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बिहार की सियासी फिजां में बदलाव की महक! पीछे हटी भाजपा

उमेश कुमार

नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव पर देश भर के लोगों की नजर टिकी हुई है। बिहार की जनता की राजनीतिक समझ को देख चुनाव परिणाम के कयास लगाने की हिम्मत कोई नहीं कर पा रहा है। भले ही सभी पार्टियां अपनी—अपनी जीत का दावा कर रही हो और उनके समर्थक उस पर विश्वास भी कर रहे हो। लेकिन असलियत यह है कि कोई भी पूर्वानुमान लगा पाने की स्थिति में नहीं है।

शुरूआती दौड़ में तो यह लग रहा था कि भाजपा अपने इशारों पर जदयू यानी नीतीश कुमार को नचा रही है। पर जैसे जैसे चुनाव प्रचार आगे बढ़ रहा है भाजपा नीतीश के आगे नतमस्तक होते जा रही है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस टिकट बंटवारे में आत्मसमर्पण करती दिखी। जबकि राजद सबसे ज्यादा उत्साहित नजर आ रहा है। जनता की खामोशी के बावजूद तेजस्वी यादव का मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा होता दिख रहा है!

लोजपा की टेढी चाल से नी​तीश को घेरना चाहती थी भाजपा

भाजपा ने बिहार में नीतीश कुमार को घेरते हुए लोजपा को साथ रखने की रणनीति बनाई थी। इसीके तहत भाजपा ने लोजपा को सीटों के तालमेल में बाहर का रास्ता दिखाया था। कहा यह भी जा रहा है कि लोजपा को पर्दे के पीछे से भाजपा का पूरा समर्थन है। तर्क दिया जा रहा है कि लोजपा ने केवल जदयू के खिलाफ ही अपने उम्मीदवार उतारे हैं, भाजपा के खिलाफ नहीं। इससे चुनाव में एनडीए के वोट का बंटवारा होने पर जदयू को नुकसान होगा। चुनाव परिणाम में भाजपा गठबंधन में छोटे भाई से बड़े भाई की भूमिका में आ जाएगा। ठीक—ठाक सीट हासिल हो जाने पर भाजपा चुनाव के बाद लोजपा और कुछ छोटे दलों के सहयोग से सरकार बना जदयू को ठोकर भी मार सकती है। इसी रणनीति के तहत भाजपा सियासी चाल चल रही थी।

अब लोजपा को इसलिए बताया वोट कटवा पार्टी!

चूंकि नीतीश राजनीति के पुराने धुरंधर है। जो बात मीडिया तक में खुलकर आने लगी, वह उन्हें भला कैसे पता न होती। बयानबाजी किए बिना जैसे ही उन्होंने अपनी रणनीति को अंजाम देना शुरू किया, केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को कहना पड़ा कि लोजपा वोट कटवा पार्टी है। भाजपा ने यह बयान उस स्थिति में जारी किया है, जब केंद्र में लोजपा उनके साथ है।

भाजपा यहीं तक नहीं रूकी। इतना ही नहीं जावड़ेकर के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी सफाई देनी पड़ी। उन्होंने एक टीवी चैनल पर साक्षात्कार में बिहार की जनता को संदेश देते हुए कहा कि लोजपा को उचित सीट देने का आफर किया गया था, पर लोजपा मानी नहीं। बिहार में चुनाव परिणाम में भाजपा को अधिक सीट भी आ जाएगी तो भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही होंगे। अमित शाह का यह बयान इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि भाजपा को जदयू से ज्यादा सीट हासिल होने वाली है। जबकि जनता का मूड अभी किसी को पता नहीं है।

राजद उत्साहित क्योंकि तेजस्वी खींच रहे हैं भीड़

राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि जनता मौजूदा सरकार से काफी खफा है। लेकिन वह विकल्प क्या चुनेगी, इसे कोई नहीं जानता है। जनता की इसी नाराजगी से राजद खुश है। तेजस्वी को अपना सपना पूरा होता दिख रहा है। तेजस्वी की सभा में भीड़ भी राजद को उत्साहित कर रही है।

जबकि कांग्रेस पूरी तरह से राजद के भरोसे है। कांग्रेस को उम्मीद है कि राजद उसकी नैय्या पार लगा देगी। दूसरी ओर अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियां शुरू नहीं हुई है। चुनावी माहौल बदलने में प्रधानमंत्री मोदी काफी माहिर माने जाते हैं। यह अलग बात है कि बिहार विधानसभा चुनाव की फिजां बदलने में उनको अब तक कामयाबी नहीं मिली है। इस बार वह चमत्कार कर पाते हैं या नहीं यह भविष्य के गर्भ में है। फिलहाल फिजां में सियासी बदलाव की महक आ रही है और यही जदयू—भाजपा गठबंधन की चिंता का सबब है।