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पांच ग्राम खमीरा रोजाना खाएं, कोरोना के डर से मुक्ति पाएं

यूनानी चिकित्सा पद्धति में प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत करने के लिए खमीरा पर बहुत जोर दिया गया है। इसमें सबसे बेहतर खमीरा अमरबरीद और रेशम को बताया गया है। इसके अलावा भी बहुत तरह के खमीरा है। जब भी प्रतिरोधक शक्ति में कमी महसूस हो, हकीम की सलाह लेकर यूनानी दवा की दुकान से खमीरा खरीद कर प्रतिदिन पांच ग्राम खाया जा सकता है।

फ्लू और मानव का साथ चोली-दामन जैसा

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के यूनानी विभागाध्यक्ष डा. सैयद अहमद के मुताबिक खमीरा शरीर को रोगों से लड़ने की ताकत देता है। यूनानी में वैसे तो अनेक प्रकार के खमीरा का वर्णन है लेकिन अमरबरीद और रेशम को आम आदमी भी आसानी से खरीद सकता है। उनका दावा है कि भरपूर नींद और समय से भोजन करके भी कोरोना संक्रमण का सफलता के साथ मुकाबला किया जा सकता है। डा. सैयद अहमद ने बताया कि फ्लू और मानव का साथ चोली-दामन जैसा है। बदलते मौसम के साथ फ्लू के वायरस मानव शरीर को संक्रमित करते हैं और शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली कुछ बाहरी उपायों के साथ उससे निजात पा लेती है। इसलिए पारम्परिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा शरीर की प्रतिरोधक शक्ति को मजबूत बनाने सिद्धांत पर काम करती हैं।

कोशिकाओं की होती है मरम्मत

डा. अहमद के अनुसार मानव शरीर एक ऐसी मशीन है जिसमें जागते रहने पर लगातार टूट—फूट होती है अर्थात उसकी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता हैं। जैसे ही शरीर नींद के आगोश में जाता है, शरीर कोशिकाओं की मरम्मत शुरू कर देता है। इसके लिए भरपूर गहरी नींद अति आवश्यक है। नींद के दौरान सिर्फ कोशिकाओं की मरम्मत ही नहीं होती बल्कि प्रतिरोधक प्रणाली भी अपनी शक्ति बढ़ाती है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अक्सर आपने देखा होगा कि भरपूर गहरी नींद वही व्यक्ति ले पाता है जिसकी दिनचर्या नियमित है अर्थात वह सभी काम तय समय पर करता है। सीजनल फल—सब्जियों का सेवन करता है। डा. सैयद अहमद का कहना है कि कोरोना काल में इम्युन सिस्टम की मजबूती के लिए ड्राइफ्रूट खाएं। भीगे हुए बादाम और अखरोट की गिरी खाने के साथ ही काली मिर्च लोंग अदरक तुलसी गिलोय की चाय बनाकर पीने से भी कोरोना वायरस के प्रकोप से स्वयं को सुरक्षित किया जा सकता है।

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भारत की छह आईआईटी ने किया कमाल, थम जाएगा कोरोना का नकारात्मक धमाल

भारत पर जब भी कोई मुसीबत आती तो देश के प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) हमेशा अलर्ट मोड में काम शुरू कर देते हैं। कोविड 19 (COVID-19) महामारी की आशंका से जूझते भारत में सम्भावित रोगियों को वेंटिलेटर की बड़ी संख्या में आवश्यकता होगी और देश के आईआईटी इन्हें बनाने की तकनीक ईजाद करने में जुट गए हैं। इसके अलावा वे सस्ती जांच किट और मशीनें भी बना रहे हैं। IIT गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने पॉलीमरेस चेन रिएक्शन (PCR) मशीन बनाई है। इसकी मदद से 12 घंटों में 1,000 सैंपल चेक किए जा सकते हैं। IIT ने अभी तक दो ऐसी मशीनें गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में भेज दी है और बाकी पर काम जारी है। यहीं के छात्रों ने ऑटोमेटेड स्प्रेयर के साथ एक ड्रोन तैयार किया है, जो ऊंची इमारतों, पार्क और सड़क आदि को सैनिटाइज करने के काम आ सकता है।

