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कोरोना की दूसरी लहर में देश बंद नहीं होगा- trump

वाशिंगटन। (शिन्हुआ) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कोरोना वायरस (कोविड-19) महमारी की दूसरी लहर में देश बंद नहीं होगा।

मिशिगन राज्य में फोर्ड उत्पादन संयंत्र के दौरे के दौरान पत्रकार के एक सवाल के जवाब में  ट्रंप ने कहा, “लोग कह रहे है बहुत पृथक संभावना है। यह मानक है और हम विपत्ति से बाहर आ रहे है। हम देश को बंद नहीं कर रहे है। हम विपत्ति से बाहर रहे है।”

उन्होंने कहा, “ एक स्थायी लॉकडाउन स्वस्थ राज्य या स्वस्थ देश की रणनीति नहीं है। हमारे देश को बंद करने का कोई मतलब नहीं है।” राष्ट्रपति ने कहा, “कभी न खत्म होने वाले लॉकडाउन एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा को आमंत्रित करेगा।” अपने लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए हमारे पास एक कामकाजी अर्थव्यवस्था होनी चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के सभी 50 राज्यों ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं को गति देने के उद्देश्य से कोरोना वायरस प्रतिबंधों में ढील देने की शुरु करने योजना की घोषणा की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सर्दी के मौसम में वायरस की दूसरी लहर आने की संभावना को लेकर चेतावनी दी है।

  • अमेरिका में अभी तक डेढ़ लाख लोग इस महमारी मारी से बीमारी है और 90 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों के अनुसार जून की शुरुआत तक देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या एक लाख तक पहुंचने की संभावना है।
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अमेरिका और रूस के पास भी नहीं है, भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने खोजी ऐसी तकनीक, कोई नहीं कर पाएगा इन पनडुब्बियों का मुकाबला

युद्ध की स्थिति में पनडुब्बियों को सुरक्षा कवच की तलाश कर रही भारतीय नौसेना बल्लियों उछल रही है क्योंकि रक्षा शोध एवं विकास संगठन ने एक ऐसी तकनीक विकसित कर ली है जिससे नौसेना अपनी डीजल पनडुब्बियों को परमाणु पनडुब्बी जैसी ताकत से लैस कर सकेगी और वे बिना आवाज किए पाकिस्तान के कराची समेत तमाम फौजी बंदरगाहों को नष्ट कर सकेंगी। चूंकि उनकी पानी की गहराई में उतरने की क्षमता बढ़ जाएगी इसलिए पाकिस्तान यहां तक कि चीन भी उन्हें कभी खोज नहीं पाएगा।

पिछले दिनों भारतीय डीजल पनडुब्बियों को परमाणु पनडुब्बियों जैसी क्षमता देने वाली प्रणाली का भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों ने सफल परीक्षण किया। इस तकनीक का नाम है, एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्सन तकनीक। इससे डीजल पनडुब्बी को काफी अधिक दिनों तक गहरे समुद्र में छिप कर रहने की क्षमता हासिल हो जाएगी।

रक्षा शोध एवं विकास संगठन (DRDO) के मुताबिक किसी डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन में एआईपी तकनीक वाली प्रणाली लगा देने से इसकी ताकत में कई गुना इजाफा होगा। भारतीय पनडुब्बियों के लिये फ्युल सेल आधारित एआईपी तकनीक के सफल जमीनी परीक्षण से डीआरडीओ ने अब तक कई लक्ष्य हासिल कर लिये हैं। इस तकनीक के सफल परीक्षण को नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने रक्षा शोध एवं विकास सचिव औऱ डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. सतीश रेड्डी की मौजूदगी में देखा। परीक्षण महाराष्ट्र के अम्बरनाथ में स्थित नेवल मटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी में किया गया। नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने इस बड़ी उपलब्धि के लिये डीआऱडीओ के वैज्ञानिकों की सराहना की। यह कार्यक्रम देश खासकर भारतीय नौसेना के लिये काफी अहमियत रखता है। डीआरडीओ चेयरमैन ने कहा कि नौसेना के मानकों के अनुरुप इस प्रणाली को जल्द से जल्द भारतीय पनडुब्बियों में तैनात करने की हर सम्भव कोशिश की जाएगी।

