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कोरोना: सबसे ज्यादा मामले वाले 10 देशों में शामिल हुआ India

नयी दिल्ली । कोरोना वायरस ‘कोविड-19’ के एक ही दिन में करीब सात हजार मामले आने के साथ भारत इस महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित 10 देशों में शामिल हो गया है।स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, आज कुल 6,977 नये मामले सामने आये। अब तक देश में 1,38,845 मरीजों में इस वायरस के संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। देश में इस समय कोरोना वायरस के 77,103 मरीज उपाचाराधीन हैं और 57,721 स्वस्थ हो चुके हैं जबकि 4,021 लोगों को नहीं बचाया जा सका।

इसके साथ ही देश में कोविड-19 के कुल मरीजों की संख्या ईरान से अधिक हो गयी है और इस मामले में हम 10वें स्थान पर पहुँच गये हैं। दुनिया भर में कोविड-19 के 54 लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। कुल 16.43 लाख मामलों के साथ अमेरिका इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। इसके बाद क्रमश: ब्राजील (3.63 लाख), रूस (3.44 लाख), ब्रिटेन (2.60 लाख), स्पेन (2.35 लाख), इटली (2.29 लाख), फ्रांस (1.82 लाख), जर्मनी (1.80 लाख) और तुर्की (1.56 लाख) का स्थान है।भारत में मई महीने में ही एक लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक 01 मई की सुबह देश में इस महामारी के 35,043 मामलों की पुष्टि हुई थी जो आज सुबह बढ़कर 1,38,845 पर पहुँच गयी। इस प्रकार महज 24 दिन में 1,03,802 मामले सामने आ चुके हैं।

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विश्व बैंक का भारत को एक अरब डॉलर का पैकेज

वाशिंगटन। विश्व बैंक ने वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) से भारत के सर्वाधिक प्रभावित गरीबों और कमजोर वर्गों के लिए एक अरब डॉलर का सामाजिक संरक्षण पैकेज मंजूर किया है।

विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने 14 मई की बैठक में इस पैकेज को स्वीकृति दी।इसे मिलाकर विश्व बैंक की कोविड-19 महामारी चुनौती से निपटने के लिए भारत को दी जा रही मदद दो अरब डॉलर हो गई।

एक अरब डॉलर की त्वरित मदद पिछले माह भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को दी गई थी।नये पैकेज की राशि दो किस्तों में दी जायेगी। चालू वित्त वर्ष में पहले 75 करोड़ डॉलरका त्वरित आवंटन होगा जबकि शेष 25 करोड़ डॉलर अगले वित्त वर्ष में मिलेंगे।

पहली किस्त की राशि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना(पीएमजीकेएवाई) के तहत खर्च की जायेगी जिससे नगदी हस्तांतरण और खाद्य लाभों के क्रियान्वयन में त्वरित मदद मिलेगी। दूसरी किस्त सामाजिक संरक्षण कार्यों पर व्यय की जायेगी।

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कोरोना के मामले में भारत बनने वाला है चीन, जानिए कितने हो गए मामले

नयी दिल्ली । देश में कोरोना वायरस (कोविड-19) का प्रकोप चरम पर है और अब यह संक्रमण के सर्वाधिक आंकड़ों वाले देशों की सूची में 12वें स्थान के साथ ही वैश्विक महामारी के केंद्र चीन के करीब पहुंच गया है। पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 3967 नए मामले सामने आने से संक्रमितों की संख्या 81,970 हो गयी तथा इसी अवधि में 100 लोगों की मौत होने से मृतकों का आंकड़ा 2649 पर पहुंच गया है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से शुक्रवार सुबह जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश के विभिन्न राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक 81,970 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं तथा 2649 लोगों की मौत हुई है , जबकि 27920 लोग इसके संक्रमण से पूरी तरह ठीक हुए हैं और उन्हें विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।