IIT गुवाहाटी कोरोना वायरस की वैक्सीन पर काम कर भी रहा है। IIT की तरफ से आधिकारिक बयान में कहा गया है कि फैकल्टी मेंबर बायो टेक्नोलॉजी टूल का इस्तेमाल करते COVID-19 के इलाज के लिए वैक्सीन तैयार कर रहे हैं। यहां फेस शील्ड का प्रोटोटाइप तैयार किया गया है। इसे स्वास्थ्यकर्मी मुंह पर पहनते हैं। 3D प्रिंटर की मदद से तैयार इस फेस शील्ड को इस्तेमाल करना आसान है।

IIT मुंबई ने कोरोंटाइन नाम से एक मोबाइल ऐप बनाई है, जो संक्रमित व्यक्ति को ट्रैक सकती है। यह ऐप समय-समय पर GPS कॉर्डेिनेट्स भेजती रहती है, जिससे ट्रेसिंग आसान हो जाती है। दिल्ली IIT छात्रों ने टेस्टिंग किट तैयार की है, जिससे कोरोना वायरस के टेस्ट के दौरान आने वाली लागत को कम किया जा सकता है। फिलहाल इसका नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) पुणे में क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। इसके अलावा यहां इंफेक्शन-प्रूफ फैब्रिक तैयार किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल अस्पतालों में इंफेक्शन को फैलने से बचाने के लिए हो सकता है।
IIT दिल्ली के केमिस्ट्री विभाग ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुरूप हैंड सैनिटाइजर तैयार किया है। यह कोरोना वायरस को मारने में पूरी तरह कारगर है। फिलहाल इसे कैंपस के अंदर इस्तेमाल किया जा रहा है। दिल्ली की तरह IIT हैदराबाद के छात्रों ने भी हैंड सैनिटाइजर तैयार किया है। इसे भी WHO के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है।

IIT कानपुर में नोक्का रोबोटिक्स नाम की कंपनी है। इस कंपनी ने वेंटिलेटर प्रोटोटाइप तैयार किया जिसकी फिलहाल टेस्टिंग चल रही है। यह बाजार में पहले से मौजूद वेंटिलेटर की तुलना में बेहद सस्ता है। वहीं IIT हैदराबाद ने वेंटिलेटर का विकल्प तैयार किया है। इस बैग वॉल्व मास्क को इमरजेंसी में मरीज को सांस देने के लिए किया जा सकता है। इसी तरह IIT खड़गपुर ने हैंड सैनिटाइजर तैयार किए हैं।

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इंसानी शरीर के चौकीदार की रक्षा करता है शहतूत, शरीर में कोरोना के प्रवेश पर लगाता है रोक

कोरोना वायरस के भय से घरों में बंद लोगों के लिए राहत की खबर। देश के जाने—माने यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डा. सैयद अहमद का दावा है कि इंसानी शरीर के गले में प्रकृति ने जिन टांसिल्स को स्थान दिया है, वे असल में शरीर के सबसे मजबूत चौकीदार हैं और कोरोना जैसे खतरनाक वायरस का हमला होते ही बचाव के लिए संकेत भेजना शुरू कर देते हैं लेकिन अधिकांश लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। इसी गलती के चलते वायरस को फेफडों तक पहुंचने का अवसर मिल जाता है। टांसिल्स हर उस बैक्टीरिया, वायरस को रोकने की कोशिश करते हैं जो शरीर में प्रवेश की कोशिश कर रहा होता है। इस प्रक्रिया के चलते ही गले में खराश पैदा होती है।

