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न्यायालय की टिप्पणी के बाद मोदी-शाह की जोड़ी पर कैसे करें भरोसा : कांग्रेस

नयी दिल्ली । कांग्रेस ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह प्रदेश गुजरात और गृहमंत्री अमित शाह के संसदीय क्षेत्र अहमदाबाद में कोरोना की स्थिति सबसे बदतर है और यदि इस महामारी के खिलाफ लड़ाई छेड़ने वाले इन दोनों प्रभावशाली लोगों के गृह क्षेत्र की यह स्थिति है तो जनता उन पर कैसे भरोसा करेगी कि वे देश को इस महासंकट से निजात दिला सकते हैं।कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने रविवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मोदी-शाह की जोड़ी देश को इस महामारी से बचाने के लिए आश्वस्त कर रही है लेकिन यह दो बडे नेता अपने प्रदेश को संभालने में ही असमर्थ साबित हो रहे हैं। अहमदाबाद तो शाह का संसदीय क्षेत्र है लेकिन इस महत्वपूर्ण संसदीय क्षेत्र में कोरोना सबसे बडा संकट बन गया है। इसे लेकर गुजरात उच्च न्यायालय ने जो टिप्पणी की है वह बहुत चौंकाने वाली है और उन्होंने न्यायालय से इस तरह की फटकार कम ही सुनी है।

उन्होंने कहा कि गुजरात उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने शनिवार को गुजरात सरकार के अहमदाबाद में कोरोना की स्थिति को लेकर जो शब्द कहें हैं वे निशब्द करते हैं और उन्हें सुनकर लगता है कि सच में गुजरात में जंगलराज चल रहा है। सिंघवी ने कहा कि न्यायालय ने अपने 143 पेज के आदेश में कहा है कि गुजरात का अहमदाबाद शहर कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित है जहां वेंटीलेटर, आईसीयू और पीपीई की गंभीर रूप से कमी है।प्रवक्ता ने कहा कि न्यायालय ने अहमदाबाद के सिविल अस्पताल को लेकर ज्यादा ही तीखी टिप्पणी की है और कहा है कि इस अस्पताल की स्थिति बहुत खराब है जबकि यह शहर का प्रमुख अस्पताल है। अहमदामद में कोरोना के कारण जो मौत हो रही हैं उनमें 62 प्रतिशत मामले इसी अस्पताल के है जबकि कोरोना वायरस से संक्रमित लोग पूरे गुजरात की तुलना में 85 प्रतिशत इसी शहर में हैं।

उन्होंने कहा कि न्यायालय की टिप्पणी में कहा गया है “कोरोना को लेकर पूरी तरह से लापरवाही बरती जा रही है और किसी का कहीं कोई नियंत्रण ही नजर नहीं आता है। स्वास्थ्य मंत्री शायद कभी इस अस्पताल में झांकने तक नहीं गये होंगे जिससे सिविल अस्पताल की स्थिति तहखाने से भी बदतर हुई है।उन्होंने कहा कि न्यायालय ने निजी अस्पतालों को टेस्ट करने की अनुमति नहीं होने को भी संज्ञान में लिया है और इस पर आश्चर्य व्यक्त किया है। सिंघवी ने कहा कि दिल्ली सहित कई प्रदेशों में निजी अस्पतालों को कोरोना जांच की अनुमति है लेकिन हैरानी की बात है कि गुजरात सरकार ने यह सुविधा नहीं दी है।

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विश्व में कोरोना संक्रमितों की संख्या 50 लाख के करीब , 3.28 लाख लोगों की मौत

बीजिंग/जिनेवा/नयी दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड 19) का कहर बढ़ता जा रहा है और विश्व भर में इससे संक्रमितों की संख्या 50 लाख के करीब पहुंच चुकी है और 3.28 लाख से अधिक लोग अब काल के गाल में समा चुके हैं।

अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र (सीएसएसई) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक कुल संक्रमितों की संख्या 49,96,472 हो गयी जबकि 3,28,115 लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। दुनिया भर में सर्वाधिक प्रभावित देशों में पहले स्थान पर अमेरिका, दूसरे पर रूस और तीसरे पर ब्राजील है।

