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कांग्रेस के इस नेता ने कब्रिस्तान में जाकर पूर्वजो से पूछा, बताओ नागरिकता के सबूत​ किस दीवार में चुनवा रखे हैं

पूरे देश में जिस नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ आंदोलन चल रहा है, उसके विरोध में कांग्रेस के एक नेता ने कब्रिस्तान में जाकर अपने मुर्दा पूर्वजों से नागरिकता के सबूत मांगकर सभी को चौंका दिया।

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी की खिलाफत कर रही कांग्रेस के एक स्थानीय नेता ने यहां विरोध का अनूठा तरीका इजाद किया जब उन्होने कब्रिस्तान जाकर पूर्वजों से अपनी नागरिकता का सबूत देने की दुआ की।

कांग्रेस नेता हसीब अहमद ने बताया कि वह और कुछ मुस्लिम युवा भी दो दिन पहले सीएए के विरोध में कब्रिस्तान गए और अपने पूर्वजों से अपनी नागरिकता का सबूत देने के लिए रोते हुए दुआ की। अहमद ने कहा “ हमारे पास दस्तावेज नहीं हैं और हम पीढियों से भारत में रह रहे हैं। हम अपने पूर्वजों से गवाही देने के लिए कह रहे हैं कि हम इस देश के नागरिक हैं।

हम सरकार से आग्रह करते हैं कि अगर हमें डिटेंशन सेंटर भेजा जाता है तो हमारे पूर्वजों के अवशेष को भी वहां रखा जाए। हमारे लोगों ने देश के लिए अपनी कुर्बानियां दी हैं। उसे कैसे नकारा जा सकता है। कांग्रेसी नेता ने कहा कि जिस तरह सीएए-एनआरसी को लेकर विवाद हो रहा है उससे उन्हें डर है कि उन्हें डिटेंशन कैंप में न भेज दिया जाए। उनके पास दस्तावेज भी नहीं हैं।

हसीब ने कहा कि एनआरसी और सीएए को लेकर देश के अंदर विभाजन की राजनीति चल रही है। हमारे पास सरकार को दिखाने के लिए कोई कागजात नहीं है।

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सात सौ वर्ष पहले लिए गए मुहम्मद बिन तुगलक के इस निर्णय की याद आते ही आज भी कांप उठती है भारत की रूह

सुल्तान मुहम्मद बिन तुग़लक़ का नाम तो आप सबने इतिहास की पुस्तकों में अवश्य पढ़ा होगा। उसके वर्ष 1330 में लिए गए एक निर्णय को याद करके आज भी भारत की रूह कांप उठती है। उसने रातों—रात अचानक अपनी प्रजा को कंगाल कर दिया था क्योंकि उसने अपनी मुद्रा को बेकार घोषित कर दिया था। 21वीं शताब्दी में तीन साल पहले लिए एक ऐसे ही निर्णय की वजह से कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को तुगलक साबित करने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने नोटबन्दी की तीसरी सालगिरह पर कहा है की देश पर नोटबंदी का आतंकी हमला करने वाले गुनाहगारों को अभी कटघरे में खड़ा नहीं किया गया और देश की जनता को इस अन्याय से अभी न्याय नहीं मिला है।
गांधी ने शुक्रवार को ट्वीट किया “तीन साल पहले आज ही के दिन नोटबंदी की गयी थी जिसके कारण भारतीय अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई, कई लोगों की जानें गई, लाखों छोटे-मोटे कारोबारी बर्बाद हो गये लाखों भारतीय बेरोजगार हुए। जिन लोगों ने देश पर यह घातक हमला किया उन गुनाहगारों को अभी कटघरे में खड़ा नहीं किया गया और देश की जनता को इस अन्याय से अभी न्याय नहीं मिला है।।”
इस बीच, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा, “नोटबंदी को तीन साल हो गए। सरकार और इसके नीम हक़ीमों द्वारा किये गये ‘नोटबंदी- सारी बीमारियों का शर्तिया इलाज’ के सारे दावे एक-एक करके धराशायी हो गए।”
उन्होंने नोटबंदी को एक आपदा बताया और कहा “नोटबंदी एक आपदा थी जिसने हमारी अर्थव्यवस्था नष्ट कर दी। इस ‘तुग़लकी’ कदम की जिम्मेदारी अब कौन लेगा।”

कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि तीन साल पहले लिए गए इस फैसले की सजा देश आज भी भगुत रहा है। उन्होंने कहा “सुल्तान मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने वर्ष 1330 में देश की मुद्रा को बेकार कर दिया था। आठ नवंबर, 2016 को आज के समय के तुग़लक़ ने भी यही किया। तीन साल बीत गए पर देश अभी भी इसकी भुगत रहा है क्योंकि-अर्थव्यवस्था चौपट हो गई, रोजगार खत्म हो गया और न आतंकवाद रुका, न जाली नोटो का कारोबार, फिर कौन है इसका जिम्मेदार?”

