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कुबेर का खजाना है मधुमक्खी का मोम, दवाओं में होता है उपयोग

नई दिल्ली. मधुमक्खी के छत्ते से प्राप्त होने वाली ‘प्रोपोलिस’ मोमी गोंद एलर्जी रोधी, अस्थमारोधी, एंटी सेप्टिक और कैंसर रोधी है।
अर्जेन्टीना, दक्षिण कोरिया, यूक्रेन, अमेरिका, ब्राजील, चीन जैसे दुनिया के कई देशों में प्रोपोलिस मोमी गोंद का दवाओं के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और विदेशों में इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधन के साथ तमाम दवाओं में हो रहा है।

कई गंभीर रोगों के उपचार में प्रोपोलिस का उपयोग जबर्दस्त ढंग से बढ़ रहा है। थॉयराइड के रोगियों, चर्बी जमाव को कम करने, कोलस्ट्रॉल को कम करने, लू लगने की स्थिति में भी उपयोगी है। इसमें मौजूद फ्लेवोनाइड्स तत्व कैंसर के मरीजों को भी राहत देता है क्योंकि यह प्रभावित कोशिका को ठीक करने के साथ बाकी कोशिकाओं को सुरक्षा प्रदान करता है। प्रोस्टेट कैंसर में यह काफी उपयोगी है। यह विकिरणरोधी भी है।

हरापन लिए भूरे रंग का होता है

भारत में मौजूदा समय में 12 लाख मधुमक्खी कॉलोनियां हैं और मौजूदा समय में प्रोपोलिस का बाजार लगभग 45 करोड़ रपये सालाना का है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्राजील के प्रोपोलिस को बेहतरीन माना जाता है जिसका रंग हरापन लिए भूरे रंग का होता है। भारत में मधुमक्खी पालन करने वाले किसान इसे बेकार मानकर फेंक देते हैं।

खुद का इलाज भी मोम से करती है मधुमक्खी

मधुमक्खी जब फूल का रस और पराग लेकर अपने छत्ते में लौटती है तो उसे शहद बनाने की प्रक्रिया के लिए अंंधेरे की आवश्यकता होती है जिसके लिए वह पेड़ पौधों के तने और कोंपलों से ‘रेजिन’ और ‘मोम’ प्राप्त करती हैं जिसे वह अपने छत्ते के बाह्य हिस्से बी हाइव में आने वाली रोशनी को बंद कर अंधेरा करने के लिए उपयोग करती हैं। इसी प्रोपोलिस का उपयोग वह अपने खुद का इलाज के लिए भी करती हैं।

दांत की संवेदनशीलता खत्म करता है मोम

इसी रेजिन और मोम के कारण प्रोपोलिस चिपचिपा पदार्थ होता है इसलिए इसे ठंडे स्थान पर रखकर निकाला जाता है क्योंकि इससे इनका चिपचिपापन खत्म हो जाता है। बाजार में यह पाउडर, कच्चे स्वरूप में, पानी तथा अल्कोहल में घुलनशील पदार्थ के रूप में मिलते हैं। प्रोपोलिस का उपयोग दांत की अति संवेदनशीलता को दूर करने सहित मुंह के अल्सर को खत्म करने और तमाम अन्य रोगों के लिए हो रहा है। भारत में प्रोपोलिस को निकालने का समय मैदानी भागों में 15 फरवरी से लेकर अप्रैल तक का होता है लेकिन हिमालयी क्षेत्रों में यह समय पूरे गर्मी भर रहता है।