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इंटरनेट के ठगों ने मोबाइल फोन में घुसाया नया हथियार, कर देता है पूरी तरह कंगाल

क्या आप अपने मोबाइल फोन को तब भी अपने साथ रखते हैं जब बेहद निजी रिश्तों में होते हैं। अगर ऐसा करते हैं तो सावधान हो जाएं क्योंकि इंटरनेट के ठग आपकी निजी पलों को सार्वजनिक कर सकते हैं। ऐसा वे स्टॉकरवेयर के जरिये करते हैं। यह मोबाइल फोन में घुसाया गया नया हथियार है। इस हथियार का इस्तेमाल कुछ सालों पहले तक पश्चिमी देशों में होता था। लेकिन अब भारत में भी इसका बड़ा पैमाने पर उपयोग हो रहा है। इसके जरिये ब्लैकमेल किए जाने की शिकायतें भी मिल रही है।

स्टॉकरवेयर, जिसे स्पाउसवेयर भी कहा जाता है, एक शक्तिशाली सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है, जिसके ज़रिए किसी पर निगरानी रखी जा सकती है। ये इंटरनेट पर बहुत आसानी से खरीदे जा सकते हैं। इस सॉफ्टवेयर के ज़रिए किसी डिवाइस के सारे मैसेज पढ़े जा सकते हैं, स्क्रीन एक्टिविटी रिकॉर्ड की जा सकती है। जीपीएस लोकेशन ट्रैक की जा सकती है। ये सॉफ्टवेयर जासूसी के लिए कैमरों का इस्तेमाल करता है, जिससे पता चल जाता है कि वो व्यक्ति क्या कर रहा है।

साइबर सिक्योरिटी कम्पनियों के मुताबिक पिछले साल अपने डिवाइस में ऐसा सॉफ्टवेयर होने के बारे में 35 फ़ीसदी लोगों को पता लगा। कम्पनियां कहती हैं कि प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी ने इस साल अबतक 37,532 उपकरणों में स्टॉकरवेयर होने का पता लगाया है। ज़्यादातर लोग अपने लैपटॉप और डेस्कटॉप कंप्यूटर की तो सुरक्षा करते हैं, लेकिन कई लोग अपने मोबाइल डिवाइस को प्रोटेक्ट नहीं करते हैंं स्टॉकरवेयर का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल रूस में किया जाता हैं इसके बाद भारत, ब्राज़ील, अमरीका और जर्मनी जैसे देश हैंं।

एक दूसरी सिक्योरिटी कंपनी के मुताबिक अगर किसी को लग रहा है कि उसकी जासूसी की जा रही है तो वो कुछ प्रैक्टिकल कदम उठा सकता है। सलाह दी जाती है कि आप अपने फोन में मौजूद सभी एप्लिकेशन को वेरिफाई करें और ज़रूरत पड़ने पर किसी वायरस का पता लगाने के लिए वायरस एनालिसिस करें। आपके डिवाइस में मौजूद जिस एप्लिकेशन के बारे में आपको पता नहीं है, उसके बारे में इंटरनेट पर सर्च करके पता लगाएं और ज़रूरत पड़ने पर हटा दें। नियम बना लें कि जो एप्लिकेशन इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, उसे हटाना ही है। एक सिक्योरिटी ऐप डाउनलोड कर लें। एंटीवायरस से स्पाइवेयर का पता चल सकता है।

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Big News: 60 लाख लोगों के मोबाइल में सेव प्राइवेट फोटोज लीक, फेसबुक से हुई गलती

मोबाइल फोन पर फेसबुक चलाने वालों के लिए ये चौंकाने वाली खबर हो सकती है। जानकारी के अनुसार फेसबुक एप के जरिए करीब 60 लाख 80 हजार लोगों की प्राइवेट फोटोज लीक हो गई है। ये फोटोज अब तक करीब 1500 से ज्यादा थर्ड पार्टी एप तक पहुंच गई है। इस गंभीर चूक पर फेसबुक ने माफी भी मांग ली है।

आपको बता दें कि फेसबुक एप से आप मोबाइल से अपनी फोटोज को शेयर कर सकते हैं। इससे ये सीधे आपके अकाउंट पर दिखने लगती हैं। इसी फीचर के चलते 60 लाख से ज्यादा लोगों के ऐसे फोटोज लीक हो गए हैं जो अपलोड नहीं किए गए थे।