कांग्रेस ने नोटबन्दी के तीन साल पूरे होने पर शुक्रवार को मोदी सरकार की नीतियों के विरोध में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सामने जमकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राजधानी के संसद मार्ग स्थित रिजर्व बैंक कार्यालय के सामने सुबह में प्रदर्शन किया। ये कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां और बैनर लिए मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों में महिलाएं और नोटबन्दी से प्रभवित आम आदमी भी शामिल थे। प्रदर्शनकारी देश की खराब अर्थव्यस्था के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे आठ नवंबर को अपने जीवन मे भूल नही सकते है क्योंकि उन्हें नोटेबन्दी का दंश झेलना पड़ा था। नोटेबन्दी से लाखों नौकरियां चली गयी और आर्थिक विकास प्रभावित हुआ। असंगठित क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए और कई छोटी कम्पनियां बर्बाद हो गई।

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केबीसी के अगले एपिसोड में पूछा जा सकता है ये सवाल, किस पार्टी को मिला है भारतीय जासूसी पार्टी का खिताब

केबीसी में ​अमिताभ बच्चन आजकल राजनीति से जुड़े सवाल अधिक पूछ हैं और अक्सर ऐसे सवालों का जवाब देने में प्रतिभागी नाकाम रहते हैं। ऐसे ही सवालों की लिस्ट में एक नया सवाल जुड़ने वाला है जिसे केबीसी के अगले एपिसोड में कभी भी पूछा जा सकता है क्योंकि ये सवाल ऐसा ही है जिसका जवाब बहुत कम लोग याद रखेंगे। सवाल ये हो सकता है कि भारत में हाल ही किस पार्टी को भारतीय जासूसी पार्टी का खिताब मिला है।

क्योंकि एक दिन पहले ही कांग्रेस ने केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि उसे इस साल अप्रैल-मई में बीते लाेकसभा चुनावों के समय इजरायली साॅफ्टवेयर पिगैसस के माध्यम से नेताओं, पत्रकारोंं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की जासूसी कराये जाने की पूरी जानकारी थी और वह इस मामले में रहस्यमयी एवं षड़यंत्रकारी चुप्पी साधे हुए है।
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने संवाददाता सम्मेलन में अपने आरोपों के समर्थन में कुछ दस्तावेज पेश करते हुए कहा, “अबकी बार जासूस सरकार।” उन्होंने कहा कि फेसबुक एवं व्हाट्सएप के मालिक ने 17 मई को अपनी रिपोर्ट में केन्द्र सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को इस बारे में जानकारी दे दी थी। उन्होंने कहा कि जासूसी के लिए इजरायल निर्मित जिस पिगैसस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया, उसे निर्माता कंपनी केवल एवं केवल सरकार एवं उसकी सुरक्षा एजेंसियों को ही बेचती है।

सुरजेवाला ने रिपोर्ट के आधार पर यह दावा भी किया कि पिगैसस की जासूसी निगाह से नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) और विदेश संचार निगम लिमिटेड भी प्रभावित रहे हैं। इसका मतलब यह है कि कोई भी जासूसी के दायरे से अछूता नहीं था। उन्होंने कहा कि सरकार यह सब जानने के बावजूद एक रहस्यमयी एवं षड़यंत्रकारी चुप्पी साधे रही। अमेरिका में मामला 30 अक्टूबर को सामने आने के बाद संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीटर पर अगले दिन कहा कि उन्होंने कंपनी से जानकारी मांगी है ।

