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भारत क्या अमेरिका और जापान भी चीन पर निर्भर

क्वाड का नहीं मिलेगा फायदा

नई दिल्ली. जिस चीन पर निर्भरता कम करने के लिए Quadrilateral Security Dialogue (चतुर्भुज सुरक्षा वार्ता:’क्वाड’) का चार देशों आस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका और भारत ने मिलकर गठन किया है। उस चीन पर इन चारों देशों की निर्भरता आंखें खोल देने वाली हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो चारों देश चीन के खिलाफ जाने से पहले अपनी—अपनी अर्थव्यवस्थाओं की चिंता जरूर करेंगे और वास्तविकता ये है कि चारों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चीनी अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई है।

मीडिया में सामने आए आंकड़ों के अनुसार 2013 से 2017 तक भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर चीन अब दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। ऑस्ट्रेलिया के कुल निर्यात का लगभग आधा (48.8 प्रतिशत) चीन में जाता है। चीन-जापान द्विपक्षीय व्यापार 2019 में 317 अरब डॉलर का था, जो जापान के कुल व्यापार का 20 प्रतिशत है। अमेरिका व चीन के बीच ट्रेड वॉर के बावजूद 2019 में द्विपक्षीय व्यापर 558 अरब डॉलर का था। 2020 जुलाई तक चीन-अमरीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 290 अरब डॉलर से अधिक था।
असल में भारत को फ़ायदा तब होगा जब वह क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (एससीआरआई) में दोबारा शामिल हो जाए, लेकिन समूह में चीन भी शामिल है!

महामारी के बाद वाली दुनिया में भारत को लाभ नहीं

(एससीआरआई)जैसी पहल से जापान और ऑस्ट्रेलिया को आसियान और पूर्वी एशिया में अपने सप्लाई चेन में विविधता लाने में मदद मिलती है, एससीआरआई भारत के लिए शायद लाभदायक साबित न हो सके क्योंकि ये आरसीईपी से बाहर है। महामारी के बाद वाली दुनिया में भारत को उसी समय लाभ मिलेगा जब वे आरसीईपी में दोबारा शामिल हो जाए। अर्थव्यवस्था की बात करें तो क्वाड के सदस्यों में शामिल अमरीका विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जापान तीसरी और भारत पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है। ये विशाल सामूहिक ताक़त चीन के बढ़ते असर और उस पर निर्भरता को कम करने के इरादे से टोक्यो में एकत्रित हुई है। क्वाड देशों की यह दूसरी बैठक है। पहली पिछले साल सितंबर में न्यूयॉर्क में हुई थी।

चीन में भी बराबर की चिंता

महामारी से हो रही तबाही से देशों के बीच बदलते रिश्ते और नई आर्थिक चुनौतियों से किसी को इंकार नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल में संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करते हुए महामारी के बाद एक नई दुनिया के उभरने की संभावना जताई थी और इसमें भारत की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया था। एक तरफ चीन के बढ़ते असर से ये चारों देश चिंतित नज़र आते हैं। वहीं दूसरी ओर चीन चिंतित है कि क्वाड समूह भविष्य में चीन विरोधी आकार लेगा जिससे चीन के हित को खतरा है।