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कोरोना की दूसरी लहर में देश बंद नहीं होगा- trump

वाशिंगटन। (शिन्हुआ) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कोरोना वायरस (कोविड-19) महमारी की दूसरी लहर में देश बंद नहीं होगा।

मिशिगन राज्य में फोर्ड उत्पादन संयंत्र के दौरे के दौरान पत्रकार के एक सवाल के जवाब में  ट्रंप ने कहा, “लोग कह रहे है बहुत पृथक संभावना है। यह मानक है और हम विपत्ति से बाहर आ रहे है। हम देश को बंद नहीं कर रहे है। हम विपत्ति से बाहर रहे है।”

उन्होंने कहा, “ एक स्थायी लॉकडाउन स्वस्थ राज्य या स्वस्थ देश की रणनीति नहीं है। हमारे देश को बंद करने का कोई मतलब नहीं है।” राष्ट्रपति ने कहा, “कभी न खत्म होने वाले लॉकडाउन एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा को आमंत्रित करेगा।” अपने लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए हमारे पास एक कामकाजी अर्थव्यवस्था होनी चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के सभी 50 राज्यों ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं को गति देने के उद्देश्य से कोरोना वायरस प्रतिबंधों में ढील देने की शुरु करने योजना की घोषणा की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सर्दी के मौसम में वायरस की दूसरी लहर आने की संभावना को लेकर चेतावनी दी है।

  • अमेरिका में अभी तक डेढ़ लाख लोग इस महमारी मारी से बीमारी है और 90 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों के अनुसार जून की शुरुआत तक देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या एक लाख तक पहुंचने की संभावना है।
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लालची हैं तो सावधान, जलेबी जैसा है आयकर छूट का टेढ़ा—मेढ़ा पिटारा

लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था के कारण रोष में दिख रहे मध्यम आयवर्ग के मतदाताओं को लुभाने के लिए सरकार आयकर छूट में राहत का पिटारा लेकर आई है, लेकिन इसका रास्ता जलेबी जैसा बना दिया है। जलेबी की तरह टेढ़ा—मेढ़ा ये पिटारा इस तरह डिजायन किया गया है कि सांप भी मर जाए और लाठी भी नहीं टूटे। उसने टैक्स राहत का ऐलान करने के साथ ही इनकम टैक्स के दो रिजीम बना दिए गए हैं. एक तो पुराना रिजीम है, जिसमें डिडक्शन और छूट ले सकते हैं. लेकिन नई व्यवस्था में जाएंगे तो पुरानी व्यवस्था में मिल रही छूट को छोड़ना होगा.

नई टैक्स व्यवस्था के तहत, 2.5 लाख रुपये तक की आय टैक्स मुक्त रहेगी. 2.5 से पांच लाख तक की आय पर पांच फीसदी की दर से टैक्स लगेगा, लेकिन 12,500 रुपये की राहत बने रहने से इस सीमा तक की आय पर कोई कर नहीं लगेगा. पांच से साढ़े सात लाख रुपये तक की आय पर 10 फीसदी, साढ़े सात से 10 लाख रुपये तक की आय पर 15 फीसदी, 10-12.5 लाख रुपये तक की आय पर 20 फीसदी और 12.5 से 15 लाख रुपये तक की आय पर 25 फीसदी की दर से इनकम टैक्स का प्रस्ताव है.

अगर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये की छूट का फायदा उठा रहे हैं. धारा 80 डी या एनपीएस दोनों में से किसी एक को चुनते हैं और 50 हजार की अधिकतम छूट का फायदा लेते हैं. 50 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन ले लिया. इसके अलावा होमलोन इंटरेस्ट पर 2 लाख की छूट ले ली. ये सब छूट कुल 4.5 लाख रुपये की हो गई. अगर इनकम 7.5 लाख रुपये सालाना मान लें और ऊपर बताए गई कुल छूट (4.5 लाख रुपये) का फायदा उठा रहे हैं तो डिडक्शन के साथ इनकम 3 लाख रुपये रह जाती है, जो 5 लाख रुपये से कम है, ऐसे में पुरानी टैक्स व्यवस्था के हिसाब से कोई टैक्स नहीं लगेगा.

