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राजस्थान में एच1एन1 वायरस का नया स्ट्रेन मिला, जानिए गंभीर बीमारी

हाल के अनुमानों के अनुसार जयपुर में swine flu के 100 से अधिक मामलों में, एक सप्ताह के भीतर, 10 से अधिक मौतें हुई हैं। ये मामले  एच1एन1 वायरस में मिले एक नये स्ट्रेन के कारण हुए हैं, जिसे मिशिगन स्ट्रेन कहा जाता है। इस वायरस का संबंध बुजुर्ग वयस्कों और छोटे बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने और उनकी मृत्यु से है। दिसंबर 2017 में 400 से अधिक लोगों के swine flu वायरस के प्रति पॉजिटिव पाये जाने के बाद, राजस्थान सरकार ने 3 जनवरी को राज्य में एक अलर्ट जारी कर दिया।

swine flu
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राजस्थान में जनवरी 2017 से दिसंबर के बीच, 241 swine flu मौतें हुई हैं। इसके अलावा, swine flu के वायरस से प्रभावित मरीजों के लिए 3,033 अस्पतालों में स्वाइन फ्लू स्क्रीनिंग केंद्र, 1,580 आइसोलेशन बेड, 214 आईसीयू बेड और 198 वेंटीलेटर सुरक्षित किये गये हैं।

इस बारे में बताते हुए, हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ;आईएमएद्ध के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, पद्मश्री डॉ. के के अग्रवाल ने कहा, ‘हालांकि वायरस कम खतरनाक हो सकता है, परंतु यह निश्चित रूप से संक्रामक अधिक है। जैसा कि वायरस में बदलाव आया है, यह अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है। खास कर ऐसे लोगों को, जिनमें अभी तक इसके प्रति इम्युनिटी विकसित नहीं हुई है। फ्लू (इन्फ्लूएंजा) वायरस को तीन व्यापक श्रेणियों में बांटा जाता है- इन्फ्लूएंजा ए, बी या सी। इन्फ्लुएंजा ए सबसे सामान्य प्रकार है। एच1एन1 फ्लू इन्फ्लूएंजा ए की एक किस्म है, जो वायरल सीरोटाइप को इंगित करती है। यह एक किस्म की शॉर्टहैंड है जो आपके प्रतिरक्षा प्रणाली से वायरस की पहचान करती है और वायरस को आपकी कोशिकाओं में प्रवेश करने की अनुमति देती है। एच1एन1 फ्लू के कई अलग-अलग उपभेद हैं। वायरस छोटी बूंदों के संक्रमण के माध्यम से फैलता है, जो एक व्यक्ति की खांसी, छींक या बोलते समय गिरती हैं। वायरस केवल 3 से 6 फीट की दूरी को कवर कर सकता है।’

एच1एन1 के कुछ लक्षणों में शामिल हैं- मांसपेशियों में दर्द, सूखी खाँसी, दस्त, मतली, या उल्टी, ठंड, थकान, या बुखार, सिरदर्द, सांस की तकलीफ, या गले में खराश।

सीमाओ के वाइस प्रेसीडेंट, डॉ. अग्रवाल ने आगे बताया, ‘राजस्थान के सभी डॉक्टरों को सलाह दी जाती है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती, गंभीर रूप से बीमार और उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए एंटीवायरल दवाओं का उपयोग करने की सलाह दी जाए। राष्ट्रीय फ्लू के दिशानिर्देशों का पालन करना भी अनिवार्य है।’

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कुछ अन्य जरूरी बातें-

* कोई बुखार नहीं तो कोई फ्लू नहीं। खांसी, सर्दी, और बुखार से फ्लू का संकेत मिलता है।

* सांस लेने में कठिनाई न हो तो अस्पताल में भर्ती होना जरूरी नहीं।

* गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के मामले में फ्लू की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

* अस्पताल में भर्ती रोगियों और आउट पेशेंट मरीजों के मामले में आइसोलेशन की सावधानी बरतनी चाहिए।

* वायरस को फैलने से रोकने के लिए, विशेष रूप से छोटे बच्चों को हाथ धोने जैसी स्वच्छ तकनीकों को सिखाया जाना चाहिए।

* पानी से तीन बार गरारे करें।

* रोगियों और आगंतुकों को अपनी नाक या मुंह को खांसी के समय ढंक लेना चाहिए।

* मरीज को एक अलग कमरे में रहने दें। संपर्क में आने वाले लोगों को मास्क पहनने चाहिए।

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हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया

हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया की शुरूआत 1986 में हुई थी। यह एक अग्रणी गैर सरकारी संस्था है जिसका उद्देश्य लोगों को उनके जीवन के हर कदम और प्रत्येक पहलू से संबंधित स्वास्थ्य के संबंध में जागरूक करना है और देश की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान हेतु उपाय करने में सहयोग देना है। एनजीओ लोगों को जागरूक करने और उन्हें स्वास्थ्य पहलुओं से अवगत कराने के लिए उपभोक्ता आधारित मनोरंजक साधनों का इस्तेमाल करता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण परफेक्ट हेल्थ मेला है, जो कि एक वार्षिक आयोजन है। मेले की शुरूआत 1993 में की गई थी, जिसमें हर साल 2-3 लाख लोग हिस्सा लेते हैं। मेले में विभिन्न श्रेणियों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जैसे कि स्वास्थ्य शिक्षा सेमिनार, चेकअप, मनोरंजक कार्यक्रम, लाइफस्टाइल एग्जिबिशन, लेक्चर, कार्यशाला और प्रतियोगिता आदि।

इसके अतिरिक्त, एनजीओ लोगों को हैंड्स ओनली सीपीआर-10 तकनीक को सीपीआर 10 मंत्र के माध्यम से सिखाने के लिए सेमिनार आदि भी लगाता है, इसके तहत सडन कार्डिएक अरेस्ट के बाद मरीज को पुनर्जीवित करने की तकनीक सिखाई जाती है। उनका नाम एक साथ सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को सीपीआर 10 तकनीक सिखाने के लिए लिमका बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में भी दर्ज है। भारतीय संविधान की धारा 21 को दिमाग में रखते हुए, जो हर व्यक्ति को जीवन का अधिकार देती है, हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने हाल ही में एक प्रोजेक्ट समीर मलिक हार्ट केयर फाउंडेशन फंड की भी शुरुआत की है। इसके तहत उन दिल के मरीजों को आर्थिक और तकनीकी सहायता मुहैया कराई जाती है जो आर्थिक रूप से पिछ़ड़े हैं।

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