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जानिए मानसिक रोग क्या होता है

mental illness एक बहुत ही बड़ा रोग होता है जो इंसान को अपनी जिंदगी से इतना पीछे ले जाता है जिसकी कोई हद नहीं है। हर कोई इसे बताने से डरता है लोग क्या सोचेंगे। ये अवधारणा गलत है क्योकि कोई भी दुःख-दर्द बताने से उसका हल निकालता है। आज हम भी आपको ऐसे ही रोग के बारे में बताने जा रहे है। जो की आपको जानना बहुत ही जरुरी है।

mental illness
mental illness

 

आज के दौर में पूरी दुनिया में बहुत ही तादाद की संख्या में mental illness के मरीज होते है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार हर चार में से एक इंसान को ये मानसिक रोग होता है या फिर कभी ना कभी होगा ये बात तय है। हर जगह पर इस रोग पैदा होना का एक ही कारण है और वो है निराशा, इंशान में निराशा ही इस रोग को उत्पन करने में सहायक होती है। बायपोलर डिसऑर्डर और स्किड्ज़ोफ्रीनीया बहुत खतरनाक मानसिक और गंभीर बीमारियाँ हैं। इस बीमारी के चपेट में बहुत ही ज्यादा की संख्या में आते है फिर भी इस बीमारी के बारे में बताने से कतराते है। जो लोग मानसिक बीमार होते है उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता। इस कारण नहीं बताते है।

मानसिक विशेषज्ञों का मानना है की जब कोई भी इंशान अच्छी तरह कुछ सोच नहीं सकता है तो उसके व्यवहार पर काबू नहीं रहता है और उसकी भावना भी कुछ अलग ही होती है इस स्थति को मानसिक रोग कहते है। मानसिक रोग से बीमार व्यक्ति सही ढंग से सोच नहीं पता है रोज के काम करना उसके लिए मुश्किल हो जाता है। मानसिक रोग से बीमार व्यक्ति के लक्षण अलग-अलग होते है क्योकि ये मरीज की हालत पर निर्भर करता है की उसे किस प्रकार की मानसिक बीमारी है। इसके लक्षण किसी में किसी भी समय दिखाई दे सकते है, पर देखने में किसी को समय लग जाता है तो किसी के बहुत ही जल्दी दिख जाते है। ये रोग आदमी-औरत किसी को भी हो सकता है। अगर इसका अच्छे डॉक्टर से इलाज करवाए तो ये बीमारी ठीक भी हो जाती है। अगर किसी जानकारी का भी कोई हो तो उसे इलाज करवाना चाहिए ताकि वह अपनी लाइफ अच्छी तरह जी सके।

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जनिये हल्दी के गुण एव उपयोग

Turmeric एक आम मसाला है हल्दी को मसालों की रानी कहा जाता है। turmeric की अपने आप में एक अलग ही पहचान है। इसकी सुगंद एरोमा जैसी, स्वाद तेज और रंग गोल्डन होता है। भारतीय रसोई हल्दी के बिना अधूरी मानी जाती है। हल्दी के बिना भारतीय रसोई की कल्पना भी करना मुश्किल है।

turmeric
turmeric

 

हल्दी में एंटीबैक्टीरिया और एंटीफंगल भी होते है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, विटामिन के, पेटेशियम, कैल्शियम, कॉपर, आयरन, मैग्निसियम, व् जिंक आदि गुण होते है। हल्दी स्वाद के साथ ही ये नेत्र रोग के लिए भी फायदेमंद होती है।

