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फेसबुक से फोटो चुराकर यूपी के दबंग अफसर को साइबर ठगों ने लगाया चूना

लॉकडाउन के चलते बैंकिंग लेनदेन कम हो जाने से आम नागरिकों को ठगी का शिकार नहीं बना पा रहे साइबर ठग अब पुलिस अफसरों को शिकार बना रहे हैं। ठगों ने राष्ट्रीय राजधानी से सटे हाईटेक शहर ग्रेटर नोएडा के पुलिस उपायुक्त राजेश कुमार सिंह को फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर मोटी ठगी करने की कोशिश की है।

 

राजेश कुमार सिंह की गिनती यूपी पुलिस के दबंग अफसरों में की जाती है। डीसीपी राजेश कुमार सिंह के नाम से अनजान लोगों ने फर्जी फेसबुक आईडी बना ली। इसकी जानकारी उन्हें अपने कुछ परिचितों से मिली। साइबर ठगों ने उनके असली फेसबुक एकाउंट से फोटो चोरी करके ऐसा किया। सिंह को तब पता चला जब लोगों ने उन्हें फोन करके पूछा कि उन्हें पैसे की क्या जरूरत पड़ गई। अगर पैसे चाहिए तो सीधे मोबाइल पर मैसेज या बात करके ले लेते। फेसबुक के जरिये रुपए क्यों मांग रहे हैं?
साइबर ठगों ने पैसे मांगने के साथ ही फर्जी फेसबुक आईडी से तमाम लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भी भेज दी। संभव है कि ठग फर्जी फेसबुक आईडी पर कुछ और अनजान लोगों को जल्दी से जल्दी जोड़कर उन्हें अपने जाल में फंसाना चाह रहे हों, हालांकि अब इसके चांस कम हैं। क्योंकि डीसीपी ने अपने सर्किल में सोशल मीडिया के ही जरिये इस फर्जी फेसबुक आईडी के बारे में बताकर अधिकांश परिचितों को अलर्ट कर दिया है। उल्लेखनीय है कि गौतमबुद्ध नगर जिले में ही कुछ समय पहले तैनात रह चुके एक इंस्पेक्टर के साथ भी इसी तरह की ठगी का मामला सामने आया था। इसी तरह बीते साल दिल्ली के एक संयुक्त पुलिस आयुक्त के साथ तो इस सबसे भी चार कदम आगे साइबर ठग पेश आये थे। ट्रांसपोर्ट विंग में तैनात इन संयुक्त पुलिस आयुक्त के कार्ड से साइबर ठगों ने 28 हजार रुपये निकाल लिये थे। संयुक्त पुलिस आयुक्त को साइबर ठगों द्वारा ठग लिये जाने की जानकारी तब हुई जब वे पुलिस मुख्यालय (आईटीओ) में अपने दफ्तर में बैठे हुए थे, उसी समय उन्हें मोबाइल पर कार्ड से 28 हजार रुपये निकाल लिये जाने का मैसेज मिला।

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ठगी के शिकार खुद देते हैं बैंक खातों के आॅनलाइन ठगों को ठगी करने का निमंत्रण

क्या आप जानते हैं कि बढ़ते बैंकिंग फ्राड के पीछे कौन है! नाम सुनकर चौंक जाएंगे, जी हां, इसके पीछे हैं आप स्वयं यानि ग्राहक। स्टेट्स सिम्बल के चलते आजकल मॉल्स में जाकर खरीदारी करने का चलन बढ़ गया है। उन्हीं मॉल, बाजारों में बिल के वक्त सेल्समैन जैसे ही पूछता है कि अपना मोबाइल नम्बर बोलिए तो आप बिना कोई सवाल किए तोते की तरह अपने मोबाइल नम्बर को दोहरा देते हैं जबकि उसी नम्बर को अपनी निजी लाइफ में ज्यादा से ज्यादा लोगों को देने से कतराते हैं। Fraud victims:

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ग्राहक यहां से खरीदते हैं अपने बैंक खातों की मौत सामान

बचत समेत तमाम किस्म के बैंक खातों के लिए खरीदारी का ये नया स्टे्टस सिम्बल मौत का सामान बन गया है। एक अनुमान के मुताबिक पूरे देश के माल्स, डिपार्टमेंटल स्टोर्स सहित एक ही परिसर में तमाम तरह के छोटे से बड़े आइटम बेचने वाले बड़े बाजारों में प्रतिदिन 2 से तीन करोड़ ग्राहक खरीदारी करते हैं। इन ग्राहकों में 50 फीसदी नए मोबाइल नम्बरयुक्त ग्राहक होते हैं। इस तरह इनके सेल्स डिपार्टमेंटों के पास प्रति माह कई करोड़ मोबाइल नम्बर आ जाते हैं।

Fraud victims

 

ग्रे मार्केट में बेच दिए जाते हैं मोबाइल नम्बर

अब सवाल उठता है कि इन नम्बरों का ये सब करते क्या हैं। इन नम्बरों से वे अपने ग्राहकों के पास ​विभिन्न कम्पनियों के अपने यहां उपलब्ध आइटमों की खरीद के लिए उकसाने वाले विज्ञापन भेजते हैं। उकसाहट में आकर विज्ञापन प्राप्त करने वालों में से 25 फीसदी खरीद का मन बनाकर प्रोड़क्ट की खासियत सर्च करते हुए निर्माता की साइट तक जाते हैं। Fraud victims:  इसी यात्रा के दौरान ठग आपके नम्बरों को हैकिंग के जरिए लपक लेते हैं। इसके अलावा कम्पनियां इन नम्बरों को विज्ञापन एजेसिंयों बेचकर भी पैसा कमाती हैं। ये एजेंसिया नम्बरों को ग्रे मार्केट से परोक्ष रूप से कनेक्ट कम्पनियों को बेचते हैं। कई कम्पनियां भी नम्बरों को ग्रे मार्केट में सीधे बेचती हैं।

Fraud victims

 

ऐसे फेंकते हैं ठगी का जाल

बैंकिंग खातों से आॅनलाइन ठगी के मामलों की जांच के दौरान पुलिस कई बार नम्बर बेचने वाले दलालों तक भी पहुंच जाती है लेकिन अधिकांश जांच अधिकारी ठगों के मोबाइल नम्बर हासिल करने के नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश नहीं करते। Fraud victims: बैंक खातों से आॅनलाइन ठगी करने वाले गिरोह बड़े ही शातिर तरीके से काम करते हैं। नम्बर मिलते ही वे आपका नाम,पता सब हासिल कर लेते हैं, फिर खास तरीके से चिन्हित करके ठगी का जाल फेंकते हैं। हालांकि आजकल लोग काफी जागरूक होते जा रहे है। इसके बावजूद बैंक खातों से आॅनलाइन ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

ऐसे हो जाएंगे ठगों की पहुुंच से बाहर

तो, निश्चित तौर पर आपको समझ आ गया होगा, बाजार में खरीददारी के बाद बिल बनवाते वक्त अपना मोबाइल नम्बर कदापि नहीं दें। कम्पनियां, व्यापारी अथवा अन्य कानूनन मोबाइल नम्बर देने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। Fraud victims:जैसे ही आप ऐसा करेंगे तो एक सप्ताह में आपके नम्बर पर विज्ञापनों के एसएमएस आश्चर्यजनक रूप से घट जाते हैं। वॉइस कॉल में आश्चर्यजनक गिरावट आ जाती है। जैसे—जैसे यह आगे बढ़ेगा, आप बैंक खातों से आॅनलाइन ठगी करने वालों की पहुंच से दूर होते चले जाएंगे।