलन को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा अध्यक्ष मायावती संबोधित करेंगी।इससे पहले दोनों पार्टियों के नेता शुक्रवार शाम को लखनऊ में मुलाकात करेंगे। सुश्री मायावती नई दिल्ली से गुरूवार शाम को यहां पहुच गयी है जबकि श्री यादव शुक्रवार दोपहर में ट्विटर के जरिये कन्नौज में ई-चौपाल में भाग लेंंगे |

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मायावती ने भाजपा सरकार पर सादा निशाना कहा सवर्णो को आरक्षण देना चुनावी स्टंट

लखनऊ | बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने केन्द्र सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर सवर्ण समाज को दस प्रतिशत आरक्षण दिये जाने को राजनीतिक छलावा बताते हुये कहा कि चलाचली की बेला में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार का यह फैसला चुनावी स्टंट के अलावा कुछ और नहीं है।मायावती ने मंगलवार को यहां जारी बयान में कहा कि देश के ग़रीब सवर्णों को भी आरक्षण की दिये जाने की मांग बसपा ने की थी। उन्होंने कहा भाजपा सरकार की चलाचली की बेला में यह फैसला लिया गया है। यह पूरी तरह से राजनीतिक छलावा तथा चुनावी स्टण्ट है।

केन्द्र सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर सवर्ण समाज को दस प्रतिशत आरक्षण दिये जाने के कैबिनेट के फैसले का स्वागत करते हुये उन्होंने कहा कि लोकसभा आमचुनाव से ठीक पहले भाजपा सरकार का यह फैसला वास्तव में सही नीयत से नही लिया गया है। अच्छा होता कि यह फैसला पहले लिया गया होता ताकि भाजपा सरकार को इसे सही ढंग से अमल करके गरीब सवर्णों को इसका लाभ देने के लिये संसद तथा संसद के बाहर न्यायालय में भी मार्ग प्रशस्त करके दिखाती। उन्होंने कहा कि बसपा इस सम्बंध में लाये जाने वाले संविधान संशोधन विधेयक का जरूर समर्थन करेगी।मायावती ने कहा कि बसपा गरीब सवर्णाें के साथ-साथ मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के गरीबोें को भी इसी तरह से आर्थिक आधार पर आरक्षण दिये जाने की माँग काफी लम्बे समय से करती चली आ रही है। भाजपा ने अन्य गरीबों की उपेक्षा करते हुये उनके साथ न्याय करने का प्रयास नहीं किया है जो अति-दुःखद एवं निन्दनीय है।

वास्तव में देश में एस.सी./एस.टी़ तथा ओबीसी वर्गों को मिल रहे आरक्षण की पुरानी व्यवस्था की अब समीक्षा करके इन वर्गों को इनकी बढ़ी हुई आबादी के हिसाब से समुचित आरक्षण दिये जाने की सख़्त ज़रूरत है।उन्होंने कहा कि संविधान में सामाजिक, शैक्षणिक व अर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछडे वर्गों को आरक्षण दिये जाने की जो वर्तमान व्यवस्था है। देश की जनसंख्या के साथ ही इन वर्गों की जनसंख्या भी अब काफी ज्यादा बढ़ बई है। उस पर कोई भी ध्यान नहीं दिया गया है। अब इस बात की भी आवश्यकता है कि एस.सी./एस.टी. तथा ओबीसी वर्गों को मिलने वाले आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा की सही नीयत के साथ समीक्षा की जाये। उन्हें इनकी बढ़ी हुई आबादी के अनुपात में आरक्षण को भी समुचित तौर पर बढ़ाकर दिये जाने की नई संवैधानिक व्यवस्था की जाये।