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राज्यसभा नामांकन विवाद उत्पन्न कर केजरीवाल ने लोकतंत्र को शर्मसार किया

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने एक पत्रकार सम्मेलन में कहा कि अरविन्द केजरीवाल सरकार (Aam Aadmi Party) की उपलब्धियों के दावों की पोल अब सार्वजनिक जीवन के हर मुद्दे पर खुल रही है। दिल्ली में अस्पतालों के घटते बेड और निजी अस्पताल के प्रबंधक को राज्यसभा में पहुंचाना केजरीवाल सरकार के दावों की पोल खोलते हैं।

Aam Aadmi Party
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तिवारी ने कहा कि अरविन्द केजरीवाल ने 2015 में सत्ता में आने से पूर्व एवं सत्ता में आने के बाद दिल्ली को सर्वोत्तम शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवायें देने का वायदा किया और बिजली के दाम हाफ और पानी के माफ उनका संकल्प था। बेघरों को सुरक्षा देने के भी अरविन्द केजरीवाल (Aam Aadmi Party) ने बड़े-बड़े दावे किये थे।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि केजरीवाल सरकार Aam Aadmi Party के रहते दिल्ली में सरकारी अस्पतालों में ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है और स्थिति इतनी खराब हो गई है कि कुछ वर्ष पूर्व तक दिल्ली के सर्वोच्च रेफरल अस्पताल के रूप में देखे जाने वाले जी.बी. पन्त अस्पताल में भी मरीजों के लिए उपलब्ध बेड की संख्या तेजी से गिर रही है।

आर.टी.आई. से मिल रही जानकारी के अनुसार जी.बी. पन्त अस्पताल में स्वीकृत 758 बेड के स्थान पर केवल 735 बेड ही आज मरीजों को उपलब्ध हैं तो जनकपुरी स्थित सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल में 250 बेडों के स्थान पर 100 बेड ही मरीजों के लिए उपलब्ध हैं। लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल प्रबंधन ने तो बेडों की उपलब्धता के बारे में जानकारी होने से ही इंकार कर दिया।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध सरकारी अस्पताल जी.बी. पन्त में मरीजों के लिए उपलब्ध बेडों की संख्या में कमी पर आर.टी.आई. से मिली जानकारी और खुद सरकार द्वारा निजी अस्पतालों से इलाज करवाने की बात दर्शाता है कि केजरीवाल सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार में असफल रही है। सरकारी अस्पतालों को सुदृृढ़ करने के केजरीवाल सरकार के संकल्प पर न सिर्फ निजी अस्पतालों में इलाज के प्रस्ताव से शंका उत्पन्न हुई है बल्कि अब राज्यसभा के लिए भी एक निजी अस्पताल के कर्ताधर्ता को नामांकित किये जाने से सरकार सवालों के कटघरे के बीच है।

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केजरीवाल सरकार बेघरों के मुद्दे को भी एक राजनीतिक मुद्दे की तरह इस्तेमाल करती है, उसका भावनात्मक उपयोग करती है पर जमीन पर उनके लिए कुछ नहीं करती। तिवारी ने कहा कि गत दिनों मैं स्वयं देर रात में बेघरों की स्थिति को समझने एवं अपना निजी सहयोग बेघरों की मदद को देने के लिए निकला और देख कर दुख हुआ कि देश की राजधानी में हजारों-लाखों लोग सड़कों पर सोने के लिए बाध्य हैं। समाचारों के अनुसार इस वर्ष की सर्दियों में दिल्ली में लगभग 200 लोग ठंड के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। दिल्ली में लगभग 1 से 2 लाख निराश्रित एवं बेघर लोगों के होने का अनुमान है पर दिल्ली सरकार के सभी आश्रय केन्द्रों की संख्या मिलकर 25,000 लोगों को भी सुरक्षा नहीं दे पा रही है।

तिवारी ने राज्यसभा में दिल्ली से नामांकन को लेकर चल रहे विवाद पर खेद व्यक्त करते हुये कहा कि विभिन्न राज्यों से राज्यसभा के लिए नामांकन होते है, छोटे-छोटे दलों के प्रतिनिधि भी संसद में नामांकित होते हैं पर जिस प्रकार नामांकन के पीछे पैसे के आरोपों की बात सड़क से संसद के गलियारों तक और मीडिया डिबेटों में हो रहा है, उसने सभी अचंभित किया और लोकतंत्र को शर्मसार किया है।

आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकन को लेकर उत्पन्न विवाद जो दिल्ली में देखने को मिला है उसने दिल्ली की जनता को कुपित किया है और दिल्ली की जनता जानना चाहती है कि इस विवाद के पीछे क्या है, आखिर क्यों ये पैसों के सवाल उठ रहे हैं ?