चीन में हुबेई प्रांत के वुहान में दिसम्बर 2019 के मध्य में कोरोना वायरस के संक्रमण का पहला मामला प्रकाश में आया था और इसने अब तक विश्व भर के अनेक देशों को अपनी चपेट में ले लिया है। चीन में ही अब तक 82933 लोग इससे संक्रमित हुए हैं तथा 4633 लोगों की मौत हो चुकी है।

देश में कोरोना से सबसे अधिक महाराष्ट्र प्रभावित हुआ है और इसके कारण राज्य की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। महाराष्ट्र में 27524 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं तथा 1019 लोगों की मौत हो चुकी है और 6059 लोग इसके संक्रमण से ठीक भी हुए हैं।

कोरोना वायरस से प्रभावित होने के मामले में देश का दक्षिणी राज्य तमिलनाडु दूसरे नंबर पर है। तमिलनाडु में अब तक 9674 लोग इससे संक्रमित हुए हैं तथा 66 लोगों की मृत्यु हुई है जबकि 2240 लोगों को उपचार के बाद विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी मिल चुकी है। गुजरात में भी कोविड-19 संक्रमितों की संख्या 9591 हो गई है तथा इसके संक्रमण से 586 लोगों की मौत हो चुकी है।    इसके अलावा 2753 लोग इस बीमारी से उबरे हैं।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की भी स्थिति इस जानलेवा विषाणु के कारण चिंताजनक बनी हुई है। यहां संक्रमितों की संख्या आठ हजार से अधिक हाे गई है । दिल्ली में अब तक 8470 लोग संक्रमित हुए हैं तथा नौ मरीजों की मौत के साथ मृतकों का आंकड़ा 115 पर पहुंच गया है और 3045 लोगों को उपचार के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।

राजस्थान में भी कोरोना तेजी से पैर पसार रहा है। यहां कोरोना संक्रमितों की संख्या 4534 तक हो गयी है तथा 125 लोगों की मौत हो चुकी है , जबकि 2580 लोग पूरी तरह ठीक हुए हैं। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में अब तक 3902 लोग इसकी चपेट में आए हैं तथा इसके संक्रमण से मरने वालों की संख्या 88 हो गयी है, 2072 लोग अब तक इससे ठीक हुए हैं।

पश्चिम बंगाल में 2377 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं तथा 215 लोगों की मौत हो चुकी है और अब तक 768 लोग ठीक हुए है। तेलंगाना में अब तक कोरोना से 1414 लोग संक्रमित हुए हैं। राज्य में जहां कोरोना से 34 लोगों की जान गई है , वहीं 950 लोग अब तक ठीक हुए हैं।दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश में 2205 और कर्नाटक में 987 लोग संक्रमित हैं तथा इन राज्यों में इससे मरने वालों की संख्या क्रमश: 48 और 35 हो गयी है।

वहीं केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 983 हो गई है और 11 लोगों की मृत्यु हुई है। पंजाब में 32, हरियाणा में 11,, बिहार में सात, केरल में चार, झारखंड, चंडीगढ़ और ओडिशा में तीन-तीन, हिमाचल प्रदेश और असम में दो-दो तथा मेघालय, पुड्डचेरी और उत्तराखंड में एक-एक व्यक्ति की इस महामारी से मौत हुई है

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lockdown me mansik tanav:लॉकडाउन में बढ़ रहा है मानसिक तनाव तो अपनाएं ये टिप्स

लॉकडाउन, इन दिनों हर भारतीय की जुबान पर यह शब्द पूरी तरह चढ़कर बैठ गया है। उठते—बैठते—सोते हर वक्त यही शब्द उनके आगे—पीछे घूमता रहता है। इसके बारे में सोच—सोचकर लोगों की मानसिक दिक्कतें भी बढ़ रही हैं।
लोगों के लिए पूरा माहौल बदल गया है। स्कूल, ऑफिस, बिजेनस बंद हो गए, बाहर नहीं जाना है। इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ना स्वाभाविक है। लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमित होने का डर, नौकरी और कारोबार लेकर अनिश्चितता और लॉकडाउन के कारण आया अकेलापन सबसे अधिक परेशान कर रहा है।