आजकल कैंसर रोग बहुत तीव्र गति से बढ़ रहा है। जब किसी को कैंसर होता है तो शरीर की सारी कोशिकाएं विपरीत कार्य करने लगती है। हल्दी का उपयोग करने से कैंसर भी कम हो जाता है। हमारे शरीर में जो कोशिकाएं विपरीत कार्य करती है हल्दी उन कोशिकाओं को नष्ट करती है। इसलिए कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के लिए भी हल्दी बहुत ही उपयोगी है। हल्दी का उपयोग सुबह खली पेट खाने से शरीर में उपस्थित गंदगी निकल जाती है।

turmeric में उपस्थित एंटीबैक्टीरिया और एंटीफंगल शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। सर्दी में जुखाम फ्लू जैसी बीमारी तो होती रहती है। लेकिन ऐसी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए आप हल्दी का उपयोग कर सकते है। सर्दी में आप रोज रात में एक गिलास दूध में एक चम्मच हल्दी मिलकर पीने से सर्दी जुखाम जैसी बीमारी तो दूर होती ही है इसके साथ ही छोटे मोटे रोग भी नष्ट हो जाते है।

turmeric डायबिटीज के लिए भी बहुत ही उपयोगी मानी जाती है। turmeric ग्लूकोस को कंट्रोल करती है। आजकल तो हल्दी कैप्सूल भी आते है ये कैप्सूल डॉक्टर की अनुमति के अनुसार ही लेने चाहिए। ऐसा करने से डायबिटीज से पीड़ित को फायदा हो सकता है। हल्दी का उपयोग करना चाहिए।

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आपके चहरे पर गोरापन चाहते हो तो कीजिये ये उपाय

आजकल हर कोई चाहता है की मेरा चहरा fairness दिखे। गोरा दिखने के लिए लोग बहुत ही उपाय करते है लेकिन फर्क नहीं होता है। इसका एक उपाय हम आपको आज बताने जा रहे है। ये उपाय बिल्कुल आसान है। आजकल लोग ब्यूटीशियन को लेकर बहुत पैसा खर्च करते है। आज आपको एक घरेलु नुस्खा बताते है जो आपको पांच मिनिट में fairness कर सकता है।

fairness
fairness

 

चहरे पर कील मुहासों से कई लोग परेशान रहते है। इसका इलाज कई लोग तो दवाईयां भी लेते है। सबको इच्छा होती है मेरा चहरा fairness और साफ दिखे। आजकल तो बाजार में ब्यूटी प्रोडेक्ट भी मिलते है। लेकिन इन सब में केमिकल प्रयोग किया जाता है। जिसके कारण त्वचा को नुकशान हो सकता है। लेकिन फिर भी लोग महगें प्रोडेक्ट यूज़ करते है। लेकिन fairness दिखने के लिए सबसे अच्छा तरीका है घरेलु नुस्खा जो आज हम आपको बताते है।

सबसे पहले हम जानते हर घर में बेसन होता है। आपको एक कटोरी में एक चम्मच बेसन लेना है, फिर आपको आधा चम्मच दही लेना है। अब इन दोनों को एक कटोरी में अच्छी तरह मिलाइये। ये अच्छी तरह मिलाने के बाद एक गाड़ा पेस्ट बनेगा। आपको देखना है ये पेस्ट अच्छी तरह मिला हुआ होना चाहिए। अब जो आपने पेस्ट बनाया है उस पेस्ट में एक चम्मच निम्बू का रस मिलाइये, अब इसको भी अच्छी तरह मिला लीजिये। अब इस पेस्ट को आप आपने चहरे पर लगाइये और 15 मिनिट के लिए चहरे को सूखने दे। 15 मिनिट बाद आप चहरा धो ले। आपका चहरा इन 15 मिनिट में fairness दिखने लगेगा।

ये सबसे आसान है और इसमें खर्चा भी नहीं है। ये उपाय आप भी करें और लोगो को भी बताये ताकि केमिकल युक्त क्रीम लगाने की बजाय ये घरेलु नुस्खा प्रयोग करें ऐसा करने से आपके चहरे को कोई नुकशान नहीं होगा। आप ये सप्ताह में एक बार प्रयोग कर सकते है। आप सप्ताह के सात दिनों में एक दिन आपने चहरे को गोरा करने के लिए भी निकल सकते हो। ये काम करने में आपको मात्र 15 मिनिट लगते है।

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इस काम में आप लेट हो जाएं तो पत्नी नहीं होती नाराज,बल्कि बांधेगी तारीफों के पुल

