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Modi बंगाल , ओडिशा के दौरे पर रवाना

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भीषण चक्रवाती तूफान ‘अम्फान’ के कारण उत्पन्न हुई स्थिति का जायजा लेने के लिए शुक्रवार सुबह पश्चिम बंगाल और ओडिशा के दौरे पर रवाना हो गये।मोदी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ राहत एवं पुनर्वास के उपायों पर चर्चा करेंगे।

वह पूर्वाह्न लगभग 10:45 बजे कोलकाता पहुंचेंगे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ राज्य का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। दोनों नेता बशीरहाट में अपराह्न में एक प्रशासनिक बैठक को भी संबोधित करेंगे जिसके बाद श्री मोदी भुवनेश्वर के लिए रवाना हो जाएंगे।

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अम्फान से प्रभावित लोगों की मदद में कोई कसर नहीं छोड़ी जायेगी- माेदी

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि समूचा राष्ट्र चक्रवाती तूफान अम्फान से प्रभावित पश्चिम बंगाल और ओड़िशा के साथ एकजुट है और उन्हें जरूरी मदद पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जायेगी।
मोदी ने आज ट्विट कर कहा ,“ पश्चिम बंगाल में तूफान के कारण हुई तबाही का दृश्य देखा है।

इस चुनौतीपूर्ण समय में समूचा राष्ट्र पश्चिम बंगाल के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है। राज्य के लोगों के कल्याण और भलायी की कामना करता हूं। प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य करने के भरसक प्रयास किये जा रहे हैं। ”उन्होंने कहा , “ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं। उच्च अधिकारी भी स्थिति पर नजर बनाये हुए हैं।

वे पश्चिम बंगाल सरकार के साथ तालमेल कर रहे हैं। प्रभावित लोगों की मदद के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जायेगी।”एक अन्य टि्वट में उन्होंने कहा , “ मेरी संवेदना ओड़िशा के लोगों के साथ हैं जो चक्रवाती तूफान के प्रभावों से साहस के साथ जूझ रहे हैं। प्रभावित लोगों की मदद के लिए प्रशासन मौके पर है और उन्हें सभी संभव मदद दी जायेगी। मैं प्रार्थना करता हूं कि स्थिति जल्द से जल्द सामान्य बनें। ”

इससे पहले कैबिनेट सचिव ने भी राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति की बैठक में दोनों राज्यों में अम्फान के बाद उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की थी।केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर स्थिति का जायजा लिया था और उन्हें केन्द्र की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया था।

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चक्रवाती तूफान ‘अम्फान’ का कहर, मृतकों की संख्या 20 हुई

कोलकाता/नयी दिल्ली। पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में चक्रवाती तूफान ‘अम्फान’ की चपेट में आकर और आठ लोगों की मौत के साथ प्राकृतिक आपदा के शिकार लोगों की संख्या 20 हो गयी है।सूत्रों के मुताबिक गुरुवार को कोलकाता में पांच और अन्य जिलाें में तीन लोगों के मरने की रिपोर्टें मिली है।

करीब 165 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवाओं और घनघोर बारिश के साथ चक्रवाती तूफान बुधवार की शाम सुंदरवन डेल्टा क्षेत्र और दक्षिणी बंगाल के छह जिलों में प्रवेश कर गया।पश्चिम बंगाल के साथ ओडिशा में व्यापक तौर पर बचाव के इंतजाम किये गये हैं , हालांकि ओडिशा में किसी जनहानि की रिपोर्ट नहीं है।

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भीषण चक्रवाती तूफान अम्फान के तट से टकराने का सिलसिला शुरू

नयी दिल्ली। भीषण चक्रवाती तूफान अम्फान बंगाल के तट पर पहुंच चुका है और इसकी वजह से पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कई क्षेत्रों में जोरदार बारिश हो रही है।मौसम विभाग के महानिदेेशक मृत्युंजय मोहपात्रा ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि यह तूफान पश्चिम बंगाल के तट से टकरा गया है। तट से टकराने की यह की प्रक्रिया अपराह्न 2.30 बजे शुरू हुई थी।यहां अनेक क्षेत्रों में पेड़ उखड़ कर गिर गये हैं।