कौन से हैं ये फोटोज
फेसबुक स्टोरी, फेसबुक मार्केटप्लेस साफ्टवेयर पर ये फोटोज यूजर्स ने अपलोड किए। ये वो फोटोज हैं जो आपने केवल अपलोड की हों लेकिन शेयर नहीं की हों। इसे समझने के लिए एक उदाहरण लिया जा सकता है। मान लीजिए आप अपनी कोई फोटो फेसबुक पर शेयर करना चाहते हैं। आप फेसबुक ऐप पर ​गए और पोस्ट में फोटो को अपलोड करने लगे। बीच में ही आपको आपका बॉस बुला लेता है। आप तुरंत जाते हैं। इसके बाद आप मोबाइल पर कोई और काम करने लगते हैं और फोटो अपलोड होकर रह जाती है। आपने इसे शेयर नहीं किया है। ऐसे फोटोज लीक हो गए हैं।

लीक होने से क्या है नुकसान

फेसबुुक से लीक हुए इन फोटोज से किसी को क्या खतरा हो सकता है। खतरा ये हो सकता है कि आपकी फोटो का दुरुपयोग 1500 से भी ज्यादा एप कर सकते हैं। ये फोटोज उन तक पहुंच गए हैं। गंदी साइट्स, प्रलोभन देने वाले विज्ञापनों आदि में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। आपकी फेसबुक आईडी को हैक करने में इन फोटोज की मदद ली जा सकती है। हालांकि आपकी फोटो का इस्तेमाल तभी हो पाएगा जब हैकर्स के किसी मैसेज का गलती से जवाब दे दें या उनके कहे अनुसार फोन में बदलाव कर दें।

फेसबुक ने मांगी माफी
इस गलती पर फेसबुक की नजर तो पड़ी लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। जब मामला सामने आया तब तक लीक हुए फोटोज सैंकड़ों एप्स तक पहुंच गए। फेसबुक ने इसके लिए माफी मांगी है। फेसबुक उन हैकर्स से बात कर रहा है जिन्होंने इस काम को अंजाम दिया है। उनसे फोटोज वापस लेने या उनका दुरुपयोग नहीं करें, इसकी कोशिश की जा रही है। साथ ही जल्द ही फेसबुक ने इस गलती को सुधारने के लिए नया अपडेट लांच करने की बात कही है।

फेसबुक का दावा है कि ये फोटोज 13 सितंबर से 25 सितंबर 2018 के बीच लीक हुई हैं। कंपनी के लिखे नए ब्लॉग में बताया गया है कि फेसबुक बिना शेयर हुए अपलोड फोटोज को केवल 3 दिन के लिए अपने डाटा में रखता है।

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Huawei Mte 20 pro में 3 कैमरे: 40 एमपी, 20 एमपी, 8 एमपी, फ्रंट कैमरा 24 एमपी

नयी दिल्ली। चीन की प्रौद्योगिकी कंपनी हुवावेई ने थ्री रियर कैमरा वाला नया स्मार्टफोन Huawei Mte 20 pro लाँच करने की घोषणा की है। ऑफलाइन मार्केट में यह 10 दिसंबर से उपलब्ध होगा और सबसे पहले क्रोमा में मिलेगा।

हुवावेई कंज्यूमर बिजनेस ग्रुप के वरिष्ठ उत्पाद निदेशक डब्ल्यू यांग ने मंगलवार को यहां इस स्मार्टफोन को पेश करते हुये कहा कि इसमें लेसिका कैमरा का उपयोग किया गया है। रियर में तीन कैमरे दिये गये हैं जिसमें एक 40 एमपी का है। दूसरा कैमरा आठ एमपी का और तीसरा कैमरा 20 एमपी का है। इसमें 24 एमपी का फ्रंट कैमरा है।

उन्होंने कहा कि किरिन 980 चिपसेट प्रोसेसर पर आधारित इस स्मार्टफोन में 4200 एमएएच की बैटरी है। यह फोन ऑनलाइन मार्केट प्लेस अमेजन के प्राइम सदस्यों के लिए 3 दिसंबर की मध्य रात्रि को उपलब्ध होगा जबकि अन्य सभी के लिए यह 4 दिसंबर की मध्य रात्रि से उपलब्ध होगा। कंपनी ने इसके साथ पीएक्ससी 550 हेडफोन की भी पेशकश की है और इसके साथ फोन का मूल्य 71,990 रुपये हो जायेगा।

कंपनी के कहा कि 29990 रुपये का हेडफोन इस फोन के साथ मात्र दो हजार रुपये में दिया जायेगा। इसके साथ ही कंपनी ने वोडाफोन और आइडिया से भी करार किया है जिसके तहत इस फोन को खरीदने वालों को आकर्षक ऑफर दिये जायेंगे।