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राजस्थान में एच1एन1 वायरस का नया स्ट्रेन मिला, जानिए गंभीर बीमारी

हाल के अनुमानों के अनुसार जयपुर में swine flu के 100 से अधिक मामलों में, एक सप्ताह के भीतर, 10 से अधिक मौतें हुई हैं। ये मामले  एच1एन1 वायरस में मिले एक नये स्ट्रेन के कारण हुए हैं, जिसे मिशिगन स्ट्रेन कहा जाता है। इस वायरस का संबंध बुजुर्ग वयस्कों और छोटे बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने और उनकी मृत्यु से है। दिसंबर 2017 में 400 से अधिक लोगों के swine flu वायरस के प्रति पॉजिटिव पाये जाने के बाद, राजस्थान सरकार ने 3 जनवरी को राज्य में एक अलर्ट जारी कर दिया।

swine flu
swine flu

 

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राजस्थान में जनवरी 2017 से दिसंबर के बीच, 241 swine flu मौतें हुई हैं। इसके अलावा, swine flu के वायरस से प्रभावित मरीजों के लिए 3,033 अस्पतालों में स्वाइन फ्लू स्क्रीनिंग केंद्र, 1,580 आइसोलेशन बेड, 214 आईसीयू बेड और 198 वेंटीलेटर सुरक्षित किये गये हैं।

इस बारे में बताते हुए, हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ;आईएमएद्ध के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, पद्मश्री डॉ. के के अग्रवाल ने कहा, ‘हालांकि वायरस कम खतरनाक हो सकता है, परंतु यह निश्चित रूप से संक्रामक अधिक है। जैसा कि वायरस में बदलाव आया है, यह अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है। खास कर ऐसे लोगों को, जिनमें अभी तक इसके प्रति इम्युनिटी विकसित नहीं हुई है। फ्लू (इन्फ्लूएंजा) वायरस को तीन व्यापक श्रेणियों में बांटा जाता है- इन्फ्लूएंजा ए, बी या सी। इन्फ्लुएंजा ए सबसे सामान्य प्रकार है। एच1एन1 फ्लू इन्फ्लूएंजा ए की एक किस्म है, जो वायरल सीरोटाइप को इंगित करती है। यह एक किस्म की शॉर्टहैंड है जो आपके प्रतिरक्षा प्रणाली से वायरस की पहचान करती है और वायरस को आपकी कोशिकाओं में प्रवेश करने की अनुमति देती है। एच1एन1 फ्लू के कई अलग-अलग उपभेद हैं। वायरस छोटी बूंदों के संक्रमण के माध्यम से फैलता है, जो एक व्यक्ति की खांसी, छींक या बोलते समय गिरती हैं। वायरस केवल 3 से 6 फीट की दूरी को कवर कर सकता है।’

एच1एन1 के कुछ लक्षणों में शामिल हैं- मांसपेशियों में दर्द, सूखी खाँसी, दस्त, मतली, या उल्टी, ठंड, थकान, या बुखार, सिरदर्द, सांस की तकलीफ, या गले में खराश।

सीमाओ के वाइस प्रेसीडेंट, डॉ. अग्रवाल ने आगे बताया, ‘राजस्थान के सभी डॉक्टरों को सलाह दी जाती है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती, गंभीर रूप से बीमार और उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए एंटीवायरल दवाओं का उपयोग करने की सलाह दी जाए। राष्ट्रीय फ्लू के दिशानिर्देशों का पालन करना भी अनिवार्य है।’

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कुछ अन्य जरूरी बातें-

* कोई बुखार नहीं तो कोई फ्लू नहीं। खांसी, सर्दी, और बुखार से फ्लू का संकेत मिलता है।

* सांस लेने में कठिनाई न हो तो अस्पताल में भर्ती होना जरूरी नहीं।

* गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के मामले में फ्लू की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

* अस्पताल में भर्ती रोगियों और आउट पेशेंट मरीजों के मामले में आइसोलेशन की सावधानी बरतनी चाहिए।

* वायरस को फैलने से रोकने के लिए, विशेष रूप से छोटे बच्चों को हाथ धोने जैसी स्वच्छ तकनीकों को सिखाया जाना चाहिए।

* पानी से तीन बार गरारे करें।

* रोगियों और आगंतुकों को अपनी नाक या मुंह को खांसी के समय ढंक लेना चाहिए।

* मरीज को एक अलग कमरे में रहने दें। संपर्क में आने वाले लोगों को मास्क पहनने चाहिए।