नए टैक्स सिस्टम में ऊपर बताई गई किसी भी छूट का फायदा नहीं मिलेगा और 4 फीसदी सेस के साथ 39000 रुपये टैक्स देना होगा. ऊपर ली गई छूट के साथ ही 10 लाख की इनकम पर पुरानी टैक्स व्यवस्था में 4 फीसदी सेस के साथ 23400 रुपये का टैक्स देना होगा। नई टैक्स व्यवस्था के हिसाब से 78000 रुपये का टैक्स देना होगा. बाकी स्लैब में 12.5 लाख, 15 लाख, 20 लाख रुपये आय लें तो भी इसी तरह कैलकुलेशन करने पर नई व्यवस्था के तहत ज्यादा टैक्स सामने आता है. याद रखें नए सिस्टम में जाने पर एलटीसी, एचआरए, फैमिली पेंशन जैसे डिडक्शन से भी हाथ धोना पड़ेगा. साथ ही एक बार नई टैक्स व्यवस्था को चुनने के बाद अगले सालों में इससे बाहर नहीं आया जा सकता।

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मोदी सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा ​ये नया फंदा, इस बार बचना मुश्किल

सुप्रीम कोर्ट से एक के बाद एक आ रहे फैसलों से और ताकतवर हुई मोदी सरकार के लिए ये नया फंदा टेढ़ी खीर साबित होगा क्योंकि इस बार विपक्षी दलों की तैयारी उसे पूरी तरह घेर लेने की है। अर्थव्यवस्था में मंदी, महाराष्ट्र के घटनाक्रम और जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को खत्म करने तथा किसानों के मुद्दे पर विपक्षी दलों के कड़े तेवरों को देखते हुए आगामी शीतकालीन सत्र के हंगामेदार होने की संभावना है और इसे सुचारू ढंग से चलाना सरकार के लिए टेढी खीर होगा।

शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू होगा और 13 दिसम्बर तक चलेगा। मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद यह संसद का दूसरा सत्र होगा। जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किये जाने और इसका दो केन्द्र शासित प्रदेशों में विभाजन किये जाने के बाद भी संसद का सत्र पहली बार बुलाया गया है। सरकार ने इससे संबंधित विधेयक सत्र के अंतिम दिनों में पारित कराये थे और विपक्ष विरोध के बावजूद इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में विफल रहा था। इस बार वह इस मुद्दे को सत्र के दौरान जोर-शोर से उठाने की पूरी कोशिश करेगा।
राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने सत्र के दौरान सुचारू कामकाज के लिए सभी विपक्षी दलों के साथ सत्र शुरू होने से एक दिन पहले रविवार को अपने निवास पर बैठक बुलायी है। बैठक में वह सभी दलों के नेताओं से पिछले सत्र की तरह विधायी कामकाज में सहयोग की अपील के साथ साथ उनके सुझाव भी मांगेगे।
लोकसभा चुनाव में शानदार जीत के साथ सत्ता में वापसी के बाद पिछले संसद सत्र में रिकार्डतोड़ विधायी कामकाज से उत्साहित मोदी सरकार एक बार फिर लंबित विधेयकों तथा नये विधेयकों के भारी भरकम एजेन्डे के साथ संसद सत्र की रणनीति बनाने में जुटी है। उधर सरकार कराधान कानून (संशोधन)अध्यादेश 2019 और देश में ई सिगरेट तथा ई हुक्का पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित अध्यादेश की जगह विधेयक लेकर आयेगी। इसके अलावा पिछले सत्र में लंबित रहे विधेयकों को भी पारित कराने के लिए सरकार कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन के फैसले पर भी संसद की मुहर लगेगी।

अयोध्या में विवादित जमीन पर राममंदिर निर्माण के लिए एक न्यास का गठन करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश के मद्देनजर सरकार इसी सत्र में एक विधेयक भी ला सकती है। विधेयक में सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ भूमि के अधिग्रहण का भी प्रावधान किये जाने की संभावना है।
राफेल लड़ाकू विमान सौदा मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा पुनर्विचार याचिका को खारिज किये जाने से भी सरकार को राहत मिली है और अब विपक्ष इस मामले को संसद में उठाने से पहले सोचेेगा। न्यायालय ने उसके पहले के फैसले के खिलाफ सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया। न्यायालय ने अपने फैसले में सौदे की स्वतंत्र जांच कराने की मांग ठुकरा दी थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले लोकसभा चुनाव में इस मामले को पूरे जोर शाेर से उठाया था।

