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कांग्रेस का भाजपा पर जीडीपी को लेकर जोरदार वार

आर्थिक मंदी छाने का जो डर व्याप्त था, वो सच साबित हो चुका है। भारत की मजबूत GDP विकास दर के जो बड़े-बड़े दावे मोदी सरकार करती आ रही थी, वो सब खोखले साबित हो गए। चाशनी में लिपटे बोल,झूठे दावे और खोखली बयानबाजी समाचारपत्रों की सुर्खियां तो बन सकते हैं, लेकिन कड़वी सच्चाई को बदल नहीं सकते।

GDP
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हम लगातार सरकार को जो चेतावनी देते आ रहे थे, वो सच साबित हो गई है। 2015-16, 2016-17 और 2017-18 में GDP विकास दर क्रमशः 8. 0, 7.1 और 6.5 % ही रही। आंकड़ों ने साफ कर दिया कि किस प्रकार देश की विकास दर नीचे की ओर जा रही है। आर्थिक गतिविधि और वृद्धि में गिरावट का मतलब है, लाखों नौकरियों का नुकसान। नई परियोजनाओं की घोषणा में गिरावट आई है, ताजा निवेश धरातल में चला गया है, असंगठित क्षेत्र अभी भी नोटबंदी की मार से उबर नहीं पाया है, नई नौकरियों पर विराम लग गया है, निर्यात गिर रहा है, निर्माण क्षेत्र की वृद्धि रुक गई है, कृषि क्षेत्र पर गहरी मार पड़ी है और किसान-मजदूरों के बीच निराशा छा गई है।

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भारतीय अर्थव्यवस्था का आंकलन करने पर गंभीर खामियां सामने आती हैं।
1. GDP में 2016-17 में 7.1 % की विकास दर के मुकाबले 2017-18 के दौरान GDP में वृद्धिदर 6.5 % रहने का अनुमान है।
2. अपनी मौलिक कीमतों पर वास्तविक जीवीए की अनुमानित वृद्धि दर 2017-18 में 6.1 % थी, जबकि 2016-17 में यह 6.6 % थी।
3. अपने जीवीए में ‘कृषि, वन एवं मछली पालन’ क्षेत्र का 2017-18 के दौरान 2.1 % वृद्धि का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह वृद्धि दर 4.9 % थी। पिछली दो तिमाही में यह क्रमशः1.7 % और 2.3 % थी।
4. 2017-18 के लिए निर्माण क्षेत्र से मौलिक कीमतों पर जीवीए 4.6 % से बढ़ने का अनुमान है, जबकि 2016-17 में यह वृद्धि 7.9 % थी।
5. रिटेल क्षेत्र में महंगाई दोहरी मार मारते हुए 15 महीनों में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचकर नवंबर में 4.88 %हो गई तथा औद्योगिक
उत्पादन अक्टूबर में तीन महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंचकर 2.2 % ही रह गया।

6. भारतीय कंपनियों द्वारा नई परियोजनाओं की घोषणा 13 साल में सबसे नीचे गिरकर दिसंबर की तिमाही में 77,000 करोड़ रु. तक पहुंच गई। यह आंकड़े सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकॉनॉमी (सीएमआईई) के प्रोजेक्ट ट्रैकिंग डेटाबेस से प्राप्त हुए हैं। नई परियोजनाओं की घोषणा में सबसे बड़ी गिरावट निर्माण क्षेत्र में आई है।

7. कुल मिलाकर निवेश की कमर टूट चुकी है।
8. वित्तीय घाटा बजट में जीडीपी के 3.2 % के अनुमान से भी ज्यादा रहने की संभावना है।
9. भाजपा सरकार की सबसे बड़ी असफलता नौकरियों के क्षेत्र में रही है। आज जब अर्थव्यवस्था पर मंदी छा गई है, तो नई नौकरियां किस तरह निर्मित होंगी? केंद्र की भाजपा सरकार हर साल 2 करोड़ नौकरी देने का अपना चुनावी वायदा किस प्रकार पूरा करेगी?