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हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया

हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया की शुरूआत 1986 में हुई थी। यह एक अग्रणी गैर सरकारी संस्था है जिसका उद्देश्य लोगों को उनके जीवन के हर कदम और प्रत्येक पहलू से संबंधित स्वास्थ्य के संबंध में जागरूक करना है और देश की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान हेतु उपाय करने में सहयोग देना है। एनजीओ लोगों को जागरूक करने और उन्हें स्वास्थ्य पहलुओं से अवगत कराने के लिए उपभोक्ता आधारित मनोरंजक साधनों का इस्तेमाल करता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण परफेक्ट हेल्थ मेला है, जो कि एक वार्षिक आयोजन है। मेले की शुरूआत 1993 में की गई थी, जिसमें हर साल 2-3 लाख लोग हिस्सा लेते हैं। मेले में विभिन्न श्रेणियों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जैसे कि स्वास्थ्य शिक्षा सेमिनार, चेकअप, मनोरंजक कार्यक्रम, लाइफस्टाइल एग्जिबिशन, लेक्चर, कार्यशाला और प्रतियोगिता आदि।

इसके अतिरिक्त, एनजीओ लोगों को हैंड्स ओनली सीपीआर-10 तकनीक को सीपीआर 10 मंत्र के माध्यम से सिखाने के लिए सेमिनार आदि भी लगाता है, इसके तहत सडन कार्डिएक अरेस्ट के बाद मरीज को पुनर्जीवित करने की तकनीक सिखाई जाती है। उनका नाम एक साथ सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को सीपीआर 10 तकनीक सिखाने के लिए लिमका बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में भी दर्ज है। भारतीय संविधान की धारा 21 को दिमाग में रखते हुए, जो हर व्यक्ति को जीवन का अधिकार देती है, हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने हाल ही में एक प्रोजेक्ट समीर मलिक हार्ट केयर फाउंडेशन फंड की भी शुरुआत की है। इसके तहत उन दिल के मरीजों को आर्थिक और तकनीकी सहायता मुहैया कराई जाती है जो आर्थिक रूप से पिछ़ड़े हैं।

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अब रक्तदान के लिए मिल सकता है आधिकारिक छुट्टी का लाभ

दि हार्ट केयर फ़ाउंडेरेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई), जो इस साल परफेक्ट हैल्थ मेला की रजत जयंती मना रहा है, ने डीओपीटी के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें केंद्र सरकार के कर्मचारियों को Blood donation के लिए हर साल 4 दिनों की विशेष आकस्मिक छुट्टी देने की घोषणा की गयी है, बशर्ते यह Blood donation किसी लाइसेंस प्राप्त ब्लड बैंक से संबंधित हो। इसका उद्देश्य वर्ष 2020 तक 100 प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदान का लक्ष्य प्राप्त करना है।

Blood donation
Blood donation

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भारत में हर साल 5 करोड़ यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है, जिसमें से केवल 2.5 करोड़ यूनिट रक्त ही उपलब्ध हो पा रहा है। भारत में रक्त की आवश्यकता के मुकाबले 10 प्रतिशत की कमी है। इसका मतलब है कि 12 लाख से अधिक यूनिट रक्त की कमी पड़ती है। भारत में Blood donation करने योग्य लोगों की संख्या 51.2 करोड़ से अधिक है, जिसे देखते हुए यह कमी खतरनाक है।

इस बारे में बताते हुए, हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ;आईएमएद्ध के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, पद्मश्री डॉ. के के अग्रवाल ने कहा, ‘भारत में 1.3 अरब से ज्यादा की आबादी है, लेकिन अभी भी यहां रक्त की बहुत कमी है। रक्तदान समाज की एक बड़ी आवश्यकता है। Blood donationस्वैच्छिक होना चाहिए। एक वर्ष में कम से कम एक बार रक्तदान करना चाहिए। भविष्य में दिल के दौरे की संभावना कम करने के लिए कई रिपोर्टों में नियमित रूप से Blood donationकरने की जरूरत बतायी गयी है। रक्तदान सबसे अच्छे दान-पुण्य कार्यों में से एक माना जाता है, जो किसी को भी दिया जा सकता है। यह रक्त के विभिन्न घटकों के माध्यम से कई जीवन बचा सकता है। डीओपीटी द्वारा उठाया गया यह कदम बहुत सकारात्मक है और उम्मीद है कि अधिक से अधिक लोगों को आगे आने और खून दान करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। मेरा विनम्र सुझाव यह है कि निजी क्षेत्र के सभी प्रतिष्ठानों को भी इस नियम को अपनाना चाहिए। जिन लोगों को अपनी सर्जरी करानी है, उनको पहले ही अपना रक्त दान कर देना चाहिए, ताकि सर्जरी के समय उसका इस्तेमाल किया जा सके।’ नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूशन काउंसिल के नये नियमों के तहत, खून बिल्कुल भी बर्बाद नहीं किया जा सकता। बचे हुए प्लाज्मा से अल्बुमिन और इंट्रावीनस इम्युनोग्लोबुलिंस (आईवीआईजी) जैसे उत्पादों का निर्माण किया जा सकता है। स्वैच्छिक रक्तदान में दान किये जाने वाले रक्त का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए।

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सीमाओ के वाइस प्रेसीडेंट, डॉ. अग्रवाल ने आगे बताया, ‘अब पर्ण रक्तदान के लिए शिविर आयोजित नहीं होने चाहिए। इसके बजाय कम्पोनेंट्स-ऑनली किस्म के रक्तदान शिविर लगाने चाहिए। एकत्रित रक्त की एक यूनिट का इस्तेमाल 3 से 4 मरीजों की मदद के लिए किया जा सकता है। इसके बदले यह एक दूसरे रोगी को जरूरत के मुकाबले पूर्ण रक्त से बर्बाद किया जा रहा है।

स्वैच्छिक रक्तदान शिविर को अब रक्त-घटक-दान शिविर कहा जाना चाहिए, न कि सिर्फ रक्तदान शिविर। इसलिए, यदि दान किया जा रहा रक्त एक ही बैग में एकत्रित किया जा रहा हो, तो रक्त न दें। आम तौर पर दो कम्पोनेंट वाले बैग का उपयोग किया जाता है। बाल चिकित्सा के उपयोग के लिए 100 मिलीलीटर वाले बैगों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।’

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रक्त दान करने के लिए कुछ चीजें इस प्रकार हैं-
*Blood donationसे एक रात पूर्व और सुबह पर्याप्त फलों के रस और पानी से अपने आप को तैयार करें।
* खाली पेट Blood donationकरने से बचें। रक्तदान करने से तीन घंटे पहले ही कुछ खाएं-पीएं। फैटी खाद्य पदार्थों से बचें। समूचे अनाज, अंडे और बीफ, और पालक, पत्तेदार सब्जियां, नारंगी तथा लौह समृद्ध भोजन करें।
* Blood donationकरने से पहले शराब या कैफीन का उपभोग न करें।
*यदि आपकी कोई मेजर सर्जरी हुई है तो 6 माह तक रक्तदान न करें।

हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया

हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया की शुरूआत 1986 में हुई थी। यह एक अग्रणी गैर सरकारी संस्था है जिसका उद्देश्य लोगों को उनके जीवन के हर कदम और प्रत्येक पहलू से संबंधित स्वास्थ्य के संबंध में जागरूक करना है और देश की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान हेतु उपाय करने में सहयोग देना है। एनजीओ लोगों को जागरूक करने और उन्हें स्वास्थ्य पहलुओं से अवगत कराने के लिए उपभोक्ता आधारित मनोरंजक साधनों का इस्तेमाल करता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण परफेक्ट हेल्थ मेला है, जो कि एक वार्षिक आयोजन है। मेले की शुरूआत 1993 में की गई थी, जिसमें हर साल 2-3 लाख लोग हिस्सा लेते हैं। मेले में विभिन्न श्रेणियों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जैसे कि स्वास्थ्य शिक्षा सेमिनार, चेकअप, मनोरंजक कार्यक्रम, लाइफस्टाइल एग्जिबिशन, लेक्चर, कार्यशाला और प्रतियोगिता आदि। इसके अतिरिक्त, एनजीओ लोगों को हैंड्स ओनली सीपीआर-10 तकनीक को सीपीआर 10 मंत्र के माध्यम से सिखाने के लिए सेमिनार आदि भी लगाता है, इसके तहत सडन कार्डिएक अरेस्ट के बाद मरीज को पुनर्जीवित करने की तकनीक सिखाई जाती है। उनका नाम एक साथ सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को सीपीआर 10 तकनीक सिखाने के लिए लिमका बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में भी दर्ज है। भारतीय संविधान की धारा 21 को दिमाग में रखते हुए, जो हर व्यक्ति को जीवन का अधिकार देती है, हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने हाल ही में एक प्रोजेक्ट समीर मलिक हार्ट केयर फाउंडेशन फंड की भी शुरुआत की है। इसके तहत उन दिल के मरीजों को आर्थिक और तकनीकी सहायता मुहैया कराई जाती है जो आर्थिक रूप से पिछ़ड़े हैं।

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