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आँध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल के अलावा सभी राज्य कल से घरेलू उड़ान के लिए तैयार

नयी दिल्ली । आँध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के अलावा सभी राज्य सोमवार से घरेलू उड़ानें दुबारा शुरू करने पर सहमत हो गये हैं। मुंबई, चेन्नई, पश्चिम बंगाल और आँध्र प्रदेश में उड़ानों की संख्या एक-तिहाई से भी कम होगी।नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आज बताया कि घरेलू उड़ानें दुबारा शुरू करने को लेकर विभिन्न राज्यों की सरकारों के साथ दिन भर उनकी वार्ता के बाद सभी राज्य इस पर सहमत हो गये हैं। आँध्र प्रदेश ने हालाँकि 26 मई से और पश्चिम बंगाल ने 28 मई से उड़ान शुरू करने की सहमति दी है। अन्य राज्यों में कल से उड़ान शुरू होगी।

केंद्र सरकार ने पूर्व में मंजूरी ग्रीष्मकालीन समय-सारणी की तुलना में अभी एक-तिहाई उड़ानों की अनुमति दी थी, लेकिन आँध्र प्रदेश सरकार ने कहा है कि वह 26 तारीख से सीमित उड़ानों की अनुमति देगी। इसी प्रकार पश्चिम बंगाल सरकार ने भी 28 मई से सीमित उड़ानों की सहमति दी है।
तमिलनाडु ने चेन्नई हवाई अड्डे पर रोजाना मात्र 25 उड़ानों को उतरने की सहमति दी है जबकि राज्य ने अन्य हवाई अड्डों के मामले में वह केंद्र सरकार के एक-तिहाई उड़ानों के प्रस्ताव को मान लिया है। इसी प्रकार महाराष्ट्र सरकार ने भी कहा है कि वह मुंबई हवाई अड्डे पर सीमित उड़ानों की अनुमति देगी जबकि राज्य के अन्य हवाई अड्डों पर केंद्र के एक-तिहाई उड़ानों को प्रस्ताव को वह स्वीकार करेगी।

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इधर चुटकी बजेगी उधर प्रधानमंत्री दफ्तर जा पहुंचेंगे……..

भारत के प्रधानमंत्री का सरकारी आवास जल्द ही राष्ट्रपति भवन के बगल में हो सकता है। यहां से उन्हें अपने दफ्तर पहुंचने में चंद मिनट ही लगेंगे। अभी प्रधानमंत्री के 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास के आसपास यातायात पर अक्सर लगने वाली पाबंदियों से दिल्ली बेहद परेशान हैं। प्रधानमंत्री जब साउथ ब्लॉक स्थित दफ्तर यातायात रोक दिया जाता है।

1984 में जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने थे तो वह सात रेसकोर्स अब 7, लोक कल्याण मार्ग में रहने आए थे। 12 एकड़ का यह परिसर नई दिल्ली के वास्तुकार एडविन लुटियंस के डिजाइन पर बना है। नई पुनर्विकास योजना सेंट्रल विस्टा के तहत रायसीना हिल पर साउथ ब्लॉक के दक्षिण-पश्चिम कोने पर प्रधानमंत्री आवास बनाने की योजना है। प्रधानमंत्री के मौजूदा आवास और साउथ ब्लॉक दफ्तर की दूरी 2.8 किमी है। योजना में संसद की नई इमारत, सभी केंद्रीय मंत्रालयों को करीब लाना और सेंट्रल विस्टा के आसपास स्थित धरोहर इमारतों का पुनर्विकास का लक्ष्य शामिल है। सेंट्रल विस्टा में सभी मंत्रालयों के साथ प्रधानमंत्री और उप राष्ट्रपति के आवास भी होंगे। उपराष्ट्रपति का आवास नॉर्थ ब्लॉक के पीछे होगा।