कांग्रेस ने संसद सत्र शुरू होने से लगभग दो सप्ताह पहले ही 5 नवम्बर को विपक्षी दलों की बैठक बुलाकर सरकार को घेरने की व्यूहरचना पर काम शुरू कर दिया था। बैठक में मौजूद 13 विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया था कि वह अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत और किसानों के मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठा रही है और इसे देखते हुए विपक्ष सरकार को संसद से सड़क तक कठघरे में खड़ा करेगा।
महाराष्ट्र के घटनाक्रम की छाया भी संसद सत्र पर दिखायी देगी। तीन दशकों से भाजपा की मजबूत सहयोगी रही शिव सेना ने महाराष्ट्र में सरकार के गठन के दौरान पनपी तल्खी के बाद उससे नाता तोड़ लिया है। भाजपा को इस बार संसद में विभिन्न मुद्दों पर शिव सेना की नाराजगी से भी दो- चार होना पड़ेगा। उधर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने भी पार्टी महासचिवों के साथ बैठक की है। सूत्रों के अनुसार बैठक में आगामी संसद सत्र के दौरान पार्टी की रणनीति पर भी चर्चा की गयी।

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यह देश पहुंचा दिवालिया होने के कगार पर : असद अमर

इस्लामाबाद| पाकिस्तानी वित्त मंत्री असद अमर ने कहा है कि पाकिस्तान का मूल्य रिण इतनी खतरनाक ऊंचाई पर पहुंच चुका है कि देश दिवालिया होने के कगार के निकट आ गया है।सोशल मीडिया के साथ देश की अर्थव्यवस्था के संबंध में सवाल जवाब के विशेष सत्र में उमर ने बुधवार को कहा,“ आप इतने भारी रिण के बोझ के साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास जा रहे हैं। हमें भारी अंतर को पाटना है।” उन्होंने कहा,“अगर पीएमएलएन समय के नंबर को देखें तो मंहगाई दहाई अंक में थी, हम शुक्रगुजार हैं कि अभी यह उस स्तर को नहीं छू पाई है।”

जियो न्यूज के मुताबिक वित्त मंत्री ने कहा कि पूर्व की भांति मंहगाई अभी दहाई अंक नहीं छू पाई है। उन्होंने कहा,“पहले देखें तो मंहगाई ने समाज के हर तबके को समान रूप से प्रभावित किया। यह सही है कि मंहगाई ने गरीबों पर अधिक असर डाला, हमारे शासन में यह स्थिति भिन्न है, उच्च आय वर्ग की तुलना में गरीब पर महंगाई का अपेक्षाकृत कम प्रभाव हुआ है।”

उमर ने माना अर्थव्यवस्था में मंदी है जिसके परिणामस्वरूप रोजगार की दर धीमी है। उन्होंने कहा,“आप कह रहे हैं मेरी सारी नीतियां इशाक डार की तरह ही हैं, इशाक डार का कहना है कि मैंनें अर्थव्यवस्था को चौपट कर डाला। उनके कार्यकाल के दौरान पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार निर्यात नहीं बढ़ा। डालर मजबूत हुआ पहले की आर्थिक नीतियों की वजह से और इस कारण एक देश के नाते हमें इतना अधिक नुकसान हुआ। यह मांग और आपूर्ति का मूल्य है।”

 

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विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था बनेगा भारत: सिन्हा

जौनपुर | केन्द्रीय रेल एवं संचार राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश जल्द ही इंग्लैंड को पछाड़ कर दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था का बन जाएगा।सिन्हा ने रविवार देर शाम यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा, “हमारे लिए गौरव की बात है कि देश विश्व की छठी अर्थव्यवस्था का देश बन चुका है और वह दिन दूर नहीं जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश जल्द ही इंग्लैंड को पछाड़ कर दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था का बन जाएगा।”

उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने वाला है और किसी भी चुनाव में मुद्दे बहुत होते है लेकिन एक- दो ही ऐसे मुद्दे होते है जो चुनाव को प्रभावित करते है। जिसमें सबसे बड़ा है नेतृत्व का मुद्दा और आज हमारे नेतृत्व का विरोध करने का साहस एवं हिम्मत किसी के पास नहीं है।

भाजपा नेता ने कहा कि मौजूदा राजग सरकार एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कोई मुकाबला नहीं है। इस देश के विपक्षी पार्टियों का आधार तथा विश्वसनीयता जनता के बीच नहीं रह गई है। पूरे विश्व में देश की ख्याति एवं प्रतिष्ठा को बढ़ाने का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाता है।

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ईरान पर यह देश बनायेगा निरंतर दबाव

वाशिंगटन। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने चेतावनी दी है कि जब तक ईरान एक सामान्य देश की तरह बर्ताव नहीं करता है, तब तक अमेरिका उस पर निरंतर दबाव बनाए रखेगा। पोम्पिओ ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से कहा, “ईरान के शासन के पास विकल्प है कि या तो वह अपनी गैरकानूनी गतिविधियों से 180 डिग्री मुड़कर अथवा एक सामान्य देश की तरह बर्ताव कर सकता है या फिर अपनी अर्थव्यवस्था को बर्बाद होते देख सकता है।

पोम्पिओ का यह बयान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासन काल में ईरान पर से हटाई गई पाबंदियों के सोमवार को फिर से प्रभावी होने के कुछ घंटे बाद आया।

 

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ईरान की आर्थिक स्थिति खराब करने में असफल रहा ये देश

तेहरान। ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा है कि वह प्रतिबंध लगाकर ईरान की आर्थिक स्थिति खराब करने में असफल हो गया है।

ईरान की सरकारी समाचार समिति इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की रिपोर्ट के अनुसार श्री खामेनेई ने कहा, “अमेरिका प्रतिबंधों के सहारे ईरान की अर्थव्यवस्था को तबाह करना चाहता था, लेकिन ईरान व्यापक रूप से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। पहले ईरानवासी सबकुछ आयात करने के आदी थे, लेकिन अब उन चीजों का उत्पादन किया जा रहा है।

 

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निजी वाहनों के पूर्ण उपयोग के लिए वाहन पूलिंग पर हो जोर: मोदी

नयी दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बताते हुये शुक्रवार को कहा कि निजी वाहनों का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के लिए वाहन पूलिंग की संभावनाओं का पूरा लाभ उठाया जाना चाहिए और ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की चाहिए कि भविष्य में निजी वाहनों की तुलना में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिले।

 

मोदी ने देश में पर्यावरण अनुकूल एवं इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने पर विचार विमर्श के लिए नीति आयोग द्वारा आयोजित पहले वैश्विक मोबिलिटी शिखर सम्मेलन का यहां शुभारंभ करते हुये कहा कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा “इंडिया इज ऑन द मूव ,आवर इकोनॉमी इज ऑन द मूव”। उन्होंने मोबिलिटी की आवश्यकता और महत्व पर प्रकाश डालते हुये कहा कि मोबिलिटी अर्थव्यवस्था को गति देने वाला मुख्य कारक है। बेहतर मोबिलिटी से यात्रा और परिवहन का बोझ कम होता है तथा इससे अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है। मोबिलिटी रोजगार प्रदान करने वाला बहुत बड़ा क्षेत्र है और इस क्षेत्र में रोजगार के नये अवसर पैदा होने की व्यापक संभावना है।

उन्होंने कहा कि भारत में भविष्य की मोबिलिटी पर उनका दृष्टिकोण ‘7 सी’पर आधारित है। इनमें कॉमन, कनेक्टेड, कॉन्वेनियेंट, कंजेशन फ्री, चार्जड, क्लीन, कटिंग ऐज शामिल हैं। उन्होंने मोबिलिटी के दूसरे पहलुओं पर ध्यान केन्द्रित करते हुये कहा कि कनेक्टेड मोबिलिटी से भाैगोलिक एकीकरण के साथ ही परिवहन के साधन जुड़ते हैं। इंटरनेट से जुड़ी भागीदारी वाली अर्थव्यवस्था उभर रही है क्योंकि यह मोबिलिटी का आधार है। उन्होंने कहा कि निजी वाहनों का पूरा उपयोग सुनिश्चित करने के लिए वाहन पूलिंग की पूरी संभावनाओं का लाभ उठाया जाना चाहिए।