क्या आप लेटलतीफी के लिए हमेशा अपनी पत्नी की डांट खाते हैं। क्या कोई ऐसा भी तरीका है जिससे आपको ये रोज—रोज की झिक—​​झिक (Marriage life issues) सुनना ही ना पड़े। बजाय पत्नी आप पर चिल्लाए, वह आपको जी जान से खुली छूट दे दे!!! जी हां, अगर वाकई ऐसा है तो हम आपको बताते हैं कि एक स्थान ऐसा है जहां लेटलतीफी की हद पार करने के बावजूद पत्नी आपको पुरस्कार देगी। साथ ही अगली बार और अधिक लेटलतीफी करने का निमंत्रण देगी।

marriage life issues
marriage life issues (Pic for illustration purpose only)

 

पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि क्या बेपर की उड़ाई जा रही है, लेकिन नहीं वास्तव में ऐसा एक स्थान है और उसका नाम है आपका बेडरूम। वहां आप सहवास के दौरान जितनी चाहे देर कर सकते हैं। मजाल कि पत्नी आपको डांट लगाए क्योंकि वह स्वयं वहां समय की पाबंदी लगाकर उस महाआनन्द से वंचित नहीं रहना चाहती जिसकी वजह से यह सृष्टि चक्र चलता है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो बैडरुम एक ऐसा स्थान है जहां जितनी अधिक देरी होगी, उतना ही अधिक सुख मिलेगा। कामशास्त्र के मुताबिक सहवास ठंडे दिमाग से किया जाए तो मैथुन का वक्त बढ़ता चला जाता है।

आमतौर पर यह देखा भी जाता है कि पति—पत्नी के बीच कई बार अनबन बनी ही रहती है। छोटी—छोटी बातों को लेकर क्लेश होता रहता है। बात—बात पर तलाक और घर छोड़ने की धमकियां दोनों तरफ से दी जाती हैं। अक्सर ऐसे मामलों में वैवाहिक सुख नहीं मिलना भी एक बड़ी वजह होती है। और पार्टनर इस बारे में आपस में खुलकर बात भी नहीं करते हैं। और मन ही मन सीधे बात नहीं करने की बजाय अन्य चीजों पर रोष दिखाते हैं।

वैसे तो कई तरह के इलाज और उपाय आजकल इस समस्या के निदान के लिए मौजूद हैं लेकिन हम आपको एक घरेलू इलाज भी बता रहे हैं। इसके लिए आपको घर पर ही बनानी है ये घरेलू दवा। दवा बनाने के लिए खूब बड़े—बड़े एक कली के लहसुन लें। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4 बजे बिस्तर छोड़ कर निवृत हो लें। अब करीब सौ ग्राम शुद्ध देशी घी लें और एक लहसुन को छोटे—छोटे टुकड़ों में काटकर घी में मिलाकर चटनी की तरह खा लें। इस चटनी को खाने के 2 घण्टे तक कुछ नहीं खाएं। यहां तक कि पानी भी नहीं पियें। दो घण्टे बाद देशी गाय का आधा लीटर दूध पी लें और फिर रात होने का इंतजार करें। पहले दिन ही पार्टनर से प्रशंसा पाएं।

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अब पार्टनर के सामने नहीं होना पड़ेगा शर्मिन्दा, सुबह ही ले लें ये ताकत देने वाला घरेलू नुस्खा

क्या आप बेडरूम के लिए आवश्यक ताकत से महरूम है और सहवास के बाद आपको पार्टनर की कड़वी बातें सुननी पड़ती हैं, तो फिर ध्यान से पढ़िए, हम आपको बता रहे हैं कि वह ताकत कैसे चुटकियों में हासिल की जा सकती है। इतना ही नहीं हम उसे हमेशा बरकरार (takat ke upay) रखने का नुस्खा भी बताएंगे।

takat ke upay in hindi
takat ke upay in hindi (Pic for illustration purpose only)

 