कल रात से इसका असर ओडिशा के उपर हो गया था और इसकी वजह से ओडिशा के तटीय जिलों मे काफी तेज बारिश हो रही थी और हवाओं की रफ्तार भी सैंकड़ो किलाेमीटर प्रति घंटा से अधिक दर्ज की गई।
ओड़िशा और बंगाल के अनेक हिस्सों में जोरदार बारिश हो रही हैं। भद्रक और बालासोर में तेज हवाएं चल रही हैं।

राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) के महानिदेशक के मुताबिक एस एन प्रधान ने इस चक्रवाती तूफान को लेकर की गई तैयारियों की जानकारी देते हुए कहा कि ओड़िशा में 20 और पश्चिम बंगाल में एनडीआरएफ की 20 टीमें तैनात कर दी गई हैं और केन्द्रीय मुख्यालय तथा ओडिशा और पश्चिम बंगाल में स्थानीय मुख्यालय के बीच लगातार इसे लेकर संपर्क जारी है।

ये सभी टीमें वायरलेस और सेटेलाइट संचार प्रणााली से युक्त हैं। इनके अलावा दो टीमों को तैयार रखा गया हैं।उन्होंने बताया कि इससे पहले आए तूफान फैनी से सबक लेते हुए सभी टीमों के पास पेड़ और लोहे के खंबे काटने वाले उपकरण हैं और तूफान के गुरजने के बाद इस तरह की स्थितियों से निपटा जा सके।

कोरोना संक्रमण को देखते हुए इन सभी टीमों को पीपीई और आवश्यक उपकरण दिए गए हैं। इन टीमों ने संबद्व जिलों और स्थानीय प्रशासन से संपर्क बना लिया हैं और ये सभी मिलकर काम कर रहे हैं। टीमें लोगों को लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को कोविड के दौरान सावधानी बरतने और तूफान के दौरान किए जाने वाले एहतियाती उपायों के बारे में पहले ही जागरुक कर चुकी है।

उन्होेंने बताया कि पश्चिम बंगाल से पांच लाख से अधिक और ओडिशा से डेढ़ लाख से अधिक लोगों को तूफान की आशंका के चलते पहले ही सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया था। एनडीआरएफ की टीमें दीघा, पूर्वी मेदिनीपुर,काकद्वीप, रामनगर में लोंगों को सावधानी बरतने के लिए समझा रही हैं।

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भीषण सड़क हादसा,24 प्रवासी मजदूरों की मौत

औरैया । उत्तर प्रदेश में औरैया जिले के काेतवाली सदर क्षेत्र में शनिवार अहले सुबह दो वाहनों की भिड़ंत में कम से कम 24 प्रवासी श्रमिकों की मृत्यु हो गयी जबकि 35 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गये।

जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि तड़के ढाई से तीन बजे के बीच यह हादसा चिरूहली- मिहौली गांव के बीच हुआ जब एक चूना लदा ट्राला सड़क किनारे खड़े एक मिनी ट्रक से टकरा कर पलट गया जिससे उसमें सवार श्रमिक चूने की बोरियों के नीचे दब गये।

इस हादसे में 24 की मौके पर ही मृत्यु हो गयी जबकि गंभीर रूप से घायल 15 श्रमिकों को सैफई मेडिकल यूनीवर्सिटी अस्पताल रेफर किया गया है वहीं 20 का इलाज औरैया जिला अस्पताल में किया जा रहा है। मृतकों और घायलों में ज्यादातर की पहचान कर ली गयी है। हताहतों में कई श्रमिक परिवार के साथ यात्रा कर रहे थे। पीड़ित के परिजनों को सूचना भिजवाई जा रही है।

सूत्रों ने बताया कि हताहतों में शामिल ज्यादातर श्रमिक बिहार,झारखंड और पश्चिम बंगाल के निवासी है जो दिल्ली और राजस्थान के भरतपुर से वापस अपने घरों को लौट रहे थे। जिलाधिकारी अभिषेक सिंह और पुलिस अधीक्षक सुनीति ने मौके पर पहुंच कर राहत और बचाव कार्य सम्पन्न कराया। कई क्रेनों की सहायता से ट्राला और डीसीएम में फंसे मजदूरों को निकाल कर एम्बुलेंस से जिला अस्पताल ले जाया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क दुर्घटना में हताहत प्रवासी श्रमिकों की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त करते हुये पीड़ितों को हर संभव राहत प्रदान करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने मंडलायुक्त कानपुर तथा आईजी कानपुर को तत्काल मौके पर पहुँच कर राहत कार्य अपनी देख रेख में संपन्न कराने तथा दुर्घटना के कारणों की जांच कर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