डा. सैयद अहमद का कहना है कि प्रकृति ने शरीर को निरोग बनाए रखने के लिए पृथ्वी पर वनस्पति के रूप में तमाम औषधियां पैदा कर रखी हैं और यूनानी, आयुर्वेद जैसी चिकित्सा पद्धतियां उन्हीं वनस्पतियों का औषधि के रूप में इस्तेमाल कर रोग से बचाव के साथ ही उसे जड़ से नष्ट करने में भरोसा रखती हैं।

गले का रक्षक है शहतूत

डा. सैयद अहमद का कहना है कि आमतौर पर भारत में लगभग सभी इलाकों में पाया जाने वाला शहतूत गले का सबसे बड़ा रक्षक है। उसके पत्तों को उबालने के बाद बचे पानी के गरारे गले के टांसिल्स को न सिर्फ राहत देते हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति के साथ मिलकर घातक से घातक वायरस को गले से बाहर निकाल फैंकते हैं। शहतूत फल का उपयोग भी अनेक तरह के वायरस और बैक्टीरिया को मार भगाता है।

यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ के अनुसार अभी तक के अध्ययन में यह साफ हो चुका है कि कोरोना वायरस मूलत: अनेक तरह के फ्लू के वायरस का ही एक घातक रूप है। चूंकि दुनिया इन दिनों कोरोना के खतरे से जूझ रही है, ऐसी स्थिति में जैसे ही किसी को गले में खराश महसूस हो, उसे तत्काल शहतूत के पत्तों के गरारे शुरू कर देने चाहिए। इसके अलावा नमक के गरारे भी गले की रक्षा करते हैं।

तीखी है लेकिन गले को रखती है स्वस्थ

यूनानी विशेषज्ञ का कहना है कि कोरोना वायरस के खतरे से बचने के लिए मौसमी फल—सब्जियों का सेवन बढ़ा दिया जाना चाहिए। ड्राई फ्रूट के साथ ही तुलसी जैसी पारम्परिक औषधि भी शरीर को रोगों से बचाने में सहायक है। काली मिर्च भी ऐसा ही एक सूखा फल है जो स्वाद में तीखी होने के बावजूद गले को स्वस्थ रखती है। प्राकृतिक इलाज में भरोसा रखने वाले गायक आज भी काली मिर्च और मिश्री से गले को बैठने से बचाते हैं।

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तनाव, थकान और सुस्ती है तो खाइए गाजर, फूलगोभी, भूरे चावल, संतरा, पपीता, बादाम, दूध

कोरोना प्रकोप के चलते पूरी दुनिया में मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता की चर्चा हो रही है। क्योंकि कोरोना का अभी कोई इलाज नहीं है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही इस वायरस से इंसानों को बचा रहा है।

 

शरीर का सुरक्षा कवच

असल में रोग प्रतिरोधक क्षमता शरीर को संक्रमण, कीटाणुओं और जीवाणुओं से दूर रखने में मदद करती है। यह शरीर को एक ऐसा सुरक्षा कवच प्रदान करती है, जिससे शरीर जल्दी किसी साधारण बीमारी की चपेट में नहीं आता। लेकिन यह कमजोर हो जाए तो शरीर जल्द ही सर्दी, जुकाम-खांसी, बुखार आदि आम समस्याओं या किसी भी तरह के संक्रमण से घिर जाता है। अगर बहुत जल्दी-जल्दी जुकाम-खांसी, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ होने लगती हैं, तो मान लीजिए कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। डायरिया, मसूड़ों में सूजन, मुंह में छाले और स्किन रेशेज आदि भी खराब इम्यूनिटी के लक्षण हैं। जब भी ऐसी समस्या हो तो डाइट में एंटीबायोटिक गुणों से समृद्ध चीजों का सेवन करना शुरू कर दें।