असल में क्या होता है कि भारतीय समाज में सेक्स को पर्दे के पीछे की चीज माना गया है, इस वजह से किशोरावस्था से जवानी की दहलीज पर कदम रखने के दौरान युवा हस्तमैथुन करने लगते हैं, अब इसी को मुद्दा बना कर नीम हकीम डराने का जाल बिछाते हैं और उन्हें बताते है कि इससे उनका प्राइवेट पार्ट कमजोर हो गया है और इसी कारण वे शीघ्र पतन के रोगी बन गए हैं।

असल में ऐसा नहीं है, शीघ्र पतन का कारण हस्तमैथुन नहीं है, इसकी असली वजह है शरीर में ताकत नही होना। आपने देखा होगा कि जब आप दौड़ते हैं तो पूरी स्पीड में पांच मिनट से ज्यादा नहीं दौड़ पाते, लेकिन आराम से पहले तेज चाल और फिर स्पीड बढ़ाते हैं तो दौड़ने का टाइम बढ़ जाता है। बिस्तर पर भी आपको ऐसा ही करना होगा, इसके साथ ही आपको लेनी होगी यह दवा। ना, ना डरिये मत!!! दवा का मतलब यहां डॉक्टरों वाली दवा नहीं, ऋषि मुनियों वाली दवा है।

दवा बनाने के लिए बाजार जाएं और खूब बड़े—बड़े एक कली के लहसुन ले आएं और सो जाएं। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4 बजे बिस्तर छोड़ कर निवृत हो लें। अब करीब सौ ग्राम शुद्ध देशी घी लें और एक लहसुन को छोटे—छोटे टुकड़ों में काटकर घी में मिलाकर चटनी की तरह खा लें। इस चटनी को खाने के 2 घण्टे तक कुछ नहीं खाएं। यहां तक कि पानी भी नहीं पियें। दो घण्टे बाद देशी गाय का आधा लीटर दूध पी लें और फिर रात होने का इंतजार करें। पहले दिन ही पार्टनर से प्रशंसा पाएं।

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सुडौल बॉडी बनाने वाले युवाओं के लिए ये है देशी नुस्खा, अपनाएं ये घरेलू उपाय

जिम जाकर डोले बनाने की चाह रखने वाले नौजवानों को जिम संचालक अक्सर उस प्रोटीन पॉउडर के सेवन के लिए तैयार कर लेते हैं जो शरीर के लिए जहर के समान है। इस पॉउडर से शरीर फूल तो जाता है, लेकिन वह पेट संबंधी रोगों की ऐसी सौगात भी देता है, जो बाद में तमाम इलाज के बावजूद ठीक नहीं होती। जहां तक शरीर को गठीला बनाने का सवाल है तो आयुर्वेद में एक से बढ़कर एक नुस्खे हैं। ऐसा ही एक नुस्खा हम आपको बताते है। udad ke laddu ….

udad ke laddu

 

यह नुस्खा तैयार होता है उड़द से, जी हां उड़द। वही उड़द जिसे हम दाल के रूप में तड़का लगाकर खाते हैं। बुजुर्गों से शायद इसके बारे में आपने सुना ही होगा। नहीं भी सुना हो तो कोई बात नहीं, आपको करना बस इतना है कि मां को बताना है यह नुस्खा।

ऐसे बनाएं गठीला बदन बनाने के लिए उड़द का पॉवर लड्डू (Udad ke laddu)

एक किलो काला उड़द लें। इसे 12 घण्टे तक भिगोएं। इतने समय में यह ठीक से भीग जाएगी। अब इसे धो लें। इससे उड़द के छिलके हट जाएंगे। अब इसे खूब महीन पीस लें। फिर गाय का एक किलो घी लें। अब इन दोनों को मिलाकर हलवे की तरह पेस्ट तैयार कर लें। इसे गैस या चूल्हे पर सुनहरी होने तक भूनें। इस ताकतवाले हलवे को ठंडा होने दें। ठंडा होने पर इसमें आधा किलो मोटा बूरा (चीनी पाउडर) मिला दें। साथ ही में पहले से आधा किलो बादाम भीगो कर रखें और इसे महीन पीस लें। इसे भी हलवे में मिला लें। और सारे पेस्ट को अच्छे तरीके से मिला लें। इसके तुरंत बाद इस हलवे से लड्डू के आकार के गोले बनाकर बर्तन में रख लें।