10. बैंक में क्रेडिट ग्रोथ थम गई है, जो अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं। हाल ही में समाज में छाई अशांति इस आर्थिक मंदी का परिणाम थी, जिसे भाजपा सरकार ने बहुत ही निपुणता से दबा दिया। अब समय आ गया है जब केंद्र की भाजपा सरकार को खोखले दावे करना बंद करके कुछ ठोस काम करके दिखाना होगा।

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हमारा इतिहास गौरवशाली, भविष्य भी होगा सुनहरा- मुख्यमंत्री

Chief Minister Raje ने कहा कि हमें ‘मेरे लिए‘ की सोच से ऊपर उठकर ‘सबके लिए‘ की सोच के साथ आगे बढ़ना होगा तभी हम नया राजस्थान और नया हिंदुस्तान की कल्पना को साकार कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि हम एक्सक्लूसिव नहीं, इनक्लूसिव ग्रोथ की सोच के साथ राजस्थान के गौरवशाली इतिहास की तरह इसका भविष्य भी सुनहरा बनाएंगे।

Chief Minister Raje
Chief Minister Raje

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Chief Minister Raje ने बिड़ला ऑडिटोरियम में सेंटर फॉर मीडिया रिसर्च एण्ड डवलपमेंट (सीएमआरडी) की ओर से ‘विकास के लिए राजनीति‘  विषय पर आयोजित युवा सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि सर्व हित की सोच के साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने ऐसे कई बडे़ निर्णय लिए जो हमारे देश का भविष्य संवार रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारा भारत एक बार फिर विश्व गुरू बनकर उभरेगा।

विकास की राजनीति के लिए बदलना होगा माइंडसेट

मुख्यमंत्री ने कहा कि उदारीकरण और वैश्वीकरण के कारण आमजन की सरकारों से अपेक्षाएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन ये अपेक्षाएं तभी  पूरी होंगी जब आमजन और सरकार कंधे से कंधा मिलाकर चलेेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक हम अपना मांइड सेट नहीं बदलेंगे तब तक विकास के लिए राजनीति के अपने ध्येय को पूरा नहीं कर पाएंगे। तोड़ने नहीं, जोड़ने की राजनीति करें

Chief Minister Raje ने कहा कि एक जमाना था जब ‘तोड़ने की राजनीति‘ के दम पर सत्ता हासिल की जाती थी, लेकिन अब वो समय है जब ‘जोड़ने की राजनीति‘ ही विकास का मूलमंत्र बन सकती है। उन्होंने कहा कि हम लोगों को गरीबी में रखकर कभी भी विकास की राजनीति नहीं कर सकते। लोगों की भावनाओं का आदर करते हुए संवेदनाओं के साथ आगे बढाकर ही हम विकसित राज्य और विकसित राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।

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‘आओ साथ चलें‘ के नारे से बढ़ा युवाओं में विश्वास

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की साढ़े सात करोड़ की आबादी में से 2 करोड़ से अधिक युवा हैं और यह वह महाशक्ति है जो पूरी दुनिया में  राजस्थान का गौरव बढ़ाएगी। प्रदेश की इसी शक्ति को एकजुट करने के लिए हमने ‘आओ साथ चलें‘ का नारा दिया था, जिसने प्रदेश की युवा शक्ति में विश्वास पैदा किया।

सीएम राजे की तरह राजनीति में संवेदनशीलता की जरूरत: सहस्त्रबुद्धे

सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे ने ‘सामाजिक बदलाव की राजनीति‘विषय पर संबोधन देते हुए कहा कि राजनीति का दायरा सत्ता के गलियारे से व्यापक है। देश में राजनीति का स्वरूप बदल रहा है और न्यू पॉलिटिक्स के साथ हम न्यू इंडिया में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में
सकारात्मकता का जो माहौल बन रहा है, हमें मिलकर उसे ताकत देने की जरूरत है। उन्होंने Chief Minister Raje के कुशल नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि जिस प्रकार वे आमजन के बीच जाकर लोगों की जरूरतों को जानने का प्रयास कर रही हैं, उसी संवेदना की आज राजनीति में जरूरत है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सामाजिक सरोकारों से संबंधित उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रदेश के 11 युवाओं को सम्मानित किया। इससे पहले सीएमआरडी के सुरेन्द्र चतुर्वेदी ने स्वागत संबोधन दिया। इस अवसर पर सार्वजनिक निर्माण मंत्री युनूस खान, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती मनन चतुर्वेदी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

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राज्यसभा नामांकन विवाद उत्पन्न कर केजरीवाल ने लोकतंत्र को शर्मसार किया