हादसे में मारे गये लोगों में राहुल निवासी गोपालपुर थाना पिंडा जोरा झारखंड, नंद किशोर नंद निवासी पिंडा जोरा, केदारी यादव निवासी बाराचट्टी बिहार,अर्जुन चौहान,राजा गोस्वामी,मिलन निवासी पश्चिम बंगाल,गोवर्धन , अजीत निवासी ऊपर बन्नी पुरुलिया पश्चिम बंगाल,चंदन राजभर, नकुल महतो,सत्येंद्र निवासी बिहार,गणेश निवासी पुरुलिया पश्चिम बंगाल, उत्तम,सुधीर निवासी गोपालपुर,कीर्ति खिलाड़ी,डॉ मेहंती,मुकेश,सोमनाथ गोस्वामी के तौर पर की गयी है जबकि अन्य नौ की शिनाख्त के प्रयास किये जा रहे हैं।

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अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में यम का पहरा, मछली पकड़ने गए तो मरना तय

मध्य अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, कर्नाटक और साथ ही दक्षिण कोंकण और गोवा, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में तथा उत्तर पूर्व तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल के पर्वतीय इलाके, सिक्किम और ओडिशा के कुछ हिस्सो में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए स्थिति अनुकूल हैं। पश्चिम बंगाल के पर्वतीय हिस्से, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, तटीय आंध्र प्रदेश, गुजरात, और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अलग-अलग स्थानों पर तेज से अति तेज वर्षा होने के आसार हैं।


उत्तर-पूर्व के साथ-साथ मध्य अरब सागर और गुजरात तट से सटे इलाकों में समुद्र की स्थिति खराब रहने का अनुमान है इसलिए अगले 24 घंटे तक इन इलाके में मछुआरों को नहीं जाने की सलाह दी गयी है। पूर्वोत्तर के साथ-साथ मध्य अरब सागर से सटे हुए क्षेत्र में 50-60 किमी प्रति घंटे की तेज गति से हवा चल सकती है जो 70 किमी प्रति घंटे की गति तक पहुंच सकती है।


गुजरात समुद्री तट और आस पास के इलाके में 17 जून की शाम से 40-50 किमी प्रति घंटे की गति से तेज हवा चल सकती है। दिन का तापमान कोंकण, गोवा, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में सामान्य से ऊपर रहा। ओडिशा, मध्य प्रदेश, उत्तर आंतरिक कर्नाटक और मराठवाड़ा के शेष हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहा।


छत्तीसगढ़, रायलसीमा के कुछ हिस्सों में तथा पश्चिम बंगाल में गंगा के तटवर्ती इलाके, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ, तटीय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के शेष हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से अत्यधिक ऊपर रहा। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, ओडिशा और राजस्थान के शेष हिस्सों में तापमान सामान्य से नीचे रहा जबकि हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और राजस्थान के कुछ हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा।

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घोड़े जैसी ताकत पाना चाहते हैं तो एक माह तक मुझे खा लीजिए क्योंकि मैं कड़कनाथ हूं

यौवन शक्ति को घोड़े के बराबर करना चाहते हैं तो मुझे एक माह तक खा लीजिए। अगर आपने सही तरीके से खा लिया तो आप न सिर्फ घोड़े को दौड़ में हरा सकते हैं बल्कि उसके जैसा बलिष्ठ शरीर भी पा सकते हैं।