भारत में भी कोरोना वायरस ने तेजी से पैर पसारे हैं और अब यह एक लाख से अधिक संक्रमण के मामलों वाले देशों में शामिल हो गया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसके संक्रमण से अब तक 1,12,359 लोग प्रभावित हुए हैं तथा 3435 लोगों की मौत हुई है जबकि 45,300 लोग इस बीमारी से निजात पा चुके हैं।

अमेरिका में कोरोना वायरस से दुनिया में सर्वाधिक 15 लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और इसके संक्रमण से मरने वालों की संख्या 90 हजार के आंकड़े को पार कर चुकी है। विश्व की महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका में कुल संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ते हुए 15,51,853 हो गयी जबकि 93,439 लोगाें की मौत हो चुकी है।

रूस में भी कोविड-19 का प्रकोप लगातार तेजी से बढ़ रहा है और यह इस संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देशों की सूची में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है। यहां अब तक 3,08,705 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं और 2972 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।इस बीच ब्राजील में भी कोरोना को संकट गहराता जा रहा है।

यहां 291,579 लोग संक्रमित हुए हैं तथा पिछले 24 घंटों के दौरान ‘कोविड 19’ के प्रकोप से 888 मरीजों की मौत के बाद देश में इस संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़कर 18,859 हो गयी है। संक्रमण के मामले में ब्राजील का तीसरा स्थान है।इसके अलावा ब्रिटेन में भी हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं।

यहां अब तक इस महामारी से 2,49,619 लोग प्रभावित हुए हैं और अब तक 35,786 लोगों की इसके कारण मौत हो चुकी है।यूरोप में गंभीर रूप से प्रभावित देश इटली में इस महामारी के कारण अब तक 32,330 लोगों की मौत हुई है और 2,27,364 लोग इससे संक्रमित हुए हैं। स्पेन में कुल 2,32,555 लोग संक्रमित हुए है जबकि 27,888 लोगों की मौत हो चुकी है।

इस वैश्विक महामारी के केंद्र चीन में पिछले 24 घंटों में संक्रमण अथवा मौत का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। यहां अब तक 84,063 लोग संक्रमित हुए हैं और 4638 लोगों की मृत्यु हुई है। इस वायरस को लेकर तैयार की गयी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में हुई मौत के 80 प्रतिशत मामले 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के थे।यूरोपीय देश फ्रांस और जर्मनी में भी स्थिति काफी खराब है।

फ्रांस में अब तक 1,81,700 लोग संक्रमित हुए हैं और 28,135 लाेगों की मौत हो चुकी है। जर्मनी में कोरोना वायरस से 1,78,473 लोग संक्रमित हुए हैं और 8,144 लोगों की मौत हुई है।तुर्की में कोरोना से अब तक 1,52,587 लोग संक्रमित हुए हैं तथा इससे 4,222 लोगों की मौत हो चुकी है।कोरोना वायरस से गंभीर रूप से प्रभावित खाड़ी देश ईरान में 1,26,949 लोग संक्रमित हुए हैं जबकि 7183 लोगों की इसके कारण मौत हुई है।

बेल्जियम में 9150, कनाडा में 6150, मेक्सिको में 6090, नीदरलैंड में 5767, स्वीडन में 3831, पेरू में 3024, इक्वाडोर में 2888, स्विट्जरलैंड में 1892, आयरलैंड में 1,571 और पुर्तगाल में 1263 लोगों की मौत हो गयी है।इसके अलावा पड़ोसी देश पाकिस्तान में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 1932 नये मामले सामने आये हैं जबकि और 46 लोगों की मौत हो गयी। यहां अब तक कुल संक्रमितों की संख्या 45,898 हो गयी है जबकि 985 लोगाें की मौत हुई है।

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राजीव से संबंधित इश्तहार का पैसा गरीबों पर ख़र्च करेगी कांग्रेस

नयी दिल्ली। कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर गुरुवार को उनकी याद में दिये जाने वाले इश्तहार आदि में खर्च होने वाले पैसों को कामगारों की मदद में व्यय करने का निर्णय लिया है।

कांग्रेस ने यहां जारी बयान में कहा “आज पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गाँधी जी के बलिदान दिवस पर हर देशवासी ने उन्हें याद कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।”