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खजाने को भरते हैं देश के पांच गरीब राज्य

देश का नीति आयोग राज्यों के बीच भेदभाव पर उतारू है। वह राज्यों में समान विकास की वकालत की आड में कुछ राज्यों को हाशिए पर रखने के लिए उनके हालात को बेहद खराब बताकर उनकी छवि बिगाड रहा है। लेकिन असल में वह जिन्हें देश के पिछडेपन के लिए जिम्मेदार ठहरा रहा है वे देश के खजाने को भरने वाले राज्यों में शामिल है। विकसित राज्यों और कथित तौर पर पिछडे पांचों राज्यों के जनसंख्या घनत्व को आधार माना जाए तो इन राज्यों का प्रदर्शन विकसित राज्यों के मुकाबले बेहतर ही है। 

 

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने हाल ही एक कार्यक्रम में यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश और बिहार की वजह से मानव विकास सूचकांक में दुनिया भर के १८८ देशों की सूची में भारत का स्थान १३१वें नम्बर पर आता है। इसके लिए ये राज्य पूरी तरह जिम्मेदार हैं क्योंकि वे मृत्यु दर तथा शिक्षा के प्रसार में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। जबकि इन पांचों राज्यों में भारत की एक तिहाई से अधिक आबादी बसती है और केन्द्रीय संसाधनों में इन राज्यों की हिस्सेदारी विकसित राज्यों के मुकाबले कम है। केन्द्रीय करों में हिस्सेदारी को ३२ से ४२ करने के बाद तो इन पांचों राज्यों को पहले के मुकाबले केन्द्र से पांच से दस फीसदी कम राशि मिलती है जिसका इन राज्यों के विकास पर सीधा असर पड़ता है।
नीति आयोग ने राजस्थान समेत जिन पांच राज्यों को पिछडे होने का तमगा दिया है, उनकी कुल आबादी पचास करोड से अधिक है और राजस्थान को छोड़ दें तो शेष चार राज्यों का आबादी घनत्व देश भर में सबसे ज्यादा है। नीति आयोग ने मृत्यु दर और शिक्षा के प्रसार को आधार मानकर पांचों राज्यों को पिछडा तो बता दिया लेकिन असल में वे इतने पिछड़ेे भी नहीं है कि उन्हें सार्वजनिक रूप से लज्जित किया जाए। आंकड़ों के अनुसार मृत्यु दर के मामले में राजस्थान में प्रति हजार में से मृत्यु दर ४१, मध्यप्रदेश में ४७, छत्तीसगढ़ में ३९, बिहार में ३८ और उत्तरप्रदेश में ४३ है। देश में सबसे कम मृत्युदर गोवा में प्रति हजार पर आठ है, लेकिन वहां जनसंख्या घनत्व बेहद कम है। विकसित महाराष्ट्र में भी मृत्यु दर प्रति हजार पर १९ है।
इसी तरह शिक्षा के पायदान पर भी ये राज्य बहुत अधिक पीछे नहीं है। राजस्थान में शिक्षा का प्रतिशत ६७.०६, मध्यप्रदेश में ७०.६३, छत्तीसगढ़ में ७१.०४, बिहार में ६३.८२ और उत्तरप्रदेश में ६९.७२ प्रतिशत है। जबकि विकसित राज्यों में शुमार महाराष्ट्र में शिक्षा के प्रसार का प्रतिशत ८२.९१ है। सर्वाधिक शिक्षा वाले राज्यों में केरल में भी शिक्षा का प्रसार ९३.९१ है, लेकिन शिक्षा के शिखर बैठे केरल में अपराध का प्रतिशत समूचे भारत में प्रति लाख आबादी पर ४५५ का है। जहां तक अर्थव्यवस्था का सवाल है तो पिछडे राज्यों में शुमार राजस्थान और उत्तरप्रदेश कुल जीडीपी में पचास फीसदी का हिस्सा रखने वाले छह राज्यों में शामिल हैं।