मौसम बदलते ही बीमार

कुछ लोग जरा सा मौसम बदलते ही बीमार हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण शरीर का तापमान कम होना सकता है। मौसम बदलते ही रोजाना एक्सरसाइज करने से अपने शरीर का तापमान संतुलित और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। तनाव, थकान और सुस्ती आदि भी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के लक्षण हैं। थोड़ा सा काम करने के बाद ही थकान महसूस होने लगे या ज्यादा समय तक सुस्त रहना भी कमजोर प्रतिरोधक क्षमता का लक्षण हैं। अनिद्रा, तनाव और विटामिन-डी, सी की कमी भी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता दर्शाता है।
अगर चोट काफी समय से ठीक नहीं हुई है तो समझ जाइए कि रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। अगर यह समस्या आ रही है तो डाइट में आयुर्वेदिक चीजों का सेवन करना शुरू कर दें। अगर कुछ खाने-पीने से जल्दी ही इंफेक्शन हो जाता है तो वह भी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का लक्षण है।

तेल मालिश से भी बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे गाजर, फूलगोभी, भूरे चावल, संतरा, पपीता, बादाम, दूध आदि का सेवन करें। हाइड्रेट रहें और भरपूर नींद लें। शराब का सेवन और धूम्रपान न करें। सूर्य की रोशनी में सुबह के समय तेल मालिश करने से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। साथ ही विटामिन-डी भरपूर मात्रा में मिलता है। सर्दी-जुकाम-खांसी वगैरह ज्यादा दिनों तक बने रहें तो इसे सामान्य न समझें और इलाज कराएं।

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कोरौना गांव निवासियों की बढ़ी मुसीबत, नाम सुनते ही भाग खड़े होते हैं लोग

भारत में अजीबोगरीब नाम वाले गांवों की भरमार है और जब कभी उससे मिलते—जुलते नाम वाले कुछ वाकये हो जाते हैं तो उन गांव वालों की परेशानी बढ़ जाती है। इन दिनों ऐसा ही उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के कोरौना गांव के निवासियों के साथ हो रहा है। Increased trouble residents of Korauna

‘कोरौना’ नामक यह गांव उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित है, जिसका नाम गांव वालों के लिए आफत बन चुका है। गांव वासियों के अनुसार जब से कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ा है, उनके गांव में बाहरी व्यक्ति आने से डरते हैं। इतना हीं नहीं, जब कोई गांववाला गांव का नाम बताता है तो वे उससे दूरी बना लेते हैं। लोग यह नहीं समझते हैं कि कोरौना एक गांव है कोई कोरोना से संक्रमित इंसान नहीं। Increased trouble residents of Korauna

हैरान रह जाती है पुलिस

इस गांव के नाम का इतना खौफ है कि लोग टेलीफोन पर भी बात नहीं करते हैं। गांव के लोग जब सड़क पर निकलते हैं तो पुलिस उनसे पूछती है कि कहां जा रहे हो और वह बताते हैं कि हम कोरौना जा रहे हैं तो पुलिस भी हैरान-परेशान हो जाती है।

Increased trouble residents of Korauna इसके अलावा केरल के कोच्चि के एक गांव में स्थित कोरोना टेक्सटाइल नामक दुकान भी भारी चर्चा में है। जब से कोरोना महामारी फैली है तब से यह दुकान लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। लोग अब इस दुकान के सामने दूर से ही सेल्फी ले रहे हैं। Increased trouble residents of Korauna

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increase immunity corona will not near: डरें नहीं, रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाएं, पास तक नहीं फटकेगा कोरोना

increase immunity corona will not near: कोरोना के भय से थर—थर कांप रही दुनिया को यूनानी विशेषज्ञों की सलाह है कि उसे डरने की अपेक्षा अपनी रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। रोग प्रतिरोधक शक्ति को रात में जल्दी सो जाने और सुबह जल्दी उठ कर ताजा और सादा नाश्ता करके मजबूती दी जा सकती है। इसके अलावा ड्राईफ्रूट का सेवन बढ़ा दें तो कोरोना का इन्फेक्शन पास तक नहीं फटकेगा। अलबत्ता इंसानों को एक—दूसरे से दूरी कायम रखने के साथ ही हाथ धोने पर विशेष ध्यान भी देना होगा ताकि कोरोना वायरस हाथों के जरिए शरीर में प्रवेश नहीं कर पाए।