पार्टी ने कहा “कोरोना महामारी के कारण कांग्रेस पार्टी ने यह निर्णय लिया की इस बार पुण्यतिथि पर इश्तहार देने की बजाय यह सारी राशि मज़दूर-कामगार भाइयों की मदद में लगाई जाएगी। पूरे देश में कांग्रेसजनों ने भी इस प्रेरणा दिवस पर हर ज़रूरतमंद की सेवा का संकल्प ले अपना हर प्रयास इस दिशा में केंद्रित करने का प्रण दोहराया है।”

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कोरोना ने बदली कैटरीना की जिंदगी

मुंबई ।बॉलीवुड की बार्बी गर्ल कैटरीना कैफ की जिंदगी के प्रति सोच कोरोना महामारी ने बदल दी है।कोरोना महामारी ने लगभग हर चीज को बदलकर रख दिया है।इससे जिंदगी के प्रति इंसानों का नजरिया बदला है। कैटरीन का भी कुछ ऐसा ही मानना है।

कैटरीना ने कहा, “यह महामारी और इसके चलते लगाए गए लॉकडाउन ने हम में से कई लोगों कोआत्मनिरीक्षण करने का मौका दिया है कि हमारी जिंदगी कितनी बेहतर है या किस तरह से हम इसे आम तौर पर ले लेते हैं।

इसके साथ ही मामलों की बढ़ती संख्या के कारण मेरा मानना है कि हमें अपने खानपान और जीवनशैली के माध्यम से अपनी बेहतर इम्युनिटी की दिशा में काम करना चाहिए। इसने कुछ मायनों में जिंदगी के प्रति मेरी सोच भी बदल दी है।”

कैटरीना ने कहा , “मैं यह सोचकर कभी-कभार परेशान हो जाती हूं कि जिंदगी पटरी पर कब आएगी, लेकिन दुनिया इस वक्त जिस परेशानी का सामना कर रही है मैं उसे भी समझती हूं। तनाव ऐसी स्थिति में एक गंभीर मुद्दा है।

मेरा सभी से सुझाव यह है कि शांत रहें, ध्यान लगाएं या योगाभ्यास करें और इसके बेहतर पहलुओं के बारे में सोचने का प्रयास करें। इस दौर के बाद आने वाले समय के बारे में सोचें, इस पर भी विचार करें कि आगामी समय में पर्यावरण के प्रति हमारी पहले की गई गलतियों को कैसे न दोहराया जाएं।

फिलहाल मैं जब भी खुद को निराश महसूस करती हूं, तो मैं या तो ध्यान लगाती हूं या योगा करती हूं या खुद को दोबारा खुश करने के लिए कोई फिल्म या शो देखती हूं।”

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17 साल पहले मौत का तांडव करने वाले सार्स का सगा भाई है कोरोना

संसार के शक्तिशाली देशों को घुटने पर ला चुका कोरोना वायरस 17 साल पुराने सार्स का सगा भाई है। इस बार उसके ज्यादा मारक होने का यही कारण है। दूसरे शब्दों में कहें तो कोरोना फैमिली का यह वायरस पिछले दो बार के मुकाबले ज्यादा ताकतवर होकर आया है और उसने म्युटेशन के जरिए स्वयं को ज्यादा घातक बना लिया है। 2003 में आए सार्स कोविड-1 और 2013-14 में आए मर्स वायरस से मौजूदा वायरस की समानता क्रमश: 70 और 50 प्रतिशत तक है। पहले के दोनो वायरस घातक तो थे लेकिन वे व्यापक तबाही नहीं फैला पाए थे। क्योंकि कोविड-1 पूरी तरह ग्लोबल होने से पहले ही दम तोड़ गया था और 2013-14 का मर्स सऊदी अरब तक सीमित रह गया था।
कोरोना वायरस का मौजूदा स्वरूप बेहद घातक है। उसने 45 वर्ष से अधिक उम्र के इंसानों को उसी तरह मौत के घाट उतारा है जिस तरह लगभग एक सदी पहले प्लेग ने उनका भक्षण किया था। अनुमान है कि पिछले चार माह में कोरोना संक्रमण के चलते पूरी दुनिया में भगवान को प्यारे हुए लगभग ढाई लाख इंसानों में से 80 प्रतिशत 45 से 80 साल के हैं।