उन्होंने कहा कि आज तक सरकार ने इस बारे में कुछ भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया है और पत्रकारों एवं संपादकों पर दबाव डाल कर सूत्रों के हवाले के झूठी बातें छपवा रही है। उन्होंने सरकार से पूछा कि वह बताये कि क्या चुनाव के लिए उसने राजनेताओं एवं पत्रकारों की जासूसी करवायी। क्या यह टेलीग्राफ अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम का उल्लंघन नहीं है। केन्द्र सरकार ने किसके कहने पर पिगैसस की खरीद एवं उसके गैरकानूनी इस्तेमाल की इजाजत दी। क्या यह काम प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार या गृहमंत्री ने किया था। केन्द्र सरकार ने इस पर रहस्यमयी चुप्पी क्यों साधे रखी। क्या सरकार इसके जिम्मेदार मंत्रियों या अधिकारियों पर कोई कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से इस मामले में भाजपा की संलिप्तता उजागर हुई है उसके बाद पार्टी के नाम का अर्थ अब भारतीय जासूस पार्टी हो गया है।

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कांग्रेस के 21 मंत्रियों ने दिया इस्तीफा

बेंगलुरु,। कर्नाटक में मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जनता दल (एस) गठबंधन सरकार को बचाने के प्रयास के तहत सोमवार को कांग्रेस के सभी 21 मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया।

कांग्रेस नेताओं ने ऐसा करके पार्टी हाईकमान को मंत्रिमंडल को परिवर्तन करने की खुली छूट दे दी है। गठबंधन साथियों के बीच गंभीर मतभेदों के कारण गत सप्ताह कांग्रेस के 10 और जनता दल (सेक्युलर) के तीन विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार को अपना त्यागपत्र सौंप दिया था।

इस्तीफा देने वाले अधिकतर विधायक मुंबई के एक होटल में रह रहे हैं। इन विधायकों के इस्तीफे से  कुमारस्वामी की सरकार पर संकट के बादल गहरा गये हैं।

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कांग्रेस ने खोज निकाले पाटी को चुनाव हरवाने वाले गद्दार, अब नपेगी इन वरिष्ठ नेताओं की गर्दन

राजनीतिक संवाददाता
नई दिल्ली. इतिहास की सबसे करारी पराजय के बाद उपजी परिस्थितियों से जूझ रही कांग्रेस ने उन गद्दारों को खोज निकाला है जिन्होंने पार्टी को हराने के लिए अंदरखाने काम किया था। कार्यसमिति की पिछले दिनों हुई बैठक में पार्टी के खिलाफ काम करने वाले इन वरिष्ठ नेताओं को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने यह कहकर चौंका दिया था कि वे जानती हैं कि कांग्रेस के हत्यारे इसी कमरे में बैठे हैं।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार शनिवार को यहां हुई कार्य समिति की बैठक में प्रियंका ने कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया और बैठक में मौजूद पार्टी के कुछ शीर्ष नेताओं पर उनका लिए बरसते हुए कहा,“कांग्रेस के हत्यारे इसी कमरे में बैठे हैं।”
सूत्रों ने बताया कि प्रियंका ही नहीं पूरा गांधी परिवार इन नेताओं की काम करने की शैली से नाराज है। करीब चार घंटे चली बैठक में इसी नाराजगी का इजहार करते हुए सोनिया गांधी ने एक शब्द नहीं बोला। उनकी चुप्पी भी इशारा कर रही थी कि पार्टी को कमजोर करने में उनके ही कुछ नजदीकी लोग शामिल है।

सूत्रों ने बताया कि प्रियंका का गुस्सा तब फूटा जब राहुल गांधी ने बैठक में मौजूद कुछ वरिष्ठ नेताओं के नाम लिए और कहा कि उन्होंने अपने बेटों को टिकट देने के लिए दबाव बनाया था लेकिन चुनाव के समय जो संकट सामने था पार्टी को उससे बाहर निकालने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया।

सूत्रों ने यह भी कहा कि गांधी को एक महीने तक उनके इस्तीफे के कदम के बारे में विचार करने की राय भी प्रियंका ने ही दी थी। यहां तक कहा जा रहा है कि पिछले दो दिन से वह गांधी के संपर्क में हैं और उन्होंने कुछ काग्रेस नेताओं की कार्यशैली पर अपनी नाराजगी दर्ज की है। पिछले दो दिन से सोनिया गांधी, राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी समिति की बैठक के बाद पैदा हुई राजनीतिक स्थिति पर लगातार परस्पर विचार विमर्श कर रहे हैं। राहुल गांधी ने आवास पर मिलने आए पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इन नेताओं में श्रीमती सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी के अलावा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट तथा पार्टी महासचिव के सी वेणुगोपाल शामिल थे।

