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इतने क्रूर हैं अफगानिस्तान के पठान, अब तक पकाकर खा चुके हैं लाखों सारस

अलग—अलग मौसम में अलग—अलग देशों में जाकर समय बिताने वाले सारसों की अधिकांश आबादी उन क्रूर अफगानी पठानों के पेट में समा गई है जो इन्हें आसमान में देखते ही मार गिराते हैं और पकाकर खा जाते हैं। पठानों की इस कारगुजारी से अब पूरी दुनिया में सिर्फ 35 हजार सारस ही बचे हैं।

ये सारस ​इन दिनों भारत में भी भीषण गर्मी का प्रकोप झेल रहे हैं। उत्तर प्रदेश में इटावा जिले का विख्यात सरसईनावर वैटलैंड सूखने से सारस समेत अन्य पंक्षी पानी की तलाश में यहां से कूच कर गये हैं। वन विभाग में जिम्मेदार अफसरों और कर्मचारियों की लापरवाही के अलावा शिकारियों की आवाजाही के चलते संरक्षित क्षेत्र वेटलैंड लगातार सूख रहा है। इसके चलते राज्य पक्षी सारस का पलायन शुरू हो गया है। पानी के अभाव में क्षेत्र के पेड़ पौधे भी सूखने लगे हैं।

भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून के संरक्षण अधिकारी डा.राजीव चौहान ने बताया कि जब उत्तराखंड नहीं बना था तो उत्तर प्रदेश की सबसे अधिक जैव विविधता उत्तराखंड इलाके में थी लेकिन बंटवारे के बाद उत्तर प्रदेश की 45 फीसदी जैव विविधता यहां बिखरे पड़े वेटलैंड में समाहित है । ये वेटलैंड वातावरण से कार्बन डाई आक्साइड का अवशोषण कर ग्लोबल वार्मिग को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य संरक्षक (वन्यजीव) रूपक डे ने बताया कि विश्व में एक लाख से ज्यादा वेटलैंड क्षेत्र हैं। दुनिया भर में 30 से 35 हजार सारस पाए जाते हैं जिनमें 20 से 25 हजार भारत में हैं। इनमें 14 हजार उत्तर प्रदेश में हैं। राज्य में विश्व के 40 फीसद सारस वास करते हैं। सारस विलुप्त प्राय पक्षियों में एक है। इनकी विश्व में पाई जाने वाली 15 में से 11 प्रजातियों के पक्षियों की संख्या निरंतर घट रही है। भारत में इसकी छह प्रजातियां हैं, जिसमें सारस सर्वाधिक लोकप्रिय है।

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