 

घबराहट होती है, बार-बार सिरदर्द  भी

इन स्थितियों का असर ये होता है कि स्ट्रेस बढ़ने लगता है। सामान्य स्ट्रेस तो अच्छा होता है इससे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलता है लेकिन ज़्यादा स्ट्रेस, डिस्ट्रेस बन जाता है। जब आगे कोई रास्ता नहीं दिखता। घबराहट होती है, ऊर्जाहीन महसूस होता है। फ़िलहाल महामारी को लेकर इतनी अनिश्चितता और उलझन है कि कब तक सब ठीक होगा, पता नहीं। ऐसे में सभी के तनाव में आने का ख़तरा बना हुआ है। इस तनाव का असर शरीर, दिमाग़, भावनाओं और व्यवहार पर पड़ता है। बार-बार सिरदर्द, रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना, थकान, और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव के साथ ही चिंता, ग़ुस्सा, डर, चिड़चिड़ापन, उदासी और उलझन हो सकती है।

ना चीखें चिल्लाएं, ना साधे एकदम चुप्पी

बार-बार बुरे ख़्याल आना। जैसे मेरी नौकरी चली गई तो क्या होगा, परिवार कैसा चलेगा, मुझे कोरोना वायरस हो गया तो क्या करेंगे। सही और ग़लत समझ ना आना, ध्यान नहीं लगा पाने की वजह से लोग शराब, तंबाकू, सिगरेट का सेवन ज़्यादा करने लगते हैं। कोई ज़्यादा टीवी देखने लगता है, कोई चीखने-चिल्लाने ज़्यादा लगता है, तो कोई चुप्पी साध लेता है। ऐसे में ख़ुद को मानसिक रूप से मज़बूत करना ज़रूरी है। ध्यान रखना है कि सबकुछ फिर से ठीक होगा और पूरी दुनिया इस कोशिश में जुटी हुई है। बस धैर्य के साथ इंतज़ार करें। अपने रिश्तों को मज़बूत करें। छोटी-छोटी बातों का बुरा ना मानें। एक-दूसरे से बातें करें और सदस्यों का ख़्याल रखें। निगेटिव बातों पर चर्चा कम करें।

बगीचे में आकर खड़े हों

घर से बाहर तो नहीं निकल सकते लेकिन, छत पर, खिड़की पर, बालकनी या घर के बगीचे में आकर खड़े होकर अच्छा महसूस कर सकते हैं। अपनी दिनचर्या को बनाए रखें। हमेशा की तरह समय पर सोना, जागना, खाना-पीना और व्यायाम करें। अगर डर, उदासी है तो अपने अंदर छुपाएं नहीं बल्कि परिजनों या दोस्तों के साथ शेयर करें। जिस बात का बुरा लगता है, उसे पहचानें और ज़ाहिर करें, लेकिन वो ग़ुस्सा कहीं और ना निकालें। लॉकडाउन के दौरान उन लोगों की समस्या भी बढ़ गई है जो पहले से ही किसी मानसिक रोग से जूझ रहे हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ साइकोलॉजिकल हेल्पलाइन में पहले दिन 1000 फ़ोन और दूसरे दिन 3000 फ़ोन आए।
लोगों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ गई हैं। जिन्हें पहले से ही तनाव, निराशा, हताशा जैसी दिक्कते थीं उनमें इजाफ़ा हो गया है।  स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर वीडियो के ज़रिए बताया गया कि तनाव से बचने के लिए स्टूडेंट्स और माता-पिता क्या करें।

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भारत की छह आईआईटी ने किया कमाल, थम जाएगा कोरोना का नकारात्मक धमाल