नौसेना के अनुसार फ्रांस के सहयोग से जो स्कारपीन डीजल पनडुब्बियां बनाई जा रही हैं, उनमें इस स्वदेशी एआईपी तकनीक वाली प्रणाली को तैनात किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मौजूदा डीजल पनडुब्बियों को 24 घंटे में एक बार सतह पर ऑक्सीजन के लिये आना होता है। इससे दुश्मन को पता चल जाता है कि कोई पनडुब्बी किसी खास इलाके में है। लेकिन एआईपी प्रणाली वाली पनडुब्बी समुद्र के भीतर एक सप्ताह से दस दिनों तक पानी के भीतर छिपी रह सकती है इससे डीजल पनडुब्बियों के पानी में रहने की क्षमता बढ़ जाएगी। परमाणु बिजली से चालित पनडुब्बियां दो महीने से अधिक वक्त तक समुद्र की गहराई में रह सकती हैं।

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अमेरिका ने फिर मरोड़ा भारत का हाथ, नाराज भारत ने कहा, हद में रहे अमेरिका

पिछले छह माह से भारत—पाकिस्तान के फटे में कश्मीर के बहाने टांग फंसाने की ताक में बैठे अमेरिका ने एक बार फिर भारत की बांह मरोड़ने की कोशिश की है। उसने न सिर्फ कश्मीर में धारा 370 हटाने के बाद के हालात पर उंगली उठाते हुए फिर दोहराया है कि राष्ट्रपति ट्रम्प कश्मीर मामले भारत—पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता को तैयार है। हालांकि भारत ने तत्काल इस पर नाराजगी जाहिर कर दी लेकिन अमेरिका पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा।

विदेश विभाग के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि कश्मीर पर अमरीकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने खेदजनक टिप्पणियां की हैं। समिति के लोगों को भारत के फ़ैसले की आलोचना करने की बजाय सीमा पार से कश्मीर में होने वाली प्रायोजित घुसपैठ की निंदा करनी चाहिए थी।
यह दुखद है कि कुछ सदस्यों ने कश्मीर के लोगों की बेहतरी और कश्मीर में शांति बनाए रखने के मकसद से उठाए गए कदम पर सवाल खड़े किए हैं। अमरीकी प्रशासन के अधिकारियों ने कहा था कि उनका एक पैनल 5 अगस्त के बाद कश्मीर जाना चाहता था लेकिन भारत ने इनकार कर दिया। जम्मू-कश्मीर मामले में पाकिस्तान लगातार अमेरिका से मध्यस्थता करने की बात कह रहा है जबकि भारत इसे अपना आंतरिक मामला मानता है।

Narendra Modi

अमेरिका ने भारत से कहा था कि वह कश्मीर में राजनीतिक और आर्थिक स्थिति सामान्य करने का ‘खाका’ पेश करने और जल्द से जल्द राजनीतिक बंदियों को रिहा करे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के ‘फॉगी बॉटम मुख्यालय’ में अमेरिकी प्रतिनिधि ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका घाटी की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। करीब 80 लाख स्थानीय लोगों का जीवन जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने और राजनीतिज्ञों को बिना कारण हिरासत में लेने और संचार प्रतिबंधों के कारण प्रभावित है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में सुरक्षा प्रतिबंधों के चलते पत्रकारों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रवक्ता ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे गिरोह निश्चित तौर पर परेशानी का कारण हैं। उन्होंने कहा, इस सिलसिले में हम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के सितंबर में आए उस बेबाक बयान का स्वागत करते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि कश्मीर में हिंसा करने के लिए पाकिस्तान से गुजरने वाला हर शख्स पाकिस्तानियों और कश्मीरियों, दोनों का दुश्मन होगा’ इस बीच, विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक बार फिर कहा कि अगर दोनों देश चाहें तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मामले पर मध्यस्थता करने को तैयार हैं। वह (ट्रम्प) निश्चित तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार हैं, अगर दोनों देश इस पर सहमत हों तो।

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कई दिनों तक पसीना पीकर बुझाई प्यास फिर भी लात मारकर वापस भारत भेजा