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में यूनानी विंग के प्रभारी डा. सैयद अहमद का कहना है कि कोरोना वायरस का अभी तक किसी भी पैथी में कोई इलाज नहीं है, लेकिन यह वायरस मजबूत रोग प्रतिरोधक शक्ति वाले शरीरों का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। डा. सैयद का कहना है कि इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि मजबूत रोग प्रतिरोधक शक्ति वाले जबरन भीड़भाड़ में जाकर घुस जाएं। उन्हें भी सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी की पालना करते हुए घरों में रहना चाहिए। increase immunity corona will not near:

फ्रोजन खाद्य से बचना जरूरी

यूनानी पैथी के विशेषज्ञ डा. सैयद अहमद का कहना है कि सुबह उठकर ताजा पका हुआ नाश्ता कर लेने से कुछ ही दिनों में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ना शुरू हो जाएगी। इसके लिए सुबह नाश्ते में दूध, हलवा बादाम इत्यादि खाया जा सकता है। अगर किसी को ये सब खाद्य उपलब्ध नहीं हैं तो वह मूंगफली, चना इत्यादि खाकर भी रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ा सकता है। अलबत्ता फ्रोजन खाद्य से बचना बेहद जरूरी है। जहां तक चिकन मटन खाने का सवाल है तो वह भी ताजा लाकर पकाया जाना चाहिए। फ्रिज में रखा हुआ और प्रोसेस फूड इस वक्त में त्याग देना ही बेहतर होगा। increase immunity corona will not near:

 

सेनेटाइजर से ज्यादा फायदा देगा हाथ धोना

डा. सैयद अहमद का कहना है कि सेनेटाइजर का उपयोग किया जा सकता है लेकिन सबसे अधिक फायदा हाथ धोने से मिलेगा। खाना खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोएं। जब भी कोई काम करें, साबुन से हाथ धो लें। जहां तक मास्क का सवाल है तो सामान्य फ्लू पीड़ितों के साथ ही कोरोना के लक्षण वाले लोगों के लिए अनिवार्य है। अन्य लोग भी लगा सकते हैं लेकिन मास्क से ज्यादा फायदा हाथ धोने से मिलेगा। increase immunity corona will not near:

बेहतरीन सेनेटाइजर है नींबू—पानी

उन्होंने बताया कि नीबू पानी ​बेहतरीन सेनेटाइजर है। चने के बेसन से भी हाथ धोए जा सकते हैं। मुल्तानी मिट्टी भी हाथ धोने के काम ली जा सकती है। लेकिन सबसे ​बढ़िया है कि साबुन से हाथ धोए जाएं। इसके लिए नीम बेस साबुन मिल जाए तो सोने में सुहागा हो सकता है। increase immunity corona will not near:

इन्फेक्शन दिखे तो शहतूत पत्ते के गरारे करें

डा. सैयद अहमद का कहना है कि फ्लू का हमला होते ही गले में खराश के साथ ही निगलने में दिक्कत शुरू हो जाती है। ऐसी स्थिति में शहतूत पत्ते के पानी के गरारे तत्काल शुरू कर दिए जाएं। नमक मिले पानी के गरारे भी फायदेमंद रहेंगे। इसके साथ ही चिकित्सक की मदद भी तत्काल ली जाए। ऐसी स्थिति आते ही शबर्ते उन्नाव को गुनगने पानी से लें। बादाम, अखरोट, चिलगोजा, मूंगफली खाएं। मूंगफली खाने के बाद आधा घंटे तक पानी नहीं पीएं। increase immunity corona will not near:

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ऐसे बनाएं अंजीर की खीर

अंजीर अपने स्वाद के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। अंजीर के पत्ते का रस क्षय रोग के उपचार में भी कारगर है। अंजीर में प्रचुर मात्रा में वसा रहित फाइबर पाया जाता है, जो ह्रदय संबंधी रोगों से बचाता है। अंजीर का सेवन यकृत और तिल्ली से संबंधित रोगों के उपचार में कारगर है। यहां हम आपको अंजीर की खीर बनाने की रेसिपी की जानकारी दे रही हैं। तो बनाइए अंजीर की खीर और रोगों से मुक्ति की शुरूआत कर दीजिए।

अंजीर की खीर की रेसिपी

सामग्री
ताजा अंजीर : 1 कप
सूजी: 1/4 कप
मावा: 1/2 कप
चीनी: 1 कप
घी: 2 बड़ा चम्मच
दूध: 1 लीटर
केसर: 1/4 छोटा चम्मच
इलाइची पाउडर: 1/4 छोटा चम्मच
बादाम, पिस्ता, काजू : 10-10 नग

विधि: बादाम, काजू और पिस्ता को गरम पानी में भिगोकर पांच मिनट के लिए रख दें। अब दोनों को छीलकर बारीक काट लें। इसके बाद एक कड़ाही में घी डालकर सूजी को 2-3 मिनट तक भूनें। इसमें बारीक कटे बादाम, पिस्ता और काजू डालकर 2 मिनट तक और भूनें। इसके बाद इसमें दूध डालकर मिश्रण को गाढ़ा होने तक पकाएं। अब इसमें चीनी और केसर को डालकर अच्छी तरह पकाएं। बारीक कटे ताजे अंजीर के टुकड़े, इलाइची पाउडर और कद्दूकस किया हुआ मावा डालकर 3 मिनट तक पकाएं। बारीक कटे पिस्ता और बादाम से सजाकर परोसें।

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शरीर की हड्डियों में अगर घुुस गया है गठिया तो अंजीर खाइए, छू मंतर हो जाएगा दर्द

अंजीर अपने स्वाद के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। अंजीर गूलर प्रजाति का एक स्वादिष्ट फल है। अंजीर के पेड़ कम पोषक तत्वों वाली मिट्टी में भी उगाए जा सकते हैं और सूखा प्रवण क्षेत्र में भी आसानी से पनप सकते हैं। अंजीर अपने स्वाद के लिए दुनियाभर में मशहूर है। ताजे और सूखे अंजीर से अनेक प्रकार के व्यंजन भी बनाए जाते हैं। अंजीर के पेड़ों में फल अमूमन अगस्त से अक्टूबर के बीच लगते हैं। अंजीर के पेड़ों पर फूल नहीं लगते, सीधे फल ही लगते हैं।

सबसे पहले उगाया था

अंजीर उन फलों में से एक है, जिसके पेड़ों को मनुष्यों ने सबसे पहले उगाया था। मनुष्य ने अंजीर को गेहूं और बार्ली से भी पहले उगाना शुरू कर दिया गया था। प्राचीन ग्रीस में अंजीर बड़े पैमाने पर उगाया जाता था। अरस्तू ने ध्यान दिलाया कि जानवरों की तरह ही अंजीर के पेड़ों में भी लैंगिक भिन्नता पाई जाती है। इसका अर्थ है कि अंजीर के पेड़ दो तरह के होते हैं- पहला, जिस पर फल लगते हैं और दूसरा, जो पहले प्रकार के पेड़ पर फल लगने में मदद करते हैं।