असल में कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, रक्तचाप और टीबी जैसी बीमारियों की रोकथाम में मददगार ‘कड़कनाथ’ एक समय अस्तित्व का संकट झेल रहा था लेकिन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और अन्य संस्थानों की मदद से अब यह देश के कोने कोने में ‘बांग’ दे रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता से भरपूर कड़कनाथ प्रजाति का मुर्गा मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात के कुछ आदिवासी क्षेत्रों में पाया जाता है। यौवन शक्ति बढ़ाने में कारगर होने के कारण लोगों में इसकी भारी मांग से पिछले वर्षों के दौरान इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया जिससे यह प्रजाति विलुप्त होने के कागार पर पहुंच गयी थी। समय रहते भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के हस्तक्षेप से अब यह न केवल तीन राज्यों बल्कि पूरे देश में किसानों की आय बढ़ाने में बहुत मददगार साबित हो रहा है।
उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) ए.के. सिंह ने बताया कि सिर से नख तक बिल्कुल काले रंग का देशी कड़कनाथ में जलवायु परिवर्तन के इस दौर में भी अत्यधिक गर्मी और सर्दी सहने की क्षमता है और यह विपरीत परिस्थिति में भी जीवित रहता है। इसका न केवल खून काला होता है बल्कि इसका मांस भी काला है जो बेहद नर्म और स्वादिष्ट होता है। इसके मांस में प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है और हृदय रोग के लिए घातक माने जाने वाले काेलेस्ट्रोल की मात्रा इसमें बहुत कम होती है। इसमें नाम मात्र की वसा है।

डॉ. सिंह ने बताया कि प्रोटीन कोशिका का एक महत्वपूर्ण घटक है जो शरीर के ऊतकों के निर्माण और मरम्मत में मददगार है। एंजाइम, हार्मोन और शरीर के अन्य रसायनों के निर्माण में प्रोटीन का उपयोग होता है। प्रोटीन हड्डियों, मांसपेशियों, त्वचा और रक्त के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे शरीर में हानिकारक चर्बी और काेलेस्ट्रोल की मात्रा कम होती है। उन्होंने बताया कि कड़कनाथ के मांस में पाया जाने वाला स्टीयरिक एसिड खराब काेलेस्ट्रोल को कम करने में मददगार है। इसमें पाया जाने वाला ओलिक एसिड रक्तचाप और काेलेस्ट्रोल कम करने के साथ ही टाइप टू मधुमेह और कैंसर प्रतिरोधक है। इसमें गामा लिनोलेनिक एसिड, अरचिडोनिक एसिड और डोकोसैक्सिनोइक एसिड भी पाया जाता है जो शरीर को कई प्रकार के फायदे पहुंचाता है। डॉ. सिंह ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विज्ञान केन्द्र तथा राज्यों के सहयोग से कड़कनाथ हेचरी की स्थापना की गयी है जहां सालाना 139000 चूजे तैयार हो रहे हैं।
इन चूजों को 20 राज्यों के 117 जिलों में पाला जाता है। इन राज्यों में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर आदि शामिल हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दांतेवाड़ा में सालाना एक लाख चूजे तैयार किये जा रहे हैं। इस राज्य के कांकेड़, बलरामपुर और राजनंदगांव में भी हेचरी की स्थापना की गयी है। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, झाबुआ, धार और ग्वालियर में भी इस प्रकार के केन्द्र हैं।

कड़कनाथ का चूजा छह माह में वयस्क हो जाता है और मुर्गी अंडा देने लगती है। यह मुर्गी साल भर में तीन से चार चरणों में अंडे देती है और यह साल भर में 75 से 90 अंडे दे देती है। इसका एक अंडा स्थानीय स्तर पर 10 रुपये से 50 रुपये में मिलता है जबकि इसका मांस 600 से 1200 रुपये प्रति किलोग्राम बिकता है। किसानों को आम अंडों का मूल्य दो से तीन रुपये और सामान्य मुर्गे का मांस का मूल्य 150 रुपये किलोग्राम मुश्किल से मिलता है।
कड़कनाथ का मूल नाम कालामासी है जिसका अर्थ काले मांस वाला मुर्गा है। इसकी तीन किस्मों में जेट ब्लैक, पेनसिल्ड और गोल्डन कड़कनाथ शामिल हैं। कृषि विस्तार उप महानिदेशक ने बताया कि कड़कनाथ के प्रति लोगों में भारी जागरुकता आयी है जिसके कारण देश के विभिन्न हिस्सों से इसके चूजे की भारी मांग आ रही है। कई स्थानों पर कड़कनाथ के पालन से गरीबों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है और वे व्यावसायिक तौर पर वैज्ञानिक ढंग से इसका पालन कर रहे हैं।