बूढ़ों के लिए मौत का दूसरा नाम है कोरोना

इन दिनों कोविड-19 के रोगियों की जान बचाने में जुटे दिल्ली के एक निजी अस्पताल में कार्डियक थोरासिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अजीत जैन के मुताबिक पूरी दुनिया में अभी तक कोरोना संक्रमितों की मृत्यु का जो आंकड़ा सामने आ रहा है, उसमें 25 साल से कम उम्र के संकमितों की संख्या एक प्रतिशत है। 25 से 44 साल तक के मृतकों का आंकड़ा अभी तक छह प्रतिशत पर टिका हुआ है लेकिन 45 से 60 साल तक संक्रमितों की मृत्यु दर 15 प्रतिशत तक जा पहुंची है। सबसे ज्यादा मौत 65 वर्ष से अधिक उम्र के रोगियों की हो रही है। इस उम्र के संक्रमितों में से आधे ठीक होने की अपेक्षा काल के गाल में समा जाते हैं।
डा. अजीत के मुताबिक तीनो वायरस एक ही जींस के हैं इसलिए विशिष्ट दवाएं उपलब्ध नहीं हो पाने के बावजूद परम्परागत दवाएं इलाज में काम ली जा रही हैं। इन दवाओं के बल पर ही कोरोना से मुक्त होने वालों की संख्या बढ़ रही है लेकिन इससे यह महामारी नियंत्रण में नहीं आ रही है।
उन्होंने बताया कि सीवियर एक्यूट रेस्पेरेटिरी सिंड्रोम अर्थात सार्स वायरस सात तरह का है। इनमें 2003 में आया सार्स कोविड-1, 2013-14 में आए मर्स वायरस और 2019 में आए कोविड-19 से दुनिया का परिचय हो चुका है। इसके अलावा कोरोना फैमिली के चार अन्य वायरस के नाम क्रमश: ह्यूमन कोरोना वायरस ओएच 43, ह्यूमन कोरोना वायरस एनएल 63, ह्यूमन कोरोना वायरस 229ई, ह्यूमन कोरोना वायरस एचयूके1 हैं। डा. अजीत जैन के अनुसार 2016 में डब्ल्यूएचओ ने भविष्यवाणी की थी कि कोरोना फैमिली के ये वायरस दुनिया में कभी भी महामारी फैला सकते हैं। भविष्यवाणी के बाद रिसर्च प्रोग्राम और दवा बनाने के प्रयास शुरू हो गए थे। इसीलिए उम्मीद है कि कोरोना का इलाज जल्द ही खोज लिया जाएगा।

प्रोटीन बढ़ाते है मौत का खतरा

डा. जैन के अनुसार दुनिया को सबसे ज्यादा घबराहट कोरोना संक्रमितों की मौत की बढ़ती दर से है। 2003 में चाइना के यूनान से शुरू हुए सार्स कोविड-1 के दौर में मौत की दर 9 प्रतिशत थी। दस साल बाद 2013-14 में आई मर्स महामारी में मौत की दर 35 प्रतिशत थी, लेकिन उसका फैलाव नहीं होने से दुनिया को ज्यादा चिंता नहीं हुई थी। इस बार यह पूरी दुनिया में फैल गया है और इसकी औसत मृत्यु दर भी 15 प्रतिशत है। कोविड-19 वायरस में चार तरह के प्रोटीन स्पाइक प्रोटीन, एनवल्व, मेमरिन और न्यूक्लोसाइट हैं और ये हाइरिस्क ग्रुप (डायबिटीज, हाइपर टेंशन,हृदय रोग) के मरीजों के मरने का खतरा बढ़ा देते है।

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अब केले पर मंडराया कोरोना वायरस का साया, हजारों टन केला……

