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जंगल छोड़कर गांव में घूमने आए बाघ के हमले में पांच घायल

कभी इंसानी दखल से परेशान वन्यजीव लाकडाउन का पूरा आनन्द उठा रहे हैं। वे अपने घर (जंगल) से न सिर्फ गांव—कस्बों में घूमने आ रहे हैं बल्कि लोगों पर हमले भी कर रहे हैं। ऐसे ही एक गांव में घूमने आए बाघ ने हमला करके पांच लोगों को घायल कर दिया। ये घटना उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के पास जरी गांव में घटी है। वहां बाघ ने पांच लोगों को घायल कर दिया। उसने वन विभाग की टीम पर भी हमले का प्रयास किया, जो कि उसे वापस जंगल में ले जाने के लिए आई थी। इस हमले में दो कर्मी घायल हो गए।

बाघ ने धावा बोल दिया

पीडि़तों के अनुसार, यह घटना तब हुई जब जरी गांव के दो भाइयों गुरप्रीत सिंह और हरदीप सिंह पर बाघ ने हमला किया। हमले के वक्त वे दोनों अपनी मोटरसाइकिल से अपने खेत पर जा रहे थे और रास्ते में उन पर बाघ ने धावा बोल दिया। बाघ उनके काफी करीब था, हालांकि दोनों मोटरसाइकल की गति तेज कर भागने में सफल रहे। बाघ ने कुछ ही मिनटों के बाद एक साइकिल सवार राम बहादुर पर हमला कर दिया और उसे घायल कर दिया। हालांकि बाइक इंजन और दो भाइयों द्वारा किए गए शोर के कारण बाघ ने उसे छोड़ दिया।

लाठी से खदेड़ा बाघ

इसके बाद 10 मिनट के अंदर ही बाघ ने दो यात्रियों उजागर सिंह और लालपुर गांव के उनके सहयोगी लालता प्रसाद पर फिर से हमला कर दिया। हमले में उनके सिर और कंधे पर गंभीर चोट आई। हालांकि उन्होंने चीखना शुरू कर दिया और जिस लाठी को वे ले जा रहे थे उसी से बाघ को खदेडऩा शुरू कर दिया, जिससे बाघ उन्हें छोड़कर पास की झाडिय़ों में गायब हो गया। पीटीआर के उप निदेशक नवीन खंडेलवाल ने कहा कि बाघ को वन कर्मचारी जब वापस जंगल में भगाने की कोशिश कर रहे थे तब उसने कर्मचारियों पर भी हमला करने कोशिश की। खंडेलवाल ने कहा, ऑपरेशन को शुक्रवार दोपहर को रोक दिया गया था और जमीनी परिस्थितियों के आधार पर फिर से शुरू किया जाएगा, क्योंकि हम बाघ को बेहोश नहीं करना चाहते हैं। जब तक बाघ जंगल में वापस नहीं आ जाता है, तब तक के लिए ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की टीमें बाघ की गतिविधियों पर निगरानी रखेगी।