धन कमाने की चाह में अमेरिका जाने निकले 300 से ज्यादा भारतवासियों को जान बचाने के लिए अपने कपड़ों में भरे पसीने को निचोड़कर प्यास बुझानी पड़ी। कई दिनों तक भूखे रहकर पसीना पी—पीकर अमेरिका के मेक्सिको पहुंचे इन भारतीयों को अब वापस भेज दिया गया है। मेक्सिको से 300 से ज़्यादा भारतीयों को वापस डिपोर्ट किए जाने की भारत में मेक्सिको के राजदूत ने पुष्टि की है। ये लोग अवैध रूप से मेक्सिको में घुसे थे और अमरीका जाने की कोशिश कर रहे थे।
इन भारतीयों की पूरी रामकथा दिल्ली से छपने वाले एक अंग्रेजी अखबार ने सिलसिलेवार प्रकाशित की है। आपबीती में बताया गया है कि इन लोगों को इक्वाडोर तक विमान से और उसके बाद सड़क और हवाई मार्ग के इस्तेमाल से कोलंबिया, ब्राज़ील, पेरू, पनामा, कोस्टारिका, निकारगुआ, होंडुरस और ग्वाटेमाला से होते हुए मेक्सिको लाया गया। वीज़ा एजेंट्स उनसे 15-20 लाख रुपये प्रति व्यक्ति मांग रहे थे।

 

लेकिन फिर उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो देखे और उन लोगों के बारे में सुना जो ऐसे ही तरीक़ों से सफलतापूर्वक अमरीका पहुंच गए थे। हालांकि उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि उन्हें जंगलों में बिना खाए-पिए सफ़र करना होगा। उन्होंने कई हफ़्ते सस्ते होटलों में ठहरते हुए गुज़ारे। इस दौरान उन्हें बीमारियां, प्यास और जंगल के पैदल सफ़र जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें से एक शख़्स बताया कि पनामा के जंगलों से गुज़रते हुए उन्हें अपनी कमीज़ का पसीना भी निचोड़कर पीना पड़ा। ये नौजवान पंजाब और हरियाणा से हैं, बेरोज़गार हैं और ज़्यादातर का संबंध किसान परिवार से हैं। भारत में मेक्सिको के राजदूत फेडरिको सालास का कहना है कि ये सभी ज़रूरी दस्तावेज़ों के बिना अवैध रूप से मेक्सिको पहुंचे थे। इसलिए उन्हें वापस भेजा गया और ऐसा भारतीय दूतावास और अधिकारियों की जानकारी में किया गया। उन्होंने कहा, “इस वक़्त पूरी दुनिया में अप्रत्याशित संख्या में प्रवासी हैं। इस मामले में इन लोगों को पहले लैटिन अमरीका, फिर मेक्सिको और फिर अमरीका ले जाने की कोशिश थी। मेक्सिको सरकार इस तरह की कई घटनाओं से रूबरू होती रही है जिसमें प्रवासी ख़ुद मानव तस्करी के पीड़ित होते हैं। उन्होंने बताया कि मेक्सिको के ज़रिये अमरीका में पहुंचने की अवैध कोशिशें अकसर होती रही हैं क्योंकि अमरीका में अवैध प्रवेश के दूसरे तरीक़े बहुत कम हैं।

 

 

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ईरान ने मार गिराया, वेनेजुएला ने ठेंगा दिखाया, शर्म से मुंह छुपाता फिर रहा है अमेरिका

ईरान की वायु सेना ने गुरुवार को एक अमेरिकी टोही विमान को मार गिराने का दावा किया जिसने कुह मुबारक क्षेत्र में उसकी वायु सीमा का उल्लंघन किया था। इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड काॅर्प (आईआरजीसी) के जनसंपर्क विभाग ने यहां एक बयान जारी कर बताया कि होरमोजगन प्रांत के कुह मुबारक क्षेत्र में ईरान की वायु सीमा का उल्लंघन करने पर इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड काॅर्प आईआरजीसी वायु सेना ने गुरुवार तड़के एक अमेरिकी टोही विमान को मार गिराया।

