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17 साल पहले मौत का तांडव करने वाले सार्स का सगा भाई है कोरोना

संसार के शक्तिशाली देशों को घुटने पर ला चुका कोरोना वायरस 17 साल पुराने सार्स का सगा भाई है। इस बार उसके ज्यादा मारक होने का यही कारण है। दूसरे शब्दों में कहें तो कोरोना फैमिली का यह वायरस पिछले दो बार के मुकाबले ज्यादा ताकतवर होकर आया है और उसने म्युटेशन के जरिए स्वयं को ज्यादा घातक बना लिया है। 2003 में आए सार्स कोविड-1 और 2013-14 में आए मर्स वायरस से मौजूदा वायरस की समानता क्रमश: 70 और 50 प्रतिशत तक है। पहले के दोनो वायरस घातक तो थे लेकिन वे व्यापक तबाही नहीं फैला पाए थे। क्योंकि कोविड-1 पूरी तरह ग्लोबल होने से पहले ही दम तोड़ गया था और 2013-14 का मर्स सऊदी अरब तक सीमित रह गया था।
कोरोना वायरस का मौजूदा स्वरूप बेहद घातक है। उसने 45 वर्ष से अधिक उम्र के इंसानों को उसी तरह मौत के घाट उतारा है जिस तरह लगभग एक सदी पहले प्लेग ने उनका भक्षण किया था। अनुमान है कि पिछले चार माह में कोरोना संक्रमण के चलते पूरी दुनिया में भगवान को प्यारे हुए लगभग ढाई लाख इंसानों में से 80 प्रतिशत 45 से 80 साल के हैं।

बूढ़ों के लिए मौत का दूसरा नाम है कोरोना

इन दिनों कोविड-19 के रोगियों की जान बचाने में जुटे दिल्ली के एक निजी अस्पताल में कार्डियक थोरासिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अजीत जैन के मुताबिक पूरी दुनिया में अभी तक कोरोना संक्रमितों की मृत्यु का जो आंकड़ा सामने आ रहा है, उसमें 25 साल से कम उम्र के संकमितों की संख्या एक प्रतिशत है। 25 से 44 साल तक के मृतकों का आंकड़ा अभी तक छह प्रतिशत पर टिका हुआ है लेकिन 45 से 60 साल तक संक्रमितों की मृत्यु दर 15 प्रतिशत तक जा पहुंची है। सबसे ज्यादा मौत 65 वर्ष से अधिक उम्र के रोगियों की हो रही है। इस उम्र के संक्रमितों में से आधे ठीक होने की अपेक्षा काल के गाल में समा जाते हैं।
डा. अजीत के मुताबिक तीनो वायरस एक ही जींस के हैं इसलिए विशिष्ट दवाएं उपलब्ध नहीं हो पाने के बावजूद परम्परागत दवाएं इलाज में काम ली जा रही हैं। इन दवाओं के बल पर ही कोरोना से मुक्त होने वालों की संख्या बढ़ रही है लेकिन इससे यह महामारी नियंत्रण में नहीं आ रही है।
उन्होंने बताया कि सीवियर एक्यूट रेस्पेरेटिरी सिंड्रोम अर्थात सार्स वायरस सात तरह का है। इनमें 2003 में आया सार्स कोविड-1, 2013-14 में आए मर्स वायरस और 2019 में आए कोविड-19 से दुनिया का परिचय हो चुका है। इसके अलावा कोरोना फैमिली के चार अन्य वायरस के नाम क्रमश: ह्यूमन कोरोना वायरस ओएच 43, ह्यूमन कोरोना वायरस एनएल 63, ह्यूमन कोरोना वायरस 229ई, ह्यूमन कोरोना वायरस एचयूके1 हैं। डा. अजीत जैन के अनुसार 2016 में डब्ल्यूएचओ ने भविष्यवाणी की थी कि कोरोना फैमिली के ये वायरस दुनिया में कभी भी महामारी फैला सकते हैं। भविष्यवाणी के बाद रिसर्च प्रोग्राम और दवा बनाने के प्रयास शुरू हो गए थे। इसीलिए उम्मीद है कि कोरोना का इलाज जल्द ही खोज लिया जाएगा।

