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साइकिल पर 1200 किलोमीटर का सफर तय करने वाली ज्योति की मदद करेगा एआईबीईए

हैदराबाद । अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) ने बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर 1200 किलोमीटर का सफर तय करने वाली 15 वर्षीय ज्योति कुमारी और उसके चार भाई-बहनों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाने की पेशकश की है।एआईबीईए के महासचिव सी. वेंकटाचलम ने रविवार को टि्वटर पर यह घोषणा की। वेंकटाचलम ने कहा, “ ज्योति का परिवार बहुत गरीब है और उसके दो छोटे भाई और दो बहनें हैं। हम उनकी आर्थिक स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं। एआईबीईए के अधिकारियों से चर्चा करने के बाद यह फैसला किया गया कि ज्योति और उसके चारों भाई-बहनों की पढ़ाई का पूरा खर्च एआईबीईए उठायेगा अथवा परिवार की इच्छानुसार कोई अन्य वित्तीय सहायता करेगा।”

एआईबीईए ने इस संबंध में बिहार प्रांतीय बैंक कर्मचारी संघ के महासचिव अनिरुद्ध कुमार को पत्र लिखकर ज्योति के परिवार से संपर्क करने के लिए कहा है।वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूरों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और ज्योति कुमारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। ज्योति ने मुश्किलों से भरे समय में साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति की अनूठी मिसाल पेश की है।

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आईडीबीआई में न्यूनतम 51 फीसदी हिस्सेदारी रखे सरकार:एआईबीईए

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संगठन(एआईबीईए) ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार को आईडीबीआई बैंक में कम से कम 51 फीसदी हिस्सेदारी रखने की प्रतिबद्धता को मानना चाहिये और पूर्व की तरह समुचित पूंजी योगदान देना चाहिये।

all india bank employees association

 

वित्त मंत्री पीयूष गोयल को लिखे पत्र में एआईबीईए के महासचिव वेंकटचलम ने कहा कि मीडिया में एलआईसी के आईडीबीआई बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी खरीदने के प्रस्ताव के संबंध में लगातार खबरें आ रही हैं जिसका साफ मतलब है कि बैंक में सरकारी शेयरधारिता कम होगी। पत्र में कहा गया है कि जब वर्ष 2003 में आईडीबीआई को आईडीबीआई बैंक में बदलने का प्रस्ताव लाया गया था तब सरकार ने संसद में यह आश्वासन दिया था कि वह कभी भी इसमें 51 फीसदी से कम की शेयरधारिता नहीं रखेगी।

इस आश्वासन के आधार पर ही उक्त विधेयक पारित हुआ था। अब जोखिम में फंसे रिण के बोझ के कारण बैंक को अतिरिक्त पूंजी की जरूरत हुई है। इसी जरूरत के कारण एलआईसी को बैंक में पूंजी निवेश करने का प्रस्ताव समक्ष आया है। अगर जोखिम में फंसे रिण बैंक के अधिकारियों के गलत निर्णय के कारण हैं तो उन्हें इसके समाधान के लिये कहना चाहिये। लेकिन अगर यह आर्थिक माहौल में बदलाव के कारण हैं तो सरकार को सामने आना चाहिये और अतिरिक्त पूंजी मुहैया करानी चाहिये।

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(इस खबर को मोबाइल पे न्यूज संपादकीय टीम ने संपादित नहीं किया है। यह एजेंसी फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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