अब रोजाना एक या दो लड्डू (जितना पचा सकें) को सुबह जिम करने के बाद गाय के शुद्ध आधा किलो दूध के साथ सेवन करें। ध्यान रहे दूध घूंट—घूंट कर पियें| सेवन एक माह तक नियमित करें। एक माह बाद अपने डोले चेक कर लें और प्रोटीन पॉउडर लेने वाले से तुलना कर लें। जो फर्क आप देखेंगे, उससे आप ही नहीं आपके मित्र और परिजन भी वाह वाह करेंगे।

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क्या जानवर भी होते हैं गे- समलैंगिक और लेस्बियन, जानिए चौंकाने वाली जानकारी

क्या पशुओं में भी गे समलैंगिक और लेस्बियन होते हैं? यह सवाल शायद आज की दुनिया का सबसे वायरल सवाल है क्योंकि पिछले तीन दशकों से लोग समलैंगिक और लेस्बियन बताने में गर्व का अनुभव करने लगे हैं। Read animal mating theory….

animal mating theory
animal mating theory

 

यहां हम आपको बताएंगे कि पशुओं में यह विकृति क्यों नहीं पाई जाती। असल में प्रकृति ने मानव के अलावा अन्य जीवधारियो को सेक्स लाइफ तो बख्शी है लेकिन नियंत्रण के साथ। किसी भी प्रजाति का पशु हो, वह अपनी इच्छा से सेक्स के लिए तैयार नहीं हो सकता। इसके लिए प्रकृति ने समय तय कर रखा है।

Animal mating theory

यह समय भी कुछ दिनों का होता है। उस तय समय में जब मादा पशु सेक्स के लिए तैयार होती है तभी नर पशु को उसके साथ समागम का मौका मिलता है। यानि दूसरे शब्दों में कहा जाए तो मादा के हीट में आने के बाद ही नर उसके साथ सहवास कर सकता है। अगर नर तय समय के अलावा सेक्स करना चाहे तो उसका शिश्न उस खोल से बाहर ही नहीं आ पाता जिसे प्रकृति ने कैप के रूप में पशु को दिया है।

यह भी पढ़ें: हजारों साल पहले से भारत में मौजूद है गूगल, ऋषि—मुनि भी लेते थे काम

पशु विज्ञानियों के मुताबिक प्रकृति ने सृष्टि चक्र को जारी रखने के लिए जिस सहवास की रचना की है, उसे मानव ने तो मस्तिष्क के दम पर कभी और कहीं भी सेक्स के लिए स्वयं को तैयार करने में महारत हासिल कर ली है लेकिन जानवरों को अभी भी इसके लिए प्रकृति के अनुमति पत्र की जरूरत होती है।

विज्ञानियों के अनुसार पालतू जानवर कुत्ते को ही ले, क्वार के माह में प्रकृति उनके लिए अनुमति पत्र जारी करती है। उस पूरे माह में कुत्ते कहीं भी सेक्स करते दिख जाते हैं। इसके बाद पूरे ग्यारह माह तक वे इस क्रिया से दूर रहते हैं। इसी तरह गाय, बैल, घोड़ा, शेर, चीता, समेत तमाम जानवरों को भी प्रकृति इसी तरह के अनुमति पत्र जारी करती है।

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आप भी जल्द छोड़ना चाहते हैं स्मोकिंग तो अपनाएं ये भारतीय प्रोडक्ट, रिसर्च के बाद हुआ लांच

निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एनआरटी) उत्पाद Kwitz धूम्रपान करने वालों के लिए एक उपचार प्रदान करता है जो अपनी सिगरेट पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करके पूरी तरह से धूम्रपान छोड़ने के लिए तैयार होते हैं। Nicotine Replacement therapy (एनआरटी) सिगरेट के धूम्रपान से प्राप्त होने वाले निकोटीन का छोटी मात्रा में उपयोग करता है यह संतुलित मात्रा में उपलब्ध स्वच्छ निकोटीन तलब को तृप्त करने में सहायता करता है। साथ ही लोगों को वापसी के लक्षणों को नियंत्रित करने और पुनरुत्थान की संभावना कम करने में सहायता करता है।

nicotine replacement therapy
nicotine replacement therapy

 

ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड जो कि एक शोध आधारित वैश्विक एकीकृत दवा कंपनी है, ने क्विट्ज़ (Kwitz) जो एक चिकित्सकीय रूप से स्वीकृत निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी है, यह धूम्रपान करने वालों को धूम्रपान से मुक्त जीवन की ओर बढ़ने में कदम-दर-कदम मदद करता है। क्विट्ज़ निकोटीन गम दो रूपों में उपलब्ध होगा। प्रति दिन 20 से कम सिगरेट पीने वालों के लिए क्विट्ज़ 2उह और प्रति दिन 20 से ज्यादा सिगरेट पीने वालों के लिए क्विट्ज़ एक ओटीसी उत्पाद के रूप में उपलब्ध होंगे।

क्विट्ज़ निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (Nicotine Replacement therapy) उत्पाद धूम्रपान करने वालों के लिए एक उपचार प्रदान करता है जो अपनी सिगरेट पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करके पूरी तरह से धूम्रपान छोड़ने के लिए तैयार होते हैं। Nicotine Replacement therapy सिगरेट के धूम्रपान से प्राप्त होने वाले निकोटीन का छोटी मात्रा में उपयोग करता है यह संतुलित मात्रा में उपलब्ध स्वच्छ निकोटीन तलब को तृप्त करने में सहायता करता है। साथ ही लोगों को वापसी के लक्षणों को नियंत्रित करने और पुनरुत्थान की संभावना कम करने में सहायता करता है। तंबाकू के धुएं के विपरीत यह उपयोगकर्ताओं को निकोटीन तक पहुंचने की अनुमति देता है जो कार्बन मोनोऑक्साइडए टायर और अन्य हानिकारक रसायनों से मुक्त है। इस प्रकार यह धूम्रपान करने वालों को धूम्रपान-मुक्त जीवन प्राप्त करने के लिए एक सुरक्षित तरीका उपलब्ध कराता है।

लॉन्च के अवसर पर ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के इंडिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका क्षेत्र के अध्यक्ष और प्रमुख सुजेश वासुदेवन ने कहा, ग्लेनमार्क को भारत में क्विट्ज़ जैसी एक निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (Nicotine Replacement therapy) लाने पर गर्व है। यह उत्पाद धूम्रपान करने वालों को तम्बाकू जनित धूम्रपान छोड़कर स्वस्थ जीवन प्राप्त करने में मदद करेगा। हम आशा करते हैं कि क्विट्ज़ धूम्रपान करने वालों को क्रमिक रूप से सहूलियत के साथ धूम्रपान रोकने का एक स्थायी तरीका ढूंढने में मदद करेगा। उन्होंने आगे कहा क्विट्ज़ केवल एक उत्पाद नहीं है बल्कि यह उन लोगों के लिए एक सहायक और सहायता-प्रणाली भी है जो पूरी तरह से धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं और साथ ही यह उनके आसण्पास के लोगों की भी मदद कर सकते हैं।

विश्व स्वास्थय संगठन का अनुमान है कि तम्बाकू का उपयोग धुआं सहित और धुआं रहित वर्तमान में करीब साठ लाख मौतों का कारण बनता है और इनमें से कई समय से पहले ही ज्ञात होने वाले होते हैं दुनिया की अधिकांश धूम्रपान करने वाली आबादी य80ःद्ध कम या मध्यम आय वाले देशों में रहती है और 49 देशों में पुरुषों के बीच धूम्रपान महिलाओं की तुलना में दस गुना पाई गई है। औसत तौर पर धूम्रपान के कारण लोगों की जीवन अवधि 12 वर्ष कम हो गई है। यदि दुनिया भर में धूम्रपान करने वालों की यही स्थिति रही तो 2020 तक यह आंकड़ा एक करोड़ मौत प्रतिवर्ष हो जाएगी।