भारत पर जब भी कोई मुसीबत आती तो देश के प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) हमेशा अलर्ट मोड में काम शुरू कर देते हैं। कोविड 19 (COVID-19) महामारी की आशंका से जूझते भारत में सम्भावित रोगियों को वेंटिलेटर की बड़ी संख्या में आवश्यकता होगी और देश के आईआईटी इन्हें बनाने की तकनीक ईजाद करने में जुट गए हैं। इसके अलावा वे सस्ती जांच किट और मशीनें भी बना रहे हैं। IIT गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने पॉलीमरेस चेन रिएक्शन (PCR) मशीन बनाई है। इसकी मदद से 12 घंटों में 1,000 सैंपल चेक किए जा सकते हैं। IIT ने अभी तक दो ऐसी मशीनें गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में भेज दी है और बाकी पर काम जारी है। यहीं के छात्रों ने ऑटोमेटेड स्प्रेयर के साथ एक ड्रोन तैयार किया है, जो ऊंची इमारतों, पार्क और सड़क आदि को सैनिटाइज करने के काम आ सकता है।

IIT गुवाहाटी कोरोना वायरस की वैक्सीन पर काम कर भी रहा है। IIT की तरफ से आधिकारिक बयान में कहा गया है कि फैकल्टी मेंबर बायो टेक्नोलॉजी टूल का इस्तेमाल करते COVID-19 के इलाज के लिए वैक्सीन तैयार कर रहे हैं। यहां फेस शील्ड का प्रोटोटाइप तैयार किया गया है। इसे स्वास्थ्यकर्मी मुंह पर पहनते हैं। 3D प्रिंटर की मदद से तैयार इस फेस शील्ड को इस्तेमाल करना आसान है।

IIT मुंबई ने कोरोंटाइन नाम से एक मोबाइल ऐप बनाई है, जो संक्रमित व्यक्ति को ट्रैक सकती है। यह ऐप समय-समय पर GPS कॉर्डेिनेट्स भेजती रहती है, जिससे ट्रेसिंग आसान हो जाती है। दिल्ली IIT छात्रों ने टेस्टिंग किट तैयार की है, जिससे कोरोना वायरस के टेस्ट के दौरान आने वाली लागत को कम किया जा सकता है। फिलहाल इसका नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) पुणे में क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। इसके अलावा यहां इंफेक्शन-प्रूफ फैब्रिक तैयार किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल अस्पतालों में इंफेक्शन को फैलने से बचाने के लिए हो सकता है।
IIT दिल्ली के केमिस्ट्री विभाग ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुरूप हैंड सैनिटाइजर तैयार किया है। यह कोरोना वायरस को मारने में पूरी तरह कारगर है। फिलहाल इसे कैंपस के अंदर इस्तेमाल किया जा रहा है। दिल्ली की तरह IIT हैदराबाद के छात्रों ने भी हैंड सैनिटाइजर तैयार किया है। इसे भी WHO के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है।

IIT कानपुर में नोक्का रोबोटिक्स नाम की कंपनी है। इस कंपनी ने वेंटिलेटर प्रोटोटाइप तैयार किया जिसकी फिलहाल टेस्टिंग चल रही है। यह बाजार में पहले से मौजूद वेंटिलेटर की तुलना में बेहद सस्ता है। वहीं IIT हैदराबाद ने वेंटिलेटर का विकल्प तैयार किया है। इस बैग वॉल्व मास्क को इमरजेंसी में मरीज को सांस देने के लिए किया जा सकता है। इसी तरह IIT खड़गपुर ने हैंड सैनिटाइजर तैयार किए हैं।

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कोरोना से बचने के चक्कर में मोल ना लें दूसरी बीमारियां, फल-सब्जियों को केमिकल से नहीं धोएं

Do not chemically wash fruits and vegetables: कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए देश भर में खट्टे फलों का उपयोग बढ़ गया है। इसके अलावा हरी सब्जियां भी खूब खाई जा रही हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि इस दौरान भी कोरोना वायरस का संक्रमण आपके घर घुसने में कामयाब हो सकता है। बिल्कुल, घरों में बाजार से अथवा हॉकरों से खरीदे जा रहे फल और सब्जियां वायरस को आपके घर लेकर आ सकते हैं, इसलिए इन्हें खरीदने के बाद इस्तेमाल करने से पहले इन टिप्स से इन्हें संक्रमण रहित जरूर करें ताकि इस भयानक बीमारी से आपका बचाव हो सके।