उसकी पहचान आरक्यू-4 ग्लोबल हॉक विमान के रूप में की गयी है। आरक्यू-4 आम तौर पर अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरता है। गौरतलब है कि ईरान के परमाणु समझौते से पीछे हटनेे के बाद अमेरिका द्वारा उस पर मनमाने ढंग से प्रतिबंध लगाये जाने के बाद दोनों देशों के बीच खटास बढ़ गयी है।

इधर वेनेजुएला ने भी गुपचुप ढंग से 7.4 टन सोना युगांडा भेजकर अमेरिका को ठेंगा दिखा दिया है। वेनेजुएला की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। इस देश के बारे में अब रिपोर्ट आई है कि अमेरिका के थोपे गए प्रतिबंधों से बचने के लिए 7.4 टन सोना गोपनीय तरीके से युगांडा की एक रिफाइनरी में पहुंचाया गया है। वाल स्ट्रीट जनरल की इस संबंध में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है की राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने अमेरिका के लादे के गए प्रतिबंधों से बचने के लिए पूर्वी अफ्रीका के युगांडा में दो विमानों के जरिये भेज गया। अमरीका ने मदुरो सरकार पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं और विपक्षी दल के नेता जुआन गुआइदो को राष्ट्रपति के तौर पर मान्यता दी है। अमेरिका ने विश्व के अन्य देशों को भी मदुरो सरकार के साथ किसी तरह की व्यापारिक साझेदारी नहीं करने को लेकर चेतावनी दी हुई है। युगांडा भेजे गए सोने की कीमत 30 करोड़ डालर से अधिक आंकी गई है।

युगांडा के राष्ट्रीय पुलिस प्रवक्ता फ्रेड एनांगा के अनुसार एंतेब्बे के अंतरर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रुसी चार्टर जेट से सोना पहुंचाया गया। दस्तावेजों की जांच करने वाले युगांडा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार पार्सल से पेपरवर्क की वजह से सोने की छड़ होने के बारे में पता चला। कुछ पर वेनेजुएला के केंद्रीय बैंक की संपत्ति की मुहर लगी हुई है। रिकार्ड से पता चलता है कि विमान ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस से उड़ान भरी थी। गौरतलब है कि वेनेजुएला की गिनती लैटिन अमेरिका की सबसे मजबूत और समुद्ध अर्थव्यवस्था में हुआ करती थी, किंतु वर्तमान में वहां महंगाई को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। तेल बिक्री के मंद पड़ जाने लोग दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं के लिए तरस रहे हैं। हाल की मीडिया रिपोर्टों में यह खुलासा हुआ था कि वेनेजुएला में एक लीटर दूध के लिए लोगों को एक लाख रुपए तक देने पड़ रहे हैं। अन्य रोजमर्रा के सामान भी आसमान छू रहे हैं।

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अमेरिका को मिला एक और सद्दाम, पहले चलाएगा मुकदमा फिर छीनेगा जिंदगी

अमेरिका ने जिस तरह नाटो देशों के साथ मिलकर इराक के सैनिक तानाशाह सद्दाम हुसैन को फांसी पर लटका दिया था, उसी तरह सद्दाम से भी ज्यादा खतरनाक दुश्मन भी अब अमेरिका के हाथ लग गया है और वह उसे येन केन प्रकारेण फांसी पर लटका कर ही दम लेगा क्योंकि इस दुश्मन पर अमेरिकी सरकार के खिलाफ षड़यंत्र के आरोप हैं। हालांकि अमेरिकी कानूनों के तहत इन आरोपों की अधिकतम सजा पांच साल है, लेकिन अमेरिका को जानने वालों का कहना है कि वह अपने इस दुश्मन पर इतने मामले थोप देगा कि अदालत उसे मौत की सजा सुनाने पर मजबूर हो जाएगी।

सद्दाम जैसा अमेरिका का यह दुश्मन है विकीलीक्स का संस्थापक जुलियन असांज। उसे गुरुवार को लंदन में इक्वाडोर के दूतावास से गिरफ़्तार किया गया। जहाँ वह पिछले सात साल से शरण लिया हुआ था। असांज ने साल 2012 से इस दूतावास में शरण ली थी। अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट का आरोप है कि असांज ने पूर्व अमेरिकी इंटेलीजेंस विश्लेषक चेल्सी मैनिंग की मदद से गोपनीय दस्तावेज़ डाउनलोड किए। अगर असांज पर लगे ये आरोप सिद्ध हुए तो उन्हें पांच साल तक की सज़ा हो सकती है।