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कमल के नीचे क्यों लिखा है ये शब्द, देश के पांच प्रमुख विपक्षी दल बिफरे

कांग्रेस सहित पांच विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर भारतीय जनता पार्टी के चुनाव चिह्न कमल के नीचे भाजपा शब्द लिखा नजर आ रहा है जो एक साजिश है और नियमों के खिलाफ है।

 

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, तेलुगु देशम पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी तथा राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं ने चुनाव आयोग के समक्ष यह मामला उठाया और आयोग से इस संबंध में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

 

आयोग से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी, तृणमूल कांग्रेस के नेता दिनेश त्रिवेदी तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता डी पी त्रिपाठी ने पत्रकारों से कहा कि ईवीएम पर कमल के निशान के नीचे भाजपा लिखा हुआ है।
इस संबंध में इन नेताओं ने त्रिवेदी के चुनाव क्षेत्र के एक मतदान केंद्र से ईवीवीएम पर अंकित चिह्नों की एक प्रति दिखायी। उन्होंने कहा कि पहले कमल के फूल के नीचे पानी दिखाया जाता था लेकिन इस बार पानी की जगह भाजपा लिखा हुआ दिखायी देता है।

 

उन्होंने कहा कि ईवीएम में या चुनाव मतपत्र में किसी भी चुनाव चिन्ह के पास किसी भी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिखा जा सकता है। यह चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित नियम है लेकिन भाजपा ने इस नियम का उल्लंघन किया है। यह काम किसने किया है इसकी गहनता जांच होनी चाहिए और आयोग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

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प्रधानमंत्री नहीं बनता ये खूबसूरत नेता तो आज भी पुरुषों की पगचम्पी करती दिखती भारत की महिलाएं

लोकसभा चुनावों के बाद अपनी सरकार बनने पर देश के दोनों ही प्रमुख दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस, महिला सशक्तिकरण के भले ही कितने भी दावे कर लें, लेकिन महिलाओं को संसद में प्रतिनिधित्व देने के मामले में दोनों ही दलों के आंकड़े आधी आबादी के लिए आस जगाने वाले नहीं दिखाई देते।

मध्यप्रदेश की सभी 29 सीटों पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। भाजपा ने जहां एक ओर मात्र चार महिलाओं को टिकट दिए हैं, वहीं कांग्रेस के लिए ये संख्या पांच है। देश की संसद में लंबे समय तक प्रदेश की महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर चुकीं लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस बार चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद अब इन दोनों के संसदीय क्षेत्रों पर भी भाजपा ने पुरुष उम्मीदवारों के नाम तय किए हैं।

भाजपा ने भोपाल संसदीय क्षेत्र से प्रज्ञा सिंह ठाकुर, शहडोल से हिमाद्री सिंह, सीधी से रीति पाठक और भिंड से संध्या राय के नाम तय किए हैं। वहीं कांग्रेस ने खजुराहो से कविता सिंह, राजगढ़ से मोना सुस्तानी, टीकमगढ़ से किरण अहिरवार, मंदसौर से मीनाक्षी नटराजन और शहडोल से प्रमिला सिंह को मैदान में उतारा है।

भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता राजो मालवीय ने इस बारे में कहा कि लोकसभा चुनाव में देश के आंकड़े देखकर बात होती है। पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी संख्या में महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया है। भाजपा में संगठन में भी आरक्षण दिया जाता हैं, जो व्यवस्था अन्य दलों में नहीं मिलती। जीत की संभावनाओं को देख कर टिकट वितरण किया जाता है।

वहीं कांग्रेस की मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने स्वीकारोक्ति देते हुए कहा कि पुरुष प्रधान राजनीति में अगर महिलाओं को समान अवसर मिलते तो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को आरक्षण लाने की जरुरत नहीं होती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण की प्रबल पक्षधर है और सत्ता में आते ही इस पर काम पूरा करेगी।

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इस दल ने किए सीधे सवाल, क्या आसमान से अव​तरित हुए हैं मोदी

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हेलीकाप्टर की तलाशी लेने वाले दस्ते के अधिकारी के निलम्बन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे गलत बताया और सवाल किया कि आखिर इस तरह की कार्रवाई कर क्या संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है।