प्रोटीन बढ़ाते है मौत का खतरा

डा. जैन के अनुसार दुनिया को सबसे ज्यादा घबराहट कोरोना संक्रमितों की मौत की बढ़ती दर से है। 2003 में चाइना के यूनान से शुरू हुए सार्स कोविड-1 के दौर में मौत की दर 9 प्रतिशत थी। दस साल बाद 2013-14 में आई मर्स महामारी में मौत की दर 35 प्रतिशत थी, लेकिन उसका फैलाव नहीं होने से दुनिया को ज्यादा चिंता नहीं हुई थी। इस बार यह पूरी दुनिया में फैल गया है और इसकी औसत मृत्यु दर भी 15 प्रतिशत है। कोविड-19 वायरस में चार तरह के प्रोटीन स्पाइक प्रोटीन, एनवल्व, मेमरिन और न्यूक्लोसाइट हैं और ये हाइरिस्क ग्रुप (डायबिटीज, हाइपर टेंशन,हृदय रोग) के मरीजों के मरने का खतरा बढ़ा देते है।

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एक मुट्ठी किशमिश खाइए, डायबिटीज(मधुमेह) से छुटकारा पाइए

आपने अपने घरों में बनने वाली खीर सहित अन्य पकवानों में मिलाया जाने वाला किशमिश नामक मेवा खूब खाया होगा। इसके अलावा भी कई मौके पर बादाम, काजू इत्यादि के साथ भी किशमिश खूब खाई होगी लेकिन ज्यादातर लोग किशमिश खाने के बाद भी इसके फायदों के बारे में नहीं जानते। दरअसल, किशमिश सिर्फ अपने खट्टे-मीठे स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर से जुड़ी कई सामान्य और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए इसका सेवन किया जा सकता है। किशमिश के आश्चर्यजनक फायदों के बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे और नियमित रूप से इसका सेवन करने लगेंगे।

 

diabetes: डायबिटीज(मधुमेह) का रामबाण इलाज है किशमिश

अब तक डाक्टरों को यही कहते सुना होगा कि मधुमेह के रोगियों के लिए मीठा जहर बराबर है, लेकिन हकीकत में किशमिश उनके लिए अमृत के समान है। अनगिनत शोधों के अनुसार किशमिश पोस्ट-प्रांडियल इंसुलिन प्रतिक्रिया को नियंत्रित कर सकती है, जिस वजह से यह मधुमेह के रोगियों के लिए फायदेमंद है। इसके अलावा किशमिश में ऐसे गुण होते हैं जो लेप्टिन और घ्रेलिन नामक हार्मोंस को भी नियंत्रित कर सकते हैं, जिससे मधुमेह रोगी का अपने खानपान पर नियंत्रण बन जाता है।

पेट में पत्थर को भी पचा देती है किशमिश

पाचन क्रिया को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कुछ किशमिश का सेवन जरूर करें, क्योंकि किशमिश अन्य जरूरी पोषक तत्वों के साथ-साथ फाइबर से भी समृद्ध होती है। फाइबर भोजन को पचाने में सहायता करता है और कई तरह की पेट संबंधी समस्याों से राहत दिलाता है। किशमिश का दैनिक सेवन शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मददगार है, जिस वजह से पाचन स्वास्थ्य के लिए रोजाना किशमिश का सेवन एक कारगर विकल्प हो सकता है।

कैंसर में बेस्ट है किशमिश

यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है कि कैंसर कितना घातक रोग है, इसलिए हर साल इसकी चपेट में आकर दुनियाभर के लाखों लोग अपनी जान गंवा देते हैं। मगर यह जानकर हैरानी होगी कि किशमिश कैंसर जैसी घातक बीमारी की आशंका को भी कम कर सकती है। इसमें कैटेचिन नामक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो शरीर को मुक्त कणों से बचाने का काम करता है। ये मुक्त कण ट्यूमर का कारण बन सकते हैं।