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Tech

दूध में पानी की मिलावट है या कुछ और, झट से बता देगा ये भारतीय स्मार्टफोन, सजा उम्रकैद

नयी दिल्ली। अब मोबाइल फोन की मदद से दूध में मिलावट का पता लगाया जा सकेगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), हैदराबाद एक ऐसा मोबाइल फोन तैयार कर रहा है जिससे दूध में मिलावट का पता लगाया जा सकता है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे स्मार्ट फोन का नमूना तैयार किया है जिसके जरिए दूध में सोडा, बोरिक अम्ल, यूरिया, पानी और शर्करा का पता लगाया जा सकता है।

आईआईटी के इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर शिव गोविन्द सिंह के नेतृत्व में शोध टीम ने यह स्मार्ट फोन प्रयोग के तौर पर बनाया है। इस महीने फ़ूड एंड एनालिटिकल मेथेड जर्नल में इस आशय का उनका एक लेख भी प्रकाशित हुआ है।

सिंह ने बताया कि दूध में एक डिटेक्टर डालने के बाद उसके रंग में परिवर्तन होगा और मोबाइल फोन से फोटो खींच कर उसे अपलोड कर लिया जायेगा और फिर मोबाइल फोन उसका अध्यन कर यह बता देगा कि दूध में कौन सी चीज़ मिलाई हुई है। यह डिटेक्टर सेंसर चिप पर आधारित होगा।

पशु कल्याण बोर्ड के अनुसार 68 प्रतिशत दुग्ध में मिलावट होती है और इस मोबाइल फोन से दूध में 99.7 प्रतिशत से अधिक शुद्धता का पता लगाया जा सकता है। यहां हम बताना चाहेंगे कि एक जनहित चाचिका की सुनवाई पर आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था सरकार ऐसे कानून को आईपीसी में शामिल करे। हालांकि देश के कुछ ही राज्यों ने इस पर सह​म​ति बनाई थी।

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कैसे बचेगी भैया, छोटी सी गौरैया

गौरैया चिड़िया की लुप्त हाे रही प्रजाति को बचाने की कवायद के बीच प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर चंबल घाटी में गौरैया के झुंड के झुंड देखकर इस पक्षी के भविष्य को लेकर सुखद अनुभूति होती है। पर्यावरण में आए बदलाव एवं अंधाधुंध शहरीकरण के चलते कई देशों में इस चिड़िया की प्रजाति लुप्तप्राय हो चुकी है मगर चंबल इलाके का भ्रमण करने वाले पर्यटकों का मन बडी तादाद मे गौरैया चिडिया को देख प्रसन्न हो जाता है। इटावा सफारी पार्क मे जहां बडी तादाद मे गौरैया चिडिया देखी जा रही है वही यमुना चंबल के बीहडो मे तो इनकी संख्या इतनी है कि इनका झुंड देख कर खुश होना लाजिमी है । असल मे चंबल के बीहड मे खासकर अधिक हरियाली होने के कारण गौरैया यहां पर बडे आराम से रह रही है और उसको यहां पर किसी भी तरह का कोई नुकसान करने वाला नहीं है। गौरैया एक ऐसी चिड़िया है जो इंसान के घर आँगन में घौंसला बनाकर रहती है लेकिन शहरों के विस्तार और हमारी बदलती जीवन शैली से अब गौरैया के रहन-सहन और भोजन में कई दिक्कतें आ रही हैं। यही वजह है कि शहरों में अब गौरैया की आबादी कम होती जा रही है।  

 

शहरीकरण के इस दौर में गौरैया भी प्रभावित हुईं। गौरैया आबादी के अंदर रहने वाली चिड़िया है जो अक्सर पुराने घरों के अंदर, छप्पर या खपरैल अथवा झाड़ियों में घोंसला बनाकर रहती हैं। घास के बीज, दाना और कीड़े-मकोड़े गौरैया का मुख्य भोजन है जो पहले उसे घरों में ही मिल जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। गौरैया के झुण्ड दिन भर उनके आँगन में मंडराते रहते थे। पहले हमारे घर में अगर 40-50 चिड़ियां आती थीं लेकिन अब एक भी दिखती नहीं है।