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Entertainment

धर्मात्मा थे इसलिए डाकू बनने से कर दिया था इनकार, फिर उनके सामने झोंक दिए प्राण

बॉलीवुड में डैनी को एक ऐसे बहुआयामी कलाकार के रूप में जाना जाता है जिन्होंने नायक, सह नायक, खलनायक और चरित्र कलाकार के रूप में दर्शकों को अपना दीवाना बनाया है। 

 

पच्चीस फरवरी 1948 को जन्मे डैनी बचपन में सेना में काम करना चाहते थे। उन्होंने पश्चिम बंगाल से सर्वश्रेष्ठ कैडेट का पुरस्कार जीता और गणतंत्र दिवस के मौके पर परेड में भाग भी लिया। उनका बाद में देश के प्रतिष्ठित आर्म फोर्सेज मेडिकल कॉलेज, पुणे में उनका चयन हो गया लेकिन उनका मन चिकित्सक बनने की बजाय अभिनेता बनने की ओर हो गया और उन्होंने पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में अभिनय के प्रशिक्षण के लिये दाखिला ले लिया।
अभिनय का प्रशिक्षण लेने के बाद डैनी ने अपने सिने कैरियर की शुरूआत नेपाली फिल्म ‘सलिनो’ से की जो टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुई। इस बीच उन्होंने नेपाली फिल्मों के लिए पार्श्वगायन भी किया। सत्तर के दशक में अभिनेता बनने का सपना लिये डैनी मुंबई आ गये। अपने वजूद को तलाशते वह लगभग तीन वर्ष तक संघर्ष करते रहें। इस बीच उन्होंने राखी और हथकड़ी, मिलाप, जरूरत, नया नशा, नई दुनिया नये लोग, चालाक और खून-खून जैसी कई बी ग्रेड फिल्मों में काम किया लेकिन ये सभी फिल्में टिकट खिड़की पर असफल साबित हुईं। इस बीच उन्हें गुलजार की सुपरहिट फिल्म ‘मेरे अपने’ में छोटी भूमिका निभाने का अवसर मिला। 

 

वर्ष 1973 में प्रदर्शित फिल्म ‘धुंध’ बतौर अभिनेता डैनी के सिने कैरियर की महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुयी। इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसे दबंग अपाहिज व्यक्ति का किरदार निभाया, जो अपनी पत्नी पर जुल्म करता है और उसे शक की नजर से देखता है। ठाकुर रंजीत सिंह के किरदार को सधे हुये अंदाज के साथ पेश कर वह दर्शकों का दिल जीतने में सफल रहे। फिल्म ‘धुंध’ की सफलता के बाद डैनी को बतौर खलनायक अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गये। इन फिल्मों में खोटे सिक्के, 36 घंटे, काला सोना, लैला मजनू, कालीचरण और फकीरा जैसी बड़े बजट की फिल्में शामिल थीं। इन फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से डैनी ने दर्शकों का दिल जीत लिया और फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गये। 

 

इस बीच डैनी को जे.पी.सिप्पी की फिल्म ‘शोले’में गब्बर सिंह की भूमिका निभाने का प्रस्ताव मिला लेकिन डैनी उन दिनों फिल्म धर्मात्मा की शूटिंग में व्यस्त थे और समय नहीं रहने के कारण उन्होंने फिल्म में काम करने से इन्कार कर दिया। वर्ष 1990 डैनी को मुकुल एस. आनंद की फिल्म अग्निपथ में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म में उनके अभिनय के नये आयाम देखने को मिले। फिल्म में उन्हें महानायक अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मौका मिला। इसमें उन्होंने ‘कांचा चीना’ नाम के अंडर वर्ल्ड डॉन की भूमिका निभायी। इस फिल्म में अभिनय की दुनिया के इन दोनों महारथियों का टकराव देखने लायक था। यह फिल्म टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुई।
नब्बे के दशक में डैनी ने अपने अभिनय को एकरूपता से बचाने और स्वयं को चरित्र अभिनेता के रूप में स्थापित करने के लिये अपनी भूमिकाओं में परिवर्तन भी किया। इस क्रम में वर्ष 1991 में प्रदर्शित सावन कुमार की सुपरहिट फिल्म ‘सनम वेवफा’ में उन्होंने सलमान खान के पिता की रोबदार भूमिका निभायी।
‘सनम बेवफा’ में डैनी का सामना सदी के खलनायक ‘प्राण’ से हुआ लेकिन डैनी अपने सशक्त अभिनय से प्राण को कड़ी टक्कर देने में सफल रहे। दमदार अभिनय के लिये डैनी अपने सिने कैरियर में पहली बार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये। वर्ष 1992 में डैनी के सिने कैरियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म ‘खुदा गवाह’ प्रदर्शित हुयी। मुकुल आंनद निर्देशित इस फिल्म में उन्होंने अमिताभ बच्चन के मित्र खुदाबख्श की भूमिका निभायी और अपने दमदार अभिनय के लिये सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से दोबारा सम्मानित किये गये । लगभग चालीस साल लंबे फिल्मी कैरियर में खलनायक,नायक और चरित्र अभिनेता के रूप में अपनी अनूठी अभिनय शैली से दर्शकों का मनोरंजन करने वाले डैनी को घोड़ों से बहुत प्यार है।