कोरोना से खेती को भी बड़ा नुकसान हुआ है। इसकी वजह से उत्तरप्रदेश में हजारों टन केले की पैदावार नहीं हो सकी। उत्तरप्रदेश के कुछ जिलों में टिशू कल्चर केले की खेती की जाती है जिसके बीज महाराष्ट्र और दक्षिण के राज्यों से आते हैं। लेकिन कोरोना के चलते इसके बीज नहीं आ पा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में बाराबंकी, अयोध्या, सीतापुर, गोंडा, बहराइच, संतकबीरनगर, श्रावस्ती, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, बलिया, वाराणसी समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों मे टिशू कल्चर केले की खेती बडे पैमाने पर होती है लेकिन कोरोना को लेकर इस खेती पर भी आफत आ गई है। राज्य मे करीब एक लाख हेक्टेयर में टिशू कल्चर के केले की खेती की जाती है लेकिन अभी तक इसके बीज की व्यवस्था नहीं हो पायी है जबकि इस खेती के लिए खेत पूरी तरह तैयार हैं। चूंकि इसके बीज दक्षिण के राज्यों से आते हैं इसलिए बीजों का आना मुश्किल माना जा रहा है।

टिशू कलचर खेती मे अपनी अलग पहचान बना चुके किसान रामशरण कहते हैं कि एक लाख हेक्टेयर मे केले की खेती के लिए करीब तीन करोड़ बीजों की जरूरत होगी। आवागमन बंद होने के कारण इतना बीज आना मुश्किल ही नहीं असंभव है। रामशरण को टिशू कलचर खेती के लिए पद्मश्री भी मिल चुका है। उद्यान विशेषज्ञों के अनुसार पिछले साल टिशू कल्चर केले की राज्य मे बंपर पैदावार हुई थी और किसानों ने मोटा मुनाफा कमाया था।

पिछले साल के मुनाफे को देखकर कुछ नये किसान भी इस क्षेत्र मे आ गए और अपने खेतों को टिशू कल्चर केले की खेती के लिए तैयार किया लेकिन बीज को लेकर अभी भी अनिश्चितता के हालात के कारण किसान अब उदास हैं। रेल के साथ हवाई सेवा भी पूरी तरह से बंद है, इसके बीज हवाई जहाज से भी आते रहे हैं लेकिन यह सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। निचोड़ यह है कि टिशू कल्चर केले की खेती पर इस बार आफत है। किसान इसके लिए किसी को दोष भी नहीं दे सकते कयोंकि देश कोरोना जैसी महामारी से लड रहा है।

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कोरोना के खत्म होने के बाद रिलीज होगी कुली नंबर वन : वरूण धवन

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता वरूण धवन का कहना है कि कोरोना महामारी के खत्म होने के बाद उनकी फिल्म कुली नंबर वन रिलीज होगी।

कोरोना वायरस ने पूरी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को ठप कर दिया है। बड़ी-बड़ी फिल्मों को पोस्टपोन किया जा रहा है। शूटिंग को रोक दिया गया है। चर्चा हो रही थी कि डेविड धवन के निर्देशन में बन रही वरुण धवन और सारा अली खान की अपकमिंग फिल्म कुली नंबर 1 को पोस्टपोन कर दिया गया है। हालांकि वरुण धवन ने इसी बीच अपनी इस फिल्म से जुड़ी एक खुशखबरी दी है।

वरुण धवन ने अपने फैंस के लिए इंस्टाग्राम पर एक चैट सेशन रखा था, जिसमे उन्होंने अपनी अगली फिल्म ‘कुली नंबर 1’ के रिलीज से जुड़ी कुछ खास बातें की। वरूण ने कहा, “कुली नंबर 1 को अब से एक सप्ताह बाद रिलीज किया जाना था हालांकि अब ऐसा संभव हीं। ऐसे में मैं इस महामारी के खत्म होने के बाद फिल्म के रिलीज की उम्मीद करता हूं।”

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गांव और शहरोंं के गैर हॉटस्पॉट क्षेत्रों में दुकान खोलने की सशर्त छूट, नहीं खुलेंगे बाजार