भारत में तंबाकू से संबंधित बीमारियों से लगभग 2,200 लोग रोजाना मरते हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन यडब्लूएचओ का अनुमान है कि 2020 तक यह मृत्यु दर 15 लाख सालाना से अधिक हो जाएगी। चबाने योग्य तम्बाखू की खपत भारत में सबसे ज्यादा है। तम्बाकू से संबंधित बीमारियों के कारण औषधीय खर्चो, इलाज के लिए अनुपस्थिति और आय का नुकसान तथा असामयिक मौत के कारण प्रत्यक्षरूप से देश पर लगभग 25 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।

ग्लेनमार्क श्वास के बारे में

ग्लेनमार्क रोगियों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसने एलर्जिक राइनाइटिसए इडियोपैथिक पल्‍मोनरी फाइब्रोसिस अस्थमा और सीओपीडी जैसी सम्‍सयाओं के इलाज के लिए लगातार नए उत्पादों को पेश किया है। ग्लेनमार्क ने श्वसन से संबंधित समस्‍याओं के इलाज के लिए नयेण्नये उत्पादों को लाने पर ध्यान केंद्रित किया हैए जिससे रोगियों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद मिले। ग्लेनमार्क ने भारत की पहली डिजिटल डोज इनहेलरण् डिजीहेलर और भारत का पहला ग्लाइकोपायरोनियम लॉन्च किया है जो एक तेजण्क्रियाशील सूखा पाउडरवाला इनहेलर है और उसका ब्रांड नाम हैण् एयर्ज।

ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के बारे में
ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड यजीपीएलद्ध एक अनुसंधान केन्द्रित विश्वस्तरीय एकीकृत दवा कंपनी है जिसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है। आय के संदर्भ में इसे विश्व की प्रमुख 75 फार्मा और बायोटेक कंपनियों के बीच स्थान प्राप्त है वर्ष 2017 में प्रकाशित 100 ैब्त्प्च् रैंकिंगद्ध। ग्लेनमार्क नए मॉलिक्यूल एनसीई यनई रासायनिक इकाईद्ध और एनबीई यनई जैविक इकाईद्धए दोनों की खोज के क्षेत्र में अग्रणी है। ग्लेनमार्क में कई मॉलिक्यूल नैदानिक विकास के विभिन्न चरणों में हैं जो मुख्य रूप से ऑन्कोलॉजीए त्वचाविज्ञान और श्वसन संबंधी समस्याओं पर केंद्रित हैं।

भारत सहित उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों के ब्रांडेड जेनरिक बाजार में कंपनी की प्रभावपूर्ण उपस्थिति है। अपनी अनुषंगी कंपनियों के साथ जीपीएल के 5 देशों के 16 स्थानों में विनिर्माण केन्द्र तथा छह अनुसंधान एवं विकास केन्द्र हैं। ग्लेनमार्क सर्विसेज का जेनरिक्स बिजनस अमेरिका एवं पश्चिमी यूरोप के बाजारों की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। एपीआई बिजनस 80 से अधिक देशों में अपने उत्पाद बेचता है जिसमें अमेरिका सहित यूरोपीय संघ के विभिन्न देश, दक्षिण अमेरिका और भारत शामिल हैं।

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प्रदूषण से फेल हो सकता है हार्ट, और क्या हो सकते हैं नुकसान, जानिए समाधान

दिल्ली को पहले से ही दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक होने का दर्जा मिला हुआ है, ऊपर से पिछले कुछ दिनों से शहर में मौजूद काले धुंए की मोटी परत ने इस तथ्य को और पुख्ता किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सीमा से 15 गुना अधिक प्रदूषण है शहर में। शहर की एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 451 की खतरनाक सीमा पर पहुंच गया है, जो एक दिन में 50 सिगरेट पीने के बराबर है। प्रदूषण के इस तरह के खतरनाक लेवल से (pollution effects) हृदय और श्वसन रोग जैसी परेशानियों वाले मरीजों में जटिलताएं पैदा होने का खतरा रहता है।

pollution effects
pollution effects

 