आदम और हव्वा ने खाया

कैलिफोर्निया की जलवायु अंजीर उत्पादन के लिए बिल्कुल मुफीद है। कैलिफोर्निया अंजीर उत्पादन में अग्रणी है। आदम और हव्वा ने जब ज्ञान वृक्ष के फल को खाया, इसके बाद ही उनमें शर्म की अनुभूति ने जन्म लिया। जिसके कारण उन्होंने अपने अंगों को अंजीर के पत्तों से ढंक लिया था। प्राचीन नग्न कलाकृतियों में जननांगों को अंजीर के पत्तों से ढंका दिखाया जाता रहा है।

बवासीर और गठिया से भी बचाता है

कुरान में अंजीर को जन्नत से उतरा पेड़ बताया गया है। कुरान के सूरा 95 का शीर्षक अल-तिन है, जिसका अर्थ अंजीर होता है। कुरान में अंजीर के बारे में पैगम्बर मुहम्मद साहब कहते हैं, “यदि मुझे किसी ऐसे फल के बारे में बताना हो, जो कि जन्नत से उतरा हो, तो मैं अंजीर का नाम लूंगा, क्योंकि इस स्वर्गिक फल में कोई गुठली नहीं होती और यह फल बवासीर और गठिया जैसे रोगों से भी बचाता है।
अंजीर कई पोषक तत्वों से भरपूर फल है, जिसके नियमित सेवन से इंसान न सिर्फ स्वस्थ रह सकते हैं, बल्कि यह कई प्रकार की बीमारियों के उपचार में भी कारगर है। अंजीर में विटामिन बी, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, मैंगनीज, फोस्फोरस, पोटाशियम, सोडियम और जिंक प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो मानव शरीर को कई प्रकार की बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं। अंजीर के औषधीय गुणों की पुष्टि वैज्ञानिक शोधों ने भी की है।

क्षय रोग के उपचार में कारगर

अंजीर के पत्ते का रस क्षय रोग के उपचार में कारगर है। एक शोध बताता है कि अंजीर का सेवन कैंसर के कोशिकाओं को बढ़ने से रोक सकता है। एक अध्ययन के अनुसार, अंजीर में प्रचुर मात्रा में वसा रहित फाइबर पाया जाता है, जो ह्रदय संबंधी रोगों से बचाता है। अंजीर का सेवन यकृत और तिल्ली से संबंधित रोगों के उपचार में कारगर है।

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शरीर को रोगों से दूर रखता है मडुआ का हलवा, ये है इसकी रेसिपी

मेहनतकश आबादी के भोजन के रूप में मशहूर मडुआ में इतनी औषधीय ताकत है कि वह मानव शरीर को कई रोगों से दूर रखता है। यह मधुमेह नाशक अन्न है। इसे हलवे के रूप में खाया जाता है। पेश है मडुआ का हलवा बनाने की रेसिपी:—

 

रेसिपी
व्यंजन: मड़ुआ का हलवा
सामग्री:
मडुआ का आटा – 1 कप
चीनी – 4 चम्मच
घी – 3 चम्मच
काजू – 6
बादाम – 6
किसमिश – 8
पानी – 2 कप
विधि: सबसे पहले चूल्हे पर कड़ाही रखें और इसे गर्म होने दें। कड़ाही गर्म होने पर इसमें मंडुआ का आटा डालकर हल्का भूरा होने तक भूनें। जब आटे से सोंधी खुशबू आने लगे तो इसमें घी डालें और अच्छी तरह से मिलाएं।
अब इसमें काजू, किशमिश और बादाम को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर मिलाएं और 2 मिनट तक भूनें। इसके बाद कड़ाही में चीनी और पानी डालें और करछी से अच्छी तरह से मिलाते रहें ताकि गांठ न बन पाए। अब आंच धीमी करके पानी सूखने तक करछी से हिलाते रहें। पानी सूख जाने पर कड़ाही को चूल्हे से उतार लें। सूखे मेवे से सजाएं और परोसें।

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एक मुट्ठी किशमिश खाइए, डायबिटीज(मधुमेह) से छुटकारा पाइए