नयी दिल्ली । केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कोरोना महामारी के कारण देश भर में एक महीने से भी अधिक समय से लागू पूर्णबंदी के दिशा निर्देशों में शुक्रवार रात किये गये संशोधनों के अनुसार गैर हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों में कुछ शर्तों के साथ दुकानोंं को खोलने की छूट दे दी गयी है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह छूट मॉल को छोड़ कर सभी दुकानों पर लागू होगी जबकि शहरों में यह केवल अकेली दुकानाें, आस पास की दुकानों और आवासीय परिसरों में स्थित दुकानों पर ही लागू होगी। बाजार और बाजार परिसरों तथा माल में स्थित दुकानों पर यह छूट लागू नहीं होगी।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ई कामर्स कंपनियों को भी केवल अनिवार्य वस्तुओं की आपूर्ति की छूट रहेगी और वे गैर जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति अभी नहीं कर सकेंगी।इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि शराब और अन्य पदार्थों की बिक्री पर पहले से लागू प्रतिबंध अभी भी जारी रहेंगे। यह भी कहा गया है कि शहर हो या ग्रामीण दोनों के ही हॉटस्पॉट क्षेत्रों में यह छूट लागू नहीं होगी।

इससे पहले केन्द्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को शुक्रवार देर रात लिखे पत्र में कहा था कि 15 अप्रैल को जारी पूर्णबंदी के दिशा निर्देशों के तहत कुछ श्रेणियों में संशोधन किया जा रहा है। ये संशोधन केवल गैर हॉटस्पॉट क्षेत्रों के लिए किया गया है और हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों में पहले की तरह ही पूर्णबंदी के सभी दिशा निर्देश लागू रहेंगे।

आदेश में व्यावसायिक और निजी प्रतिष्ठान की श्रेणी में छूट देते हुए कहा गया है कि सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियमों के तहत पंजीकृत दुकानों को खोलने की अनुमति होगी। यह आदेश आवासीय परिसरों , पडोस में बनी और अकेली दुकानों पर भी लागू होगा।आदेश के अनुसार नगर निगमों और नगर पालिकाओं की सीमाओं में आने वाले मार्केट परिसरों को छोड़कर अन्य सभी दुकानों को भी यह छूट मिलेगी। साथ ही किसी भी सिंगल और मल्टी ब्रांड माल में दुकानाें को खेलने की अनुमति नहीं होगी।

जिन दुकानों को यह छूट दी गयी है उनमें केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी काम करेंगे और सभी के लिए मास्क पहनना तथा सामाजिक दूरी का पालन करना अनिवार्य होगा। आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि ये छूट केवल गैर हॉटस्पॉट क्षेत्रों में ही लागू होगी।

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मुनाफाखोर चीन का पर्दाफाश, दक्षिण कोरियाई कम्पनी आधे दामों पर बेच रही है कोरोना टेस्टिंग किट

कोरोना महामारी को लेकर पूरे विश्व के निशाने पर आए चीन की कम्पनियां टेस्टिंग किट पर भारी मुनाफा वसूल रही हैं। इसका खुलासा दक्षिण कोरियाई कम्पनी एस. डी बायोसेंसर की ओर से हरियाणा सरकार को सप्लाई की गई टेस्टिंग किट से हुआ है। दक्षिण कोरियाई कम्पनी ने किट चीनी कम्पनी के मुकाबले 400 रुपए सस्ती दर पर बेची है। चीनी कम्पनी इसी किट की कीमत 780 रुपए वसूल रही है।

चीन का आर्डर रद्द कर दक्षिण कोरियाई कम्पनी को दिया

इसी के साथ हरियाणा सरकार ने चीन से मंगाई जाने वाली एक लाख रेपिड टेस्ट किट का आर्डर रद्द कर इसे दक्षिण कोरियाई कम्पनी को दे दिया। दक्षिण कोरियाई कम्पनी का कारखाना हरियाणा के मानेसर में ही स्थित है। दक्षिण कोरियाई कम्पनी एस.डी. बायोसेंसर यह किट गुणवत्ता में भी बेहतर है। इसलिये चीन की कम्पनियों को दिया गया आर्डर रद्द किया गया है। इससे सरकार को राजस्व की भी बचत होगी। कोरियाई कम्पनी को एक लाख किट का आर्डर दिया गया है जिसमें से राज्य सरकार को 25 हजार रैपिड टेस्टिंग किट मिल गई हैं। इसकी प्रति किट कीमत 380 रुपए है जो चीन से आयातित किट से लगभग 400 रुपए सस्ती है। यह किट यहां बनने से अब इसके लिये दूसरे देशों पर देश और प्रदेश की निर्भरता कम होगी।