असांज ने साल 2006 में विकीलीक्स की स्थापना कर गोपनीय दस्तावेज़ और तस्वीरों को प्रकाशित करना शुरू कर दिया था। विकिलिक्स ने तब सुर्खियों में आ गया जब वे फ़ुटेज जारी कर दिए जिसमें अमेरिकी सैनिक इराक़ में हेलिकॉप्टर से आम नागरिकों की हत्या कर रहे थे। खुलासे में साथ देने वाली अमेरिकी विश्लेषक चेल्सी मैनिंग को साल 2010 में अमेरिका मे गिरफ़्तार किया गया. उनपर आरोप था कि उन्होंने 7 लाख गोपनीय दस्तावेज़, वीडियो और डिप्लोमैटिक केबल का खुलासा एंटी सीक्रेसी वेबसाइट के साथ मिलकर किया।

पिछले साल वर्जीनिया राज्य में जारी किए गए असांजे के ख़िलाफ़ अभियोग में आरोप है कि उन्होंने 2010 में मैनिंग के साथ रक्षा विभाग की गोपनीय जानकारी हासिल करने की साज़िश रची थी। अभियोग के मुताबिक़ मैनिंग ने जनवरी और मई 2010 के बीच अमेरिकी विभागों और एजेंसियों से चार डेटाबेस डाउनलोड किए और इसे विकिलीक्स को मुहैया कराई।

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बड़ा खुलासा, भारत का धर्म भ्रष्ट करने पर आमादा था अमेरिका, साथ में दे रहा था बीमारियां

भारत का एमएफएन का दर्जा छीनने के पीछे के कारण सामने आ गए हैं। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने बाकायदा बयान जारी कर खुलासा किया है कि अमेरिका ने यह कार्रवाई अमेरिकी डेयरी उत्पादों के आयात पर लगाई गई रोक की वजह से की है। अमेरिका उन गायों के डेयरी उत्पाद भारत को खिलाना और पिलाना चाहता है जो मांसाहारी है और उन्हें पशुओं के मांस तथा खून से बना चारा खिलाया जाता है। 

 

भारत ने इस पर यह कहते हुए आपत्ति की थी कि देश की आधी से अधिक आबादी शाकाहारी है। मांस का प्रयोग धार्मिक रूप से वर्जित है। ऐसे में उन्हें बिना बताए उन गायों के डेयरी उत्पाद खिलाना उनके साथ बड़ा अन्याय होगा जो मांस खाना पाप समझते हैं और उससे दूर रहना पसंद करते हैं। वाणिज्य मंत्रालय ने तर्क दिया कि भारत के मंदिरों में भगवान के भोग में डेयरी उत्पाद आवश्यक रूप से रहते हैं और मंदिरों में मांस—मदिरा की बात सोचते ही देश के अधिकांश नागरिकों के शरीर में झुरझुरी सी आ जाती है। 

 

इस वजह से अमेरिका अगर यह सुनिश्चित करे कि वह सिर्फ उन्हीं गायों के डेयरी उत्पाद निर्यात करेगा जिन्हें चारे के रूप में मांस और खून से बने उत्पाद नहीं खिलाए गए हों। अमेरिका जानवरों को जो मांसाहारी चारा खिलाता है, वह ब्लड मील के नाम से बिकता है।
पाठकों को याद होगा कि 1980 के आसपास मैडकाऊ नामक बीमारी ने अमेरिका और ब्रिटेन में मवेशियों पर ऐसा कहर ढाया था कि दोनों देशों में हाहाकार मच गया था। दोनो देशों में तीस से चालीस फीसदी मवेशियों का सफाया हो गया था। 

 

यह बीमारी उन जानवरों को जल्द घेरती है जिन्हें ब्लड मील खिलाया गया हो। मैडकाऊ जानवरों से इंसानों में बहुत जल्दी फैलने की सम्भावना रहती है। हालांकि भारत ने अमेरिका को यह विकल्प दिया था कि वह मांसाहारी गायों के डेयरी उत्पाद उस सर्टिफिकेशन प्रक्रिया के तहत निर्यात करे जिसे पूरी दुनिया में मान्यता प्राप्त है, लेकिन अमेरिका ने मना कर दिया। वह इसी पर अड़ा था कि वह मांसाहारी गायों के डेयरी उत्पाद ही निर्यात करेगा।