कई लोग वायरस की वजह से पनपे संदेह से राहत पाने के चक्कर में फल और सब्जियों को विभिन्न केमिकल्स जैसे क्लोरीन, डिसइंफेक्टेंट, एल्कोहल आदि से धो देते हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोग तो फल और सब्जियों को धोने के लिए साबुन या डिटर्जेंट पाउडर का इस्तेमाल करने लगे हैं। लेकिन ऐसा करना गलत है, क्योंकि ऐसा करने से ये स्वास्थ्यवर्धक चीजें आपके स्वास्थ के लिए घातक हो सकती हैं और गंभीर बीमारी का रूप ले सकती हैं। जब भी बाहर से फल और सब्जियां लाएं तो घर पहुंचकर सबसे पहले किसी बड़े बर्तन में पानी भरकर उनको एक-एक करके धोएं। हो सके तो गलव्स पहनकर धोएं। इसके अलावा, एक टब में आवश्यकतानुसार पानी और एक चम्मच नमक डालकर उसमें फल और सब्जियों को डुबोकर अच्छी तरह साफ कर सकते हैं। साथ ही जब भी फल और सब्जियों का इस्तेमाल करने जा रहे हों, तब भी उनको पानी से अच्छे से साफ कर लें। Do not chemically wash fruits and vegetables:

रीयूजेबल कैरीबैग पर किसी भी तरह के संक्रमण का असर हो सकता है इसलिए जब भी जरूरी सामान की खरीदारी करने जाएं तो घर का कोई भी थैला न लेकर जाएं। इसकी जगह खरीदारी के लिए किसी ऐसे प्लास्टिक बैग का चुनाव करें, जिसे घर आकर फेंक सकें या दुकान से मिलने वाली थैली में ही सामान लें और घर लाकर प्लास्टिक की थैली को फेंक दें। Do not chemically wash fruits and vegetables:

अगर बाहर से दूध, फल और सब्जियां लाएं तो उन्हें पानी से अच्छे से धो लें। बाहर से लाए गए किसी भी तरह के सामान के पैकेट को दांतो से फाड़ने की बजाए कैंची की मदद से खोलें।फ्रिज में हमेशा पके खाद्य पदार्थ को अलग और कच्चे खाद्य पदार्थ को अलग रखें। छिलके वाली चीजों का सेवन ज्यादा करें और सब अच्छे से पकाकर ही खाएं। Do not chemically wash fruits and vegetables:

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चावल और कटहल से बने पाज्जाकांजी के सामने नहीं टिक सका कोरोना वायरस

चावल और कटहल के मिश्रण से तैयार डिश के सहारे 93 साल के बुजुर्ग ने समूचे संसार को भयभीत कर देने वाले कोरोना वायरस को धूल चटा दी है। इस डिश का नाम पाज्जाकांजी है और केरल में इसे बड़े चाव से खाया जाता है। कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए केरल के पथानामथिट्टा निवासी 93 वर्षीय बुजुर्ग थॉमस अब्राहम ने पाज्जाकांजी खाकर न सिर्फ अपनी बल्कि अपनी 88 साल की पत्नी की जान भी बचा ली है। वे इलाज के दौरान इस डिश को खाते रहे और आखिरकार कोरोना वायरस उनके शरीर को छोड़ने को बाध्य हो गया।

ठीक होकर घर लौटे बुजुर्ग

केरल के पथानामथिट्टा निवासी 93 वर्षीय बुजुर्ग थॉमस अब्राहम के साथ उनकी पत्नी मरियम्मा (88) को उनके बेटे, बहू और पोते से कोरोना का संक्रमण मिला था। तीनों गत माह ही इटली से लौटे थे। वे तीनों भी गंभीर वायरस की चपेट से बाहर आ चुके हैं और अब अपने माता-पिता के सकुशल घर से आने से बहुत खुश हैं। कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों पर होता है। बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण इससे संक्रमित होने पर उनकी मौत होने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है, लेकिन थॉमस ने इस खतरे को टाल दिया।