कोरियाई कम्पनी एक माह में देगी एक करोड़ रेपिड टेस्टिंग किट

खास बात यह है कि किट बनाने की स्वीकृति 15 दिन में ही मिल गई, जिसमें रूटीन में पांच माह तक का समय लग जाता है। क्योंकि किट निर्माण के लिये पहले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे को आवेदन करना होता है तो इसके बाद भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद को जाता है तथा इसके बाद औषध महानियंत्रक से उत्पादन की स्वीकृति लेनी होती थी। कोरियाई कम्पनी एक माह में एक करोड़ रेपिड टेस्टिंग किट तैयार करेगी। हरियाणा में कोरोना मरीजों के दुगुने होने की रफ्तार लगभग 14 दिन है जबकि देश में यह औसत 7.5 दिन है। हरियाणा में रिकवरी रेट 57 है वहीं केंद्र में केवल 16 फीसदी है।

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कोरोना से बचने के चक्कर में मोल ना लें दूसरी बीमारियां, फल-सब्जियों को केमिकल से नहीं धोएं

Do not chemically wash fruits and vegetables: कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए देश भर में खट्टे फलों का उपयोग बढ़ गया है। इसके अलावा हरी सब्जियां भी खूब खाई जा रही हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि इस दौरान भी कोरोना वायरस का संक्रमण आपके घर घुसने में कामयाब हो सकता है। बिल्कुल, घरों में बाजार से अथवा हॉकरों से खरीदे जा रहे फल और सब्जियां वायरस को आपके घर लेकर आ सकते हैं, इसलिए इन्हें खरीदने के बाद इस्तेमाल करने से पहले इन टिप्स से इन्हें संक्रमण रहित जरूर करें ताकि इस भयानक बीमारी से आपका बचाव हो सके।

कई लोग वायरस की वजह से पनपे संदेह से राहत पाने के चक्कर में फल और सब्जियों को विभिन्न केमिकल्स जैसे क्लोरीन, डिसइंफेक्टेंट, एल्कोहल आदि से धो देते हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोग तो फल और सब्जियों को धोने के लिए साबुन या डिटर्जेंट पाउडर का इस्तेमाल करने लगे हैं। लेकिन ऐसा करना गलत है, क्योंकि ऐसा करने से ये स्वास्थ्यवर्धक चीजें आपके स्वास्थ के लिए घातक हो सकती हैं और गंभीर बीमारी का रूप ले सकती हैं। जब भी बाहर से फल और सब्जियां लाएं तो घर पहुंचकर सबसे पहले किसी बड़े बर्तन में पानी भरकर उनको एक-एक करके धोएं। हो सके तो गलव्स पहनकर धोएं। इसके अलावा, एक टब में आवश्यकतानुसार पानी और एक चम्मच नमक डालकर उसमें फल और सब्जियों को डुबोकर अच्छी तरह साफ कर सकते हैं। साथ ही जब भी फल और सब्जियों का इस्तेमाल करने जा रहे हों, तब भी उनको पानी से अच्छे से साफ कर लें। Do not chemically wash fruits and vegetables:

रीयूजेबल कैरीबैग पर किसी भी तरह के संक्रमण का असर हो सकता है इसलिए जब भी जरूरी सामान की खरीदारी करने जाएं तो घर का कोई भी थैला न लेकर जाएं। इसकी जगह खरीदारी के लिए किसी ऐसे प्लास्टिक बैग का चुनाव करें, जिसे घर आकर फेंक सकें या दुकान से मिलने वाली थैली में ही सामान लें और घर लाकर प्लास्टिक की थैली को फेंक दें। Do not chemically wash fruits and vegetables:

अगर बाहर से दूध, फल और सब्जियां लाएं तो उन्हें पानी से अच्छे से धो लें। बाहर से लाए गए किसी भी तरह के सामान के पैकेट को दांतो से फाड़ने की बजाए कैंची की मदद से खोलें।फ्रिज में हमेशा पके खाद्य पदार्थ को अलग और कच्चे खाद्य पदार्थ को अलग रखें। छिलके वाली चीजों का सेवन ज्यादा करें और सब अच्छे से पकाकर ही खाएं। Do not chemically wash fruits and vegetables: