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पुतलीबाई का नाम सुनकर पायजामा गीला कर देते थे चंबल के डाकू

चंबल के बीहड़ों में राज करने वाले जिन डाकुओं का नाम सुनकर आम आदमी को कंपकंपी छूट जाती थी, उन्हीं डाकुओं में से अनेक डाकू पुतलीबाई का नाम सुनकर पायजामा गीला कर देते थे। बी हड़ों में पुतलीबाई के अलावा भी अनेक महिला डकैत हुई हैं लेकिन उनमें से एक भी पुतलीबाई जैसा नाम नहीं कमा सकी।

चंबल के इतिहास में पुतलीबाई का नाम पहली महिला डकैत के रूप में दर्ज है। बीहडों में पुतलीबाई का नाम एक बहादुर और आदर्शवादी महिला डकैत के रूप में सम्मानपूर्वक लिया जाता है। गरीब मुस्लिम परिवार में जन्मी गौहरबानो को परिवार का पेट पालने के लिए नृत्यांगना बनना पड़ा और इसी दौरान डाकुओं के उत्पीड़न से तंग आकर पुतली बाई ने हथियार उठा लिए। बीहड़ों में उसकी बहादुरी के साथ ही गरीबों विशेषकर महिलाओं की दुष्टों से रक्षा के लिए उसका नाम आज भी आदर के साथ लिया जाता है।

हाथों मे बदूंक थामना वैसे तो हिम्मत और साहस की बात कही जाती है, लेकिन जब कोई महिला बंदूक थामकर बीहडों में कूदती है तो उसकी चर्चा बहुत ज्यादा होती है। चंबल के बीहडों में सैकडों की तादात में महिला डाकुओं ने अपने आंतक का परचम लहराया है। बाद में कुछ महिला डकैत पुलिस की गोली खाकर मौत के मुंह मे समा गईं तो कुछ गिरफ्तार कर ली गई या फिर कुछ महिला डकैतों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें से ऐसी ही कुछ महिला डकैत आज भी समाज में अपने आप को स्थापित करने में लगी हुई हैं।

एक समय था जब चंबल में सीमा के नाम की तूती बोला करती थी। सीमा बीहड में आने से पहले अपने माता-पिता के साथ मासूमियत के साथ जिंदगी बसर कर रही थी। दस्यु सरगना लालाराम सीमा परिहार को उठा कर बीहड में लाया था। बाद में लालाराम ने गिरोह के एक सदस्य निर्भय गुर्जर से सीमा की शादी करवा दी, लेकिन दोनों जल्दी ही अलग हो गए। 18 मई, 2000 को पुलिस मुठभेड में लालाराम के मारे जाने के बाद 30 नवंबर, 2000 को सीमा परिहार ने आत्मसमर्पण कर दिया था। फिलहाल, सीमा परिहार औरैया में रहते हुए राजनीति में सक्रिय है। फूलनदेवी के चुनाव क्षेत्र मिर्जापुर से लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी सीमा परिहार टेलीविजन शो बिग बॉस में हिस्सा ले चुकी है। सीमा परिहार के बाद डकैत चंदन की पत्नी रेनू यादव, डकैत सलीम गुर्जर की प्रेयसी सुरेखा उर्फ सुलेखा और जगन गुर्जर की पत्नी कोमेश गुर्जर, डकैत सलीम की प्रेमिका सुरेखा भी बहुत थोड़े समय तक चर्चा में रही है।

अस्सी के दशक में सीमा परिहार के बाद लवली पांडे, अनीता दीक्षित, नीलम गुप्ता, सरला जाटव, सुरेखा, बसंती पांडे, आरती, सलमा, सपना सोनी, रेनू यादव, शीला इंदौरी, सीमा यादव, सुनीता पांडे, गंगाश्री आदि ने भी बीहड में दस्तक दी परंतु इनमें से कोई भी सीमा परिहार जैसा नाम और शोहरत नहीं हासिल कर सकीं। सरला जाटव, नीलम गुप्ता और रेनू यादव के अतिरिक्त अन्य महिला डकैत पुलिस की गोलियों का शिकार हो गईं। हालांकि एक समय लवली पांडेय सीमा परिहार के मुकाबले ज्यादा खतरनाक साबित हुई थी।