संसद की इमारत के पुनर्निर्माण की अपेक्षा संसद परिसर में ही एक नई इमारत बनाई जाएगी। अभी जिस इमारत में संसद है, उसी के 13 एकड़ के भूखंड पर नया कक्ष बनाया जाएगा। इसमें मौजूदा लोक सभा कक्ष से तीन गुना ज्यादा आकार का कक्ष, राज्य सभा कक्ष और एक लाउंज होगा। लोक सभा के नए कक्ष को संयुक्त सत्र के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। अभी इसके लिए केन्द्रीय कक्ष का इस्तेमाल होता है। इसमें नियमित रूप से 900 लोग बैठ सकेंगे लेकिन संयुक्त सत्र के दौरान 1,350 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। हर सांसद को 50 फीसदी ज्यादा जगह मिलेगी। मौजूदा लोकसभा में केवल 552 सांसद बैठ सकते हैं।

अभी केंद्र सरकार के 51 में से 22 मंत्रालय सेंट्रल विस्टा और इसके आसपास हैं। योजना के मुताबिक राजपथ के दोनों तरफ 10 नई इमारतों में सभी मंत्रालयों के दफ्तर होंगे। एकीकृत भूमिगत पार्किंग के अलावा इनमें सीधे दिल्ली मेट्रो की येलो और वॉयलेट लाइनों तक पहुंचने के लिए भूमिगत रास्ते भी होंगे। इंडिया गेट और रायसिना हिल के बीच तीन किमी लंबे सेंट्रल विस्टा में यातायात को कम करने के लिए पैदल यात्रियों के लिए ट्रैफिक सिग्नल पर अंडरपास होंगे। सेंट्रल विस्टा परियोजना रायसिना हिल के रिज से शुरू होकर यमुना नदी पर खत्म होगी।

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बारिश से हुए नुकसान को लेकर किसानों की मदद के लिए रकम देगी मोदी सरकार

नयी दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मोदी सरकार किसानों के हितों और उनकी भलाई को लेकर गंभीर है।

तोमर ने बुधवार को यहां संसद परिसर में कहा कि देशभर में इस बार बारिश से किसानों का काफी नुकसान हुआ है जिसका राज्य स्तर पर आंकलन किया जा रहा है। राज्य सरकारों की ओर से किसानों को बारिश से हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है और राज्यों से जब नुकसान की रिपोर्ट आ जाएगी उसके बाद केंद्र सरकार वहां के किसानों के लिए रकम देगी।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार किसानों के हितों को लेकर शुरू से ही गंभीर है।उन्होंने महाराष्ट्र के किसानों के साथ भेदभाव की बात को बेबुनियाद बताया है और कहा कि सरकार सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार कर रही है।

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माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम की कम्पनी में पैसा लगाने की आंच में झुुलस सकती है मोदी सरकार, एक आईएएस अधिकारी का नाम आया सामने!

उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 4,000 करोड़ रुपये के कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) घोटाले में अब नौकरशाहों को अपने शिकंजे में लेने लगी है, और ऐसे में केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
ईओडब्ल्यू द्वारा जब्त दस्तावेजों के अनुसार, उप्र काडर के वरिष्ठ आईएएएस अधिकारी, और उप्र के तत्कालीन अतिरिक्त सचिव (ऊर्जा) और उप्र विद्युत निगम लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के अध्यक्ष संजय अग्रवाल इंप्लाईस ट्रस्ट का नेतृत्व कर रहे थे, जिसमें एक बड़ा घोटाला पिछले सप्ताह सामने आया।

केंद्र सरकार के शीर्ष सचिव के लिए मुश्किलें इसलिए बढ़ गई हैं, क्योंकि राज्य सरकार के हजारों कर्मचारियों और मजदूर यूनियनों की ओर से दबाव बढ़ता जा रहा है कि उन नौकरशाहों के खिलाफ कार्रवाई शुरू किया जाए, जो उनकी कठिन मेहनत से अर्जित की गई गाढ़ी कमाई को एक विवादास्पद कंपनी, दीवान हाउसिंग फायनेंस (डीएचएफएल) में निवेश के लिए जिम्मेदार हैं। दस्तावेजों से पता चलता है कि मार्च 2017 में संजय अग्रवाल (ट्रस्ट के चेयरमैन के रूप में) के नेतृत्व में यूपीपीसीएल के पांच शीर्ष अधिकारी ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित थे, जिसमें भविष्य निधि का निवेश डीएचएएफएल में करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था। उन पांच अधिकारियों में से तीन को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें यूपीपीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक, ए.पी. मिश्रा भी शामिल हैं।

बिजली इंजीनियर यूनियन अब बिजली विभाग के उन शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जिन्होंने कर्मचारियों का भविष्य निधि निवेश करने के लिए डीएचएफएल जैसी किसी कंपनी को चुनने में नियमों को ताक पर रख दिया। ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन, शैलेंद्र दुबे ने आईएएनएस से कहा कि उनकी दो प्रमुख मांगें हैं। पहली मांग यह है कि कर्मचारियों का भविष्य निधि सरकार वापस लाए, और दूसरा यह कि इस गड़बड़ी के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जो भी शीर्ष अधिकारी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। दुबे ने कहा, “हमारी दो घंटे की दैनिक राज्यव्यापी हड़ताल जारी है। यदि पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई तो हम सात नवंबर से 48 घंटे की हड़ताल करेंगे।”

दूसरी तरफ मुख्यमंत्री कार्यालय के करीबी सूत्रों ने लखनऊ में कहा कि घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता यूपीपीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक ए.पी. मिश्रा थे, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामले चल रहे हैं। सूत्र ने कहा, “मिश्रा ने यूपीपीसीएल के निदेशक (वित्त) सुधांशु द्विवेदी, और महाप्रबंधक पी.के. गुप्ता के साथ मिलकर डीएचएफएल जैसी निजी कंपनियों के लिए रास्ते तैयार किए। गुप्ता ट्रस्ट के सचिव थे और द्विवेदी उसके एक सदस्य थे। दोनों गिरफ्तार हो चुके हैं। मामले में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, ईओडब्ल्यू द्वारा गिरफ्तार अधिकारियों ने डीएचएफएल में निधि हस्तांतरित करने से पहले सरकार के शीर्षस्थ स्तर से अनुमति नहीं ली थी। डीएचएफएल एक ऐसे कंपनी है, जिसके प्रमोटरों कपिल वधावन और धीरज वधावन से प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम से संबंधित कंपनियों के साथ उनके संबंधों को लेकर पूछताछ की थी।

 

 

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दिग्विजय सिंह ने सभी कोचिंग संस्थानों के मामले को लेकर किया ये

भोपाल, । कांग्रेस नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कोचिंग संस्थानों को माल एवं वस्तु कर (जीएसटी) के दायरे से बाहर लाने का अनुराेध करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है।

सिंह ने अनुरोध किया है कि ऐसा करना बेरोजगार युवाओं के हित में एक बड़ा कदम होगा।पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा है कि बड़ी संख्या में बेरोजगार युवा केंद्रीय और राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के लिए काेचिंग करते हैं। पहले इन कोचिंग संस्थानों पर पांच फीसदी जीएसटी था, जो अब बढ़ाकर 18 फीसदी कर दिया गया है। ऐसे में ये कोचिंग संस्थान और महंगे हो गए हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि बढ़ती बेरोजगारी को देखते हुए इन संस्थानों को जीएसटी के दायरे से बाहर लाया जाना चाहिए। साथ ही केंद्र सरकार को केंद्र के तहत होने वाली परीक्षाओं से प्रवेश शुल्क लेना भी बंद कर देना चाहिए।

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मेट्रो में महिलाओं की मुफ्त यात्रा को लेकर आई ये बात सामने

नयी दिल्ली । केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मेट्रो रेल सेवा में महिलाओं की मुफ्त यात्रा के संबंध में दिल्ली सरकार ने कोई प्रस्ताव उसके पास नहीं भेजा है।

आवास और शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को लोकसभा में यह जानकारी दी । तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने दिल्ली मेट्रो में महिलाओं की मुफ्त यात्रा के संबंध में जानकारी चाही थी ।

पुरी ने लिखित उत्तर में बताया कि केंद्र सरकार का दिल्ली मेट्रो रेल सेवा में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने बताया कि मेट्रो रेल में महिलाओं के लिए की स्वीकृति के लिए दिल्ली सरकार से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है और इसलिए उसे मंजूरी देने का कोई सवाल ही नहीं

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लंदन शेयर बाजार के लिस्टिंग समारोह में शामिल हो सकते है पहले भारतीय मुख्यमंत्री विजयन

तिरुवनंतपुरम| केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन आगामी 17 मई को लंदन शेयर बाजार में आयोजित केआईआईएफबी मसाला बांड के लिस्टिंग समारोह में शामिल ले सकते हैं।आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक लंदन शेयर बाजार की ओर से विजयन को आमंत्रण भेजा गया है तथा मुख्यमंत्री कार्यालय केंद्र सरकार से विजयन के ब्रिटेन दौरे के लिए जल्द ही अनुमति मांगेगा। अगर केंद्र सरकार से अनुमति मिल जाती है तो यह पहला मौका होगा जब कोई भारतीय मुख्यमंत्री लंदन शेयर बाजार के लिस्टिंग समारोह में हिस्सा लेंगे।

उल्लेखनीय है कि केरल सरकार द्वारा नियंत्रित केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी) के 2150 करोड़ रुपये के मसाला बांड अंतर्राष्ट्रीय सिक्योरिटीज मार्केट में सूचीबद्ध की जाएगी।इस बीच विपक्षी दल के नेता रमेश चेन्नीतला ने केआईआईएफबी के माध्यम से धन जुटाने की तीखी आलोचना की और आरोप लगाया कि इससे कनाडाई पेंशन फंड (सीडीपीक्यू) और घोटालेबाज एसएनसी लवलीन के बीच सीधा संबंध साबित करने के पर्याप्त संकेत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एसएनसी लवलीन केरल में वर्ष 1995 के हाईड्रोइलेक्ट्रिक घोटाले में शामिल था और उस समय विजयन ईके नायनार सरकार में बिजली मंत्री थे।

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वह चिल्लाती रही, लेकिन करते रहे ये काम, अब कोर्ट ने मांगा दो सप्ताह में जवाब

भारत में नेताओं की दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही सम्पत्ति पर अब उच्चतम न्यायालय शिकंजा कस सकता है। वह उस याचिका की सुनवाई के लिए तैयार हो गया है जिसमें नेताओं की सम्पत्ति की रोकथाम करने की मांग की गई है। याचिका की सुनवाई के दौरान सांसदों और विधायकों के साथ ही मंत्रियों को मिलने वाले वेतन को आयकर मुक्त रखे जाने का मुद्दा भी उठ सकता है क्योंकि देश में पांच लाख से अधिक आय वाले प्रत्येक व्यक्ति को आयकर देना होता है जबकि नेताओं को दस से बीस लाख सालाना इनकम पर भी आयकर नहीं देना होता है। 

 

उन्हें ये छूट जनसेवा के नाम पर दी जाती है, लेकिन सभी वाकिफ हैं कि वे जनसेवा नहीं अपनी और अपने परिवार की सेवा ज्यादा करते हैं।
इसके अलावा वे प्रतिवर्ष अपने वेतन—भत्ते खुद ही बढ़ा लेते हैं। अभी देश के सांसदों को सभी सुविधाओं को मिलाकर सालाना तीस लाख से अधिक की आय होती है। यहां तक कि फ्री टेलीफोन सेवा के जमाने में भी उन्हें एसटीडी युक्त चार से अधिक टेलीफोन फ्री मिलते हैं। देश की जनता खुद के वेतन भत्ते बढ़ाने के अधिकार पर खूब चिल्लाती है, लेकिन उन पर कोई असर नहीं पड़ता है। 

 

उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा कि आखिर उसने पिछले कुछ वर्षों से नेताओं की परिसम्पत्तियों में बेतरतीब बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए कोई स्थायी तंत्र क्यों नहीं बनाया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) लोक प्रहरी की याचिका की सुनवाई के दौरान कानून मंत्रालय के जरिये केंद्र से दो सप्ताह के भीतर यह जवाब मांगा है कि नेताओं की सम्पत्तियों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, उसकी रोकथाम के लिए क्या उपाय किये गये हैं। 

 

न्यायालय ने केंद्र से पूछा कि पिछले पांच वर्षों में कुछ नेताओं की आय और परिसम्पत्तियों में बढोतरी पर अंकुश के लिए उसके आदेश पर अमल क्यों नहीं किया गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि सरकार ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व के आदेश का अनुपालन नहीं किया है। इसके लिए न्यायालय को अवमानना का मामला शुरू करना चाहिए।

