खाए हैं कभी बांस के पकवान, ये है बांस से बनने वाले पकवानों की रेसिपी

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टोकरी, डगरा, सूप, हाथ पंखा आदि के निर्माण के साथ ही दुनियाभर में बांस का इस्तेमाल खाद्य पदार्थ के तौर पर भी किया जाता है?  बिल्कुल, बांस में प्रोटीन और फाइबर जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। बांस एक प्रकार की घास है जो किसी भी खराब या बंजर भूमि पर उगाया जा सकता है। वनस्पतिक नाम बैम्बूसोईडी है। भारत में बांस की 125 प्रजातियां मिलती हैं। बांस का कोंपल हल्का पीले रंग का होता है और इसकी महक बेहद तेज होती है। स्वाद कड़वा होता है। बांस की सभी प्रजातियों में से केवल 110 प्रजातियों के बांस के कोंपल ही खाने योग्य होते हैं। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांस उत्पादक देश है। बांस के कोंपल बांस के युवा पौधे होते हैं, जिसे बढ़ने से पहले ही काट लिया जाता है और सब्जी, अचार, सलाद सहित अनेक प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं।

 

 

मानसून के दौरान प्रमुख भोजन

बस्तर की जनजातियों के बीच मॉनसून का महीना आराम का दौर होता है। इस समय तक फसलों के बीज बो दिए जाते हैं और नई फसल आने में समय होता है। ऐसे में खाने में नई चीजें आजमाई जाती हैं। जुलाई की शुरुआत में बांस की एक फुट ऊंची कोंपलों को तोड़ लेते हैं।
पूर्वोत्तर राज्यों मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम, मेघालय आदि में बांस के कोंपलों से सिरका बनाने का काम सदियों से होता आया है। मणिपुर में बांस के ताजे कोंपलों को सूखी मछली के साथ पकाकर खाया जाता है। सिक्किम में बांस के कोंपलों से करी बनाई जाती है।

खाती है पूरी दुनिया

नेपाल के पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्रों में टूसा (बांस की ताजी कोंपलें) और टुमा (बांस के उबले हुए कोंपल) प्रमुख खाद्य पदार्थों में शुमार हैं। इथियोपिया के बांस के जंगलों के निकट के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों का भी बांस प्रिय भोजन है। इंडोनेशिया में बांस के कोंपलों को नारियल के गाढ़े दूध के साथ मिलाकर खाया जाता है। बांस के कोंपलों को अन्य सब्जियों के साथ मिलाकर पकाए जाने वाले व्यंजन को “सयूर लाडे” के नाम से परोसा जाता है।

औषधीय गुण

बांस में सैचुरेटिड फैट, कोलेस्ट्रोल और सोडियम कम होता है तथा रेशों (फाइबर), विटामिन-सी, थायामिन, विटामिन बी6, फास्फोरस, पोटेशियम, जिंक, कॉपर, मैगनीज, प्रोटीन, विटामिन ई, रिबोफ्लेविन, नियासिन और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसलिए इसका इस्तेमाल औषधि के तौर पर भी किया जाता है। बांस के कोंपलों में बड़ी मात्रा में फाइबर पाए जाते हैं जो खून में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करने में मदद करते हैं। कोलेस्ट्रोल नियंत्रित होने से हृदय रोग का खतरा कम हो जाता है। 2016 में जर्नल ऑफ कैन्सर साइंस एंड थेरेपी में प्रकाशित एक शोध के अनुसार बांस में कुछ मात्रा में क्लोरोफिल पाए जाते हैं, जो कोशिकाओं में कैंसर पैदा करने वाले कारकों को रोकने में सक्षम हैं। बांस के कोंपलों का नियमित सेवन महिलाओं को स्तन कैंसर से बचा सकता है। 2011 में प्लांटा मेडिका नामक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन बताता है कि बांस के कोंपलों में गर्भाशय को शक्ति प्रदान करने वाले तत्व पाए जाते हैं, जो प्रसव में होने वाली देरी से बचाता है।

रेसिपी

बांस का सूप बनाने के लिए सामग्री

बांस के अंकुर
काले चने
सब्जियां (सहजन, आलू, बैंगन, प्याज, बीन्स आदि)
इमली का गूदा
चावल का आटा
अदरक-लहसुन-हरी मिर्च का पेस्ट
हल्दी (वैकल्पिक)
नमक

विधि

काले चनों को रातभर भिगोकर रखें। बांस के अंकुरों को अच्छी तरह छीलकर बारीक काट लें तथा चार गुना पानी में तब तक उबालें जब तक यह पक न जाए। अब बचा हुआ पानी निकाल दें। उबालने से बांस की कड़वाहट के साथ ही जहरीले तत्व भी निकल जाते हैं। उबालते समय ध्यान रखें कि इसका कुरकुरापन बरकरार रहे।

अब इन्हें साफ पानी से धोकर अलग रख लें। सब्जियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। एक बड़े बर्तन में पानी लें। इसमें काले चने, बांस के बारीक कटे टुकड़े, हल्दी, नमक डालें और पानी को उबालें। जब काले चने आधे पक जाएं तो इसमें कटी हुई सब्जियां मिलाएं और अदरक-लहसुन-मिर्च का पेस्ट और इमली का गूदा मिलाकर तब तक हिलाते रहें जब तक सब्जियां पूरी तरह से पक नहीं जातीं।

अब आंच को तेज कर इसमें चावल के आटे को डालकर हिलाते रहें, ताकि गुठली न बने। जब सूप जरूरत के मुताबित गाढ़ा हो जाए, तो इसे चूल्हे से उतार लें। लीजिए तैयार है बांस का सूप। इसे चावल या परांठे के साथ परोसें।

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