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अब भाजपा की नजर इस गढ़ पर , इसके लिए रथ यात्रा ऐवम जोरदार रैलियों की तयारी

नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अब तृणमूल कांग्रेस प्रमुुख ममता बनर्जी के गढ़ पश्चिम बंगाल पर अपनी नजरें टिका दी है और इसके लिए रथ यात्राओं तथा जोरदार रैलियों की तैयारियां की जा रही हैं।

BJP

सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ‘मिशन पूर्व’ में जुट गयी है। इसी के तहत भाजपा तृणमूल कांग्रेस को उसी के गढ़ में कड़ी टक्कर देने की याेजना बना रही है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पहले ही पार्टी के लिए पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 22-23 सीटें हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित कर चुके हैं।

पश्चिम बंगाल में भाजपा सात दिसंबर को महीने भर चलने वाली ‘लोकतंत्र बचाओ’ थीम के अंतर्गत रथ यात्राओं की शुरुआत करेगी। शाह राज्य में तीन रथ यात्राओं को हरी झंडी दिखायेंगे। इनमें से पहली सात दिसंबर को उत्तरी बंगाल के कूचबिहार जिले से, दूसरी नौ दिसंबर को दक्षिण बंगाल के गंगासागर से और तीसरी 14 दिसंबर को बीरभूम जिले में तारापीठ मंदिर से शुरू होंगी।

शाह के अलावा उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनवाल पश्चिम बंगाल के मतदाताओं के साथ ‘एनआरसी’ के मुद्दे पर अपना अनुभव साझा करेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र की भी राज्य में कई जनसभा होने की संभावना है।

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व्हाटसएप के समारोह में सामने आई असलियत, मैसेज पढ़ते समय बुद्धि नहीं लगाई तो बन जाएंगे वज्र मूर्ख

सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर व्हाटसएप के मैसेज को समझने के लिए जो व्यक्ति अपनी बुद्धि का इस्तेमाल नहीं करता, उसे वज्र मूर्ख बनने से कोई नहीं रोक सकता और घीरे-धीरे वह व्यक्ति बुद्धिहीन होता चला जाता है। यह राय जयपुर पुलिस ने व्हाट्एसऐप और डिजिटल एम्पॉवरमेंट फाउंडेशन की ओर से जयपुर में आयोजित सामुदायिक लीडर्स के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम में कही। अगस्त में व्हाट्सऐप और डिजिटल एम्पॉवरमेंट फाउंडेशन ने 10 राज्यों में शैक्षिक कार्यशालाओं की श्रृंखला का शुभारंभ किया। इन कार्यशालाओं में यूज़र्स को इस बारे में शिक्षित किया गया कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग किस प्रकार किया जाए। उन्हें भारत में भ्रामक जानकारी की महामारी को रोकने के उपाय बताए गए, जो इस साल की शुरुआत में हिंसा का कारण बनी थी। 

 

