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अब मोदी के एक और मंत्री की जुबान फिसली, कहा मैली नहीं है गंगा

फिल्मों के एक दिन के कलेक्शन के आधार पर मंदी को नकारने वाले मोदी के बड़बोले मंत्री के बयान वापसी के दो दिन बाद एक और मंत्री की जुबान फिसल गई। इस मंत्री ने कहा है कि गंगा मैली नहीं है, यह स्वार्थी लोगों का लगाया गया आरोप है। मंत्री ने ये गलत बयानी राजस्थान के झुंझुनूं में पत्रकारों के सवालों के जवाब में की। जबकि स्वयं उनका जल शक्ति मंत्रालय गंगा सफाई प्रोजेक्ट पर अब तक 25 हजार करोड़ से अधिक रुपया खर्च कर चुका है।

ये मंत्री हैं केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के प्रभारी गजेंद्रसिंह शेखावत। उन्होंने कहा है कि कुछ लोगों ने अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते देश में भ्रम फैलाया कि गंगा सबसे मैली नदी है, जबकि ऐसा नहीं है। शेखावत ने राजस्थान में झुंझुनू में सम्मान समारोह में शिरकत करने के बाद पत्रकारों से कहा कि गंगा समान लंबाई की विश्व की सबसे साफ 10 नदियों में शामिल है और इसमें भी वह पहले स्थान पर है। ढाई हजार किलोमीटर लंबी गंगा नदी में एक-दो जगहों पर ही शुद्धता मानक स्तर के नीचे है। उन्होंने कहा कि गंगोत्री से लेकर ऋषिकेश तक उन्होंने खुद नदी के पानी में राफ्टिंग की है। इस दूरी में गंगा नदी पूरी तरह से आचमन योग्य है।

उन्होंने नमामि गंगे अभियान के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि गंगा की अविरलता और निर्मलता को सुनिश्चित करने के लिए जल शक्ति मंत्रालय काम कर रहा है। शेखावत ने दावा कि कि आने वाले दो साल में नमामि गंगे अभियान का असर दिखने लगेगा, साथ ही उन्होंने गंगा के साफ होने के सवाल पर कहा कि गंगा की अविरलता और निर्मलता की कोई भी तारीख तय नहीं हो सकती। यह सतत चलने वाली प्रक्रिया है, लेकिन इसमें हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझेगा, तो ही इस दिशा में कोई काम हो सकता है। इसे जन आंदोलन बनाना पड़ेगा।

सवालों के जवाब में शेखावत ने कहा कि 1984 से गंगा को लेकर प्रयास प्रारंभ हुए थे, लेकिन इसे गम्भीरता से नहीं लेने के चलते यह काम सिरे नहीं चढ़ पाया। वहीं राज्यों का मामला होने के कारण भी दिक्कतें आईं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले पांच सालों में इस काम को मिशन मोड पर लिया है और उसका परिणाम आने वाले दो साल में दिखने लगेगा। उन्होंने बताया कि यमुना का पानी पहले नहर के जरिए शेखावाटी में आना था, लेकिन राज्य सरकार ने जो प्रस्ताव भिजवाया, उसमें एक पाइपलाइन के जरिए लाने का प्रस्ताव दिया है। जिसकी लागत बेहद ज्यादा आ रही है। इसलिए केंद्र ने वो प्रस्ताव राज्य सरकार को वापिस भिजवाया है, ताकि वे नए सिरे से दूसरे जरिए से पानी लाने का प्रस्ताव भिजवाएं। उन्होंने यह भी साफ किया कि हरियाणा और राजस्थान में पानी को शेखावाटी में लाने के लिए करार पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।

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