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बसपा के मैदान में आने से कांग्रेस हतप्रभ, भाजपा में भी बेचैनी

नई दिल्ली. राजस्थान में बसपा विधायकों को कांग्रेस में शामिल किए जाने से नाराज बसपा ने मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनावों में अपने प्रत्याशी खड़े कर दिए हैं। इससे राजनीतिक प्रेक्षक हैरान हैं और यह मान रहे हैं कि वह वोट काटकर उपचुनावों में भाजपा की मदद करेगी।

उल्लेखनीय है कि गत मार्च में ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक 22 विधायक कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे जिससे कांग्रेस सरकार गिर गई थी और भाजपा ने सरकार बना ली थी। बाद में तीन और कांग्रेसी विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया जबकि तीन विधायकों का निधन हो गया था। इस तरह विधानसभा की 28 रिक्त सीटों पर मतदान होना है।

ग्वालियर सम्भाग में दलितों पर बसपा की मजबूत पकड़

कांग्रेस और भाजपा, दोनों ने ही सभी सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। कांग्रेस छोड़कर आए सभी 25 विधायकों को भाजपा ने टिकट दिया है। लेकिन कांग्रेस और भाजपा के बीच के इस सत्ता-संघर्ष में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी कूद पड़ी है। 230 सदस्यीय विधानसभा में बसपा के केवल दो विधायक है।

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जिन 28 सीटों पर चुनाव होना है, उनमें से 16 सीटें ग्वालियर-चंबल सम्भाग में हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे ग्वालियर-चंबल अंचल में दलित मतदाताओं के बीच बसपा की अच्छी पकड़ मानी जाती है। इलाके की 16 में से 11 सीटें ऐसी हैं जिन पर कभी न कभी बसपा जीत चुकी है। एक सीट ऐसी भी है जिस पर 2018 के विधानसभा चुनाव में 50 हजार से अधिक वोट लाकर दूसरे स्थान पर रही थी।

कांग्रेस प्रत्याशियों को ज्यादा खतरा

2018 के विधानसभा चुनावों की बात करें तो ग्वालियर-चंबल की जिन 18 सीटों पर चुनाव नहीं हैं, उन पर भी बसपा को अच्छा खासा वोट मिला था। विधानसभा में जो दो सीटें उसके पास हैं, उनमें से एक ग्वालियर-चंबल की भिंड सीट भी है। बसपा के मामले में प्रदेश में प्रचलित है कि अगर वह जीतती नहीं है तो कांग्रेस के जीतने वाले प्रत्याशियों का खेल बिगाड़ती है।

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भाजपा की बात करें तो उसे पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए नौ सीटों की जरूरत है, लेकिन उसके समक्ष तीन बड़ी चुनौतियां हैं। कांग्रेस से आए सभी दलबदलू नेता भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं जिससे कि जनता में उनकी ‘बिकाऊ’ वाली छवि बनने से भाजपा को खतरे का अंदेशा है। सिंधिया के दवाब में सभी सिंधिया समर्थकों को भाजपा ने टिकट तो दे दिया, लेकिन पार्टी के आंतरिक सर्वे में उनमें से कई की जीत पर संदेह है। सिंधिया समर्थकों को टिकट देने के कारण भाजपा कार्यकर्ता रोष में हैं।