व्हाट्सऐप और डीईएफ इस साल मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम और राजस्थान में प्रशिक्षणों का आयोजन कर रहे हैं, जिसके बाद तेलंगाना में प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। इन प्रशिक्षणों का केंद्रण राज्यों में चुनाव और भ्रामक जानकारी के फलस्वरूप इस साल हुई प्रेरित-हिंसा की घटनाओं को रोकने पर है। टीमें मार्च, 2019 तक प्रमुख राज्यों, जैसे पश्चिम बंगाल, असम, कर्नाटक, महाराष्ट्र, त्रिपुरा और झारखंड में भी पहुंचेंगी। पब्लिक पॉलिसी मैनेजर, व्हाट्सऐप, बेन सपल ने कहा, ”व्हाट्सऐप को राजस्थान में लाखों लोगों को दुनिया में कहीं भी अपने प्रियजनों से स्वतंत्रतापूर्वक कनेक्ट होने में मदद करने पर गर्व है। ये प्रषिक्षण लोगों को इस चुनावी मौसम में सुरक्षित रहने और नुकसानदायक अफवाहों को फैलने से रोकने में मदद करने की हमारी कार्ययोजना के प्रमुख हिस्से हैं। 

 

जयपुर में आयोजित चैथी एजुकेशन वर्कशॉप की अध्यक्षता, रवि गुरिया, डिप्टी प्रोग्राम डायरेक्टर, मीडिया एवं कम्युनिकेशन ने की। तीन हिस्सों में बंटे, तीन घंटे के प्रशिक्षण सत्र ने व्हाट्सऐप यूज़र्स को सामाजिक व्यवहार में परिवर्तन को संबोधित कर खुद को ‘परिवर्तन के दूत के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित किया और उन्हें झूठी खबरें पहचानने में समर्थ बनाया। इसके अलावा इसने उन्हें अफवाहों और विचारों में अंतर करने में समर्थ बनाया। उनसे झूठी खबरों की घटनाओं का समाधान करने के उपाय साझा किए तथा व्हाट्सऐप पर सुरक्षित रहने के सुझाव दिए। इस करिकुलम में यह भी बताया गया कि ग्राहक संदेह होने पर किस प्रकार फास्ट चेकिंग संस्थानों जैसे एल्टन्यूज़ एवं बूमलाईव से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं। 120 से अधिक आगंतुकों को संबोधित करते हुए यह प्रशिक्षण स्थानीय शासकीय प्रशासन, कानून प्रवर्तन अधिकारियों, कॉलेज के विद्यार्थियों, एनजीओ एवं अन्य सामुदायिक लीडर्स द्वारा दिया गया, जो अपने समाज, खासकर गांवों एवं अद्र्धशहरी केंद्र के टेक्नॉलॉजिकल सशक्तीकरण के लिए समर्पित हैं। 

 

विनीत कुमार, डिप्टी कमिश्रर ऑफ पुलिस (डीसीपी) क्राइम, जयपुर ने कहा, ”सोशल मीडिया विचार, संदर्भ और भावनाएं साझा करने का ग्लोबल प्लेटफॉर्म बन गया है। इसकी आसान उपलब्धता और व्यापक पहुंच के कारण यह हर व्यक्ति के दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाला उत्प्रेरक बन गया है। इसने कई तरह से लोगों की जिंदगी में सुधार किया है। हालांकि इसकी अपनी एक कमी भी है। यह झूठे प्रचार एवं अफवाहें फैलाने का माध्यम भी बन गया है। यदि व्यक्ति सोशल मीडिया के कंटेंट के बारे में अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर जाँच नहीं करता, तो वास्तविकता समझने की उसकी क्षमता इससे प्रभावित हो सकती है। इसका प्रभाव उनके व्यक्तिगत/व्यवसायिक जीवन तथा उनके आसपास के लोगों पर पड़ता है। इसलिए सोशल मीडिया के कंटेंट की जाँच कर अपनी बुद्धि के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का यह सही समय है। हालांकि यह काम तभी पूरा हो सकता है, जब स्कूली षिक्षा और घर के वातावरण में इसका समावेश किया जाए। लेकिन नकली खबरों एवं भ्रामक जानकारी पर ऐसी कार्यषालाएं इस विशय की जरूरत पर जानकारी प्रदान कर सकती हैं। इसके अलावा व्हाट्सऐप और डीईएफ अपने सामुदायिक इन्फॉर्मेशन रिसोर्स सेंटर (सीआईआरसी) के तहत कार्यशाला आयोजित करेंगे, जिसमें वो भारत के 5 राज्यों के ग्रामीण इलाकों में जमीनी स्तर के समुदायों पर केंद्रित प्रशिक्षण सत्रों का संचालन करेंगे।