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने एक पत्रकार सम्मेलन में कहा कि अरविन्द केजरीवाल सरकार (Aam Aadmi Party) की उपलब्धियों के दावों की पोल अब सार्वजनिक जीवन के हर मुद्दे पर खुल रही है। दिल्ली में अस्पतालों के घटते बेड और निजी अस्पताल के प्रबंधक को राज्यसभा में पहुंचाना केजरीवाल सरकार के दावों की पोल खोलते हैं।

Aam Aadmi Party
Aam Aadmi Party

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तिवारी ने कहा कि अरविन्द केजरीवाल ने 2015 में सत्ता में आने से पूर्व एवं सत्ता में आने के बाद दिल्ली को सर्वोत्तम शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवायें देने का वायदा किया और बिजली के दाम हाफ और पानी के माफ उनका संकल्प था। बेघरों को सुरक्षा देने के भी अरविन्द केजरीवाल (Aam Aadmi Party) ने बड़े-बड़े दावे किये थे।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि केजरीवाल सरकार Aam Aadmi Party के रहते दिल्ली में सरकारी अस्पतालों में ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है और स्थिति इतनी खराब हो गई है कि कुछ वर्ष पूर्व तक दिल्ली के सर्वोच्च रेफरल अस्पताल के रूप में देखे जाने वाले जी.बी. पन्त अस्पताल में भी मरीजों के लिए उपलब्ध बेड की संख्या तेजी से गिर रही है।

आर.टी.आई. से मिल रही जानकारी के अनुसार जी.बी. पन्त अस्पताल में स्वीकृत 758 बेड के स्थान पर केवल 735 बेड ही आज मरीजों को उपलब्ध हैं तो जनकपुरी स्थित सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल में 250 बेडों के स्थान पर 100 बेड ही मरीजों के लिए उपलब्ध हैं। लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल प्रबंधन ने तो बेडों की उपलब्धता के बारे में जानकारी होने से ही इंकार कर दिया।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध सरकारी अस्पताल जी.बी. पन्त में मरीजों के लिए उपलब्ध बेडों की संख्या में कमी पर आर.टी.आई. से मिली जानकारी और खुद सरकार द्वारा निजी अस्पतालों से इलाज करवाने की बात दर्शाता है कि केजरीवाल सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार में असफल रही है। सरकारी अस्पतालों को सुदृृढ़ करने के केजरीवाल सरकार के संकल्प पर न सिर्फ निजी अस्पतालों में इलाज के प्रस्ताव से शंका उत्पन्न हुई है बल्कि अब राज्यसभा के लिए भी एक निजी अस्पताल के कर्ताधर्ता को नामांकित किये जाने से सरकार सवालों के कटघरे के बीच है।

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केजरीवाल सरकार बेघरों के मुद्दे को भी एक राजनीतिक मुद्दे की तरह इस्तेमाल करती है, उसका भावनात्मक उपयोग करती है पर जमीन पर उनके लिए कुछ नहीं करती। तिवारी ने कहा कि गत दिनों मैं स्वयं देर रात में बेघरों की स्थिति को समझने एवं अपना निजी सहयोग बेघरों की मदद को देने के लिए निकला और देख कर दुख हुआ कि देश की राजधानी में हजारों-लाखों लोग सड़कों पर सोने के लिए बाध्य हैं। समाचारों के अनुसार इस वर्ष की सर्दियों में दिल्ली में लगभग 200 लोग ठंड के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। दिल्ली में लगभग 1 से 2 लाख निराश्रित एवं बेघर लोगों के होने का अनुमान है पर दिल्ली सरकार के सभी आश्रय केन्द्रों की संख्या मिलकर 25,000 लोगों को भी सुरक्षा नहीं दे पा रही है।

तिवारी ने राज्यसभा में दिल्ली से नामांकन को लेकर चल रहे विवाद पर खेद व्यक्त करते हुये कहा कि विभिन्न राज्यों से राज्यसभा के लिए नामांकन होते है, छोटे-छोटे दलों के प्रतिनिधि भी संसद में नामांकित होते हैं पर जिस प्रकार नामांकन के पीछे पैसे के आरोपों की बात सड़क से संसद के गलियारों तक और मीडिया डिबेटों में हो रहा है, उसने सभी अचंभित किया और लोकतंत्र को शर्मसार किया है।

आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकन को लेकर उत्पन्न विवाद जो दिल्ली में देखने को मिला है उसने दिल्ली की जनता को कुपित किया है और दिल्ली की जनता जानना चाहती है कि इस विवाद के पीछे क्या है, आखिर क्यों ये पैसों के सवाल उठ रहे हैं ?

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