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अमेरिका के लिये किसी भी प्रकार की सहायता नहीं दी इस देश ने

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान को दी जाने वाली करोड़ों डॉलर की सैन्य सहायता रोके जाने के अपने प्रशासन के फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि पाकिस्तान ने अमेरिका के लिए एक भी काम नहीं किया है, तो ऐसे में उसे सैन्य सहायता क्यों जारी रखी जाए।

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(इस खबर को मोबाइल पे न्यूज संपादकीय टीम ने संपादित नहीं किया है। यह एजेंसी फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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अमेरिका मेक्सिको के लिए 5200 सैनिक भेजने की करेगा तैयारी

वाशिंगटन। अमेरिका का रक्षा विभाग शरणार्थियों के जत्थे के मेक्सिको सीमा पर पहुंचने से पहले वहां 5200 सैनिकों को भेजेगा। अमेरिकी अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।जनरल जे. ओ. शौगनेसी ने सोमवार को मीडिया को कहा, “सामान्यत: यूनिट को हथियार बांटे जाते हैं लेकिन यहां सैनिकों की तैनाती हथियारों के साथ ही हो रही है।”

इस मिशन को ‘ऑपरेशन भरोसेमंद देशभक्त’ का नाम दिया गया है और इसका नेतृत्व सेना के वाशिंगटन कर रहे हैं जिन्होंने वर्ष 2017 में प्यूर्टो रिको में भयंकर तूफान मारिया आने के बाद अभियान का नेतृत्व किया था।
मेक्सिको सीमा पर सैनिकों की तैनाती मंगलवार से आरंभ हो जाएगी। इसके अलावा अमेरिकी वायुसेना भी सीमा पर गश्त करने वाले 400 एजेंट को हवाई मार्ग से लाने-ले जाने के लिए तैयार है।

इससे पहले मेक्सिको सीमा पर 800 सैनिक भेज जाने की जानकारी सामने आ रही थी जो सीमा पर तैनात राजस्व अधिकारियों की संख्या की एक तिहाई संख्या थी। सेना ने इसी वर्ष यहां 2000 राष्ट्रीय रक्षक जवानों को भी भेजा था।इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया, “शरणार्थियों के जत्थे में अपराधी गिरोह के सदस्य और बहुत बुरे लोग शामिल हैं। यह हमारे देश पर हमला है और हमारी सेना आपका इंतजार कर रही है।”

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सोमालिया में अमेरिकी हवाई हमले में अल-शबाब के 60 आतंकवादियों की मौत

मोगादिशु। सोमालिया के उत्तर-मध्य में अमेरिकी हवाई हमले में अल-शबाब के लगभग 60 आतंकवादी मारे गये। अमेरिका ने मंगलवार को एक बयान में इसकी जानकारी दी। मृतकों की संख्या के लिहाज से यह इस वर्ष का सबसे बड़ा हवाई हमला है।

कत्तर संवाद समिति ने अमेरिका के अफ्रीका कमांड के हवाले से दी रिपोर्ट के अनुसार,“यह महत्वपूर्ण हवाई हमला सोमलिया की संघीय सरकार के समर्थन से संचालित हुआ और अल-शबाब को खत्म करने के लिए यह लगातार जारी रहेगा।

इस हवाई हमले से अल-शबाब की भविष्य में हमला करने की क्षमता कम होगी, उनके नेतृत्वकारी नेटवर्क में बाधा पहुंचेगी और इन क्षेत्रों में पैठ कम होगी। अमेरिका ने कहा, हरारडेरे में हुए हमले में किसी नगारिक की मौत नहीं हुुई है।

अमेरिकी सेना, अफ्रीकी संघीय सेना, एएमआईएसओएम और सोमाली राष्ट्रीय सुरक्षा बलों के साथ पूर्वी अफ्रीकी राष्ट्र में संयुक्त रूप से आतंकवाद विरोधी अभियान चला रहे हैं।