 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने आज ट्वीट किया “चुनाव के दौरान के कई उदाहरण हैं जब आयोग ने कांग्रेस के वर्तमान तथा पूर्व अध्यक्ष के काफिले की तलाशी की है। एसपीजी सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति की निजी स्तर पर जांच पड़ताल नहीं की जा सकती। सवाल है कि प्रधानमंत्री के हेलीकाप्टर की जांच करने वाले अधिकारी को निलम्बित क्यों किया गया। क्या संदेश दिया जा रहा है। क्या कानून कुछ लोगों के लिए अलग ही है।

उन्होंने कहा कि जब एसपीजी सुरक्षा प्राप्त कांग्रेस नेताओं की जांच की जा सकती है तो फिर भाजपा के नेताओं पर यह नियम लागू क्यों नहीं होता है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी इस निलम्बन को लेकर मोदी पर तीखा हमला किया और कहा “मोदी एजेंसियों का दुरुपयोग कर पूरे विपक्ष पर छापेमारी का खेल रचते है, वो 15 मिनट की चेकिंग से इतना डर गये कि चुनाव आयोग को अपने ही अफ़सर को हटाना पड़ा!

कर्नाटक में ‘ब्लैक बाक्स’ निकलने के बाद मोदी को अपना हेलीकाप्टर चेक कराने में इतनी आपत्ति क्यों?”
गौरतलब है कि मंगलवार को मोदी जब ओडिशा के संबलपुर में रैली के लिए पहुंचे तो उसी दौरान चुनाव आयोग के एक उड़न दस्‍ते ने उनके हेलिकॉप्‍टर की तलाशी ली लेकिन बाद में आयोग ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने काे आरोप में दस्ते के प्रमुख मोहम्‍मद मोहसिन को निलंबित कर दिया। आयोग ने कहा है कि एसपीजी सुरक्षा प्राप्‍त व्‍यक्तियों के लिए तयशुदा निर्देशों का पालन नहीं किया गया है।

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कांग्रेस के शासन में आतंकवाद कैंसर की तरह बढा, अब इसका इलाज होगा पक्का : मोदी

सोनगढ़| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद की तुलना कैंसर से करते हुए आज कहा कि कांग्रेस के शासन के दौरान पैदा हुए और पले-बढ़े आतंकवाद का उनकी सरकार की ओर से शुरू किया गया कड़ा इलाज आगे भी इसलिए जारी रहना चाहिए क्योंकि उपचार के बीच रूकने पर कैंसर की तरह ही यह दोबारा तेजी से फैल जायेगा।मोदी ने कहा कि यह उपचार लगातार जारी रखने के लिए भी उन्हेें दोबारा मौका दिया जाना चाहिए।उन्होंने भ्रष्टाचार काे एक और कैंसर बताते हुए कांग्रेस को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।प्रधानमंत्री ने अपने गृह राज्य गुजरात के तापी व्यारा जिले और बारडोली लोकसभा क्षेत्र के सोनगढ़ मे एक चुनावी सभा में यह बातें कहीं।

मोदी ने कहा, ‘एक जमाना था जब देश में आतंकी हमले होते थे तो सरकार हाथ पर हाथ रख कर बैठी रहती थी। मैने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर अपने शासन के दौरान राज्य में आतंकियों के सभी स्लीपर सेल का सफाया करवा दिया। अब गुजरात में सभी चैन, सद्भावना और भाईचारे के साथ रहते हैं। ऐसे ही पूरे देश में ऐसे माहौल के लिए आतंकवाद का सफाया होना चाहिए और येन केन प्रकारेण (जिस तरह से भी संभव हो) इसे जड़ से उखाड़ा जाना चाहिए। इसे खाद पानी पड़ोस से मिलता है इसलिए मैने जो जरूरी था वह (एयरियल स्ट्राइक) कराया। अब कांग्रेसियों और विपक्ष को इसमें भी आपत्ति है और वे सबूत मांग रहे हैं। अरे भाई पाकिस्तान रो रहा है आवाज सुनो तो समझ आये पर इन्हें भारत के सपूतों पर विश्वास नहीं, पाकिस्तान के लोगों पर भरोसा है। ऐसे लोगों को क्या देश सौंपा जा सकता है।’