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इस नेता ने उड़ाई मोदी की खिल्ली, कहा मोदी है तो हो जाता है हर काम नामुमकिन

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार की किसानों के लिये चलाई जा रही योजनाओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव आते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को किसान याद आते हैं।

गहलोत ने पत्रकारों से कहा कि मोदी सरकार किसानों के लिये छह हजार रुपये की योजना लाकर चुनाव जीतने का प्रयास कर रही है, इसके क्या मायने हैं। छह हजार का क्या मतलब है। इससे अधिक की तो हमने पेंशन योजना शुरू की है। उन्होंने कहा कि किसानों का भला करना हैं तो उनका कर्जा माफ किया जाये। 

 

गहलोत ने कहा कि हमने किसानों के दो लाख रुपये के कर्ज माफ किये हैं। पहले चरण में सहकारी और ग्रामीण बैंकों के कर्ज माफ किये गये हैं, अगले चरण के लिये व्यवसायिक और राष्ट्रीय बैंकों से बातचीत की जा रही है, जिससे किसान अपनी रहन रखी भूमि छुड़ा सकें।
गहलोत ने केंद्र सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताते हुए कहा कि देश में आज नफरत का माहौल बनाया जा रहा है। व्यापार ठप है। ऐसा माहौल आजादी के बाद नहीं अब तक नहीं देखा गया है। पुलवामा हमले को लेकर केंद्र सरकार कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रही जबकि माहौल बनाया जा रहा है। लोगों में आक्रोश उत्पन्न हो रहा है। 

 

गहलोत ने कहा कि यह सब जनता का ध्यान बंटाने के लिये किया जा रहा है। गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कल अजमेर में दिये नारे ‘मोदी है तो मुमकिन है’ की खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि मोदी है तो नामुमकिन है। मोदी ने पांच साल में क्या किया है। उन्होंने एक भी वायदा पूरा नहीं किया जो उन्होंने पिछले चुनाव से पहले किये थे। वह चुनाव जीतने के लिये कुछ भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी कांग्रेस पर गलत तथ्यों पर आरोप लगा रहे हैं। जनता उनको सबक सिखायेगी। गहलोत ने कहा कि भाजपा और आरएसएस या मोदी हो इनकी की एक ही भाषा है। ये धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण कर रहे हैं। ध्रुवीकरण की राजनीति देश के लिये खतरनाक है। कांग्रेस ने ऐसे लोगों को कभी पनपने नहीं दिया।

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उच्चतम न्यायालय ने इस मंत्री के बेटे की याचिका पर, केंद्र से किया जवाब तलब

नयी दिल्ली | उच्चतम न्यायालय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदम्बरम के पुत्र कार्ति चिदम्बरम की विदेश यात्रा की अनुमति संबंधी याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है।मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने कार्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। न्यायालय ने ईडी को अगले सोमवार (28 जनवरी) तक जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।कार्ति ने 21 से 28 फरवरी तक फ्रांस की यात्रा करने की अनुमति शीर्ष अदालत से मांगी है।

न्यायालय ने गत 16 जनवरी को कार्ति की याचिका पर त्वरित सुनवाई से यह कहते हुए इन्कार कर दिया था कि उसके पास और भी महत्वपूर्ण मामले हैं। जब कार्ति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के. वी. विश्वनाथन ने खंडपीठ के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख किया था, तो न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा था, “आप कार्ति चिदम्बरम की बात कर रहे हैं? उन्हें वहीं रहने दीजिए जहां वह हैं। हमारे पास और भी महत्वपूर्ण कार्य हैं।”गौरतलब है कि कार्ति ने विदेश जाने की अनुमति संबंधी याचिका गत वर्ष नवम्बर में ही दायर की थी, लेकिन उन्हें अनुमति अभी नहीं मिली है। वह एयरसेल-मैक्सिस सौदा मामले में आरोपी हैं और इसमें सीबीआई एवं प्रवर्तन निदेशालय की जांच जारी है।