Pollution effects

प्रदूषण के कारण आंखों, नाक और गले में जलन हो सकती है। खाँसी, कफ, सीने में जकड़न और सांस की तकलीफ के अलावा हृदय की समस्याओं वाले लोग सीने में दर्द, सांस की तकलीफ और थकान महसूस कर सकते हैं। जहरीली हवा में सांस लेने से दिल का दौरा भी पड़ सकता है।

पुष्पावती सिंघानिया हार्ट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली के चेयरमैन डॉ. टी एस क्लेर के अनुसार प्रदूषण का स्तर अब तक सबसे ऊंचे स्तर पर है। यह स्थिति उन लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक है, जो मौजूदा हृदय की समस्या से पीड़ित हैं और जिन्हें एलर्जी रहती है। अधिक प्रदूषित हवा में सांस लेने से दिल के दौरे और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है। यदि आपको हार्ट फेल होने का खतरा रहता है, तो वायु प्रदूषण के उच्च स्तर से यह और भी बदतर हो सकता है। यदि आपको एनजाइना या एटरियल फिब्रीलेशन हो तो लक्षण और भी बदतर हो सकते हैं। प्रदूषण के लगातार संपर्क में रहने पर धमनियों में प्लेक पैदा हो सकता है, जिससे उच्च जोखिम वाले रोगियों में दिल का दौरा पड़ सकता है। विशेष रूप से ऐसे प्रदूषण के स्तर के चलते बाहर जाने के दौरान कुछ एहतियाती उपाय करने आवश्यक हैं। सरकारें तो प्रदूषण को कम करने के प्रयास करती ही हैं, व्यक्तिगत स्तर पर भी हमें प्रयास करने चाहिए।’

स्माॅग एक जटिल मिश्रण है जो विभिन्न प्रदूषक पदार्थों जैसे नाइट्रोजन आॅक्साइड और धूल कणों से बना है। सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने से यह जमीनी स्तर के ओजोन जैसा व्यवहार करता है। औद्योगिक शहरों में यह धुंध की तरह हो जाता है। यह शहर में रह रहे बीमार बच्चों और वयस्कों के लिए बेहद खतरनाक स्थिति है।

डॉ. क्लेर ने बताया, ‘पीएम 2.5 के धूल कण, जिनका आकार 2.5 माइक्राॅन से भी कम है, सांस के साथ अंदर चले जाते हैं, जिससे हृदय धमनियों में सूजन हो सकती है। प्रदूषकों के संपर्क में आने से आर्टीरियल वासोकंस्ट्रिक्शन और एथेरोस्कलेरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। यद्यपि प्रदूषण के असर को पूरी तरह से तो खतम नहीं किया जा सकता, लेकिन कुछ कदम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि यह एक्सपोजर कम से कम हो। इसके लिए अधिक प्रदूषण वाले इलाकों में खुले में घूमने या व्यायाम करने न जायें। धुंए का स्रोत आपके पार्क या सड़क से कम से कम 200 मीटर दूर होना चाहिए।’

प्रदूषण का स्तर बढ़ने से निपटने के सुझाव

– अस्थमा और पुरानी ब्रोंकाइटिस के मरीजों को धुंध के दिनों में अपनी दवा की खुराक बढ़ा लेनी चाहिए।
– स्माॅग होने पर परिश्रम वाले कामों से बचें। धुंध के समय बाहर निकलने से बचना ही बेहतर है।
– स्माॅग के समय हृदय रोगियों को सुबह की सैर नहीं करनी चाहिए।
– फ्लू न्यूमोनिया के टीके अवश्य लगवा लें।
– सुबह के समय दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें।
– बाहर निकलना ही हो तो मास्क पहनना बेहतर है।