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सरिस्का के बाघों में दर्शकों को देखने की होड, सडक पर आ जाते हैं बाघ

जयपुर. सरिस्का अभ्यारण्य एक अक्टूबर से फिर से सैलानियों के लिए खोल दिया गया है। एक अक्टूबर को जैसे ही सरिस्का अभ्यारण सैलानियों के लिए खोला गया तो टहला गेट से प्रवेश करने वाले पर्यटकों ने एसटी-तीन को देखा। कुछ दिन बाद करना का बास के पास एसटी-पांच ने भी पर्यटकों को आकर्षित करने की कोशिश की तथा शनिवार रात्रि अलवर जयपुर मार्ग बांदीपुर के पास बाघ एसटी-21 और बाघिन एसटी-9 उस समय सड़क पर आ गए थे जब वहां से एक रोडवेज बस गुजर रही थी इस दौरान सभी यात्री इन दोनों बाघों को देखकर रोमांचित हो गये।

डीएफओ सुदर्शन शर्मा का कहना है कि अब तक एसटी-तीन पर्यटक को सबसे ज्यादा दिखा है वहीं एसटी -15, 21 और एसटी-9 भी पर्यटकों को नजर आ रहे हैं।

बाघों के संरक्षण के मद्देनजर उनकी निगरानी के लिये रेडियो कॉलर लगाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए सरिस्का प्रशासन ने एनटीसी को पत्र लिखा है। वयस्क होते बाघों की निगरानी के लिए रेडियो कॉलर लगाना जरूरी है। सरिस्का के एसटी 17, 18 ,19, 20 एवं 21 नर मादा बाघों को रेडियो कॉलर लगाने के लिए एनटीसी को पत्र लिखा गया है और वहां से अनुमति मिलने के बाद रेडियो कॉलर लगा दिये जाएंगे।

सरिस्का बाघ अभयारण्य में बाघों के संरक्षण के लिये किये जा रहे प्रयासों के तहत गांवों में विस्थापन के प्रयास गति नहीं पकड़ पा रहे हैं। बाघों के सफाए के बाद जब यहां बाघों को लाया गया तब केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार के दिशा निर्देशानुसार यहां गांव के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसमें अच्छा खासा पैकेज दिया गया था। शुरू में दो गांवों का विस्थापन हो गया, लेकिन विस्थापन स्वैच्छिक होने के कारण राजनीति की भेंट चढ़ गया और हालात यह हो गए कि स्थानीय नेता यहां से विस्थापन को नहीं होने देना चाहते।

हालांकि राज्य सरकार और एनटीसीए गांवों के विस्थापन के लिए पूरी तरह प्रयासरत है। सरिस्का में ग्रामीणों का विस्थापन पिछले कई वर्षाें से जारी है और अब तक इस विस्थापन की प्रक्रिया चल रही है।