अब से करीब 10 साल पहले तक गौरैया चिड़ियों की खासी तादाद को घरों में देखा करते थे, लेकिन अब यह चिड़िया करीब करीब शहरी इलाकों से गायब हो गई हैं। गौरैया एक ऐसी चिड़िया है, जो इंसान के घर आँगन में घौंसला बनाकर उसके सबसे करीब रहती रही है लेकिन शहरों के विस्तार और हमारी बदलती जीवन शैली से अब गौरैया के रहन-सहन और भोजन में कई दिक्कतें आ रही हैं। जिस तरह से इटावा के पास बड़ी संख्या में गौरैया चिड़िया नजर आई उससे गौरैया के भविष्य को लेकर एक सुखद अनूभूति हो रही है।
गौरैया चिड़िया बहुत संवेदनशील पक्षी हैं और मोबाइल फोन तथा उनके टावर्स से निकलने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडियेशन से भी उसकी आबादी पर असर पड़ रहा है इसके अलावा शहरों में भव्य इमारतों के निर्माण और मोबाइल टावरों से निकलने वाली किरणों के कुप्रभाव के चलते गौरैया चिड़िया शहरी इलाकों से पूरी तरह से लुप्त हो रही है। गौरैया बचाओ अभियान के तहत इसके लिए बडी तादाद मे घोंसले प्रदेश भर मे लगाये गये थे उससे भी गौरैया को काफी जगह देखा जाने लगा है लेकिन अभी गौरैया के सकंट को दूर नहीं कहा जा सकता है।

ब्रिटेन की ‘रायल सोसायटी ऑफ प्रोटेक्शन आफ बर्ड्स’ ने भारत से लेकर विश्व के विभिन्न हिस्सों में अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययनों के आधार पर गौरैया को ‘रेड लिस्ट’ में डाला गया है। आम घरों में हमेशा रहने वाली गौरैया नामक चिड़िया करीब-करीब विलुप्त होने के कगार पर आ खड़ी हुई थी। इसको लेकर वन अधिकारियों और पर्यावरणीय संस्थाओं की ओर से चिंता जताई जाने लगी कि आम लोग गौरैया को देखने के लिये तरस गये है।

अध्ययनों में गौरैया एक संकटग्रस्त पक्षी पाया गया है। ब्रिटेन ,इटली ,फ्रांस ,जर्मनी जैसे देशों में इनकी संख्या तेजी से घट रही है,लेकिन नीदरलैंड में तो इसे दुर्लभ प्रजाति के वर्ग में रखा गया है। गौरैया को बचाने की कवायद में दिल्ली सरकार ने गौरैया को राज पक्षी भी घोषित कर दिया है। एक अध्ययन के अनुसार भारत में गौरैया की संख्या करीब साठ फीसदी तक घट गई है।

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एप बनाइए, अरबों कमाइए

सैलफोन जिसे भारत में मोबाइल के नाम से पुकारा जाना अधिक पसंद किया जाता है, उसने दुनिया की दिनचर्या ही बदल कर रख दी है। पहले प्रत्येक वस्तु के लिए लोगों को बाजार तक दौड लगानी पडती थी, अब वह आॅर्डर देते ही घर तक पहुंच जाता है। जानते हैं, ये आर्डर देना कैसे आसान हुआ, एप से, हां भई हां एप, जिसे मोबाइल फोन में इंस्टाल करते ही मनचाहा काम किया जा सकता है। मोबाइल के दिन प्रतिदिन बढ़ते इस्तेमाल से अब शायद ही कोई ऐसा कार्य क्षेत्र होगा जिसके लिए मोबाइल ऐप नहीं बनाया गया हो। देश-विदेश में हज़ारों एक्सपर्ट्स प्रतिदिन किसी न किसी सेवा अथवा प्रोडक्ट के लिए ऐप का विकास कर रहे हैं। विश्वभर में अरबों लोगों द्वारा मोबाइल का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसकी वजह से विभिन्न कंपनियों द्वारा ऐप्स के माध्यम से उपभोक्ताओं और सेवा उपयोगकर्ताओं तक पहुंचना आसान हो गया है। मोबाइल ऐप यूजर्स अपनी आवश्यकता के अनुसार कंपनियों को आर्डर देते हैं और इसी के माध्यम से सेवाओं और उत्पादों की खरीदारी और धनराशि का भुगतान भी हो जाता है। इन ऐप्स के माध्यम से बहुत से कार्य किसी तरह की तकलीफ उठाये बिना हो जाते हैं और समय ही नहीं धन की भी बचत होती है। ई-कॉमर्स से जुड़ी कम्पनियाें ने तो अब अपनी वेबसाइट की बजाय सिर्फ ऐप के ज़रिये ही यूजर्स को सेवाएं प्रदान करना शुरू कर दिया है। शिक्षा संस्थान और बड़े-बड़े संगठनों के लिए भी ऐप विकसित करना ज़रूरत बन चुका है।