किशमिश खाइए एसिडिटी को बॉय—बॉय कहिए

एसिडिटी एक आम समस्या है जो गलत खाद्य पदार्थों के कारण हो जाती है, लेकिन किशमिश का सेवन करके इस समस्या से भी निजात पाया जा सकता है। किशमिश में पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे कई तरह के पोषक तत्व सम्मिलित होते हैं जो एसिडिटी को कम करते हैं। इतना ही नहीं, इसके पोषक तत्व गठिया, गाउट, पथरी और यहां तक कि हृदय रोग जैसी बीमारियों को रोकने में भी मदद करते हैं।

एक मुट्ठी किशमिश देती है दिनभर ऊर्जा

भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण पूरे दिन अपने आप को ऊर्जावान बनाएं रखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है, लेकिन रोजाना एक मुट्ठी किशमिश का सेवन नाश्ते में कर लें तो दिन भर घोड़े की तरह दौड़ सकते हैं। किशमिश विटामिन-बी के समूह से समृद्ध होती है जो व्यक्ति को दिन भर ऊर्जावान रखने में मददगार है। अधिक शारीरिक श्रम करने वाले लोगों के लिए नियमित रूप से किशमिश का सेवन करना जरूरी है।

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जनिये हल्दी के गुण एव उपयोग

Turmeric एक आम मसाला है हल्दी को मसालों की रानी कहा जाता है। turmeric की अपने आप में एक अलग ही पहचान है। इसकी सुगंद एरोमा जैसी, स्वाद तेज और रंग गोल्डन होता है। भारतीय रसोई हल्दी के बिना अधूरी मानी जाती है। हल्दी के बिना भारतीय रसोई की कल्पना भी करना मुश्किल है।

turmeric
turmeric

 

हल्दी में एंटीबैक्टीरिया और एंटीफंगल भी होते है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, विटामिन के, पेटेशियम, कैल्शियम, कॉपर, आयरन, मैग्निसियम, व् जिंक आदि गुण होते है। हल्दी स्वाद के साथ ही ये नेत्र रोग के लिए भी फायदेमंद होती है।

आजकल कैंसर रोग बहुत तीव्र गति से बढ़ रहा है। जब किसी को कैंसर होता है तो शरीर की सारी कोशिकाएं विपरीत कार्य करने लगती है। हल्दी का उपयोग करने से कैंसर भी कम हो जाता है। हमारे शरीर में जो कोशिकाएं विपरीत कार्य करती है हल्दी उन कोशिकाओं को नष्ट करती है। इसलिए कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के लिए भी हल्दी बहुत ही उपयोगी है। हल्दी का उपयोग सुबह खली पेट खाने से शरीर में उपस्थित गंदगी निकल जाती है।

turmeric में उपस्थित एंटीबैक्टीरिया और एंटीफंगल शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। सर्दी में जुखाम फ्लू जैसी बीमारी तो होती रहती है। लेकिन ऐसी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए आप हल्दी का उपयोग कर सकते है। सर्दी में आप रोज रात में एक गिलास दूध में एक चम्मच हल्दी मिलकर पीने से सर्दी जुखाम जैसी बीमारी तो दूर होती ही है इसके साथ ही छोटे मोटे रोग भी नष्ट हो जाते है।

turmeric डायबिटीज के लिए भी बहुत ही उपयोगी मानी जाती है। turmeric ग्लूकोस को कंट्रोल करती है। आजकल तो हल्दी कैप्सूल भी आते है ये कैप्सूल डॉक्टर की अनुमति के अनुसार ही लेने चाहिए। ऐसा करने से डायबिटीज से पीड़ित को फायदा हो सकता है। हल्दी का उपयोग करना चाहिए।