संयमित जीवन ने बचाया

थॉमस इब्राहिम के घर लौटने के बाद उनके पोते रिजो मोन्सी ने बताया कि उनके दादा के कोरोना वायरस को पछाड़ने के पीछे उनकी स्वस्थ जीवन शैली का बड़ा हाथ है। वह बड़ा संयमित जीवन जीते हैं। वे किसान है और शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं। वह न तो कोई नशा करते हैं और ना ही उन्हें धूम्रपान का शौक है। वह बिना जिम जाए भी सुडौल शरीर रखते हैं। दादा को केरल का सबसे बेहतरीन डिश पाज्जाकांजी बहुत पसंद है। इसे चावल के घोल और कटहल के मिश्रण से तैयार किया जाता है। उपचार के दौरान उनके दादा ने आइसोलेशन वार्ड में इसी का नियमित रूप से सेवन किया था।

दादी को भी यही खिलाया

उन्होंने दादी को भी यही खाना खिलाया था। इससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। उपचार करने वाले चिकित्सक भी उनकी संयमित जीवन शैली से चकित थे। इटली में रेडियोलॉजी क्षेत्र में काम करने वाले रिजो मोन्सी ने बताया कि उनका अगस्त में भारत आने का कार्यक्रम था, लेकिन उनके दादा ने जिद करके उन्हें मार्च में ही भारत बुला लिया। यदि वह नहीं आते तो शायद अब उनकी जिंदगी भी खतरे में होती। उन्होंने कहा कि भारत की चिकित्सा व्यवस्था बेहतरीन है और चिकित्सकों ने बेहतरीन प्रयास किए थे। उन्होंने कहा कि उनके दादा इटली की जगह भारत में ज्यादा सुरक्षित हैं। रिजो ने बताया कि उनके परिवार में कुल 26 सदस्य हैं। उनके इटली से आने के बाद उनके दादा-दादी, माता-पिता, उनकी बहन, बहनोई और उनके ताऊजी कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे, लेकिन उपचार के बाद सभी ठीक हो गए हैं।

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इंसानी शरीर के चौकीदार की रक्षा करता है शहतूत, शरीर में कोरोना के प्रवेश पर लगाता है रोक

कोरोना वायरस के भय से घरों में बंद लोगों के लिए राहत की खबर। देश के जाने—माने यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डा. सैयद अहमद का दावा है कि इंसानी शरीर के गले में प्रकृति ने जिन टांसिल्स को स्थान दिया है, वे असल में शरीर के सबसे मजबूत चौकीदार हैं और कोरोना जैसे खतरनाक वायरस का हमला होते ही बचाव के लिए संकेत भेजना शुरू कर देते हैं लेकिन अधिकांश लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। इसी गलती के चलते वायरस को फेफडों तक पहुंचने का अवसर मिल जाता है। टांसिल्स हर उस बैक्टीरिया, वायरस को रोकने की कोशिश करते हैं जो शरीर में प्रवेश की कोशिश कर रहा होता है। इस प्रक्रिया के चलते ही गले में खराश पैदा होती है।

डा. सैयद अहमद का कहना है कि प्रकृति ने शरीर को निरोग बनाए रखने के लिए पृथ्वी पर वनस्पति के रूप में तमाम औषधियां पैदा कर रखी हैं और यूनानी, आयुर्वेद जैसी चिकित्सा पद्धतियां उन्हीं वनस्पतियों का औषधि के रूप में इस्तेमाल कर रोग से बचाव के साथ ही उसे जड़ से नष्ट करने में भरोसा रखती हैं।