क्या है मोबाइल ऐप :- बुनियादी तौर पर ऐप एक प्रकार के छोटा कंप्यूटर प्रोग्राम होता है जो मोबाइल फोन, टेबलेट अथवा घड़ियों तक में चलाया जाता है। प्रत्येक ऐप का खास तरह का लक्षित कार्यकलाप होता है। उदाहरण के लिए हेल्थकेअर, शॉपिंग, गेम्स आदि। कई ऐप्स तो मोबाइल फोन के साथ ही आते हैं जबकि अन्य ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर इत्यादि से डाउनलोड कर इंस्टाल किया जाता है।

ट्रेनिंग :- इस फील्ड का एक्सपर्ट बनने के लिए विभिन्न प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज का जानकार होना सबसे पहली शर्त है। इनमें ऑब्जेक्टिव सी, सी++, जावा आदि प्रमुख हैं। शुरुआत जावा प्रोग्रामिंग लैंग्वेज से करनी चाहिए। कई कंपनियों में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के डिग्रीधारकों को ही जॉब के लिए आमंत्रित किया जाता है। कंप्यूटर साइंस की पृष्ठभूमि वाले युवा भी इस प्रोफेशन में आ सकते हैं।

व्यक्तिगत गुण :- इस क्षेत्र में तकनीकी दक्षता के साथ सृजनात्मक सोच का भी सफलता हासिल करने में काफी महत्त्व है। कंज्यूमर और कंपनी दोनों की आवश्यकताओं को समझते हुए मोबाइल ऐप का डिजाइन करना पड़ता है। इसके लिये अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर जाकर प्रस्तावित ऐप की कार्यविधियों को समझने की ज़रूरत पड़ती है। संवेदनशीलता के आधार पर ही ऐसी बारीकियों को पकड़ा जा सकता है अन्यथा एक छोटी-सी गलती समूचे ऐप को बर्बाद करने के लिए काफी हो सकती है। उपभोक्ता अक्सर किसी भी नयी तकनीक को अपनाने में हिचकता है। इसके पीछे आमतौर पर कारण होता है असुविधा की आशंका। डेवलपर के लिए यह भी एक चुनौती होती है कि कैसे इसे अधिक से अधिक सुविधाजनक बनाया जाए। मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि तकनीकी कुशलता के साथ मानवीय पहलुओं से भी भलीभांति परिचित होना इस तरह के काम में सफलता हासिल करने के लिए आवश्यक है।

दायित्व :- मोबाइल ऐप डेवलपर का मुख्य कार्य कंपनियों की ज़रूरत के अनुसार ‘टेलरमेड’ ऐप को विकसित करना है। इसके लिए वे निरंतर कंपनी के अधिकारियों से फीडबैक लेते रहते हैं और उनके अनुरूप सही तरह के ऐप को निर्मित करते हैं। ऐप के कारगर होने की जांच एवं पुष्टि की ज़िम्मेदारी भी उन पर ही होती है। ऐप के क्रियान्वयन में आने वाली किसी भी प्रकार की समस्या का निदान करने के लिए उनकी ही सेवाएं ली जाती हैं।

जॉब्स :- प्रायः मोबाइल ऐप डेवलपिंग के कार्य से जुड़ी कंपनियों में इस क्षेत्र के एक्सपर्ट्स को अपने यहां रखती हैं। कई कम्पनियां सीधे भी अपने ऐप्स को तैयार करने के लिए इन एक्सपर्ट्स को नियुक्त करती हैं। अनुभव और कार्य प्रवीणता के आधार पर कम्पनियों द्वारा इनकी सैलरी तय की जाती है। इस क्षेत्र में फ्रीलांसिंग के ज़रिये कमाई करने के अवसरों की कमी नहीं है।

भावी संभावनाएं:- इंटरनेट के तीव्र गति से बढ़ते प्रयोग ने भी मोबाइल ऐप्स के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई है। फिलहाल मोबाइल ऐप का का निर्माण काफी महंगा है लेकिन उम्मीद है कि तकनीकी प्रगति और इस क्षेत्र के एक्सपर्ट्स की संख्या में बढ़ोतरी के साथ इस खर्च में कमी आती जायेगी।

दुनियाभर में डिजिटल तकनीक के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले काफी समय तक मोबाइल ऐप्स के विशेषज्ञों की मांग बनी रहेगी। भारत जैसे विकासशील देश में तो अभी इसकी शुरुआत भर ही है। फिलहाल बहुराष्ट्रीय और शीर्ष देसी कम्पनिया ही मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल कर रही हैं लेकिन वह समय दूर नहीं जब कम नामी कंपनियों को भी स्पर्धा में बने रहने के लिए इस तकनीक का सहारा लेने को बाध्य होना पड़ेगा।