आपने अपने घरों में बनने वाली खीर सहित अन्य पकवानों में मिलाया जाने वाला किशमिश नामक मेवा खूब खाया होगा। इसके अलावा भी कई मौके पर बादाम, काजू इत्यादि के साथ भी किशमिश खूब खाई होगी लेकिन ज्यादातर लोग किशमिश खाने के बाद भी इसके फायदों के बारे में नहीं जानते। दरअसल, किशमिश सिर्फ अपने खट्टे-मीठे स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर से जुड़ी कई सामान्य और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए इसका सेवन किया जा सकता है। किशमिश के आश्चर्यजनक फायदों के बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे और नियमित रूप से इसका सेवन करने लगेंगे।

 

diabetes: डायबिटीज(मधुमेह) का रामबाण इलाज है किशमिश

अब तक डाक्टरों को यही कहते सुना होगा कि मधुमेह के रोगियों के लिए मीठा जहर बराबर है, लेकिन हकीकत में किशमिश उनके लिए अमृत के समान है। अनगिनत शोधों के अनुसार किशमिश पोस्ट-प्रांडियल इंसुलिन प्रतिक्रिया को नियंत्रित कर सकती है, जिस वजह से यह मधुमेह के रोगियों के लिए फायदेमंद है। इसके अलावा किशमिश में ऐसे गुण होते हैं जो लेप्टिन और घ्रेलिन नामक हार्मोंस को भी नियंत्रित कर सकते हैं, जिससे मधुमेह रोगी का अपने खानपान पर नियंत्रण बन जाता है।

पेट में पत्थर को भी पचा देती है किशमिश

पाचन क्रिया को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कुछ किशमिश का सेवन जरूर करें, क्योंकि किशमिश अन्य जरूरी पोषक तत्वों के साथ-साथ फाइबर से भी समृद्ध होती है। फाइबर भोजन को पचाने में सहायता करता है और कई तरह की पेट संबंधी समस्याों से राहत दिलाता है। किशमिश का दैनिक सेवन शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मददगार है, जिस वजह से पाचन स्वास्थ्य के लिए रोजाना किशमिश का सेवन एक कारगर विकल्प हो सकता है।

कैंसर में बेस्ट है किशमिश

यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है कि कैंसर कितना घातक रोग है, इसलिए हर साल इसकी चपेट में आकर दुनियाभर के लाखों लोग अपनी जान गंवा देते हैं। मगर यह जानकर हैरानी होगी कि किशमिश कैंसर जैसी घातक बीमारी की आशंका को भी कम कर सकती है। इसमें कैटेचिन नामक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो शरीर को मुक्त कणों से बचाने का काम करता है। ये मुक्त कण ट्यूमर का कारण बन सकते हैं।

किशमिश खाइए एसिडिटी को बॉय—बॉय कहिए

एसिडिटी एक आम समस्या है जो गलत खाद्य पदार्थों के कारण हो जाती है, लेकिन किशमिश का सेवन करके इस समस्या से भी निजात पाया जा सकता है। किशमिश में पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे कई तरह के पोषक तत्व सम्मिलित होते हैं जो एसिडिटी को कम करते हैं। इतना ही नहीं, इसके पोषक तत्व गठिया, गाउट, पथरी और यहां तक कि हृदय रोग जैसी बीमारियों को रोकने में भी मदद करते हैं।

एक मुट्ठी किशमिश देती है दिनभर ऊर्जा

भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण पूरे दिन अपने आप को ऊर्जावान बनाएं रखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है, लेकिन रोजाना एक मुट्ठी किशमिश का सेवन नाश्ते में कर लें तो दिन भर घोड़े की तरह दौड़ सकते हैं। किशमिश विटामिन-बी के समूह से समृद्ध होती है जो व्यक्ति को दिन भर ऊर्जावान रखने में मददगार है। अधिक शारीरिक श्रम करने वाले लोगों के लिए नियमित रूप से किशमिश का सेवन करना जरूरी है।