गले का रक्षक है शहतूत

डा. सैयद अहमद का कहना है कि आमतौर पर भारत में लगभग सभी इलाकों में पाया जाने वाला शहतूत गले का सबसे बड़ा रक्षक है। उसके पत्तों को उबालने के बाद बचे पानी के गरारे गले के टांसिल्स को न सिर्फ राहत देते हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति के साथ मिलकर घातक से घातक वायरस को गले से बाहर निकाल फैंकते हैं। शहतूत फल का उपयोग भी अनेक तरह के वायरस और बैक्टीरिया को मार भगाता है।

यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ के अनुसार अभी तक के अध्ययन में यह साफ हो चुका है कि कोरोना वायरस मूलत: अनेक तरह के फ्लू के वायरस का ही एक घातक रूप है। चूंकि दुनिया इन दिनों कोरोना के खतरे से जूझ रही है, ऐसी स्थिति में जैसे ही किसी को गले में खराश महसूस हो, उसे तत्काल शहतूत के पत्तों के गरारे शुरू कर देने चाहिए। इसके अलावा नमक के गरारे भी गले की रक्षा करते हैं।

तीखी है लेकिन गले को रखती है स्वस्थ

यूनानी विशेषज्ञ का कहना है कि कोरोना वायरस के खतरे से बचने के लिए मौसमी फल—सब्जियों का सेवन बढ़ा दिया जाना चाहिए। ड्राई फ्रूट के साथ ही तुलसी जैसी पारम्परिक औषधि भी शरीर को रोगों से बचाने में सहायक है। काली मिर्च भी ऐसा ही एक सूखा फल है जो स्वाद में तीखी होने के बावजूद गले को स्वस्थ रखती है। प्राकृतिक इलाज में भरोसा रखने वाले गायक आज भी काली मिर्च और मिश्री से गले को बैठने से बचाते हैं।

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कोरौना गांव निवासियों की बढ़ी मुसीबत, नाम सुनते ही भाग खड़े होते हैं लोग

भारत में अजीबोगरीब नाम वाले गांवों की भरमार है और जब कभी उससे मिलते—जुलते नाम वाले कुछ वाकये हो जाते हैं तो उन गांव वालों की परेशानी बढ़ जाती है। इन दिनों ऐसा ही उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के कोरौना गांव के निवासियों के साथ हो रहा है। Increased trouble residents of Korauna

‘कोरौना’ नामक यह गांव उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित है, जिसका नाम गांव वालों के लिए आफत बन चुका है। गांव वासियों के अनुसार जब से कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ा है, उनके गांव में बाहरी व्यक्ति आने से डरते हैं। इतना हीं नहीं, जब कोई गांववाला गांव का नाम बताता है तो वे उससे दूरी बना लेते हैं। लोग यह नहीं समझते हैं कि कोरौना एक गांव है कोई कोरोना से संक्रमित इंसान नहीं। Increased trouble residents of Korauna

हैरान रह जाती है पुलिस

इस गांव के नाम का इतना खौफ है कि लोग टेलीफोन पर भी बात नहीं करते हैं। गांव के लोग जब सड़क पर निकलते हैं तो पुलिस उनसे पूछती है कि कहां जा रहे हो और वह बताते हैं कि हम कोरौना जा रहे हैं तो पुलिस भी हैरान-परेशान हो जाती है।

Increased trouble residents of Korauna इसके अलावा केरल के कोच्चि के एक गांव में स्थित कोरोना टेक्सटाइल नामक दुकान भी भारी चर्चा में है। जब से कोरोना महामारी फैली है तब से यह दुकान लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। लोग अब इस दुकान के सामने दूर से ही सेल्फी ले रहे हैं। Increased trouble residents of Korauna

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increase immunity corona will not near: डरें नहीं, रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाएं, पास तक नहीं फटकेगा कोरोना

increase immunity corona will not near: कोरोना के भय से थर—थर कांप रही दुनिया को यूनानी विशेषज्ञों की सलाह है कि उसे डरने की अपेक्षा अपनी रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। रोग प्रतिरोधक शक्ति को रात में जल्दी सो जाने और सुबह जल्दी उठ कर ताजा और सादा नाश्ता करके मजबूती दी जा सकती है। इसके अलावा ड्राईफ्रूट का सेवन बढ़ा दें तो कोरोना का इन्फेक्शन पास तक नहीं फटकेगा। अलबत्ता इंसानों को एक—दूसरे से दूरी कायम रखने के साथ ही हाथ धोने पर विशेष ध्यान भी देना होगा ताकि कोरोना वायरस हाथों के जरिए शरीर में प्रवेश नहीं कर पाए।

