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अब तो लटकना ही होगा फांसी पर क्योंकि सुप्रीम कोर्ट नहीं सुनना चाहता याचिका - Mobile Pe News
Sunday , February 23 2020
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अब तो लटकना ही होगा फांसी पर क्योंकि सुप्रीम कोर्ट नहीं सुनना चाहता याचिका

नयी दिल्ली. निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले के गुनहगार मुकेश की फांसी से बचने की आखिरी कोशिश बुधवार को उस वक्त नाकाम हो गई, जब उच्चतम न्यायालय ने दया याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ उसकी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) निरस्त कर दी।
इधर निर्भया कांड के एक अन्य गुनहगार अक्षय कुमार ने उच्चतम न्यायालय में क्यूरेटिव पिटीशन (सुधारात्मक याचिका) दायर कर फांसी को टलवाने की कोशिश की है।

न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की विशेष खंडपीठ ने मुकेश की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि उसकी याचिका में कोई आधार नहीं दिखता। न्यायालय ने निर्भया कांड के गुनहगार मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली अपील पर मंगलवार को फैसला सुरक्षित रख लिया था। खंडपीठ ने मुकेश की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश और दिल्ली सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
देश को दहला देने वाले निर्भया कांड के एक अन्य गुनहगार अक्षय कुमार ने अब उच्चतम न्यायालय में क्यूरेटिव पिटीशन (सुधारात्मक याचिका) दायर किया है।

यह याचिका मंगलवार की देर शाम दाखिल की गई थी। इस बारे में हालांकि आज न्यायालय परिसर में वकील ए. पी. सिंह ने पत्रकारों को जानकारी दी। सिंह ने ही अक्षय की ओर से याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने सजा कम करने की मांग की है। अक्षय के पास हालांकि अभी राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगाने का संवैधानिक अधिकार मौजूद है। इस मामले में अभी चौथे दोषी पवन की ओर से क्यूरेटिव याचिका दाखिल नहीं की गई है। इधर निर्भया मामले के दोषियों द्वारा लगातर कानून का सहारा लेकर फांसी टालने के मामले में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कहा कि वे इस मामले में संसद से अनुरोध करेंगे कि कानून में जरुरी बदलाव कर ऐसे अपराधियों की फांसी की सजा पर तुरंत क्रियान्वयन किया जाये।
चौहान ने ट्वीट कर कहा ‘ मासूम बिटियाओं के साथ बलात्कार जैसे घिनौने अपराध करने वालों का सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। मैं संसद से अनुरोध करता हूँ कि क़ानून में ज़रूरी बदलाव कर ऐसा किया जाए कि ऐसे अपराधियों को बिना कोई देरी किए मिली हुई फाँसी की सजा का क्रियान्वयन तुरंत हो।’ पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा ‘जैसा कि कहा गया है कि न्याय मिलने में हुई देरी, न्याय न मिलने के बराबर है। यही सब क़ानूनी दाँवपेंच के चलते जनता हैदराबाद में हुए एनकाउंटर पर ख़ुशियाँ मनाती है। उसको त्वरित न्याय और उचित सजा मानती है। जनता का ये आक्रोश समाज में अराजकता पैदा कर सकता है।

 

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