उन्होंने कहा कि आतंकवाद कैंसर जैसा है जो जन्मा, पला-बढ़ा कांग्रेस के जमाने में है। अगर इसके खिलाफ कार्रवाई बीच में बंद कर दो तो जैसे कैंसर की दवा बीच में बंद होने से बीमारी नहीं जाती वैसे ही कार्रवाई बीच में नहीं छोड़ी जा सकती है। और इसे उनके अलावा करेगा कौन। मोदी ने कहा, ‘देश में एक नाम बताओ जो अपना सिर लेकर आतंकवाद से मुकाबले के लिए निकलने को तैयार हो। एक बार यह आतंकवाद जाये तो सुख चैन की जिंदगी होगी। अभी तो मंदिर में जाओ तो भी पुलिस है और आतंकवाद के चलते प्रसाद की थैली तक की जांच करनी पड़ती है। आतंकवाद के कारण देश को सुरक्षा पर बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। इस परिस्थित को बदलने की जरूरत है।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस देश का दूसरा कैंसर भ्रष्टाचार का है जिसे खत्म किया जाना चाहिए। गुजरात मेें उनके शासन काल में किसी ने उन पर एक ऊंगली नहीं उठायी। पूर्व मुख्यमंत्री तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता अमरसिंह चौधरी विधानसभा में कहते थे कि मोदी जादूगर है। पर अब कांग्रेस कहते है कि चौकीदार चोर है। पर तुगलक रोड चंदा घोटाले में पैसा कहां से निकल रहा है। यह कैसी जादूगरी है। अब मुझे पता चल रहा है कि क्यों कांग्रेसी नेता अपने भाषण में नोटबंदी पर बार-बार प्रहार क्यों करते थे। हाल में छापेमारी के दौरान पहले ही घंटे में 280 करोड़ रूपये बरामद हुए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस गरीब बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से दिये गये पैसे से घोटाला करती है। ऐसे लोगों को जनता रूपी ईश्वर माफ नहीं करेगी। 15 साल तक मप्र में सत्ता से बाहर रहने के बाद वहां पैर रखने का मौका मिलते ही घोटाला करने वाली कांग्रेस को अगर पांच साल बाद केंद्र मेें सत्तावापसी का मौका मिला तो यह पांच मिनट भी नहीं लगायेगी। ऐसी लूट करने वालों को कभी भी दिल्ली की सत्ता में वापसी का मौका नहीं दिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी दावा किया कि उनको हराने के लिए एक दूसरे के साथ हाथ मिला कर फोटो खिंचाने वाले विपक्षी दल अब आपस में ही लड़ रहे हैं। ऐसे लोगों जिनको न जनता की और न भविष्य की पड़ी है उन्हें देश देना नहीं चाहिए।मोदी ने कांग्रेस की घोषणा पत्र को ढकोलसा पत्र बताते हुए इस पर अपने आरोप दोहराये। उन्होंने पार्टी पर गुजरात विरोधी मानसिकता का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश को एक करने वाले सरदार पटेल आज अगर जीवित होते तो कश्मीर से सेना हटाने और देश को टुकड़े करने की बात कहने वालों के खिलाफ राजद्रोह की धारा नहीं लगाने की वकालत करने वाले इस घोषणा पत्र को एक मिनट के लिए स्वीकार नहीं करते।मोदी ने विश्वास जताया कि 23 मई को मतगणना के बाद दोबारा केंद्र मेें भाजपा की ही सरकार बनेगी।

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किन्नर स्नेहा ने भरा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र

मुंबई | उत्तर मध्य मुंबई चुनाव क्षेत्र से वर्तमान सांसद पूनम महाजन और कांग्रेस की प्रिया दत्त को टक्कर देने के लिए स्नेहा निवृत्ति काले (किन्नर) ने बुधवार को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र भरा।

वाणिज्य में स्नातक की शिक्षा ग्रहण कर चुकी स्नेहा (27) ने कहा कि उनके समुदाय से पहली बार लोकसभा का चुनाव वह लड़ रही हैं।उन्होंने कहा आजादी के बाद किसी भी सरकार ने उनके समुदाय के विकास पर ध्यान नहीं दिया।नामांकन पत्र भरने के बाद स्नेहा ने कहा कि यदि वह चुनाव जीतती हैं तो आर्थिकरूप से पिछड़े वर्ग, विधवाओं, सैनिकों और अपने समुदाय के विकास के लिए काम करेंगी।

उन्होंने कहा कि उत्तर मध्य मुंबई लोकसभा चुनाव क्षेत्र में लगभग 30-40 हजार उनके समुदाय के लोग रहते हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे समुदाय के लोग चुनाव में मेरी हर संभव मदद करेंगे।हालांकि प्रिया दत्त और पूनम महाजन ने अभी तक अपना नामांकन पत्र नहीं भरा है।