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में यूनानी विंग के प्रभारी डा. सैयद अहमद का कहना है कि कोरोना वायरस का अभी तक किसी भी पैथी में कोई इलाज नहीं है, लेकिन यह वायरस मजबूत रोग प्रतिरोधक शक्ति वाले शरीरों का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। डा. सैयद का कहना है कि इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि मजबूत रोग प्रतिरोधक शक्ति वाले जबरन भीड़भाड़ में जाकर घुस जाएं। उन्हें भी सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी की पालना करते हुए घरों में रहना चाहिए। increase immunity corona will not near:

फ्रोजन खाद्य से बचना जरूरी

यूनानी पैथी के विशेषज्ञ डा. सैयद अहमद का कहना है कि सुबह उठकर ताजा पका हुआ नाश्ता कर लेने से कुछ ही दिनों में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ना शुरू हो जाएगी। इसके लिए सुबह नाश्ते में दूध, हलवा बादाम इत्यादि खाया जा सकता है। अगर किसी को ये सब खाद्य उपलब्ध नहीं हैं तो वह मूंगफली, चना इत्यादि खाकर भी रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ा सकता है। अलबत्ता फ्रोजन खाद्य से बचना बेहद जरूरी है। जहां तक चिकन मटन खाने का सवाल है तो वह भी ताजा लाकर पकाया जाना चाहिए। फ्रिज में रखा हुआ और प्रोसेस फूड इस वक्त में त्याग देना ही बेहतर होगा। increase immunity corona will not near:

 

सेनेटाइजर से ज्यादा फायदा देगा हाथ धोना

डा. सैयद अहमद का कहना है कि सेनेटाइजर का उपयोग किया जा सकता है लेकिन सबसे अधिक फायदा हाथ धोने से मिलेगा। खाना खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोएं। जब भी कोई काम करें, साबुन से हाथ धो लें। जहां तक मास्क का सवाल है तो सामान्य फ्लू पीड़ितों के साथ ही कोरोना के लक्षण वाले लोगों के लिए अनिवार्य है। अन्य लोग भी लगा सकते हैं लेकिन मास्क से ज्यादा फायदा हाथ धोने से मिलेगा। increase immunity corona will not near:

बेहतरीन सेनेटाइजर है नींबू—पानी

उन्होंने बताया कि नीबू पानी ​बेहतरीन सेनेटाइजर है। चने के बेसन से भी हाथ धोए जा सकते हैं। मुल्तानी मिट्टी भी हाथ धोने के काम ली जा सकती है। लेकिन सबसे ​बढ़िया है कि साबुन से हाथ धोए जाएं। इसके लिए नीम बेस साबुन मिल जाए तो सोने में सुहागा हो सकता है। increase immunity corona will not near:

इन्फेक्शन दिखे तो शहतूत पत्ते के गरारे करें

डा. सैयद अहमद का कहना है कि फ्लू का हमला होते ही गले में खराश के साथ ही निगलने में दिक्कत शुरू हो जाती है। ऐसी स्थिति में शहतूत पत्ते के पानी के गरारे तत्काल शुरू कर दिए जाएं। नमक मिले पानी के गरारे भी फायदेमंद रहेंगे। इसके साथ ही चिकित्सक की मदद भी तत्काल ली जाए। ऐसी स्थिति आते ही शबर्ते उन्नाव को गुनगने पानी से लें। बादाम, अखरोट, चिलगोजा, मूंगफली खाएं। मूंगफली खाने के बाद आधा घंटे तक पानी नहीं पीएं। increase immunity corona will not near: